हर नागरिक को एक मेगा फोन ख़रीदना चाहिए, चौराहे पर मेगा फोन लेकर खड़े हो जाना चाहिए, यह ख़बर गोदी मीडिया के चैनल और अख़बार कल रोक देंगे, जनता को बताया जाना चाहिए, चाय की दुकान पर जाकर. मेट्रो गेट के बाहर, एयरपोर्ट के बाहर, चलती ट्रेन में, स्टेशन के बाहर, कालेजों के बाहर, अस्पताल के बाहर।देश का लोकतंत्र लुट गया है। वोट चोरी का खेल खुल गया है। सबके हाथ में एक मेगा फोन होना चाहिए। गोदी चैनल सूत्रों के हवाले से खेल कर जाएंगे। जब तक नागरिकों की समिति आयोग के भीतर जाकर जाँच नहीं करती है, सूत्रों की सफाई का कोई मतलब नहीं है। किसी भी नागरिक को शर्म आनी चाहिए कि वह आज के भारत में एक निष्पक्ष न्याय व्यवस्था की उम्मीद नहीं कर सकता है।
सबको पता था कि यह हो रहा है। पिछले साल राहुल गांधी ने वोट चोरी को लेकर प्रेस कांफ्रेंस की। अख़बारों ने उनके ही बयानों को ठीक से नहीं छापा। बिहार और बंगाल के चुनाव के बाद चुनावी विश्लेषक भी लोकतंत्र की हत्या के अपराध में शामिल हो गए। उन्होंने वोटर का नाम काट कर हासिल की गई जीत को डेटा से सही साबित किया। उसमें विपक्ष के खिलाफ़ लहर दिखाई। ये लोग मनी लौंड्रिंग की तरह वोट लौड्रिंग करते हैं। मनी लौंड्रिंग में काला धन सफेद होता है, वोट लौंड्रिंग में वोट की डकैती को डेटा के ज़रिए सफ़ेद किया जाता है। मैं अपने बारे में बता सकता हूँ। किसी का चुनावी विश्लेषण नहीं देखता न पढ़ता हूं, मुझे पता है कि ये लोग वोट लौंड्रिंग कर रहे हैं। इन लोगों ने सुंदर सुंदर ग्राफिक्स बना कर यहां से 25 प्रतिशत घटा कर, वहां से 5 प्रतिशत जोड़ कर वोट चोरी से हासिल जीत को सही साबित किया है। वोट लौंडरर से भी जवाब मांगना चाहिए कि जब चुनाव का डेटा फेयर नहीं है तो आप चुनाव का एनालिसिस किस डेटा से कर रहे हैं?
#ExpressInvestigation | SIR, which began in Bihar in June 2025, an otherwise routine clean-up of the rolls, has struck more than 13 crore names off the draft voter rolls in 30 States and Union Territories. This has put the Election Commission at the centre of intense public debate over its role in deciding who gets to vote — and who doesn’t.
An investigation by The Indian Express reveals that questions were raised on these very issues within the three-member Election Commission itself, time and again through much of this same period. By two of the three Election Commissioners, Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi, no less.
Reported by: @RitikaChopra__
Read: https://t.co/5wxH2BOWkG
The Election Commission of India is under fire like never before.
The SIR has struck 13 crore names off draft rolls, putting the EC at the centre of intense public debate over its role in deciding who gets to vote — and who doesn’t.
HOWEVER, what nobody knew: through that same period, some of the sharpest questions were being asked from inside.
Out today, after months of work. Our #ExpressInvestigation 🧵
(1/10)
The video from Jamui, Bihar is deeply disturbing.
Two Class 10 students were stopped on a road. Harassed. Humiliated. Molested. A young girl, hands folded, begged to be let go while goons groped her and dragged her away.
Who gave these men the right to behave like this? This is not "culture." It is patriarchy: the belief that any man can police a girl's body, her movement, her choices.
When control is mistaken for culture, and such attitudes are normalised by Andhbhakts, mobs start believing they are the law.
Every individual in that video must be identified and prosecuted under POCSO, and justice must be swift. And if the incident happened on September 19th, why are the culprits not behind bars yet?
And the Bihar government must answer why a girl is not safe on a public road at 7 pm?
बिहार के जमुई का एक वीडियो बहुत बेचैन करने वाला है।
10वीं क्लास के एक छात्र और छात्रा को रास्ते में जबरदस्ती रोक लिया गया। उन्हें प्रताड़ित किया गया, अपमानित किया गया और छात्रा के साथ उत्पीड़न किया गया। बच्ची हाथ जोड़कर उसे जाने देने की विनती करती रही, मगर गुंडे उसे गलत तरीके से छूते और खींचतान करते रहे।
इन लोगों को ऐसी बदतमीज़ी करने का हक किसने दिया? यह "संस्कृति" नहीं है, यह patriarchy है: ये सोच कि किसी भी पुरुष का किसी लड़की के शरीर, उसके आने-जाने और उसकी पसंद-नापसंद पर नियंत्रण है।
जब नियंत्रण को ही संस्कृति मान कर 'अंधभक्त' ऐसी सोच को सामान्य ठहराते हैं, तो भीड़ को लगने लगता है कि वही कानून है।
उस वीडियो में दिख रहे हर व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए और उन अपराधियों पर POCSO के तहत मुकदमा चलाकर उन्हें जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए। और अगर ये घटना 19 सितंबर की है तो गुनहगार अब तक सलाखों के पीछे क्यों नहीं हैं?
और बिहार सरकार जवाब दे कि शाम 7 बजे कोई लड़की राज्य की सड़कों पर सुरक्षित क्यों नहीं है?
