Registering an FIR against Shri @RahulGandhi for raising his voice strongly against the untouchability faced by Congress President Shri @kharge is the height of the BJP’s arrogance and authoritarianism. It shows that the BJP wants untouchability and discrimination against Dalits to continue, while those who speak out against it are harassed and targeted.
The Congress has always stood firmly against untouchability and discrimination. From the constitutional abolition of untouchability to the SC/ST (Prevention of Atrocities) Act aimed at protecting Dalits from atrocities, all of these are the direct contributions of the Congress. Why has the BJP never taken any such meaningful step in the interest of Dalits? Why has the RSS never launched a single campaign to eradicate untouchability?
This makes it clear that the BJP not only ignores discrimination against Dalits but also actively shields and patronizes it. By turning the victim into the accused, this BJP government is openly undermining the Constitution and the principles of Babasaheb Ambedkar.
Shri Mallikarjun Kharge, Shri Rahul Gandhi, and the entire Congress party stand firmly with Dalits and will continue to oppose every such injustice.
कांग्रेस अध्यक्ष श्री @kharge जी के साथ हुई छुआछूत के खिलाफ मुखरता से आवाज बुलंद करने पर श्री @RahulGandhi के ही खिलाफ एफआईआर दर्ज करना भाजपा के घमंड और तानाशाही की पराकाष्ठा है। यह दिखाता है कि भाजपा चाहती है कि दलितों के साथ छुआछूत और भेदभाव चलता रहे और जो उसके खिलाफ आवाज उठाए उन्हें प्रताड़ित किया जाए।
कांग्रेस ने हमेशा छुआछूत और भेदभाव का विरोध किया है। संविधान में अस्पृश्यता निवारण हो या दलितों के साथ अत्याचार रोकने वाला एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून, सब कांग्रेस की देन है। भाजपा ने आजतक दलितों के हित में ऐसा कोई कदम क्यों नहीं उठाया। आरएसएस ने आजतक छुआछूत खत्म करने का कोई अभियान क्यों नहीं चलाया?
इससे स्पष्ट हो जाता है कि भाजपा दलित वर्ग के साथ भेदभाव को न सिर्फ नजरअंदाज करती है, बल्कि उसे संरक्षण भी देती है। पीड़ित पक्ष को ही आरोपी बनाने वाली यह भाजपा सरकार संविधान और अंबेडकर के सिद्धांतों की खुलेआम अवहेलना कर रही है। श्री मल्लिकार्जुन खड़गे, श्री राहुल गांधी एवं पूरी कांग्रेस पार्टी दलितों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और ऐसे हर अन्याय का विरोध करेगी।
भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ प्रतापगढ़ की 'जन आक्रोश महारैली' में अपनी बुलंद आवाज दर्ज कराने पहुँची समस्त देवतुल्य जनता-जनार्दन का हार्दिक आभार। 🙏
आज प्रतापगढ़ में आयोजित जन आक्रोश यात्रा महारैली में संबोधन:
शिक्षा पद्धति में सुधार हो ,स्कूलों में मरम्मत के काम हों , आज इशू बन गया है। छात्रों की गूँज प्रोग्राम में आप देखते हो राहुल गांधी जी को, कितने बच्चे बच्चियां आ रहे हैं। खरगे साहब अभी वहां चले गए उत्तराखंड, वो दलित वर्ग के हैं हमारे कांग्रेस प्रेजिडेंट, उनके जाने के बाद में उनकी जगह को धोया गया, पवित्र किया गया। राजस्थान में हमारे नेता प्रतिपक्ष दलित वर्ग के हैं जूली साहब, वो भी मेघवाल हैं, आप बताइए वो चले गए मंदिर में, धोया गया उसको। ये संविधान के अंदर कानून के खिलाफ है। मुकदमा दर्ज होना चाहिए उन बेईमानों के खिलाफ जो कि इस तरह की हरकत करते हैं।
