1960-61 में नेहरू जी भारत के प्रधानमंत्री थे
उस वक्त सोवियत संघ के मदद से भारत में तमाम फैक्ट्रियां लगनी शुरू हुई तो साइकिल की सेल बढ़ गई हालांकि उसे जमाने में भी मोट��� कर और बाइक थी एचडी जावा जैसी बाइक थी लेकिन वह उच्च वर्ग के लोग ले सकते थे मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग साइकिल ही खरीद सकता था
उस वक्त ज्यादातर साइकिल विदेश से आई थी जिसमें BSA रेले नंबर वन थी जो ब्रिटेन से आती थी तब नेहरू जी साइकिल की कीमत का 10% आयात कर वसूलते थे और प्रतिवर्ष एक रुपया 10 पैसा साइकिल टैक्स लेते थे लाइसेंस फीस
जबकि उस वक्त के लेबर फोर्स को लोगों को साइकिल की बहुत जरूरत थी
हमार�� नेहरू जी कितना दूरदर्शी थे
और कांग्रेसी कहते हैं कि भारत में कभी कोई टैक्स था ही नहीं टैक्स तो 2014 के बाद नरेंद्र मोदी जी ने वसूलना शुरू किया
इज़राइल ने बेन गुरियन तेलअवीव एयरपोर्ट के लाउंज का नामकरण कैप्टन स्मित माच्छर के नाम पर कर दिया है....
एक बदतमीज 56 वर्षीय मिक्स ब्रीड का हिन्दुफोबिक बुड्ढा , एक कर्कश मगरमच्छ... एक लंबी नाम वाली औरत...एक विदेशी महिला... कैप्टन माच्छर की बहादुरी से जुड़ा ट्वीट नहीं करती तो कैप्टन माच्छर की कीर्ति कम नहीं हो जाएगी... !!
75 साल पहले हमें यहाँ मरने के लिए लाया गया था।
हमारे पास न कोई देश था, न कोई सेना थी, न कोई सरकार थी। सिर्फ 65,000 यहूदी थे। चारों तरफ 7 देशों की सेनाओं ने हमें घेर रखा था। हमें खत्म करने का ऐलान हो चुका था। दुनिया ने कहा था - ये कुछ दिनों के मेहमान हैं।
लेकिन हम मिटे ��हीं।
लेबनान ने हमला किया, सीरिया ने हमला किया, इराक ने, जॉर्डन ने, मिस्र ने, लीबिया ने, सऊदी अरब ने... सबने मिलकर हमें समंदर में धकेलना चाहा। कोई हम पर दया करने वाला नहीं था।
संयुक्त राष्ट्र ने हमें एक जमीन का टुकड़ा दिया, जिसका 65% सिर्फ रेगिस्तान था। पानी नहीं, तेल नहीं, कुछ नहीं। हमने उस रेगिस्तान को अपने खून-पसीने से हरा-भरा कर दिया। क्योंकि वही हमारी आखिरी उम्मीद थी।
हम फिरौन से बचे, हम यूनान से बचे, हम रोमन साम्राज्य से बचे, हम स्पेन से निकाले गए, हम हिटलर की गैस चैंबर से बचे, हम सद्दाम की मिसाइलों से बचे, हम गद्दाफी की धमकियों से बचे।
हम हमास से भी बचेंगे, हम हिजबुल्लाह से भी बचेंगे और हम ईरान से भी बचेंगे।
1/2.....
अभी तक उनमें से किसी ने भी कैप्टन स्मित मच्छार के समर्थन में ट्वीट नहीं किया है। ऐसा लगता है कि उन्हें डर है कि इसस�� उनके वोटबैंक पर असर पड़ सकता है।
अगर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो जाता, तो शायद यही लोग सबसे पहले हिंदू पायलट की भूमिका पर सवाल उ��ाते।
अब यह खबर मीडिया से गायब हो जाएगी। 😂
कल के हवाई जहाज कांड में जैसे ही नाम आया—“स्मिथ मच्छार”—पूरी सेक्युलर जमात खुशी से झूम उठी। ��गा, अपना कौम वाला हीरो मिल गया।
लेकिन बाद में पता चला कि असली नाम स्मित मच्छार है और वह राजस्थानी-गुजराती नागर ब्राह्मण हैं। 😂
बस फिर क्या था?
