दधाना करपद्माभ्याम्, अक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
आप सभी को माँ भगवती के द्वितीय स्वरुप माँ ब्रह्मचारिणी पूजन की हार्दिक शुभकामनाएँ।
ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी मां ब्रह्मचारिणी सभी भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करें ।
सुप्रभात!
मेरे कविता संग्रह ‘‘परीक्षा लेती जिंदगी’’ से एक कविता ‘‘उभरती चेतना’’
शक्ति हो जब लुप्त सारी,
स्वजन का दल-बल बढ़ा हो।
रक्त से लथपथ बना जो,
पीत तन पर ही चढ़ा हो।
वीरता कायर बनी हो,
श्रेष्ठता भी लुप्त सारी।
निज पराए बन गए हो,
दुश्मनी या भाईचारी।
न्याय हो यदि आँख मूँदे,
और गूँगा सत्यवादी।
राष्ट्र बन हो आत्मविस्मृत,
चलता रहा नित-नृत्यवादी।
तब उभरती चेतना,
जो विकट संघर्ष करती।
तोड़ती अन्याय को ही,
उत्कर्ष में है हर्ष भरती।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने आज चेन्नई में जयगोपाल गरोदिया हिंदू विद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह में सहभागिता की।
इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्र निर्माण में शिक्षा और संस्कारों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। साथ ही, वैश्विक चुनौतियों के समाधान खोजने में भारत के युवाओं की क्षमता और सामर्थ्य पर विश्वास व्यक्त किया।
Inauguration of the Poonamallee-Vadapalani stretch of Chennai Metro Phase-2 ensures:
Faster, more convenient daily travel for commuters.
Better connectivity between Chennai’s fast-growing western suburbs and the city centre.
Unique 3.7-km double-decker corridor.
Also travelled on the Metro and interacted with upcoming StartUps, whose energy was as usual exceptional.
சென்னை மெட்ரோ ரயில் இரண்டாம் கட்டத்தில் துவங்கப்பட்ட பூந்தமல்லி -வடபழனி வழித்தடம், பயணிகளின் தினசரி பயணத்தை எளிதாக்கியுள்ளதோடு விரைவுப்படுத்தியும் உள்ளது.
இந்த வழித்தடம் அதிவேக வளர்ச்சி பெற்று வரும் சென்னையின் மேற்கு புறநகர் பகுதியோடு நகரின் மத்திய பகுதியை இணைக்க உதவுகிறது.
3.7 கி.மீ தொலைவிலான ஈரடுக்கு பாதை இவ்வழித்தடத்தின் சிறப்பம்சமாகும்.
வளர்ந்துவரும் புத்தொழில் நிறுவன பிரதிநிதிகளாடு மெட்ரோ ரயில் பயணத்தில் உரையாடினேன். அவர்களின் உற்சாகம் எப்போதும் போல அளவிடற்கரியதாய் இருந்தது.
Golden Jubilee celebrations of Jaigopal Garodia Hindu Vidyalaya in Chennai... The energy of our youth inspires great faith in India's future. https://t.co/FoyiqVrShY
उनकी अमर पंक्तियाँ “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल” आज भी हमें अपनी मातृभाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रतिष्ठा के प्रति अपने दायित्व का स्मरण कराती हैं। उनके पैतृक आवास की यह यात्रा मेरे लिए साहित्य के प्रति श्रद्धा, इतिहास के प्रति संवेदनशीलता और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से आत्मीय जुड़ाव का अविस्मरणीय अनुभव रही।
हिंदी नवजागरण के अग्रदूत, युगद्रष्टा साहित्यकार एवं राष्ट्रचेतना के अमर संवाहक भारतेंदु हरिश्चन्द्र जी को कोटि-कोटि नमन। उनकी साहित्य-साधना का प्रकाश आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और अपने राष्ट्र के गौरव के प्रति सदैव जागरूक करता रहे।
“लै ब्यौड़ा ठाड़े भए, श्री अनिरुद्ध सुजान।
बाणासुर की सैन्य को, हनन लगे भगवान्॥”
— भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
कुछ यात्राएँ स्थानों तक पहुँचकर पूर्ण नहीं होतीं, वे हमें अपने अतीत, अपनी संस्कृति और अपनी सभ्यतागत चेतना की गहराइयों तक ले जाती हैं। काशी में हिंदी साहित्य के युगप्रवर्तक, भारतेंदु हरिश्चन्द्र जी के पैतृक आवास पर पहुँचना मेरे लिए ऐसा ही एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।