आज प्रतापगढ़ के दिवाक माताजी में आयोजित 'जन आक्रोश यात्रा महारैली' को संबोधित किया।
रैली में उमड़ा यह विशाल जनसैलाब स्पष्ट संदेश दे रहा है कि आदिवासी अंचल की जनता भाजपा की जनविरोधी नीतियों से त्रस्त है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद करने और झूठे चुनावी वादों से जनता में भारी आक्रोश है।
आगामी नगरीय निकाय और पंचायतीराज चुनावों में जनता भाजपा को इसका करारा जवाब देकर सबक सिखाएगी।
जयपुर में सुबह 9 बजे से होने वाली NEET-PG की परीक्षा 12 बजे तक शुरू ही नहीं हो पाई।
छात्र और उनके परिजन मोदी के घटिया सिस्टम के कारण परेशान होते रहे और पूरी सरकार चादर ताने सोती रही।
एक बार फिर साबित हो गया कि मोदी सरकार एक परीक्षा ठीक से नहीं करवा सकती।
धिक्कार है।
पर चुनाव आ गया तो चुनाव में एक संदेश जाता है चुनाव के बाद। यूं हम लोग कितने ही स्टेटमेंट देते रहें, पर जब चुनाव आ जाता है, चुनाव जीतते हैं, तब मुहर लगती है जो हम आरोप लगाते हैं बीजेपी पर, सरकार पर, उसपे मुहर जनता लगाती है। जनता ने मुहर लगा दी, तो मैं समझता हूं कि जनता का भला होगा। यह मैं कह सकता हूं।
यही बात कह के मैं आप सब का आह्वान करूंगा, आप सब समझदार बैठे हो। वहां से चित्तौड़ वगैरह आए हो, उदयपुर के भी आसपास के लोग हो, कृपा करके टिकटों का झमेला कल परसों खत्म हो जाएगा, उसके बाद बड़ा दिल रख करके सबको समझाओगे, कोई गुस्से में भी है तो। क्योंकि नुकसान पार्टी को होगा, व्यक्ति को नहीं होता है। कम से कम राहुल गांधी और खरगे साहब जो लगे हुए हैं, आप देखते होंगे कैसी स्थिति दिल्ली के अंदर है। तानाशाही का राज चल रहा है। जम्हूरियत खतरे में है। डेमोक्रेसी खतरे में है, लोकतंत्र। इलेक्शन कमिशन, ज्यूडिशियरी, ईडी, इनकम टैक्स, सीबीआई सब दबाव के अंदर है। वो आप सबको मालूम है।
उसका मुकाबला राहुल गांधी जी कर रहे हैं, खरगे साहब कर रहे हैं पूरी टीम के साथ में, पार्लियामेंट के अंदर भी, बाहर भी। और पार्टी स्तर अलग है। पूरे देश के प्रदेश कांग्रेस में, जिला कांग्रेस में, ब्लॉक कांग्रेस में, मंडल में आप लोगों ने कई प्रोग्राम किए होंगे, कई यात्राएं की होगी। अभी जब जंतर-मंतर आंदोलन हुआ था, राहुल गांधी जी भी गए थे, पीएम हाउस के बाहर, तब भी कोई कमी नहीं रखी आप लोगों ने। सब खबरें आती हैं, जयपुर तक आती हैं।
तो कृपा करके हमें चुनाव जिताने में अपना योगदान दें। इस संकल्प के साथ आप यहां से जाओ। यही बात कह के मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। धन्यवाद। जय हिंद।
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आज उदयपुर में उदयपुर संभाग में विभिन्न स्थानों से पधारे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नगरीय निकाय चुनावों को लेकर संबोधित किया :
भाई, यह तो मीटिंग का रूप ले लिया। यह आपका जो उत्साह है, उसका प्रतीक है। उसके लिए आप बधाई के पात्र हैं।
अभी पूरे प्रदेश में उत्साह है। ए भाई, बैठ जाओ आप लोग। पूरे प्रदेश में उत्साह है कार्यकर्ताओं में और मुख्य कारण उसका यही है कि सरकार तुम्हारी नहीं बनी, पर जो हमारे वक्त में स्कीमें थीं, योजनाएं थीं, वो इतनी शानदार थीं, सोशल सिक्योरिटी की भी थीं, विकास भी काफी हो गए।
विधायकगण जो, जिन्होंने मांग करी विकास की, मैंने कहा तुम मांगते-मांगते थक जाओगे, मैं देते-देते नहीं थकूंगा। वही करके दिखाया और उसके कारण से गांव-गांव में वो स्कीमों का जो लाभ मिल रहा था, नई सरकार आते ही वो या तो रुक गया, या रोक दिया गया या बंद कर दिया गया।
