अगर मुसलमानों को देश से निकालने की बात करने वाला हिंदू नहीं है तो मोहन भागवत जी बताएं, ऐसे लोगों को @RSSorg अपने संगठन से बाहर क्यों नहीं करती?
मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ नफरत फैलाने, मॉब लिंचिंग और हिंसा का समर्थन करने, आर्थिक एवं सामाजिक बहिष्कार की अपील करने, मस्जिदों, मदरसों एवं शिक्षण संस्थानों को निशाना ब��ाने तथा मुसलमानों की नागरिकता और संवैधानिक अधिकारों को संदेह के घेरे में लाने वाले आखिर कौन लोग हैं? उनके खिलाफ RSS ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
अमेरिका में एकता, भाईचारे और सभी धर्मों के सम्मान की बात करना स्वागत योग्य है, लेकिन इस संदेश की असली जरूरत आज भारत में है। यदि मोहन भागवत अपने इस विचार को वास्तव में अमल में लाना ��ाहते हैं, तो उन्हें नफरत फैलाने वालों से खुले तौर पर दूरी बनानी चाहिए और उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करके यह साबित करना चाहिए कि यह केवल विदेश में कही गई बात नहीं है।
भारत किसी एक धर्म का नहीं, बल्कि सभी धर्मों को मानने वालों का साझा वतन है। किसी भी विचार की सच्चाई भाषणों से नहीं, बल्कि उसके अमल से साबित होती है। इसलिए सवाल सीधा है—नफरत फैलाने वालों पर कार्रवाई कब होगी और संविधान में मिले सम��न अधिकारों की रक्षा जमीन पर कब दिखाई देगी?
#ArshadMadani
#India #RSS #MohanBhagwat #ReligiousHarmony #UnityInDiversity
केशव मौर्य सिर्फ़ मदरसों पर हमला कर सकते हैं, क्योंकि उनकी कुर्सी दरअसल एक स्टूल है।
जिन्हें अंग्रेज़ो��� से मोहब्बत हो, उन्हें मदरसे कैसे पसंद आएँगे? मदरसे अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ साज़िशों और आज़ादी की जद्दोजहद के मरकज़ थे। उन्होंने बेशुमार मुजाहिदीन-ए-आज़ादी पैदा किए, जबकि सावरकर अंग्रेज़ों को माफ़ीनामे लिख रहे थे।
आज़ाद भारत का पहला दहशतगर्द गोडसे किसी मदरसे का तालीब-ए-इल्म नहीं था। लेकिन भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद मदरसे में पढ़े थे। मुंशी प्रेमचंद और राजा राम मोहन राय ने भी मदरसे में तालीम हासिल की थी।
दस्तूर का आर्टिकल 30 हर अक़ल्लियती बिरादरी को अपने तालीमी इदारे क़ायम करने और चलाने का हक़ देता है। ये बेहद शर्मनाक है कि एक दस्तूरी ओहदे पर बैठा शख़्स ऐसी ज़हरीली ज़बान इस्तेमाल करे।
मगर जब कुर्सियाँ कम हों, तो स्टूल वालों को अपनी सियासी अहमियत बनाए रखने के लिए ज़हर उगलना ही पड़ता है।
नाम नकुल (बजरंग दल) का का सदस्य है
ये दो मुस्लिम लड़कों जीशान और शावेज़ को कानूनी मामले में फंसाना चाहता था।
इसलिए नकुल ने इन दोनों लड़को को 'लव जिहाद' और 'गैंग���ेप' के झूठे आरोप में फंसाने के लिए अपनी ही बहन को उनके पास (कार में) भेजा।
और फिर नकुल ने पीछे से जाकर अपनी बहन का एक वीडियो बनाया जिसमें लड़की यह नाटक करती है कि उसके साथ बहुत गलत हुआ है।
इसके बाद ��िंदू संगठनों (जैसे हिंदू परिषद/बजरंग दल) के लोग इकट्ठे हो जाते हैं और पुलिस को बुलाया जाता है।
पुलिस जब लड़की को कस्टडी में लेकर मेडिकल जांच और कानूनी पूछताछ के लिए ले जाती है तो लड़की पुलिस की सख्त जांच और पूछताछ का दबाव नहीं झेल पाती।
फिर क्या वह सच उगल देती है और कबूल करती है कि यह दोनों लड़को को फंसाने के लिए रचा गया एक झूठा षड़यंत्र था।
साजिश का भंडाफोड़ होने के बाद मुख्य आरोपी नकुल फरार हो जाता है। पुलिस की तीन टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई है
किसी को फँसाने के लिए अपनी ही बहन को मोहरा बना देना इंसानियत और रिश्तों दोनों की हार है।
🚨 इज़राइल ने माना कि वह हिज़्बुल्लाह के ड्रोन को नहीं रोक सकता
