बीना बच्चे का शीतकालीन स्कूल चलने से क्या मूवी का ही सूटिंग चलता है
चित्तौड़गढ़ की न्यू रिलीज मूवी के कलाकार प्रिंसिपल अरविन्द व्यास ब्राह्मण और टीचर कांता पांडेय
मूवी का नाम शीतकालीन स्कूल
बात 1994 की है. मैसूर में इंजीनियरिंग के दौरान अखिलेश जी के एक सहपाठी नीरज थे. तस्वीर में जो दो लोग रेलवे प्लेटफार्म पर बक्शा पकड़े है....एक नीरज है, दूसरे अखिलेश जी है.अखिलेश जी उन्हें विदा करने के लिए मैसूर स्टेशन के प्लेटफार्म पर आए हैं।
राष्ट्रीय जनता दल की ये दोनो प्रवक्ताएं जोड़ी @priyanka2bhartiऔर @Kanchanyadav000 जो गोदी मीडिया के एंकर और भाजपा के प्रवक्ताओं को पानी पिला पिला के तथ्य और फैक्ट के साथ धुलाई कर रही है राजद को बहुत समय बाद ऐसे प्रवक्ता मिले है जो पुरे होमवर्क के साथ मीडिया में तबाही मचाई हुई है
@samajwadiparty@socialistaditya@yadavakhilesh@JyotiDevSpeaks
25 मार्च 2025 को Samrat Singh (@USPJYHind) ने अपनी माँ की तबीयत का बहाना बनाकर मुझसे ₹1000 UPI से लिए। पैसा न लौटाया, कॉल ब्लॉक कर दिया। ऐसे लोग पद का दुरुपयोग कर कई लोगों से ठगी कर रहे हैं। समाजवादी लोग सावधान रहे
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कल परमिंदर अम्बर जी का ब्रॉडकास्ट देखा। सच कहूँ तो यह वीडियो बिहार की राजनीति का इतिहास और वर्तमान स्थिति समझने के लिए बेहद शानदार है ।
परमिंदर जी ने सवाल पूछे और राज्यसभा सांसद संजय यादव जी ने उन सवालों का बहुत ही विस्तार से जवाब दिया।
इस बातचीत में संजय यादव जी ने बताया कि किस तरह स्वर्ण मीडिया बहुजन समाज से आने वाले नेताओं को बदनाम करती है। वे हमेशा बहुजन नेताओं को केवल एक जाति विशेष का नेता बताती है, जबकि स्वर्ण नेताओं को पूरे देश का नेता कहकर पेश किया जाता है।
संजय यादव जी ने यह भी समझाया कि स्वर्ण मीडिया ऐसा क्यों करती है और इसके पीछे की राजनीति क्या है। वास्तव में यह एक सोची-समझी रणनीति है ताकि बहुजन समाज की एकता और नेतृत्व को कमजोर किया जा सके।
उन्हें बिहार की राजनीति का "चाणक्य" भी कहा जाता है और उन्होंने बेहद गहराई से बताया कि किस तरह बहुजन आंदोलन ने बिहार की राजनीति को नई दिशा दी है और आने वाले समय में इसकी भूमिका और भी मज़बूत होगी।
यह वीडियो सचमुच ज्ञानवर्धक और तथ्यपूर्ण था। इसे हर उस व्यक्ति को देखना चाहिए, जो बिहार और बहुजन राजनीति को सही नज़रिए से समझना चाहता है।
@ambar_parmindar@yuva_rajad@priyanka2bharti
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उमेश यादव नाम के यूजर ने विधायक पूजा पाल को गाली दी थी अब पुलिस जांच में पता चला है इसका असली नाम विवेक सिंह है
अब आप सोच सकते है PDA समाज को बदनाम करने के लिए किस कदर षड्यंत्र हो रहा है
1997 में जनता का जनादेश तोड़ा गया, और आज 28 साल बाद हंसी-हंसी में कबूलनामा हो रहा है।
जिनको मंत्री बनना था उन्होंने बसपा तोड़ी, और जिनको कुर्सी चाहिए थी उन्होंने राजनीति तोड़ी।
असली नाम होना चाहिए – "जनादेश हड़पने वाले महाराज" और "तोड़क सिंह"।