तो लोगों में बहुत भयंकर आक्रोश है, बहुत भयंकर आक्रोश। ऐसा मैंने आज तक कभी नहीं देखा, इतना गुस्सा गांव में और शहरों में, कस्बों में है।
नगर निकाय के चुनाव होने वाले हैं। हमने उनके लिए भी नरेगा की तरह, कोई कानून नहीं था शहरों के लिए, तब भी हमने शहरी रोजगार योजना शुरू करी। नगर पालिकाओं को इतना फायदा हुआ कि वहां गरीब लोग रहते हैं शहरों में, उनको काम मिलने लग गया। बंद कर दी उसको।
हमारे वक्त में 12 लाख पट्टे मिले हैं, ₹5 में या ₹500 में। अब ये ढाई साल हो गए इनको, बार-बार कैंप लगाते हैं, कैंप फेल होते हैं। कोई पट्टे बांट नहीं पा रहे, मामूली पट्टे बांटे होंगे। यह स्थिति सरकार की है।
सड़कें खुदी पड़ी हैं, सीवरेज, पानी बह रहा है। बिल्डिंगें बन चुकीं अपने वक्त की, उद्घाटन तक नहीं कर रहे ये लोग। यह मुझे आश्चर्य होता है कि बिल्डिंग बन गई, करोड़ों रुपए खर्च हो गए। हमने इंतज़ार शास्त्र निकाला था, देखा आपने 20 दिन तक लगातार एक-एक स्कीम के बारे में लिखा। उस वक़्त सरकार घबरा गई पूरी तरह से, दो-तीन काम शुरू किए, वो आधे-अधूरे हैं वो भी। पर काम सब पड़े हैं ठप। तो समझ के परे है कि सरकार को क्या हो गया। काम क्यों नहीं कर पा रहे? ऐसा कुशासन कभी नहीं देखा गया।
सरकार कम करती है, काम ज्यादा करती है पर इस बार तो भ्रष्टाचार की सीमा टूट गई है। ये जो बीजेपी, आरएसएस वाले लोग कहते थे चाल, चरित्र, चेहरा हमारा, वो जनता के सामने एक्सपोज हो गया पूरी तरह से, पूरी तरह एक्सपोज हो गए। जनता के रोज काम पड़ते हैं, बिना पैसे दिए काम होता ही नहीं किसी का। काम ही नहीं होता है।
विकास ठप हो गया, स्कूलें बंद हो रही हैं, दवाएं मिलनी बंद हो गई हैं या कमजोर हो गई हैं।
आरजीएचएस स्कीम को ठप कर दिया। अस्पताल वाले पैसा मांगने लग गए लोगों से इलाज का, जबकि ऑपरेशन फ्री थे। हार्ट का ऑपरेशन, घुटनों का ऑपरेशन, दवाएं फ्री, ऑपरेशन फ्री, जांचें फ्री, डायलिसिस फ्री, एमआरआई फ्री, सीटी स्कैन फ्री, 25 लाख तक का अपन ने इलाज फ्री किया और आज भी घर-घर में उसकी चर्चा है, क्योंकि बीमार कोई न कोई पड़ ही जाता है घर के अंदर। घर में बीमार पड़ता है ₹500, ₹5000, ₹50,000, ₹5 लाख खर्च हो जाते हैं। वो पैसे बचत हो गई।
अब एक तरफ तो प्याज भी महंगा, शक्कर मिल नहीं रही है मार्केट से, गायब हो गई। ₹70 से पार कर गई उसकी, भाव उसका भी, शुगर का भी और ऊपर से जो स्कीमें थीं, वो स्कीमें उन्होंने कमजोर कर दीं हमारी। वो थैला दिया हम लोगों ने, गांव-गांव में थैला ले के फिर रहे हैं लोग ,अन्नपूर्णा योजना। अभी मेरे घर पे कोई एक थैला ले के आ गया, "साहब, इसको आप कहो सरकार को, वापस शुरू करे।" और वो कह रहा है, "साहब, आपकी फोटो हटा दे, खुद की लगा दे, स्कीम बंद क्यों कर रहा है?" यह भावना है।
खाली थैला बांट दिया बाद में, खाली थैला। उसकी मजाक खूब उड़ी खाली थैले की भी। मैंने भी कहा, मुख्यमंत्री जी, आप थैला की स्कीम बंद क्यों कर रहे हो? अपनी फोटो लगा दो, मेरी फोटो हटा दो और कायदे की बात है बुरा मानने वाली बात नहीं, मुख्यमंत्री बदल गए हैं, तो फोटो उनकी लग जाएगी। इतनी शानदार स्कीम को बंद कर दिया।
बुजुर्गों का, विधवाओं का, पांच-पांच, छह-छह महीने हो गए, पेंशन नहीं आती उनकी और तो और लोग मर जाते हैं बेचारे एक्सीडेंट में, मैंने ₹5 लाख की योजना बनाई कोई मर गया तो ₹5 लाख मिलेंगे, घर में दो मर गए ₹10 लाख मिलेंगे। 2,500, ढाई हजार लोगों का पैसा पेंडिंग है। सैंक्शन हो गया सरकार से, ट्रेजरी में रुक गया। 1/2.
