The forcible removal of Sonam Wangchuk from the protest site is not merely an administrative action but casts a serious shadow over the constitutional right to peaceful democratic protest.
जैसे जैसे समय आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे छात्रों के आंदोलन को भी और बल मिल रहा है - बात अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े से कहीं आगे निकल चुकी लगती है -यह मैं नहीं देश भर में छात्रों के तेज होते आंदोलन 🪧को देख कर महसूस हो रहा है - जंतर मंतर पर छात्रों को जिस तरह से बर्बरता से पीटा गया और लहू 🩸 लुहान किया गया उसके बाद अमित शाह के इस्तीफ़े तक की माँग की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है, छात्रों को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन की आग 🔥 प्रधानमंत्री की कुर्सी तक भी पहुँच जाए तो बड़ी बात नहीं है - फिर सिर्फ़ प्रधान ही नहीं प्रधानमंत्री के इस्तीफ़े के बाद ही #GenZ मानेगा 🇮🇳👊