बनना है तो गाँव सा बचपन बनो,
शहर सी जवानी बस बचपन की याद दिलाती है
जब जलाती है ये धूप, बरगद का छाँव याद आता है,और
जब आसरा छीन लेता है ये शहर, तब मेरा गांव याद आता है।
राम राम सा हुक्म ❣️🤝❣️
बाजरे की रोटी गेल्याँ, टिंडी घी का मठहा होवै। हरे साग अर गुड़ की डली, गेल्याँ कटोरा सीत का होवै।।
इसे भोजन की होड़ ये शहरी पिज़्ज़े, बर्गर कित्त कर पावेगे। अपने देशी खाने आगे, ये फिरंगी कित टिक पायेंगे।।
✍️ मारवाड़ की आवाज