बिलो देती हूं
जीवन की मुश्किलें
दूध-दही की तरह..!
*
जीवन का मोल चुकाते हैं
टुकड़ों में
प्रेम भी हो गया है
टुकड़ों में.
~मनीषा जैन✍️
सुपरिचित साहित्यकार:(कविता,आलेख,
समीक्षा):भारतीय साहित्य सृजन संस्थान
पटना से कथा सागर सम्मान,रोचना
विश्वकीर्त�� ‘कृति ओर’ कविता सम्मान
@22manishaJ