कल ही मैंने फोन किया एक अधिकारी को, भई मैंने सुना ढाई हजार लोगों का पेंशन, पेंशन क्या जो बेचारे मर गए गरीब लोग, उनका पैसा क्यों नहीं दे रहे हो? रोक क्यों रहे हो? उसको पता नहीं था। और 1500 लोग ऐसे हैं जिनका वापस इन्क्वायरी भेज दिया जिलों के अंदर, डिले करने के लिए। कहने का मतलब यह पेमेंट सारे बाकी पड़े हैं सब डिपार्टमेंट के, पीएचईडी के हों, सड़कों के हों, सिंचाई के हों, कोई पेमेंट नहीं हो रहा है ठेकेदारों को भी। वो भी रो रहे हैं रोज के। विज्ञापन देते हैं धमकी का, बुला के समझाते हैं कि आपके ₹2,000 करोड़ रिलीज कर रहे हैं, वापस आप धन्यवाद का विज्ञापन दो। वो विज्ञापन देना पड़ता है। कल वो आए ठेकेदार, कह रहे, "साहब, वो विज्ञापन दिलवा दिया हमसे और पैसा हमें दिया नहीं है, खाली धोखा दिया हमें।" यह स्थिति है।
कहने का मतलब यह चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। लंबी बात नहीं करता हुआ, लंबी बात तो चित्तौड़ में करेंगे। उदयपुर में आएंगे ,कार्यक्रम में बात करेंगे। अभी आपको यह कहना है कि टिकट का जो चल रहा सिलसिला, इसमें हमेशा नगर निकाय के हों या पंचायत के हों, टिकट मांगने वाले ज्यादा होते हैं। और अगर हवा अच्छी पक्ष में है, तो ज्यादा और ज्यादा बढ़ जाते हैं, जो अभी है। अभी हवा आपके पक्ष में है।
बड़े-बड़े शहरों में भी जहां नगर निगम हैं, वहां भी पहली बार मैं सुन रहा हूं कि काफी अच्छी हवा वहां पर भी है। अब खाली इतना ही है कि टिकट तो मिलेगा एक को। आपने मेरा स्टेटमेंट पढ़ा होगा, मैंने कहा भाई, मैं भी किसी की सिफारिश करूं, उसको टिकट मत दो। वो वहां वार्ड में कौन जीतने वाला है, वो तो आप ज्यादा जानते हो। मैं जयपुर में बैठा-बैठा भरतपुर में कौन से वार्ड में कौन टिकट मांग रहा है या बीकानेर में कौन मांग रहा है, चित्तौड़ में कौन मांग रहा है या उदयपुर में कौन मांग रहा है, मुझे क्या मालूम? अगर मेरे पास कोई सिफारिश आई, और मैंने मान लो इत्तला कर दी भाई इसको टिकट दे दो, क्योंकि मैं फोन करूंगा भाई सुनो, उनका फोन आ गया टिकट दे देते हैं। तो पता नहीं उसकी स्थिति क्या है, बोर्ड कैसे बनेंगे?
