लंबे समय से संविधान प्रदत्त हिस्सेदारी की व्यवस्था यानी आरक्षण के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। अब इसी मुहिम को “आरक्षण में सुधार” जैसे शब्दों की आड़ में आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
कान खोलकर सुन लो—आरक्षण कोई खैरात नहीं है। यह सदियों से सामाजिक भेदभाव और वंचना झेलते समाज को संविधान द्वारा दिया गया प्रतिनिधित्व का अधिकार है।
भारत सरकार व लखनऊ दरबार में बैठे सत्ताधीशों, कान खोलकर सुन लो—आरक्षण व्यवस्था में किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आरक्षण पर हमला यानी सामाजिक न्याय पर हमला है और सामाजिक न्याय से समझौता आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) किसी भी कीमत पर नहीं करेगी।
हम यह भी देख रहे हैं कि इस पूरे माहौल को बनाने में मीडिया की बड़ी भूमिका है। हमारे हितों के विपरीत विचार रखने वाले लोगों को बार-बार बुलाकर एकतरफा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
लेकिन याद रखिए—हमारे सब्र का इतना इम्तिहान मत लीजिए। अगर हमारी आवाज को लगातार दबाने और नजरअंदाज करने की कोशिश की गई, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।
हम जानते हैं कि मेनस्ट्रीम मीडिया में हमारा पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, लेकिन हमारी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। मीडिया को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर निष्पक्षता, संतुलन और जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभानी होगी।
और आरक्षण का विरोध करने वालों को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) खुली बहस के लिए आमंत्रित करती है।
अगर आपके पास आरक्षण के खिलाफ तर्क और तथ्य हैं, तो सामने आइए। बहस हो—तर्क से, तथ्यों से और संविधान के दायरे में।
जय भीम! जय भारत! जय मंडल!
जय संविधान! जय आरक्षण!
पटना में छात्रों का डबल इंजन वाला भाजपा सरकार द्वारा बर्बर दमन शर्मनाक है!
अपने अधिकार और भविष्य की मांग को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, वाटर कैनन का प्रयोग और उन्हें खदेड़ने के लिए बुलेटप्रूफ CRPF बख्तरबंद गाड़ी (MPV) का इस्तेमाल बेहद निंदनीय है।
छात्र आंदोलन के दौरान महिला अभ्यर्थी को पुलिस द्वारा घसीटकर ले जाना भी बेहद आपत्तिजनक और शर्मनाक है।
युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लाठियों और दमन से छात्रों की आवाज नहीं दबाई जा सकती।
#TRE4 #Protest #Patna #Students #StudentProtest
दिल्ली में इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक और घटना सामने आई है। ओखला विधानसभा क्षेत्र में 15 वर्षीय मासूम मिथुन नाले में गिर गया।
बताया जा रहा है कि परिवार करीब 10 घंटे तक मदद के लिए बिलखता रहा, लेकिन शासन-प्रशासन की संवेदनशीलता जैसे कहीं दिखाई ही नहीं दी। एक मां अपने बेटे को बचाने के लिए रोती-बिलखती रही, पिता की आंखों से आंसू निकलते रहे और परिवार मदद की गुहार लगाता रहा।
यह सिर्फ मिथुन की मौत नहीं है, यह हमारी व्यवस्था की संवेदनहीनता पर सवाल है।
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो, परिवार को न्याय और उचित मुआवजा मिले तथा ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं।
मिथुन को भावपूर्ण अर्धांजलि। प्रकृति शोकाकुल परिवार को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति दे।
@BhimArmyChief@ASP4Delhi_
ब्रिटिशकालीन भारत में अंग्रेजों ने जमींदारी जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से शासन किया और पहले से सामाजिक एवं राजनीतिक प्रभुत्व रखने वाले वर्गों को अपने शासन में सहयोगी बनाया। इसके परिणामस्वरूप धन, धरती और राजपाट पर कुछ विशेष वर्गों का वर्चस्व और मजबूत हुआ। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ, लेकिन आजादी के बाद भी धन, धरती और सत्ता-संसाधनों पर समाज के एक बड़े वर्ग का वर्चस्व बना रहा और भूमि तथा संसाधनों का न्यायपूर्ण बंटवारा नहीं हो सका।
इसी असमानता को कम करने के उद्देश्य से स्वतंत्र भारत में भूमि सुधार लागू किए गए। लेकिन प्रभावी क्रियान्वयन की कमी, कानूनी एवं प्रशासनिक अड़चनों और प्रभावशाली भू-स्वामी वर्गों के प्रतिरोध के कारण भूमि सुधार अपने व्यापक उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल नहीं कर सके। भूमि और संसाधनों की असमानता से पैदा हुआ असंतोष आगे चलकर कई उग्र सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों की पृष्ठभूमि बना, जिनमें नक्सल आंदोलन भी शामिल था।
