28 जून को फॉरेस्टर एग्जाम है, टाइम से पहले ही सेंटर पर पहुंचे, ड्रेस कोड के अनुसार जाएं, ब्लूटूथ, मोबाइल और AI वाले मेटा ग्लासेस, चश्मों को स्क्रीन करने के सख्त नए आदेश हैं, गलती से भी गलती न करें।
सभी 3.7 लाख कैंडिडेट्स को हमारी बेस्ट विशेज।
ये ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
मयूराज जी, जितने मुँह उतनी बात, कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं। अभी बोर्ड उलझासन से सुलझासन योग में व्यस्त है।
आप तो धैर्य योग, शवासन जो उपयुक्त लगे थोड़ा और चलने दो।
आनेवाले मंगल को स्थिति क्लियर होगी, की मंगल का योग बन रहा है कि नहीं,? बन रहा है तो कितनों के मंगल का योग बन रहा है।
@alokrajRSSB "योगाचार्य आलोक सर, 'धैर्य योग' का कोर्स अब पूरा हो चुका है। कृपया अब 'परिणामासन' करा दीजिए, क्योंकि इंतज़ार करते-करते हम सब 'मरणासन' की स्थिति में पहुँच चुके हैं! 🧘♂️💀🙏"
LDC Grade II / Junior Assistant 2026 : Office Order Regarding Debarred Candidates
LDC Grade II / Junior Assistant 2026 : Advertisement regarding Admit Card issue date & Important Instructions for candidates is available on
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Platoon Commander Direct Recruitment 2025 : Schedule of Interviews and Important Instruction for Selected Candidates : interview dates 8 से 17 जुलाई 2026
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जिम्मी Banna, की भर्ती में न्यूनतम मार्क्स हों या न हों, या कितने हों, ये निर्णय संबंधित विभाग करता है, उसमें हमारा कोई दखल नहीं।
तो हर भर्ती के नियम विभागानुसार ही होते हैं, जो कि अलग अलग भी हो सकते हैं।
@alokrajRSSB माननीय #युवा_हितैषी_आलोकराज जी पशु परिचर और चतुर्थ श्रेणी सेम लेवल की भर्ती है पशु परिचर में 40% मिनिमम क्वालीफाइंग मार्क तय थे तो चतुर्थ श्रेणी में क्यों नहीं युवा आपसे बहुत उम्मीद रखते है हजारों युवाओं का ध्यान रखते हुए चतुर्थ श्रेणी में मिनिमम मार्क तय कीजिए
@alokrajrssb
महिला पर्यवेक्षक भर्ती के 2600 से भी ज्यादा कैंडिडेट्स जिनको 24 जुलाई को होने वाली परीक्षा में किसी कारण से शामिल नहीं होना है, जिम्मेदार नागरिक का रोल अदा करते हुए अपने फॉर्म्स प्रत्यारित कर लिए। इस से 10 से भी ज्यादा स्कूलों में पढ़ाई का हर्जाना होने से बचेगा।
थैंक यू सो मच।
CET (Senior Secondary) 2026:-Detailed Advertisement हमारी वेबसाइट पर।
ऑनलाइन फॉर्म्स 24 जून से 23 जुलाई के बीच भरे जाएंगे। ये सबसे शेयर करें।
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यह हमारा राष्ट्रीय चरित्र है
परीक्षाओं को सफलतापूर्वक संपन्न करवाना चुनौती हो गया है। लेकिन सवाल यह है कि यह चुनौती है किसकी ओर से? इसी देश के वे आम नागरिक हैं जो "किसी भी तरह" से परीक्षा पास करना चाहते हैं। किसी भी तरह मतलब किसी भी तरह। तरीका कोई भी हो। सही-गलत, कानूनन-गैरकानूनी, नैतिक-अनैतिक कैसे भी। अब इस बात की परवाह कोई नहीं कर रहा कि आप जो करने जा रहे हैं, वह सही है या गलत।
NEET पेपर लीक ने सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया तो RE-NEET को और भी बड़ी चुनौती की तरह लिया गया। देश के सारे संसाधन इस परीक्षा को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में झौंक दिए गए। इंतजामों का मजाक तक उड़ाया गया लेकिन उपाय क्या हैं? हर कोई पेपर उड़ाने के लिए गिद्ध बनकर बैठा है। ऐसे में अंट-शंट उपाय भी होंगे ही। देश का हजारों करोड़ रुपया भी वेस्ट होगा ही।
हालांकि सरकार कभी वे उपाय नहीं करेगी, जो परीक्षा की पवित्रता को चुनौती देने वालों में खौफ पैदा कर सके। सरकार ऐसा कोई कानून नहीं बनाएगी कि पेपर किसी भी स्तर पर लीक करने वालों, डमी परीक्षार्थी बनने वालों में डर बैठे। वे हतोत्साहित हों। अगर ऐसे लोगों के लिए सीधे और एकमात्र फांसी की सजा का प्रावधान कर दिया जाए या ऐसे लोगों की 100% संपत्ति जब्त करने का कानून बना दिया जाए तो किसी की हिम्मत थोड़े ही होगी चुनौती देने की? लेकिन सरकार ऐसा कुछ नहीं करेगी। स्थाई समाधान में कोई भी सरकार रुचि नहीं लेती।
अब आप यह बताइए कि 40 लाख रुपए लेकर जो मेडिकल छात्र किसी और के लिए परीक्षा में बैठे थे, उनको पता नहीं था क्या कि वह गलत कर रहे हैं? उनको इसके अंजाम के बारे में पता नहीं था क्या? उनको यह नहीं पता था कि इस परीक्षा को सरकार ने कितने गंभीरता से लिया हुआ है? मेडिकल की पढ़ाई कर रहे लड़के, जिनके सामने एक सुरक्षित और शानदार भविष्य खड़ा है, सब कुछ जानते-बूझते हुए भी अगर यह सब कर रहे हैं तो इस बात को स्वीकार करने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए कि हमारा राष्ट्रीय चरित्र खत्म हो चुका है। इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं के बीच अगर एक लड़की अंडरगारमेंट्स में मोबाइल छिपा कर ले जाती है, मोबाइल के साथ उसे अंदर जाने दिया जाता है तो समझ लीजिए हमारा राष्ट्रीय चरित्र खाक हो चुका है। जिस राष्ट्र का राष्ट्रीय चरित्र खत्म हो जाए, उसमें आप चाहे जितना इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास कर लीजिए, अर्थव्यवस्था को कितना भी बड़ा कर लीजिए लेकिन उसका आगे बढ़ना बेहद मुश्किल है। हम नकल, अपराध, जुगाड़, अनैतिकता के विश्वगुरु हैं। इन हालात पर आप गर्व करना चाहे तो गर्व कर सकते हैं और शर्मिंदा होना चाहे तो शर्मिंदा हो सकते हैं। लेकिन हालात ऐसे ही है।