🚨 Missing Child SOS 🚨
Deepesh, a 16-year-old from Palwal, Haryana, has been missing since 11 September 2026 morning after leaving home for school.
Please help locate him and share this widely. If seen, contact the family immediately:
📞 9813798744 | 9813195866
@PalwalPolice@HaryanaPolice@DC_Palwal@nayabsaini@dgpharyana #missingchild
पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस।
हर बार एक ही पैटर्न - BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है।
जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं।
वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी - ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं।
ECI की संवैधानिक ज़िम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है - मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं।
यह लड़ाई सिर्फ़ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।
Here it is . My first podcast independently , with all the faults there may be . Do share , subscribe .
ये है मेरी पहली रिपोर्ट । शुरुआत है ,
कृपया देखें , समझें , और आगे बढ़ायें
The Killing of Vikram Singh: When an Indian becomes an “Other" https://t.co/e0MxCW359N via @YouTube
नासिक, महाराष्ट्र में आज आदिवासी छात्र-छात्राओं के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिसमें अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल कर रहे छात्र भी शामिल थे।
उनकी समस्याएं और मांगें ध्यान से सुनीं।
हर छात्र को पढ़ाई के लिए एक सम्मानजनक, सुरक्षित और अनुकूल माहौल मिलना उसका हक़ है। वंचित समुदायों से आने वाले छात्रों को सिस्टम की अनदेखी नहीं, उसके सहयोग और हर संभव मदद की जरूरत है।
शिक्षा कोई विशेषाधिकार नहीं - यह भारत के हर छात्र का अधिकार है।
#ChhatronKiGoonj
भाजपा और 'वोट चोरी आयोग' के तरीके बदलते रहते हैं, और बदलते रहेंगे - मकसद बस एक ही है: किसी भी क़ीमत पर BJP की जीत, और भारत के लोकतंत्र का अंत।
महाराष्ट्र 2024 - लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच अचानक 39 लाख नए वोटर जुड़ गए। मैंने तब भी कहा था, आज भी कहता हूँ: यह वोट चोरी थी।
बंगाल 2026 - SIR में जिन नामों को काटा गया, उनमें से 91% नाम अपील के बाद वापस जोड़ने पड़े। यानी हर 10 में से 9 नाम गलत तरीके से काटे गए, और नाम चुनाव के बाद ही जोड़े गए। मैंने तब भी कहा था, आज भी कहता हूँ: यह वोट चोरी थी।
और अब महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ मतदाताओं को ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर कर दिया गया है - यानी हर पांचवां वोटर।
लोक सभा 2024: 9.29 करोड़
विधान सभा 2024: 9.7 करोड़
SIR 2026: 7.78 करोड़
कौन सी लिस्ट सही थी?
वोट चोरी से बनी सरकार के लिए जनता ज़रूरी नहीं है - यही कारण है कि ये BJP न जनता की सुनती है, न उनका आदेश मानती है।
“YOU BELONG TO NOBODY BUT YOURSELF”
You have a relationship with your father, brother, husband… BUT YOU DO NOT BELONG to them!!!
THE GASP I GASPED JUST NOWW
RAHUL GANDHI THE MAN YOU ARE 🔥💛
आज के छात्र आंदोलन के दौरान संयम, संवेदनशीलता और पूरी जिम्मेदारी के साथ स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन और पुलिस के सभी अधिकारियों एवं जवानों का मैं धन्यवाद करता हूं।
मेरे प्यारे युवा साथियों,
आपने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठाई। लोकतंत्र में अपनी बात रखने का आपका अधिकार है और आपकी आवाज़ का सम्मान करना सरकार की जिम्मेदारी है।
सरकार ने आपकी बात सुनी है। हमारे सरकार के वरिष्ठ मंत्रीगण आपसे लगातार संवाद करते रहे हैं और मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि आपकी मांगों पर पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई होगी।
पिछले कुछ दिनों में आपने देखा है कि दोषी चाहे कोई भी हो, सरकार ने किसी को भी बख्शा नहीं है। हमारा स्पष्ट उद्देश्य है कि व्यवस्था में ऐसी कमियां दूर हों, जिससे भविष्य में किसी भी छात्र को परेशानी न उठानी पड़े।
हम परीक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना चाहते हैं। इस बदलाव में आपकी भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है।
हमारा प्रयास है कि झारखंड केवल समस्याओं की चर्चा न करे, बल्कि यहाँ से समाधान की एक नई मिसाल कायम करे।
मैं यह भी समझता हूं कि आपके शांतिपूर्ण आंदोलन के बीच विपक्ष के कुछ लोगों ने राजनीतिक लाभ के लिए माहौल बिगाड़ने और छात्रों को भटकाने की कोशिश की। आप सभी से अपील है कि आप ऐसे किसी भी राजनीतिक नैरेटिव के बहकावे में न आएं।
आप झारखंड का भविष्य हैं। आपकी आवाज़ को नजरअंदाज करना नहीं, उसे सुनना और आपकी समस्याओं का समाधान करना हमारी जिम्मेदारी है।
मैं अपनी बात दोहराऊंगा कि आइए, संवाद और विश्वास के साथ मिलकर इस मुद्दे का समाधान करें।
भारत की स्त्रियों को यह सुनना चाहिए, इसलिए नहीं कि उन्हें कोई महान वादा किया जा रहा है, यह जानने के लिए कि एक पॉलिटिशियन को महिलाओं के बारे में क्या और कैसे बात करनी चाहिए. भारत की स्त्री माताओं-बहनों के आगे भी बहुत कुछ हैं, एक मुकम्मल इंसान हैं, नागरिक है- उन्हें यह एहसास दिलाना और इसकी चिंता करना इस देश की तरक़्क़ी के लिए बेहद ज़रूरी है.