मीडियाई बौद्धिक नक्सलियों ने खबर का रुख मोड़ दिया। भारतीय हिंदू पायलट की बहादुरी पर चर्चा करने के बजाय बाकी पाँच इज़राइलियों को हीरो बनाना शुरू कर दिया।
कांग्रेस और गांधी परिवार की चुप्पी भी समझ से परे है। एक भारतीय पायलट ने अपनी जान जोखिम में डा���कर सैकड़ों यात्रियों की जान बचाई, लेकिन राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और उद्धव ठाकरे के मुंह से बधाई के दो शब्द तक नहीं निकले।
क्यों?
क्योंकि बचाने वाला हिंदू भारतीय पायलट है?
और फिर ये लोग कहते हैं कि हिंदू इन्हें वोट क्यों नहीं देता!
दुनिया में कहीं भी जब किसी सुरक्षाकर्मी को पता चलता है कि सामने वाला हिंदू है, तो उसके मन में भरोसा पैदा होता है कि इससे उसे और उसके देशवासियों को ��ोई खतरा नहीं है।
कभी सोचिएगा...
“हिंदू” नाम का यह पहचान-पत्र आपको दुनिया में कितना सम्मान दिलाता है।
फिर समझ आएगा कि सनातनी होने की कीमत और अहमियत क्या है। ❣️
राहुल गांधी अखिलेश यादव अरविंद केजरीवाल उद्धव ठाकरे तेजस्वी यादव सदमे में है
वह सोच रहे हैं काश वह विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया होता सभी यात्री और दोनों पायलट मारे जाते तो हम यह थ्यो��ी देते कि हिंदू आतंकवादी होते हैं और एक हिंदू आतंकवादी स्मिथ मछर ने प्लेन को दुर्घटनाग्रस्त करके लोगों की जान लिया
लेकिन क्योंकि स्मिथ मच्छर ने बहादुरी दिखाकर न सिर्फ यात्रियों बल्कि हिंदुओं की अस्मिता को भी बचा लिया इसीलिए राहुल गांधी अखिलेश यादव सहित पूरा विपक्ष इतने सदमे में है कि इन दोगले इन हिंदू द्रोहियों ने एक बहादुर हिंदू भारतीय पायलट की इस अदम्य अप्रतिम साहस पर एक ट्वीट तक नहीं किया
जबकि डोनाल्ड ट्रंप बेज़मींन नेतन्याहू फ्रांस के राष्ट्रपति मेक्सिको के राष्ट्रपति भारत के प्रधानमंत्री यूएई के राष्ट्रपति सऊदी के प्रिंस सहित दुनिया के 16 देश के राष्ट्र प्रमुख यूनाइटेड नेशन के चीफ तक ने भारतीय पायलट के अदम्य साहस की तारीफ ��ी
राहुल गांधी सहित पूरे विपक्ष ने हिंदू भारतीय पायलट को बधाई इसलिए नहीं दिया क्योंकि आतंकी एक मुस्लिम पायलट था और इसके अलावा इसमें इजराइल का एंगल था
और यह दोगले यह नीच सोचते हैं कि हिंदू इनको वोट देगा ??
किधर है मेरा जूता
अगर ओसामा बिन लादेन आज जिंदा होता और आज World Trade Center पर हमला होता...
आरफा ख़ानम शेरवानी : ओसामा ने विमान को इमारत पर उतारने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा।
ध्रुव राठी : तीन लोग विमान को उतारने के लिए जूझ रहे थे, तभी इमारत बीच में आ गई।
अजीत अंजुम : World Trade Center की खराब डिजाइन के कारण विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
पुण्य प्���शुन : विमान कहीं भी इमारत से टकराया हो — मोदी को इस्तीफा देना चाहिए।
बरखा दत्त : एक सिविल इंजीनियर विमान से इमारत की मजबूती का परीक्षण कर रहा था।
राणा अयूब : खराब मौसम के कारण विमान और इमारत की टक्कर हुई।
अभिसार शर्मा : सबसे बड़ा सवाल ये है कि विमान के ब्लैक बॉक्स ने अभी तक प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं की?
