आँखों वाली
क्षितिज-रेख पर
काला-सूरज उदित हुआ
धरती का कर
निज दुहिता के
पाँव परस कर मुदित हुआ
कम्पित शब्द-गोट ने
सहसा चला
एक ध्वनिवाही दाँव!
बहुत देर से
सोकर जागी
दिशा-वधू मौसम के गाँव..! 😍😍
#कविराज_KV@DrKumarVishwas
हर इक मौसम,हर इक रुत में,बिना नागा,बिना झिझके,
हमारे गाँव में सुबहें यूँ ही आती हुई देखीं ,
मेरी मिट्टी, मेरी माँ के मुहब्बत से भरे घर में,
हवाएँ बालियों के साथ बतयाती हुई देखीं...!❤️
(😍खेत पर सुबह😍)
आँखों वाली
क्षितिज-रेख पर
काला-सूरज उदित हुआ
धरती का कर
निज दुहिता के
पाँव परस कर मुदित हुआ
कम्पित शब्द-गोट ने
सहसा चला
एक ध्वनिवाही दाँव!
बहुत देर से
सोकर जागी
दिशा-वधू मौसम के गाँव..! 😍😍
#कविराज_KV@DrKumarVishwas
कुछ किताबें तब ज़्यादा सुंदर थीं,
जब वे पेड़ थीं।
- गीत चतुर्वेदी,
('ख़ुशियों के गुप्तचर' से)
प्रकृति को नमन करते हुए विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
#WorldEnviromentDay
🔥🔥🔥
भटकता कारवाँ है और मैं हूँ ~
†तलाश-ए-राएगाँ है और मैं हूँ!
बताऊँ क्या तुम्हें *हासिल सफ़र
का,
अधूरी +दास्ताँ है और मैं हूँ ..!
नया कुछ भी नहीं क़िस्से में मेरे,
वही बोझल ×समाँ है और मैं हूँ!
#मनीष_शुक्ला
👉
† = निरर्��क खोज
* = उपलब्धि
+ = कहानी
× = दृश्यावली