ऐतिहासिक रूप से सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षणिक अवसरों से वंचित समुदायों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए संविधान में आरक्षण का प्रावधान किया गया। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को संविधान लागू होने के साथ ही आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान मिला। वहीं, अन्य पिछड़ा वर्ग को केंद्र सरकार की नौकरियों और केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर 1990 के दशक में लागू हुआ।
आरक्षण का संवैधानिक आधार मुख्यतः सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन तथा पर्याप्त प्रतिनिधित्व का अभाव है। इसके बावजूद आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आर्थिक आधार पर EWS आरक्षण की व्यवस्था की गई। ऐसे में आज आवश्यकता है कि आरक्षण और प्रतिनिधित्व की पूरी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आंकड़ों के आधार पर मूल्यांकन किया जाए।
हम लंबे समय से सामाजिक-आर्थिक एवं जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि देश की धन-संपत्ति, जमीन, शिक्षा, रोजगार, प्रशासन, राजनीति, मीडिया और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों में विभिन्न सामाजिक समूहों की कितनी हिस्सेदारी है। जब तक विश्वसनीय और व्यापक आंकड़े सामने नहीं आएंगे, तब तक सामाजिक न्याय और समान हिस्सेदारी की वास्तविक तस्वीर पूरी तरह सामने नहीं आ सकती।
हमारी मांग है कि जिसकी जितनी संख्या है, उसकी उतनी भागीदारी सुनिश्चित की जाए। महिलाओं को उनकी जनसंख्या के अनुपात में स्थानीय निकायों, संसद और विधानमंडलों में प्रभावी प्रतिनिधित्व मिले। OBC समाज को लोकसभा और विधानसभाओं में उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिले। SC, ST और OBC के लिए राज्यसभा तथा विधान परिषदों में भी उचित और प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
उच्च न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व, पदोन्नति में आरक्षण, सरकारी योजनाओं और बजट में आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी, सरकारी ठेकों और सरकारी खरीद में आरक्षण तथा निजी क्षेत्र में प्रतिनिधित्व की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि सामाजिक न्याय केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित न रहे।
निजी क्षेत्र में हमारे समाज के लोग केवल मजदूरी करने के लिए नहीं हैं। उन्हें प्रबंधन, निर्णय लेने वाली संस्थाओं और नेतृत्व के पदों पर भी उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। आर्थिक विकास में भागीदारी तभी सार्थक होगी, जब विकास के साथ निर्णय लेने की शक्ति में भी समान भागीदारी सुनिश्चित हो।
मीडिया लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसलिए मीडिया संस्थानों में भी ऐतिहासिक रूप से वंचित समाजों की पर्याप्त भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि समाज के हर वर्ग की आवाज लोकतांत्रिक विमर्श में प्रभावी रूप से सामने आ सके।
यह लड़ाई किसी के अधिकार छीनने की नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से वंचित समाजों को उनके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के अनुरूप न्यायपूर्ण हिस्सेदारी दिलाने की लड़ाई है। हमारा लक्ष्य है-- धन, धरती, सत्ता और देश के महत्वपूर्ण संस्थानों में न्यायपूर्ण हिस्सेदारी तथा वास्तविक सामाजिक न्याय।
अर्जक संघ के संस्थापक एवं मानवतावादी वैचारिकी के मजबूत स्तंभ, राजनीति के कबीर कहे जाने वाले महामना रामस्वरूप वर्मा जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि।
#जय अर्जक_जय भीम
आज डांगावास के पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए जयपुर में।
राजस्थान के नागौर के डांगावास हत्याकांड में वर्ष 2015 की इस जघन्य घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
11 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद 5 अगस्त 2026 को आए फैसले ने पीड़ित परिवारों को बेहद आहत किया है। उनका सवाल है कि यदि सभी 40 आरोपी बरी हो गए, तो उनके 5 परिजनों सहित कुल 6 लोगों की हत्या आखिर किसने की?