रविश कुमार : ओसामा ने साबित कर दिया कि इमारतों पर केवल हेलीकॉप्टर ही उतारे जा सकते हैं!!
����🤣🤣
72 हूरों वाले मुद्दे पर आरजू काजमी ने एक भारतीय मौलवी को भी अच्छे से लपेट दिया था।
🙂🙂
पाकिस्तानी पत्रकार
*आरज़ू काजमी* ने
अपनी वाल पर
ये पोस्ट किया...
👆😆
कहते हैँ किसी की बददुआ नहीं लेनी चाहिए.
गोविंदा के साथ भी यही हुआ है.
1998 में गोविंदा की फ़िल्म आयी थी दूल्हे राजा.
फ़िल्म ब्���ॉकबस्टर साबित हुई. दूसरी तस्वीर में दिख रहे आदमी फ़िल्म डायरेक्टर हरमेश मल्होत्रा हैँ
दूल्हे राजा के बाद इन्होने गोविंदा को अँखियो से गोली मारे के लिए साइन किया.
फ़िल्म की शूटिंग शुरू हो गयी, शिमला में 2 करोड़ का सेट लगाया गया, लेकिन सफलता के नशे में चूर गोविंदा सेट पर नहीं पहुँचे.
सेट बर्बाद हो गया, फिर मुंबई और विदेश में शूटिंग के नाम पर गोविंदा ने इनको इतना परेशान किया कि ये बहुत बड़े क़र्ज़ के नीचे दब गए.
फ़िल्म फ्लॉप हो गयी. लोग पै���ा वापिस माँगने लगे क़र्ज़ का. गोविंदा ने हाथ खडे कर दिए मदद से.
उसी सदमे में इनको हार्ट अटैक आया और ये चल बसे
उसी दिन इनकी पत्नी मंज़ू मल्होत्रा ने कसम खाइ कि वो गोविंदा की बर्बादी के लिए हर रोज़ मंदिर, मस्जिद गुरुद्वारा जाकर प्रार्थना किया करेंगी.
वो हर रोज़ पैदल भगवान के घर जाकर गोविंदा की बर्बादी की दुआ मांगती. उसको अपने पति का हत्यारा बताती.
2012 में मौत से पहले उन्होंने कहाथा गोविंदा दो कौड़ी का आदमी बनकर रह जायेगा एक दिन
आज देखो, ना पत्नी पूछती है, ना बच्चे कामयाब हुए, ना कोई काम देता है और बॉलीवुड वाले भी मुँह नहीं लगाते.
किसी की बद्दुआ नहीं लेनी चाहिए आज गोविंदा नुक्कड़ नुक्कड़ आपको नाचते दिखेंगे
@Malanggav4 शायद यह पूरब का कन्या का पाँव पूजना है। हर बड़ा बूढ़ा, माँ बाप सभी कन्या के विवाह के पहले उसके पांव पूजते है। हां कन्या दर्द से नहीं रो रही है। ये बिटिया के पीहर से यह बिछड़न के आंसू हो सकते है। यदि आपके मां बाप आपके पैर पूजे और आप न रोयें तो ही आपको हंसी उड़ाने का हक है।
जब क्रांति घर खा ग���
केट मिलेट ने 1970 में एक किताब लिखी - 'सेक्सुअल पॉलिटिक्स'। दुनिया में आग लग गई। उसने कहा - प्यार धोखा है, शादी जेल है, पति मालिक है, परिवार पिंजरा है। औरत को आजाद होना है तो ये सब तोड़ना पड़ेगा।
अमेरिका की औरतों ने तालियां बजाईं। टाइम मैगजीन ने उसे कवर पर छापा - "स्त्री मुक्ति की माओ"।
पहला चरण:घर टूटा
केट का अपना घर था। पति था, फुमियो योशिमुरा। 17 साल से साथ खुश पर आंदोलन को एक शादीशुदा हीरोइन नहीं चाहिए थी। उसे लेस्बियन हीरोइन चाहिए थी।
एक मीटिंग में घेर कर पूछा गया - तू लेस्बियन है?