तो यह स्थिति बनी है। पर इसमें कई तरह की शिकायतें भी होती हैं। प्रक्रिया में भी शिकायत हो सकती है। जो जांच-पड़ताल होती है, असेसमेंट होता है, उसमें कभी कमजोरी हो जाती है, कमी रह जाती है। कई तरह की बातें होती हैं। कई बार टिकट में कोई शिकायत हो जाती है, साहब, मिलना इनको चाहिए, इनको मिल गया। ये बातें आएंगी।
पर यह दिमाग में रखो, पार्टी इस बार जिस रूप में प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जो ब्लॉक कांग्रेस कमेटियां बन गईं, मंडल बन गए, और मैं चाहूंगा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी इस बार जो है इस रूप में पूरा अपना कंप्यूटराइज करे प्रोग्राम। यदि कोई टिकट नहीं भी मिल रहा है, वो चुनाव जिता रहा है मान लीजिए उम्मीदवार को, तो कई तरीके हैं उसको, बोर्ड कॉरपोरेशन भी है। पार्षदों का जो नॉमिनेट करते हैं हम लोग, बड़ी संख्या में करते हैं पार्षद नॉमिनेट, अगर वो खड़ा नहीं हुआ है, तो वो मनोनीत हो सकता है। कई तरीके होते हैं।
पर अगर मान लो टिकट मिलने के बाद में ही झगड़े शुरू हो जाएं, तो आप सोच लीजिए बोर्ड कैसे बनेगा? ये तो तैयार करके बैठे हैं झगड़ा करवाने के लिए, बीजेपी वाले तो। जिस प्रकार परिसीमन किया वार्डों का, आप में अधिकांश लोगों को मालूम है कि परिसीमन में बहुत बड़ी बेईमानी करी इन लोगों ने। चुनाव जीतने के लिए परिसीमन का एरिया अदला-बदली करी। पूरे राजस्थान में शिकायतें उसकी हैं। पंचायतों में भी और अपने स्थानीय निकायों के अंदर, नगरपालिका, नगर परिषद, नगर निगम के अंदर भी। उसका इलाज हमारे पास में नहीं है।
अब तो यही है कि सबक सिखाने का, इनको सबक मिले कि अधिकांश जगह नगरपालिका, नगर परिषद, नगर निगमों में कांग्रेस के बोर्ड बनें, मेंबर जीतें । तब जाके इनकी अकल ठिकाने आएगी। अकल ठिकाने लाना जरूरी होता है डेमोक्रेसी के अंदर। तब जाके वो जो है उनका हाईकमान और लोअर कमान जो भी उनकी है, जैसी-कैसी भी आरएसएस अलग है उनका, तमाम लोगों की आंखें खुलेंगी कि यह हो क्या गया है।
तब जाके शासन, जो भी कुशासन है, उसमें सुधार करने का प्रयास करेंगे। जो उसका फायदा जनता को मिलेगा। हम विपक्ष में हैं तो हमारी ड्यूटी है इतना दबाव बनाओ, इतना दबाव बनाओ जिससे कि सत्ता में रहने वाले लोगों की आंखें खुल जाएं, अच्छा काम करने लग जाएं, जनता को राहत देवे, विकास के काम करे, परेशानियां दूर करे, करप्शन को रोके, कानून-व्यवस्था ठीक करे। यह विपक्ष का काम है।
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रक्षाबंधन पर अब बाईजी का दुलार, उनका आशीर्वाद और वह वात्सल्य भरा आँचल बहुत याद आता है। बाईजी हम भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं।
रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर निवास पर पधारे एक आगंतुक बाईजी के साथ मेरी पेंटिंग लेकर आए। यह पेंटिंग जिस तस्वीर से बनी है वह कुछ वर्षों पूर्व के रक्षाबंधन के अवसर की ही तस्वीर थी।
इस भेंट ने बाईजी के साथ बिताए उन आत्मीय पलों की अनगिनत यादें ताज़ा कर दीं।
नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश के दलित एवं कमजोर वर्गों के साथ हो रहे "शुद्धिकरण" के नाम पर छुआछूत और जातिगत भेदभाव का सच देश के सामने रखा।
आरएसएस-भाजपा विचारधारा से पोषित यह सामाजिक भेदभाव संविधान के अनुसार अपराध है और पूर्णतः अस्वीकार्य है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी का हल्द्वानी में घोर अपमान हुआ, जहां भाजपा-आरएसएस विचारधारा के लोगों ने मंच का "शुद्धिकरण" किया और उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष इसका खुलेआम समर्थन कर रहे हैं। इससे पहले राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष श्री टीकाराम जूली के मंदिर जाने पर भी ऐसी ही घटना दोहराई गई थी। इन लोगों का संविधान में कोई विश्वास नहीं है, और भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में दलित-विरोधी मानसिकता को समाप्त करने के लिए समाज को आगे आना चाहिए।