वर्ष 2015 की इस जघन्य घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इतने वर्षों बाद भी पीड़ित परिवारों को न्याय न मिलना बेहद गंभीर और चिंताजनक है।
पुलिस की यह कार्रवाई हमारी आवाज़ नहीं रोक सकती। हम डांगावास के पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाकर रहेंगे। न्याय की यह लड़ाई आख़िरी दम तक जारी रहेगी।
मेरठ में मोहित जाटव और दिग्विजय भाटी के साथ पुलिस हिरासत में हुई बर्बरता कानून-व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल करने वाली हैं।
पीड़ितों का आरोप है कि तत्कालीन SSP अविनाश पांडेय ने दोनों को अपने कार्यालय बुलाकर गालियां दीं और चैंबर बंद कर उनके साथ मारपीट की। इसके बाद SOG के हवाले कर उन्हें पैर बांधकर उल्टा लटकाने और फट्टों-लाठियों से बेरहमी से पीटने का भी आरोप है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, यह पुलिसिंग नहीं, बल्कि वर्दी की ताकत का खुला दुरुपयोग और हिरासत में यातना है। किसी भी अधिकारी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है।
@UPGovt तत्काल CCTV फुटेज सुरक्षित कराए, पीड़ितों का स्वतंत्र मेडिकल परीक्षण कराए और आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो।
वर्दी कानून से बड़ी नहीं है और आम नागरिकों की आवाज को पुलिसिया ताकत के बल पर दबाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
@India_NHRC
उत्तर प्रदेश के जिला चंदौली के नौगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत विशेषरपुर नई बस्ती भरदुआ में लगभग 50 वर्षों से निवास कर रहे अनुसूचित जनजाति के गोंड/मांझी समुदाय के लोगों के साथ हुई कार्रवाई बेहद गंभीर और चिंताजनक है।
पीड़ितों का कहना है कि 19 अगस्त को, स्थानीय भाजपा नेता के दबाव में प्रशासन ने उनकी खेती की भूमि पर खड़ी मिर्च व अन्य फसलों को ट्रैक्टर से नष्ट कर दिया, धान की रोपाई बर्बाद कर दी और खेतों में बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए। उनका आरोप है कि उक्त नेता के दबाव में इन परिवारों को पहले भी कई बार परेशान किया गया है।
पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया। महिलाओं को बाल पकड़कर घसीटा गया। ग्रामीणों पर मुकदमे दर्ज कर कुछ लोगों को जेल भेजा गया है। लगातार पुलिस दबिश से गांव में भय का माहौल है और कई परिवार घर छोड़ने को मजबूर बताए जा रहे हैं।
गांव का मुख्य रास्ता भी खराब कर दिया गया, जिससे लोगों को पानी भरी मेड़ से आवागमन करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, आदिवासी परिवारों और उनकी जमीन व फसल पर इस तरह की कार्रवाई वनाधिकार अधिनियम, 2006 का गंभीर उल्लंघन है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
@UPGovt तत्काल पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराए, महिलाओं और ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार के दोषियों पर कार्रवाई करे, नष्ट फसलों का उचित मुआवजा दे, मुकदमों की समीक्षा करे और वनाधिकार अधिनियम के तहत आदिवासी परिवारों के अधिकार सुनिश्चित करे।
@CMOfficeUP@ncsthq@India_NHRC@AntarsinghArya
17 दिन में चीनी 19 रुपये महंगी होकर फुटकर बाजार में 65 रुपये और थोक में 60 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। चाय दुकानदार, मिठाई कारोबारी और सबसे बढ़कर आम उपभोक्ता इसकी मार झेल रहे हैं।
11 अगस्त को मैंने सवाल उठाया था कि E20 नीति के तहत गन्ने और मक्के जैसी फसलों को ‘खाद्य से ईंधन’ की दिशा में मोड़ने का असर देश की खाद्य सुरक्षा और चीनी की कीमतों पर क्या पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, अब करीब 30 लाख टन चीनी के बराबर उत्पादन एथेनॉल की ओर डायवर्ट होने की बात सामने आ रही है।
कच्चे तेल के आयात और विदेशी मुद्रा के दबाव को कम करने के लिए E20 नीति लाई गई है, लेकिन भारत आयातित कच्चे तेल का उपभोग केवल घरेलू ऊर्जा जरूरतों के लिए नहीं करता, बल्कि उसे रिफाइन करके पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी करता है।कुल आयातित कच्चे तेल का लगभग एक-चौथाई हिस्सा रिफाइनिंग के बाद पेट्रोलियम उत्पादों के रूप में निर्यात किया जाता है। रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है और इससे बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा अर्जित होती है।