केट ने कहा दिया - हाँ। अगले दिन अखबार में छप गया। पति सामान लेकर निकल गया। उसकी सगी बहन मैलोरी ने बाद में लिखा, ये एक गलती केट को जिंदगी भर सालती रही। वह मरते दम तक उस टूटे हुए घर को याद करती रही।
दूसरा चरण : खुद की लिखी किताब सेक्सुअल पॉलिटिक्स से नफरत
जिस किताब ने उसे ���गवान बनाया, उसी किताब से उसे नफरत हो गई। उसने लिखा, ये प्रसिद्धि नहीं, बेइज्जती है। लोग उसे पढ़ते नहीं थे, उसे इस्तेमाल करते थे।
तीसरा चरण: पागलखाना
क्रांति के बाद क्या बचा?
पति नहीं, बच्चा नहीं, परिवार नहीं।
यदि कुछ बचा तो बचा डिप्रेशन, पागलखाना, लिथियम की गोलियां, बिजली के झटके।
उसने अपनी आखिरी किताब 'द लूनी-बिन ट्रिप' में लिखा, पागलखाना जेल से भी ग���दा है। वहाँ ताले हैं, जंजीरें हैं, और कोई सुनने वाला नहीं।
आखिरी बात
केट ने औरतों को सिखाया - परिवार को जहर समझो, पर्दा फाड़ दो।
पर पिछले तीस से प्रताड़ित होते होते आखिरी दिन जब वह 83 साल की होकर पेरिस में मरी, तो कमरे में अकेली थी। कोई बेटा नहीं, कोई बेटी नहीं, कोई पोता नहीं।
उसकी ही साथी औरतें बाद में पूछने लगीं, "हमने सब तोड़ दिया, पर हाथ में क्या आया?"
केट मिलेट का जीवन इसका जवाब है नारे में क���रांति थी, आंखों में सिर्फ पछतावा।
: डॉ पवन विजय
Forwarded as received from a known scholar. Yet to cross check.
जिसकी फटी न पैर बीमाई वो क्या जाने पीर पराई कहने का तात्पर्य उन माता-पिता पर क्या बीती होगी जिनके बच्चे उनकी गोद में इंसेफेलाइटिस बीमारी से पीड़ित दम तोड़ दिए। चार दशक तक गोरखपुर समेत पूरे पूर्वांचल की हवाओं में केवल कफ़न उड़ते रहे। एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम व जापानी इंसेफेलाइटिस की विभीषिका ने 50000 से अधिक ��ौनिहालों की सांसें ली। यह बीमारी प्रशासनिक संवेदनहीनता और सत्ता के आपराधिक संरक्षण का जीता-जागता नरसंहार था। उस दौर में सत्ताधीश अपने राजनीतिक महलों में विलासिता, जातिवादी गोलबंदी और दलाली के गठजोड़ में मस्त थे।
साल 2006 में भारतीय संसद के पटल पर 34 वर्ष का भगवाधारी सांसद (योगी आदित्यनाथ जी) पूर्वांचल के बच्चों का दर्द बयां करते रो पड़ा वह आंसू नहीं व्यवस्था पर संन्यासी का वज्रप्रहार था जो हजारों बच्चों की लाशों पर बैठकर सत्ता की मलाई चाट रही थी। उस समय छद्म बुद्धिजीवी ठहाके लगाते थे। वे अज्ञानी भूल गए जब संन्यासी रोता है तो पूरे युग के परिवर्तन का संकल्प लेता है। जिस नौजवान ने अपनी जीवित काया का स्वयं पिंडदान किया हो जिसने सांसारिक वैभव छोड़कर सम्पूर्ण जीवन गुरु गोरखनाथ को समर्पित किया हो उसे चंद दरबारी भगवाधारी कहकर अपनी कुंठा शांत करेंगे।