KAN की रिपोर्ट के मुताबिक, IDF दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के तेज़ी से उन्नत हो रहे ड्रोन का मुकाबला करने के लिए "उन्नत निशाना साधने वाली प्रणाली" और सैकड़ों "डैग���" नाइट-विज़न स्कोप लगा रहा है।
▪️ फ़ाइबर-ऑप्टिक ड्रोन लगभग पता नहीं चलते और उन्हें भरोसेमंद तरीके से रोका नहीं जा सकता है।
▪️वे लगभग कोई गर्मी छोड़ने का कोई निशान नहीं छोड़ते है और सिग्नल के बाधित होने से सुरक्षित रहते हैं।
▪️ नेतन्याहू ने खुद माना कि वे "दो बड़े खतरों" में से एक हैं -यह सेना की कमियों को लेकर एक असामान्य रूप से सार्वजनिक तौर पर मानना है।
युद्ध के वातावरण में अचानक किसी खेत में एक बड़े ड्रोन के, गेहूँ के खेत में गिरने से इटावा ज़िले के सैफई इलाके के नंदपुर गाँव में दहशत और अफ़रातफ़री मच गयी। लोगों ने सोचा कहीं कोई मिसाइल तो नहीं, जो युद्ध क्षेत्र से भटक कर यहाँ आ गिरी है।
अगर ये किसी सरकारी परीक्षण-टेस्ट या एक्सपेरिमेंट का हिस्सा है तो प्रदेश के नागरिकों को पहले से सूचना देकर आगाह करना था। जब ये विश्वास ही नहीं है कि ड्रोन उड़ेगा कि नहीं तो आम लोगों के इलाके में इसे उड़ाने का जोखिम क्यों उठाया गया। कहीं ये खेत की बजाय आस-पास की किसी बस्ती पर गिर जाता तो इस दुर्घटना से किसी भी तरह की जान-माल की हानि हो सकती थी।
सरकार इस मामले में जाँच बिठाए और किसान के खेत में हुई आर्���िक हानि और मानसिक आघात का आंकलन-मूल्यांकन करके किसान को यथोचित मुआवज़ा दे।
भविष्य में ऐसे सभी टेस्ट-एक्सपेरिमेंट निर्धारित निर्जन क्षेत्रों में ही किये जाएं।
भाजपा सरकार में कोई भी परीक्षण सफल क्यों नहीं हो पाता है। सैफई की जनता कह रही है जब भाजपाई ड्रोन नहीं उड़ा पा रहे हैं तो सैफई की उस हवाई-पट्टी से जहाज़ क्या उड़ाएँगे, भाजपा ने जिस रनवे को राजनीतिक विद्वेषवश बिना रखरखाव के उपेक्षित छोड़ दिया है।
मुस्लिम नाम सुनते ही SAI द्वारा लिया जा रहा इंटरव्यू खत्म?
मुस्लिम छात्र शान मोहम्मद ने SAI पर गंभीर आरोप लगाए।
स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की Dope Testing Internship के फ���इनल इंटरव्यू में पहुंचे मुस्लिम छात्र शान मोहम्मद ने गंभीर आरोप लगाए हैं। शान का कहना है कि उन्होंने सभी स्टेप्स पूरे किए, शॉर्टलिस्ट हुए और 30 मार्च 2026 को उनका ऑनलाइन फाइनल इंटरव्यू था। लेकिन जैसे ही इंटरव्यू लेने वाले ने उनका नाम “Shan Mohammed” सुना और उनकी डिग्री पूछी, उसके बाद माहौल पूरी तरह बदल गया।
शान के मुताबिक, इंटरव्यूअर ने उनसे कहा: “तुम यहाँ तक कैसे पहुँच गए? ये इंटर्नशिप तुम्हारे लिए नहीं है।” शान का कहना है कि उन्हें यह भी कहा गया कि यह इंटर्नशिप उनके लिए सही नहीं है और वे कहीं और अप्लाई कर लें, जबकि उन्होंने समझाने की कोशिश की कि Dope Testing का काम उनकी Pharmacology से जुड़ी पढ़ाई से पूरी तरह संबंधित है।
सबसे हैरानी की बात यह रही क�� शान के मुताबिक उनसे ना ठीक से इंट्रोडक्शन लिया गया, ना योग्यता पूछी गई, ना स्किल्स, ना एक्सपीरियंस। आखिर में उन्हें सिर्फ इतना कहा गया: “You may leave now.” शान मोहम्मद का आरोप है कि उनके साथ यह बर्ताव सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि उनकी मुस्लिम पहचान उनके नाम से साफ हो गई।
अगर यह आरोप सही हैं, तो सवाल सिर्फ एक इंटरव्यू का नहीं, बल्कि इस बात का है कि क्या एक काबिल मुस्लिम छात्र को उसका हक सिर्फ पहचान की वजह से नहीं ��िया गया। @Media_SAI #IndianMuslims
🚨 ताज़ा खबर: दक्षिण लेबनान में हिज़बुल्लाह ने हजारों नए लड़ाकों को तैनात किया — क्या इज़राइल की जमीनी कार्रवाई को अब और कड़ी विरोध का सामना करना पड़ रहा है?