ऐसे में सवाल है, जब भारत आयातित कच्चे तेल को रिफाइन करके पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात कर विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है, तो E20 के लक्ष्य पूरे करने के लिए गन्ने और मक्के जैसी खाद्य फसलों को एथेनॉल की ओर मोड़ने की कीमत देश की खाद्य सुरक्षा और आम उपभोक्ता को क्यों चुकानी पड़े? इसका असर अब चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर दिख रहा है और हालात चीनी आयात करने की नौबत तक पहुंच गए हैं।
(संबंधित मंत्री से न पूछकर सरकार से इसलिए पूछ रहा हूं कि आपके यहां पता ही कौन-सा मंत्री जवाब देगा!)
सरकार E20 नीति की व्यापक समीक्षा करे और चीनी के बढ़ते दामों पर तत्काल प्रभावी कदम उठाए।
“E20 का जुनून, जनता मजबूर!”
@mygovindia@narendramodi@nsitharaman@nitin_gadkari@HardeepSPuri@ChouhanShivraj
उत्तर प्रदेश के जिला कन्नौज के तिर्वा स्थित राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्रवृत्ति न मिलने से नाराज छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन सरकार की छात्र कल्याण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। छात्रों का कहना है कि छात्रवृत्ति नहीं मिलने के कारण उन्हें फीस, किताबों और अन्य शैक्षणिक खर्चों को पूरा करने में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
छात्रवृत्ति कोई एहसान नहीं, बल्कि जरूरतमंद विद्यार्थियों की शिक्षा जारी रखने का जरूरी सहारा है। यदि छात्रों को अपनी पढ़ाई के लिए मिलने वाली छात्रवृत्ति के लिए भी प्रदर्शन को मजबूर होना पड़े, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता है।
हम @UPGovt से मांग करते हैं कि छात्रों की लंबित छात्रवृत्ति का तत्काल भुगतान कराया जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए, इसकी ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
“छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा! ”
@CMOfficeUP@myogiadityanath@UPSamajKalyan@asim_arun
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के रैपुरा गांव के पास कीचड़ और जलभराव से बदहाल सड़क को लेकर बरसते पानी के बीच हाइवे पर प्रदर्शन कर रहे स्कूली छात्र-छात्राओं (Zen-Alpha) के साथ पुलिस द्वारा बदसलूकी का मामला बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है।
रैपुरा, मझलवारा, बनियातला और महानपुरा को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग गड्ढों और जलभराव में तब्दील है। आए दिन ई-रिक्शा और ऑटो पलटने से स्कूली बच्चे चोटिल हो रहे हैं। मजबूर होकर बच्चे अपनी जायज़ मांग लेकर हाइवे पर उतरे, लेकिन उनकी समस्या सुनने के बजाय उन्हें हड़काया गया और उनके साथ बदसलूकी की गई।
बच्चे सड़क मांग रहे हैं, बदसलूकी नहीं।
बच्चों की आवाज बुलंद रहे।
उत्तर प्रदेश के जनपद अंबेडकर नगर में वरिष्ठ IPS अधिकारी आशुतोष मिश्रा जी की 94 वर्षीय मां श्रद्धेया इंद्रावती जी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु के मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली और मीडिया की भूमिका दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिवार ने हत्या की आशंका जताई और जेवर गायब होने की बात कही। पुलिस ने मृत्यु को सामान्य बताते हुए जेवर बरामद होने का दावा किया, लेकिन आशुतोष मिश्रा जी ने कहा कि न मृत्यु का कारण स्पष्ट हुआ है और न जेवर परिवार को मिले हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि पुलिस के अनुसार जेवर बरामद हो चुके हैं, तो पुलिस उनके घर पर रेड डालकर उसे बरामद कर ले और सामने रखे कि आखिर जेवर हैं कहां।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक वरिष्ठ IPS अधिकारी ही अपनी मां की मृत्यु के मामले में पुलिस के दावों पर सवाल उठाने को मजबूर है, तो उस आम आदमी की कौन सुनेगा, जिसके पास न पद, न पहुंच और न प्रभाव है?