2017 में संन्यासी के हाथों में प्रदेश का राजदंड आया तो आलोचक बोले कि मठ चलाने वाला सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य कैसे चलाएगा। पर उसने राजनीति नहीं की शासन के संपूर्ण काल-चक्र को उलट दिया। जिस दिमागी बुखार को अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां, पूर्ववर्ती सरकारें असाध्य मानकर हाथ खड़े कर चुकी उसकी रीढ़ संन्यासी के प्रशासनिक ��नुशासन ने तोड़ी। घर घर शुद्ध पेयजल एवं स्वच्छता को युद्ध स्तर पर लागू किया। अब इस बीमारी से 95% से अधिक मौतों को हमेशा के लिए दफन किया। गोरखपुर में 1000 बेड का एम्स, बीआरडी मेडिकल कॉलेज का कायाकल्प और हर जिले में मेडिकल कॉलेज का जाल आलोचकों के मुंह पर तमाचा है।
एक दौर था जब शाम होते अपराधियों के डर से व्यापारी अपनी पैतृक जमीनें बेचकर पलायन करते थे। सत्ता के संरक्षण में पलने वाले मुख्तार व अतीक जैसे दुर्दांत माफिया समानांतर सरकार चलाते थे। आज माफिया पुलिस की गाड़ी का सायरन सुनकर जान की भीख मांगते हैं। अपराधी गले में तख्तियां लटकाकर थानों में आत्मसमर्पण करते हैं। अपराधियों द्वारा हड़पी गई 4000 करोड़ की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाकर उसी जमीन पर गरीबों के लिए घर बनाए गए।
2017 से पहले यूपी को देश का बीमारू राज्य और कानून-व्यवस्था के नाम पर कलंक माना जाता था। आज यूपी 8 लाख करोड़ से अधिक की जीएसडीपी के साथ देश की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दहलीज पर है। यूपी को एक्सप्रेसवे प्रदेश बनाया, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना ने साबित किया कि जब नीति और नीयत साफ हो तो विकास हवा में नहीं जमीन पर दौड़ता है।
अयोध्या में 500 वर्षों के संघर्ष और करोड़ों सनातनियों के लिए भव्य श्रीराम जन���मभूमि मंदिर में रामलला का विराजमान, काशी विश्वनाथ धाम, प्रयागराज का दिव्य-भव्य कुंभ; यह धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारत के सांस्कृतिक स्वाभिमान की पुनर्स्थापना और खरबों रुपये की टूरिज्म इकोनॉमी का सशक्त आधार हैं। आस्था का सम्मान और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का यह अभूतपूर्व संतुलन स्वतंत्र भारत के इतिहास में किसी चमत्कार से कम नहीं है।
आज रात के बारह बजे भी जब किसी गांव या शहर की सड़क पर कोई बेटी बेखौफ होकर अपनी स्कूटी दौड़ाती है उस निडरता के पीछे मिशन शक्ति एवं पुलिस का स्पष्ट निर्देश शोहदों, अपराधियों को पाताल से खोजकर मिट्टी में मिलना। नो कर्फ्यू, नो दंगा एक नारा नहीं, प्रदेश का जीवंत यथार्थ बन चुका है।
मंचों पर खड़े होकर जहर उगलने वाले तुम्हारी जिंदगी वैचारिक जुगाली और सत्ता की दलाली में बीती। तुमने कभी किसी गरीब के आंसू नहीं पोंछे तुम उस कर्मयोगी पर सवाल उठाते हो जिसने अपना सर्वस्व इस माटी के स्वाभिमान के लिए होम कर दिया। जिसका न कोई बैंक खाता, न पारिवारिक उत्तराधिकारी उसे तुम कैसे डिगाओगे। जो सुबह चार बजे से जनता के आंसुओं को पोंछने के लिए खड़ा हो उसके पुरुषार्थ पर भौंकने वाले अपने बौद्धिक दिवालियापन का प्रदर्शन करते हैं।