फ़िलिस्तीनी लोगों की तकलीफ़ देखकर ब्राज़ील के राष्ट्रपति की आँखों में आँसू आ गए
लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा फ़िलिस्तीनी लोगों की तकलीफ़ देखकर अपने आँसू नहीं रोक पाए:
“यह बहुत दुख की बात है कि दुनिया ऐसे नरसंहार पर चुप है, जहाँ असली पीड़ित सैनिक नहीं, बल्कि औरतें और बच्चे हैं।”
बिहार सहरसा बंधक लड़कों को छुड़ाने पहुँची 112 की पुलिस अधिकारी आसिफ अनवर अपनी टीम के साथ पहुँचे थे। तब महिलाओं द्वारा पुलिस के साथ मारपीट की गई। कपड़ों से पहचानो पुलिस पर हमला करने वाला गिरोह इस मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठा है।
यूपी के बदायूँ में तीन मुस्लिम बुजुर्गों के साथ बजरंग दल के अक्षय कुमार ने मारपीट कि थी, सुनिए पीड़ित मुस्लिम बुजुर्ग ने साफ कहा है कि उनका मुस्लिम नाम और पहचान देखकर उनपर हमला किया गया है। शिकायत लिखाने तीनों थाने भी पहुँचे।
उत्तराखंड के दीपक भारत के हीरो हैं।
दीपक संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं - उस संविधान के लिए जिसे BJP और संघ परिवार रोज़ रौंदने की साज़िश कर रहे हैं।
वे नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान का जीवित प्रतीक हैं और यही बात सत्ता को सबसे ज़्यादा चुभती है।
संघ परिवार जानबूझकर देश में आर्थिक और सामाजिक ज़���र घोल रहा है, ताकि भारत बँटा रहे और कुछ लोग डर के सहारे राज करते रहें। उत्तराखंड की BJP सरकार खुलेआम उन असामाजिक ताक़तों का साथ दे रही है जो आम नागरिकों को डराने और परेशान करने में लगी हैं।
नफ़रत, डर और अराजकता के माहौल में कोई भी देश आगे नहीं बढ़ सकता। शांति के बिना विकास सिर्फ़ एक जुमला है।
हमें और दीपकों की ज़रूरत है - जो झुकें नहीं, जो डरें नहीं, और जो पूरी ताक़त से संविधान के साथ खड़े रहें।
हम तुम्हारे साथ हैं भाई। डरो मत।
तुम बब्बर शेर हो। 🇮🇳
बाहर निकलो—वापस जाकर फ़िलिस्तीनियों को मारोगे।
“तुम फ़िलिस्तीन के लोगों को मारते हो और फिर यहाँ छुट्टियों पर आते हो?” 🇪🇸
एक स्पेनिश रेस्टोरेंट मालिक ने इज़राइलियों के एक ग्रुप को मौके पर ही बाहर निकाल दिया।
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छत्तीसगढ़ के रायपुर में बड़ा आतंकवादी हमला, आतंकवादियों के समूह ने मैग्नेटो मॉल में क्रिसमस की सजावट में की तोड़फोड़, पहले आतंकवादी बॉर्डर पार से आते थे लेकिन अब इसी देश में आतंकवादी आपको सार्वजनिक स्थानों पर तोड़फोड़ करते हुए मिल सकते हैं।
राम नवमी और हनुमान जयंती पर ये लोग मस्जिदों के बाहर जा कर डीजे बजाते हैं, उकसाने वाले गाने बजाते हैं।
क्रिसमस पर ये लोग चर्च के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ते हैं, सैंटाक्लॉस की टोपी खींचते हैं, तोड़फोड़ करते हैं।
कौन हैं ये मूर्ख?