बिना परिवार का पक्ष जाने और बिना ठोस प्रमाण के घटना को ही गलत बताने वाली मीडिया रिपोर्टिंग भी बेहद चिंताजनक है।
यह सिर्फ एक परिवार का सवाल नहीं, बल्कि हर उस आम नागरिक का सवाल है जो न्याय के लिए व्यवस्था पर भरोसा करता है।
अगर एक IPS अधिकारी को भी न्याय के लिए आवाज उठानी पड़े, तो आम आदमी आखिर न्याय के लिए किस दरवाजे पर दस्तक दे?
अजमेर के कडैल स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य पर छात्रा द्वारा वीडियो में बताए गए अशोभनीय व्यवहार के आरोप पर कुछ कहने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। इससे पहले भी छात्राओं और अध्यापिकाओं को आपत्तिजनक शब्द कहने और अश्लील तस्वीरें दिखाने जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं।
एक तरफ राजस्थान सरकार खुद को “In Loco Parentis” यानी अभिभावक के समान दायित्व निभाने वाली बताकर बच्चों की सुरक्षा, निजता और गरिमा के नाम पर स्कूलों में बिना अनुमति फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर रोक लगाती है, वहीं दूसरी तरफ विद्यालयों के भीतर ही छात्राओं की सुरक्षा और गरिमा से जुड़े ऐसे गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।
कैमरे और वीडियो पर रोक लगाने से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी। इसके लिए स्कूलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और ऐसा सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करना होगा, जहां हर बच्चा सम्मान और सुरक्षा के साथ शिक्षा प्राप्त कर सके।
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी, यदि आपके संरक्षण में पढ़ने वाली बेटियां विद्यालय में ही असुरक्षित महसूस करेंगी, तो अभिभावक के समान दायित्व निभाने वाली सरकार की इस जिम्मेदारी का आखिर क्या अर्थ रह जाता है?
@RajGovOfficial तत्काल दोषी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे।
बहिन-बेटियों के सम्मान और सुरक्षा से किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जनपद रामपुर, तहसील स्वार के रुस्तम नगर में स्कूली बच्चों द्वारा गोगा नदी पार कर स्कूल जाने का यह दृश्य भाजपा सरकार के विकास के दावों की जमीनी हकीकत दिखा रहा है। इसके अलावा रामपुर जिले में ही घूघा और पीलाखार नदी पर भी पुलों के अभाव में ग्रामीण लकड़ी और अन्य साधनों से बनाए गए अस्थायी पुलों के सहारे जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं।
बारिश आते ही ये अस्थायी पुल बह जाते हैं और कई गांवों का संपर्क टूट जाता है। किसान खेतों तक नहीं पहुंच पाते, बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और स्थानीय कारोबार भी प्रभावित होता है।
विकास के नाम पर भाजपा ने सिर्फ अपने इंजनों की संख्या बढ़ाई है।
“इंजन भरपूर, जनता मजबूर!”