उस ऐतिहासिक भवन में प्रवेश करते ही लगा, मानो समय की परतें खुल रही हों और हिंदी नवजागरण का एक गौरवशाली अध्याय अपनी संपूर्ण जीवंतता के साथ सम्मुख उपस्थित हो रहा हो। जिस व्यक्तित्व ने अपनी लेखनी से हिंदी भाषा को नवीन चेतना, सामाजिक दृष्टि और राष्ट्रीय स्वाभिमान का स्वर प्रदान किया, उसके जीवन से जुड़ी स्मृतियों के बीच उपस्थित होना अत्यंत भावुक कर देने वाला क्षण था।
आवास में सुरक्षित प्राचीन तमझाम, डोली और ढोलियों से लेकर भारतेंदु जी तथा उनके पूर्वजों के चित्रों तक, प्रत्येक वस्तु अपने समय की कहानी कहती प्रतीत हुई। उनकी हस्तलिखित पांडुलिपियों को देखना विशेष रूप से हृदयस्पर्शी था। वे पृष्ठ केवल अक्षरों का संकलन नहीं, अपितु उस विलक्षण प्रतिभा की सृजन-साधना के साक्ष्य हैं, जिसने हिंदी साहित्य को नई दिशा प्रदान की।
उनकी ‘हरिद्वार यात्रा’ में वहाँ के पंडों को सरल और संतुष्ट बताने वाला उल्लेख उनकी सूक्ष्म दृष्टि, सहज संवेदना और जीवन को निकट से देखने वाली साहित्यिक प्रतिभा का परिचय देता है।
उनका पेन-स्टैंड, इत्रदान, टोपी और अन्य व्यक्तिगत वस्तुएँ देखते हुए सहज ही अनुभव हुआ कि किसी महान साहित्यकार की विरासत उसकी पुस्तकों तक सीमित नहीं रहती; उसकी दिनचर्या से जुड़ी छोटी-छोटी वस्तुएँ भी इतिहास की अमूल्य निधि बन जाती हैं। भवन में स्थित सदियों पुराना कुआँ, पारंपरिक स्थापत्य की कलात्मकता और दीवारों पर अंकित समय की छाप ने इस अनुभूति को और गहरा कर दिया।
वहाँ की प्रत्येक ईंट, प्रत्येक दीवार और प्रत्येक संरक्षित धरोहर मानो भारतीय संस्कृति, काशी की साहित्यिक परंपरा और हिंदी के गौरवशाली अतीत का मौन आख्यान सुना रही थी। भारतेंदु हरिश्चन्द्र जी की साहित्य-साधना इस सत्य को प्रतिष्ठित करती है कि भाषा किसी राष्ट्र की अभिव्यक्ति मात्र नहीं, अपितु उसकी आत्मा, संस्कृति और सभ्यतागत अस्मिता की आधारशिला होती है।
इन ऐतिहासिक धरोहरों के मध्य भारतेंदु जी के व्यक्तित्व का एक अनूठा पक्ष उनकी उदारता और धन के प्रति अनासक्ति में भी दिखाई देता है। कहा जाता है कि जब काशी नरेश ने उनकी अत्यधिक धन-व्यय की प्रवृत्ति पर प्रश्न उठाया, तो उन्होंने उत्तर दिया— “महाराज, यह दौलत मेरे कितने ही पुरखों को निगल गई, अब मैं इसे खा जाऊँगा।” उनका यह कथन उनकी स्वतंत्र जीवन-दृष्टि का परिचायक है। साहित्य, पत्रकारिता और जनकल्याण में अपनी संपत्ति व्यय करने वाले भारतेंदु जी ने सिद्ध किया कि मनुष्य की वास्तविक महानता उसकी संपदा में नहीं, बल्कि उसकी साधना, उदारता और समाज के प्रति समर्पण में निहित होती है।
राष्ट्र सेवा हेतु स्वयं को समर्पित करने वाले युगदृष्टा, चिंतक, राष्ट्र ऋषि श्रद्धेय नानाजी देशमुख जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
राष्ट्र्रऋषि नानाजी देशमुख जी का सारा जीवन ग्रामोदय से राष्ट्रोदय के मंत्र को चरितार्थ करने व गरीबों-पिछड़ों के उत्थान के प्रति समर्पित रहा।उनका अद्भुत संगठन कौशल व राष्ट्रप्रेम सभी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणापुंज है।
वन्दे वाञ्छितलाभाय, चन्द्रार्धकृतशेखरम्।
सिंहारूढ़ा चंद्रघंटा, यशस्विनीम्॥
आज शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिवस पर माँ दुर्गा के शैलपुत्री रूप की आराधना होती है।
विद्या, साहस और तपस्या की अधिष्ठात्री माँ शैलपुत्री समस्त भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करें और जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्रदान करें।
जय माता दी!