ये संघ द्वारा लगाये ज़हरीले बीजों से निकली खरपतवार है।
यह गुंडे ना हिंदू धर्म के हो सकते हैं और ना ही भारतीय सभ्यता से इनका कोई नाता हो सक��ा है।
आस्ट्रेलिया के बॉंडी बीच पर हमला करने वाले दो आतंकियों में से एक का नाम नवेद अकरम… ये सभी बता रहे हैं… बताना भी चाहिए… आतंकवादियों की पहचान ज़ाहिर होनी ही ��ाहिए…
लेकिन अंतराष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक़ अकरम से हथियार छीन कईयों की जान बचाने वाला अहमद अल अहमद है, ये बताने में कई को शर्म आ रही है।
यूपी के बुलंदशहर में फेरी लगाकर गुजारा करने वाले युसूफ की पीट-पीटकर कर जान ले ली गई। युसूफ अपनी पत्नी शकीला और पांच बच्चों के साथ रहते थे और पिछले 15 वर्षों से गांव-गांव में आर्टिफिशियल ज्वेलरी बेचकर अपना परिवार पाल रहे थे।
रविवार को युसूफ जब भीमपुर दोराहा पर थे, तभी दो-तीन लोगों ने उनके साथ मारपीट की, जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी जान चली गई। इस मामले में चौगानपुर निवासी राजेंद्र वर्मा और भीमपुर निवासी भरत को गिरफ्तार किया ��ै।
यूपी में सरकार द्वारा बुलडोज़र चलाने और पुलिस द्वारा टांग में गोली मारने का चलन है। लेकिन मजाल भला कि मुसलमानों के खिलाफ हेट क्राइम करने वालों पर बुलडोज़र चला हो! मजाल भला कि मुसलमानों के खिलाफ हेट क्राइम करने वालों की टांग में पुलिस ने गोली मारी हो! उनका जुलूस निकाला हो।
वंदे मातरम को लेकर देश भर में चल रही बहस के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी बड़ा बयान सामने आया हैं, उन्होंने कहा हैं की मुसलमानों को किसी के वंदे मातरम गाने या पढ़ने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके भक्ति वाले कंटेंट की वजह से वे इसे स्वीकार नहीं कर सकते. इस्लाम सिर्फ़ एक ईश्वर, अल्लाह की पूजा करने का हुक्म देता है, इसलिए ऐसे गानों या कामों में हिस्सा लेना जिनमें कई देवी-देवताओं की पूजा होती है या मातृभूमि को देवी के रूप में पेश किया जाता है, हमा��े धार्मिक सिद्धांतों के खिलाफ है. भारत का संविधान, खासकर आर्टिकल 25 और 19, हर नागरिक को धर्म और अभिव्यक्ति की आजादी देता है. इसलिए, किसी भी नागरिक को ऐसा गाना गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता जो उसके धर्म के खिलाफ हो
हमें किसी के “वंदे मातरम्” पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता। और “वंदे मातरम्” का अनुवाद शिर्क से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है, इसके चार श्लोकों में देश को देवता मानकर “दुर्गा माता” से तुलना की गई है और ��ूजा के शब्दों का प्रयोग हुआ है। साथ ही “माँ, मैं तेरी पूजा करता हूँ” यही वंदे मातरम् का अर्थ है। यह किसी भी मुसलमान की धार्मिक आस्था के खिलाफ है। इसलिए किसी को उसकी आस्था के खिलाफ कोई नारा या गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। क्योंकि भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) देता है।
वतन से प्रेम करना अलग बात है, उसकी पूजा करना ���लग बात है। मुसलमानों की देशभक्ति के लिए किसी के प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं है। स्वतंत्रता संग्राम में उनकी कुर्बानियाँ इतिहास के सुनहरे पन्नो में दर्ज हैं।
हम एक खुदा (अल्लाह) को मानने वाले हैं, अल्लाह के सिवा न किसी को ��ूजनीय मानते हैं और न किसी के आगे सजदा करते हैं। हमें मर जाना स्वीकार है, लेकिन शिर्क (खुदा के साथ किसी को शामिल करना) कभी स्वीकार नहीं!
#ArshadMadani