जिला बाराबंकी के हैदरगढ़ के सुबेहा थाना क्षेत्र के पूरे गुमान मजरे कोलवा गांव में लंबे समय से चले आ रहे जमीनी विवाद का फैसला पीड़ित पक्ष के पक्ष में आने के बाद उन्होंने अपनी जमीन पर फसल बोई थी। इसके बावजूद आरोपी पक्ष जुताई करने के लिए पहुंचा और विरोध करने पर पहले से घात लगाए लोगों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
पीड़ितों का कहना है कि इस दौरान महिलाओं समेत कई लोगों के ऊपर ट्रैक्टर चढ़ा दिया गया, जिसमें 70 वर्षीय शमशेर अली की मौत हो गई। वहीं, जब दलित समाज के लोग बीच-बचाव के लिए पहुंचे तो उन्हें भी बेरहमी से पीटा गया। इस हमले में कई लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि 16 अगस्त की इस घटना में लगभग 30 आरोपियों में से अभी तक केवल 5 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। बाकी आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। यह पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की जिला टीम मौके-ए-वारदात से ही पीड़ित पक्ष के साथ खड़ी है। पीड़ितों को न्याय दिलाने और सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर कल धरना भी दिया गया।
@UPGovt से हमारी मांग है कि सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए, मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो तथा पीड़ित परिवार और घायलों को उचित न्याय एवं सहायता दी जाए।
हमारी गहरी संवेदनाएँ मृतक शमशेर अली जी के शोकाकुल परिवार के साथ हैं। प्रकृति परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। साथ ही, हम सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।
देश की एकता, संविधान और सामाजिक न्याय के मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से आज विधानसभा झबरेड़ा, जिला हरिद्वार में तिरंगा यात्रा निकाली गई।
तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर देश की एकता, संविधान और सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इस यात्रा को सफल बनाने के लिए उपस्थित सभी साथियों, कार्यकर्ताओं और सम्मानित क्षेत्रवासियों का हृदय से आभार।
तिरंगे की शान और सामाजिक न्याय के सम्मान के लिए हमारा संघर्ष और संकल्प निरंतर जारी रहेगा।
जय भीम! जय भारत!
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के तलेन थाना क्षेत्र के इकलेरा में जमीन विवाद के दौरान पुलिसकर्मी द्वारा दलित परिवार के लोगों पर गोली चलाने की घटना में तीन दलित घायल हुए, जबकि एक दलित युवक की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। यह घटना अत्यंत दुखद, निंदनीय और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली है।
सबसे पीड़ादायक बात यह है कि जिस युवक की गोली लगने से मौत हुई, उसका इस विवाद से कोई लेना-देना तक नहीं था। वह तो वहां से गुजर रहा था, लेकिन पुलिसकर्मी की गोली ने उसकी जिंदगी छीन ली।
पीड़ित परिवार ने आरोपी द्वारा जमीन पर कब्जे और दबाव बनाए जाने की शिकायत पूर्व में पुलिस को दी थी, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई। यदि शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाती, तो शायद यह गोलीकांड और एक निर्दोष युवक की मृत्यु नहीं होती।
यह भी आरोप सामने आए हैं कि आरोपी पुलिसकर्मी पर पूर्व में भी दबाव बनाकर जमीनों पर कब्जा करने के आरोप लगे हैं। इन सभी शिकायतों और आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी, जिस पुलिस पर नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, अगर उसी से जुड़ा कोई व्यक्ति गोलीकांड में आरोपी बनता है और एक निर्दोष की जान चली जाती है, तो यह पूरी कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न है।
@MP_MyGov घटना के वीडियो, पूर्व में की गई शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई सहित पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। आरोपी पुलिसकर्मी को उसके पद या वर्दी का कोई संरक्षण न मिले। दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून के सामने जवाबदेह होना चाहिए।
भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर है। सरकार हमारी मांगों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल न्याय सुनिश्चित करे।
मृतक के परिवार को उचित मुआवजा मिले तथा घायलों के इलाज की पूरी जिम्मेदारी सरकार उठाए।
हमारी गहरी संवेदनाएँ मृतक युवक के परिवार के साथ हैं। इस असीम दुःख की घड़ी में प्रकृति उन्हें यह पीड़ा सहने की शक्ति प्रदान करे। साथ ही, घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।