छात्रों के ख़िलाफ़ पूरा का पूरा सिस्टम ही जानलेवा है।
खबर आ रही है कि बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर AK-47 से गोलियाँ चलाई गई हैं और सैकड़ों छात्रों को गिरफ़्तार करके उनपर FIR की जा रही है।
मोदी जी, कहाँ गया आपका वादा कि छात्रों पर कोई FIR नहीं की जाएगी और उन्हें रिहा कर दिया जाएगा? उल्टा उनपर घातक हमले और बर्बरता की जा रही है।
दिल्ली में छात्रों पर पेलेट गन चली और बिहार में AK-47। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार हो या दिल्ली - हर जगह पैटर्न एक ही है।
पहले भी कहा है, ये सरकार झूठी है। सुधार इनके बस का नहीं है। अपनी बातों से मुकर जाएगी और हर तरकीब से छात्रों की आवाज़ दबाएगी।
मोदी जी, देश के छात्रों से माफ़ी मांगिए। और जिन्होंने छात्रों पर हमला किया है, उन्हें कुचला है उनपर कार्रवाई कीजिए, छात्रों पर नहीं।
कॉंपती हुई आवाज़ में संविधान की प्रस्तावना पढ़ते हुए इरफ़ान को सुना जाये, सड़क पर अपने हक़ के लिये उतरे हुए छात्रों में ना जाने कितने एैसे युवा हैं जिनके सपने चकनाचूर हैं।
इनकी आवाज़ सुनी जानी चाहिये, आपको सैल्यूट इरफ़ान साहब❤️
सच्चाई ये है कि हमारे लोकतंत्र की हिफ़ाज़त में खड़े होने का हक़ और ज़िम्मेदारी तो सब की बराबर है लेकिन इसकी क़ीमत सब बराबर नहीं चुकाते - जब मुसलमान आवाज उठाते हैं या साथ आते हैं उन्हें ग़ैर-आनुपातिक तौर पर ज़्यादा क़ीमत चुकानी पड़ती है - उनका दमन कहीं ज़्यादा होता है.
देश भर के छात्रों की सेवा के लिये लगातार मौजूद रहने वाले जुनैद को डिटेन करना और उनको परेशान करना इस सिस्टम का सबसे शर्मनाक चेहरा था, देश भर के लोग अपने अपने स्तर पर बच्चों की सेवा कर रहे थे, जुनैद ने भी इंसानियत के नाते छात्रों की मदद की।
सरकार से अनुरोध है कि ऑंदोलन में लोगों की सेवा करने वाले साथियों को डराना बंद करे।
सुहाना खान का नाम सुनते ही पुलिस ने कहा, 'इसे अलग लेकर आओ।' इसके बाद सिविल ड्रेस में मौजूद एक पुरुष पुलिसकर्मी ने मुझे करीब 7 घंटे तक टॉर्चर किया। मेरे प्राइवेट पार्ट पर भी हमला किया और मुझे बेरहमी से पीटा।
CJP प्रोटेस्ट के समर्थन में व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाने के आरोप में तीन मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया, मामला असम के लखीमपुर का है। गिरफ्तार युवकों के नाम असराफ़ुल इस्लाम, मंज़ूर रहमान और अब्दुल कासेम हैं। इन मुस्लिम युवकों पर आरोप है कि वे छात्रों के आंदोलन के समर्थन में एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करने की कोशिश कर रहे थे। चलो मान लेते हैं कि ये प्रोटेस्ट कि तैयारी भी कर रहे हों तो अब सवाल ये उठता है कि अगर किसी ने हिंसा नहीं की, कानून नहीं तोड़ा, और सिर्फ़ लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की तैयारी की, तो क्या उसे गिरफ्तार कर के जेल भेज देना न्याय है?
सीवान में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर असॉल्ट राइफल से फायरिंग किया!
AK-47 हो या इंसास, जैसे एसॉल्ट राइफल का इस्तेमाल पुलिस, अर्ध सैनिक बलों अथवा सेना द्वारा आतंकवादियों या हमलवार पेशेवर अपराधियों के विरुद्ध किया जाता है, प्रदर्शन कर रहे आम नागरिकों के विरुद्ध नहीं!
देशवासी दिल्ली में पैलेट गन के इस्तेमाल पर अचंभित हो रहे थे पर बिहार पुलिस ने तो सभी सीमाएं ही लाँघ दी। बिहार पुलिस द्वारा पहले जहानाबाद में फायरिंग की गई थी और अब तो सिवान में असॉल्ट राइफल से फायरिंग हो रही है।
सम्राट सरकार पागल हो चुकी है!
@yadavtejashwi
#NEET #Bihar #RJD
इस देश में मुसलमान होना गुनाह है क्या ? जामिया इलाके में मुस्लिम स्टूडेंट को क्यों डिटेन किया गया ?
आओ फिर जंतर -मंतर के पास हजारों बच्चों -छात्र बैठे हैं . सबको डिटेन कर लो . या कि देखकर ही डिटेन कर रहे हो ? धार्मिक पहचान के आधार पर ?
मोदी जी, अपने "फ्रैंड" को एक मंत्रालय से हटाकर दूसरे में बैठाकर बचाने की आपकी साज़िश देश के छात्रों और भारत की जनता को मंज़ूर नहीं।
धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्टाचार और देश की education system की बर्बादी के चिन्ह और अनेक छात्रों की मौतों के ज़िम्मेदार हैं।
उन्हें अब किसी और की ज़िंदगी उजाड़ने नहीं देंगे। धर्मेंद्र प्रधान को कैबिनेट से जाना ही पड़ेगा - ये non-negotiable demand है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे education system को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है।
सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।
2 मांगें अभी भी बाकी हैं - प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो।
ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है - अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है।
इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है।
डरो मत!
जामिया वाले बच्चों सावधान!
आंदोलन जामिया से लगभग 20 किमी दूर चल रहा है, लेकिन @DelhiPolice की वर्दी में बिना नेम प्लेट वाले पुलिसकर्मी जामिया के छात्रों को रोक-रोककर उनके नाम लिख रहे हैं।
आख़िर ऐसा क्यों किया जा रहा है? क्या इसका कोई आधिकारिक कारण बताया गया है? क्या यह उचित है?
कुछ लोग आशंका जता रहे हैं कि भविष्य में इन छात्रों को परेशान किया जा सकता है। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि कहीं फिर से मुस्लिम युवाओं पर NSA या UAPA जैसी कड़ी धाराओं के इस्तेमाल की तैयारी तो नहीं की जा रही।
Note- इस तरह से अगर कोई भी पुलिस वाले आपको रोक कर आपका नाम पता पूछे तो उन्हें कुछ भी न बताएं जब तक कि पूछने का कोई ठोस वजह न हो!
#CJPProtest #JamiaMiliaIslamia
सुनिए, इस वीडियो को बनाने वाले छात्र क्या कह रहे हैं। 👇
दिल्ली और पुरानी दिल्ली के थानों में प्रोटेस्ट में जाने वाले निवासियो लोगो को @DelhiPolice पूछताछ कर रही है, 7/51 की कार्येवाही कर रही है, क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शन में जाना अपराध है लोगो को धमकाया जा रहा है, ये ग़ैर लोकतांत्रिक है,उपद्रवियों पर कार्येवाही हो। @DCPCentralDelhi