हमारी मांग है कि भाजपा सरकार शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत तत्काल कार्रवाई का आदेश दे।
यह विचारणीय है कि भाजपा-आरएसएस की यह सोच देश को उसी जातिगत भेदभाव और दकियानूसी मानसिकता की ओर वापस धकेल रही है, जिससे बाहर निकालने के लिए महात्मा ज्योतिबा फुले, महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, बाबासाहेब अंबेडकर जैसे अनगिनत समाज सुधारकों ने संघर्ष कर देश को एक नई राह दिखाई थी।
@RahulGandhi@kharge
Leader of the Opposition, Shri @RahulGandhi , today in a press conference presented the truth before the nation regarding untouchability and caste discrimination being practiced against the Dalit and weaker sections of the country in the name of "purification".
Nurtured by the RSS-BJP ideology, this social discrimination is a crime under the Constitution and is completely unacceptable.
Congress National President and Leader of the Opposition in Rajya Sabha, Shri @kharge Ji, was deeply insulted in Haldwani, where people belonging to the BJP-RSS ideology "purified" the stage, and the Uttarakhand BJP President is openly supporting this. Prior to this, a similar incident was repeated when the Leader of the Opposition in Rajasthan, Shri Tikaram Jully, visited a temple. These people have no faith in the Constitution, and society must come forward to end this anti-Dalit mindset in a democratic country like India.
We demand that the BJP government immediately order action under the SC/ST Act against those who performed the purification.
It is worth considering that this mindset of the BJP-RSS is pushing the country back toward the same caste discrimination and regressive mindset that countless social reformers, including Mahatma Jyotiba Phule, Mahatma Gandhi, Pandit Nehru and Babasaheb Ambedkar, fought against to liberate the nation from and showed it a new path.
देश के हर दलित व्यक्ति का जन्म से मृत्यु तक, हर जगह, हर कदम अपमान किया जाता है।
उनकी जितनी बुलंद आवाज़ होती है, उनपर उतना तेज़ हमला होता है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी के साथ हल्द्वानी में जो भी हुआ वो "शुद्धिकरण" का नाम दे कर उनके खिलाफ़ छुआछूत है - और छुआछूत भारत के संविधान के अनुसार दंडनीय अपराध है।
इस बात को 20 दिन हो गए - मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, कोई FIR दर्ज नहीं हुई।
नरेंद्र मोदी जी, देश के हर दलित व्यक्ति को आपकी यह दलित विरोधी विचारधारा साफ़ दिखाई दे रही है।
अब गेंद BJP के पाले में है - जल्द से जल्द SC-ST क़ानून के तहत FIR दर्ज हो, कार्रवाई हो और न्याय हो - वरना कांग्रेस पार्टी न्याय हासिल करना अच्छे से जानती है।
हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन एवं राष्ट्रीय खेल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर देने के लिए राजीव गांधी ग्रामीण एवं शहरी ओलंपिक खेलों का आयोजन किया। खिलाड़ियों को सुरक्षित भविष्य देने के उद्देश्य से सरकारी नौकरियों में 2% आरक्षण की घोषणा भी की गई थी। साथ ही, आउट ऑफ टर्न नियुक्ति नीति के माध्यम से उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सरकारी सेवाओं में अवसर देकर उनको प्रोत्साहित किया गया था। कांग्रेस सरकार का प्रयास रहा कि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलें।