वन्दे वाञ्छितलाभाय, चंद्रार्थकृतशेखराम्।
वृषारूढ़ां शूलधरां, शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
शक्ति संचय और आत्मचेतना की जागृति का महापर्व शारदीय नवरात्रि सम्पूर्ण मानवता को धर्म, साहस और सत्य की राह पर अग्रसर होने का आह्वान करता है।
आदिशक्ति माँ दुर्गा सबकी मनोकामनाएँ पूर्ण करें तथा जीवन को सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य से परिपूर्ण करें।
जय माता दी!
सुप्रभात!
मेरे कविता संग्रह ‘‘दर्पण अन्तर्मन का’’ से एक कविता ‘‘समय से पहले’’
जिन्हें भय नहीं
न प्रेम का, न समाज का,
न कल का, न आज का,
जिन्हें भय नहीं
किसी की गलत बात का।
न भय है
किसी गलत साथ का,
ऐसे लोग
अहंकारी हो जाते हैं,
ईश्वर
समय से पहले
उन पर कहर ढाते हैं।
जनसेवा से देश सेवा के 25 वर्ष!
जब देश की आधी आबादी को उसका हक और सम्मान मिलता है, तब राष्ट्र सच मायनों में प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi के नेतृत्व और अटूट सेवा का यह सफर इस बात का प्रमाण है कि सशक्त महिलाएं ही एक समर्थ और विकसित भारत की नींव हैं।
🔹 10 करोड़ से ज़्यादा महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन
🔹 70% मुद्रा लोन सिर्फ महिलाओं के नाम
🔹 3.5 करोड़ से ज़्यादा माताओं को सीधी आर्थिक मदद
🔹 74% पक्के घरों की मालकिन बनी नारी शक्ति
नारी सशक्तिकरण से ही संभव है एक समर्थ और सशक्त भारत!🇮🇳
#SevaSankalpAbhiyan
#SevaKiKahani
पुस्तकें विचारों को विस्तार देती हैं और शिक्षा जीवन को नई दिशा।
आज नई दिल्ली स्थित मेरे आवास पर गुजरात के ‘वांचे गुजरात’ अभियान से प्रेरित ‘परेश पंड्या वाचनवीर पुरस्कार’ के विजेता विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से आत्मीय भेंट हुई।
इस अवसर पर विद्यार्थी वर्ग के विजेता जलधि तपोधन (अहमदाबाद), रोशनी चौहान (बोटाद) एवं विक्रम सिंह (बारडोली) तथा शिक्षक वर्ग के विजेता सुरेश घोरिया (सुरेंद्रनगर), चेतन वणकर (पंचमहल), अधिनभाई अवैया (काछल) एवं खोडाजी ठाकोर (साबरकांठा–नर्मदा क्षेत्र) को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
पठन केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि चिंतन की गहराई, दृष्टि की व्यापकता और व्यक्तित्व की परिपक्वता का आधार है। ‘वांचे गुजरात’ जैसी पहलें समाज में ज्ञान-संस्कृति के विस्तार और नई पीढ़ी में अध्ययनशीलता के विकास की दिशा में सराहनीय प्रयास हैं।
पुस्तकों से समृद्ध चेतना और शिक्षकों से संस्कारित पीढ़ियाँ ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण करती हैं। सभी विजेताओं की ज्ञान-साधना निरंतर नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करे और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य में सार्थक योगदान दे।
चुनाव में लगातार हार से हताश राहुल गांधी का ‘INDI गठबंधन’ और CJP की आड़ में अरविंद केजरीवाल, विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश को अस्थिर करने की होड़ में लगे हैं।
भारत के लोकतंत्र और जनादेश का यह अपमान देश देख रहा है। भाजपा और देश की राष्ट्रभक्त जनता इन अराजकतावादी ताकतों को करारा जवाब देगी।
वाराणसी स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लोकसभा सांसद एवं लोकप्रिय भोजपुरी गायक श्री @ManojTiwariMP जी, वाराणसी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. अवधेश कुमार सिंह जी तथा भारतीय जनता पार्टी, उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री सुरेश कुमार राणा जी से आत्मीय भेंट हुई।
इस अवसर पर प्रो. आनंदवर्धन शर्मा जी (निदेशक, यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय), प्रो. विनोद कुमार मिश्रा जी (डीन, त्रिपुरा विश्वविद्यालय) तथा श्री शैलेश पांडेय जी (प्रोटोकॉल प्रभारी) भी साथ रहे।
भाजपा उत्तराखण्ड के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, सादगी की प्रतिमूर्ति, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. बची सिंह रावत (बची दा) जी की जयंती पर कोटिशः नमन।
संगठन एवं जनकल्याण हेतु दिया गया आपका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।