उठा सकते नहीं जब चूम कर ही छोड़ना अच्छा
मोहब्बत का ये पत्थर इस दफ़ा भारी ज़ियादा है
ज़रूरी हो तो कर देंगे 'ज़फ़र' तरदीद भी जारी
बयान-ए-इश्क़ अपना अब के अख़बारी ज़ियादा है
~ज़फ़र इक़बाल 🖤🪻
वो नहीं मेरा मगर उस से मोहब्बत है तो है
ये अगर रस्मों रिवाजों से बग़ावत है तो है
दोस्त बन कर दुश्मनों सा वो सताता है मुझे
फिर भी उस ज़ालिम पे मरना अपनी फ़ितरत है तो है
- दीप्ति मिश्रा