सावन बीतने के साथ ही राजस्थान में मानसून कमजोर पड़ गया है और भादों में भी बारिश की उम्मीद क्षीण नजर आ रही है। राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के 17 जिलों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं।
पाली, जालोर, बांसवाड़ा, जैसलमेर और उदयपुर जैसे जिलों में सामान्य से 40 से 55 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है, जो बेहद चिंताजनक है।
हमारी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इंदिरा रसोई और मनरेगा जैसी योजनाएं संकट के समय गरीब, किसान और मजदूर वर्ग का सबसे बड़ा सहारा बनी थीं। सूखे जैसी स्थिति में सबसे अधिक नुकसान किसानों और श्रमिकों को उठाना पड़ता है, इसलिए राज्य सरकार को अभी से सतर्क होकर खाद्यान्न भंडारण बढ़ाने, पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने और रोजगार के लिए मनरेगा व शहरी रोजगार गारंटी योजना को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। पशु चारे की उपलब्धता पर भी अभी से ध्यान देना जरूरी है।
मुख्यमंत्री को संबंधित विभागों की समीक्षा कर समय रहते तैयारी की जाए, ताकि आने वाले दिनों में आमजन को संकट का सामना न करना पड़े। @BhajanlalBjp
पत्रकार: सर, आरएसएस के जो साप्ताहिक मुखपत्र है 'ऑर्गेनाइजर', उसने हाल ही में एक जो लेख छापा था उसमें जो यूपीए सरकार के समय जो सोनिया गांधी जी की अध्यक्षता में नेशनल एडवाइजरी कमेटी थी, उसको दिमागी नक्सल बताया है। उसको किस तरह देखते हैं आप?
जवाब: देखिए, वो मुझे लगता है वो खुद ही नक्सली सोच वाले लोग होंगे। आज़ादी मिलते ही इन्होंने संविधान का विरोध किया था। संविधान का विरोध करने वाले लोग हैं ये। और मनुस्मृति की बात करने लग गए थे उस ज़माने के अंदर। आज़ादी मिलते ही वही 'ऑर्गेनाइजर' अख़बार है जिसकी कोई क्रेडिबिलिटी नहीं है।
और जिस प्रकार वो एनएसी के लोगों को, नेशनल एडवाइजरी कमेटी जो यूपीए गवर्नमेंट वक्त में थी, सोनिया गांधी जी चेयरपर्सन थीं उसकी। और कई एक्टिविस्ट भी उसके अंदर थे जिन्होंने क्रांतिकारी काम किए। आरटीई, राइट टू एजुकेशन, फूड सिक्योरिटी एक्ट, एक के बाद एक जो एक्ट बनाया देश के अंदर। शिक्षा का अधिकार मिला हो, सूचना का अधिकार मिला हो, खाद्य सामग्री का अधिकार मिला हो। अधिकार आधारित युग की शुरुआत करी उन्होंने, सोनिया जी ने। उनको कहते हैं ये दिमागी नक्सलियों का अड्डा था वो! ये कहते हैं 'ऑर्गेनाइजर' कहता है।
और 15 अगस्त को प्रधानमंत्री जी ने निसंकोच वही काम लिया जो ये ले रहे हैं 'ऑर्गेनाइजर' अख़बार वाले कह रहे हैं। तो इनमें कोई दम नहीं है, लोग समझते हैं। लोग समझते हैं कि किस रूप में सोनिया गांधी जी ने जो जिस प्रकार से कॉन्ट्रिब्यूट किया है देश के अंदर हर क्षेत्र में, सोशल सिक्योरिटी के अंदर। आज हम जो यहां प्रेरणा लेते हैं, आज राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने जो इतिहास बनाया है अपना सोशल सिक्योरिटी के अंदर पूरे देश में चर्चा हो रही है, उसकी प्रेरणा ही हमने सोनिया गांधी जी से ली होगी, उनसे ली होगी। जिस प्रकार से उन्होंने कार्यक्रम चलाए थे उस ज़माने के अंदर। आज 22-23 साल से देख रहा हूं मैं।
तो इसलिए ये इस प्रकार जो ये अख़बार है आपका, साप्ताहिक अख़बार है ये 'ऑर्गेनाइजर', उसकी कोई क्रेडिबिलिटी मैं नहीं मानता।