सूरज की ओर मुंह ��रके थूकने वालों की लार उनके अपने ही चेहरों पर गिरती है। तुम्हारी कुंठा, गालियां, तुम्हारे दुष्प्रचार की उम्र केवल उस माइक के बंद होने तक है योगी जी का पुरुषार्थ उत्तर प्रदेश के कायाकल्प और भारत के इतिहास की छाती पर लोहे की कील की तरह अमिट होकर दर्ज हो चुकी। तुम मुफ्त की रोटियां तोड़कर गालियां बांटते रहे और संन्यासी ने भस्म लपेटकर प्रदेश की तस्वीर और तकदीर बदल दी।🙏
@myogiadityanath, @BJP4UP, @BJP4India
@Malanggav4 हार्डकोर कम्युनिस्ट है।भारत को डिस्टर्ब करने के लिए काम करते हैं। उनके एनजीओ को मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा अरबो की फंडिंग होती है।इस ��रह के फोटोज के साथ फीचर प्रचारित की जाती हैं,जिससे पॉपुलेरिटी गेम हो सके।उन्हें नोबेल या कोई बड़ा अवार्ड देकर और स्टैबलिश करने की कोशिश हो रही।
एक दिन आएगा
एक दिन आएगा जब रामलला टेंट के अपमान से निकलकर भव्य मंदिर में प्रतिष्ठित होंगे।
एक दिन आएगा जब बस्तर के घने जंगलों तक से नक्सली समाप्त हो जाएंगे।
एक दिन आएगा जब बांग्लादेश की सीमाओं पर घुसपैठ रोकने के लिए फेंसिंग होगी।
एक दिन आएगा जब आतंकी हमले का जवाब पाकिस्तान पर मिसाइलें मारकर दिया जाएगा।
एक दिन आएगा जब कश्मीर में हर जुम्मे पर होने वाली पत्थरबाजी समाप्त हो जाएगी।
एक दिन आएगा जब धारा 370 का अहंकार समाप्त हो जाएगा।
एक दिन आएगा जब वोटबैंक ��ा दबदबा समाप्त हो जाएगा।
एक दिन आएगा जब पाकिस्तान में बैठे आतंकी घात लगाकर मारे जाएंगे।
एक दिन आएगा जब इफ्तारी नहीं, देव दीपावली मनाई जाएगी।
एक दिन आएगा जब पाकिस्तान-बांग्लादेश के विस्थापित हिंदुओं को भारत की नागरिकता मिलेगी।
एक दिन आएगा जब 200 करोड़ वैक्सीन बिना घोटाले और बर्बादी के लगेंगी।
एक दिन आएगा जब शहरों के बीच की दूरी घंटों नहीं, मिनटों में सिमट जाएगी।
एक दिन आएगा जब ईरान-अमे��िकी युद्ध में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने पर भी भारत में तेल-गैस की किल्लत नहीं होगी और कालाबाजारी नहीं होगी।
एक दिन आएगा जब देश में समान नागरिक संहिता होगी।
एक दिन आएगा जब भारत दुनिया का ग्रोथ इंजन कहलाएगा।
एक दिन आएगा जब वंदे मातरम् पूरा गाया जाएगा।
कभी यह सब होगा, यह सोचना स्वप्न जैसा ही था।
कभी कोई एक प्रधानमंत्री, कोई एक सरकार अपने कार्यकाल में अगर इनमें से कोई एक भी उपलब्धि हासिल कर लेती, तो भी उसका योगदान अमर हो जाता।
और हमने यह सारे बदलाव एक आदमी को मात्र पिछले 12 वर्षों में साकार करते देखा है।
जो बहुत जल्दी में हैं, बहुत छोटे दृष्टिकोण से देख रहे हैं, वे हमेशा दुखी थे, दुखी रहेंगे।
जानने वाले जानते हैं, यह सभ्यतागत लड़ाई है,
जिसमें इतिहास में पहली बार हम हावी पड़ रहे हैं।
ईश्वर, आपके नेतृत्व में हमें इस संघर्ष में निर्णायक जीत दिलाए।
आप शतायु हों,
और आपका लिया हर निर्णय इस राष्ट्र को चिरंजीवी बनाने में सहायक सिद्ध हो।
वंदे मातरम्...
Inspiration : अविनाश त्रिपाठी / Shashi Bhushan