“सक्रिय भागीदारी से राजनीति को नियंत्रित करें वरना राजनीति आपको नियंत्रित करती रहेगी” - पुष्पम प्रिया चौधरी
प्लुरल्स पार्टी का सदस्य बनना पॉजिटिव पॉलिटिक्स की दिशा में पहला कदम है।
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जो समझदार हैं उन्हें पता है कि कौन उनके बच्चों को वर्ल्ड क्लास शिक्षा दे सकता है। जिसने स्वयं वर्ल्ड क्लास शिक्षा प्राप्त की हो सिर्फ वही वर्ल्ड क्लास एजुकेशन पॉलिसी लागू कर सकेगा। बाकी तो यह देश अनेक बहुरूपियों से जुमले सुन-सुन कर थक चुका है। #ChooseProgress
अब नीतीश जी ने भी अगले पाँच साल में एक करोड़ नौकरी देने की बात कही है। हम विकास के मापदंड को यूँ ही बड़ा बनाते रहेंगे जो 2020 से हमने लगातार किया है। @NitishKumar
“आधी आबादी के हित की बात सिर्फ दिखावा है। ये लोग चाहे राजनीति हो या मीडिया, महिलाओं को सिर्फ दासी के रूप में स्वीकार करते हैं सर्वोच्च लीडर के रूप में नहीं। मैं अभी भी बिहार में किसी दल की एकमात्र महिला अध्यक्ष हूँ।” - @pushpampc13
हिन्दी बेहतरीन संपर्क भाषा है पर वह राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई जैसा गांधी चाहते थे। सरकारों और राजभाषा विभाग के नक्कारेपन और संस्कृतनिष्ठ-तत्सममुखी ज़िद ने शानदार भाषा को बर्बाद कर दिया। न ही इसने क्षेत्रीय भाषाओं का सम्मान किया, न उनके शब्दों को समाहित किया और न ही यह विज्ञान-तकनीक की भाषा बन सकी। अब यह बॉलीवुड, मुशायरे, सरकारी घोषणा व साइनेज की भाषा है।
आज जनहित याचिका पर सुनवाई का दिन था। सरकारी सेवक की हत्या के मामले में अपराधी की रिहाई संबंधी संशोधन पर माननीय पटना उच्च न्यायालय ने केस एडमिट करते हुए सरकार को आदेश दिया कि एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करें। सुनवाई की गंभीरता से सिद्ध हुआ कि बिहार में न्याय है। सत्यमेव जयते।
लालू-नीतीश राजनीतिक लाभ लेने के चक्कर में हमेशा बिना जाने-समझे निर्णय लेते हैं। पहले शराबबंदी और अब जाति जनगणना। जब क़ानूनी पक्ष समझा ही नहीं गया था तो चुनाव से पहले गणना कराने की हड़बड़ी क्यों थी? जातियों को गिनना ही था तो 30 साल से क्या कर रहे थे? @NitishKumar@laluprasadrjd
Shayad , Sir ne isi liye inko chuna hai. Aur ye sir ne sabit kr diya hai ki Ptrakar bhale hi Jaatibaad ka samarthan krta ho , par Neta jab tak chahe nhi Jaantibaad nhi panap sakta hai.
@pluralsbharat@sumananupam13 आप लोगों को कोई और पत्रकार नहीं मिला जो इस जातिवादी पत्रकार को इंटरव्यू दे रहे हैं और वो वीडियो भी जनता को पेश कर रहे हैं।
ये ऐसे पत्रकार हैं की ट्विटर ने इनका दो दो अकाउंट हटा दिया, किस हद तक कानून के खिलाफ जाते हैं ये इससे ही समझा जा सकता है।
नीतीश कुमार जब कुतर्क करते हैं तो उनकी आदत है कि वे नर्वस होकर हँसते हैं और उनके अग़ल-बग़ल के लोग साथ देते हैं। मगर स्वर्गीय जी. कृष्णैया साहब की हत्या हँसने वाला मसला नहीं है।
अब कुतर्क का जवाब -
1. कानूनी जवाब - जब सरकारी कर्मचारी और आम आदमी की हत्या में अंतर नहीं है और सभी हत्याएँ बराबर हैं तो फिर जेल मैनुअल की धारा 481 की क्या प्रासंगिकता है? डकैती और तस्करी के दौरान हत्या ज्यादा संगीन कैसे है? तब पूरी धारा को विलोपित कीजिए। महज एक प्रावधान को हटाना tailor-made प्रयास है ताकि एक अपराधी या अपराधियों के समूह को लाभ दिया जा सके।
2. राजनीतिक जवाब - केंद्र के ऐसे अनेक प्रावधान और गाइडलाइन हैं जो राज्यों पर बाध्यकारी नहीं। और आप हर मामले में तो केंद्र और अन्य राज्यों का अनुकरण करते नहीं। उल्टे आप कहते हैं कि हमारे मॉडल की नक़ल केंद्र सरकार करे। जैसे - जातीय जनगणना, शराबबंदी इत्यादि। अच्छा है कि आप कर रहे हैं पर ये तो केंद्र की गाइडलाइन नहीं है। स्पष्ट है कि यहाँ भी आप अपने कुकृत्य को छिपाने के लिए केंद्र व अन्य राज्यों का दस्तावेज ढूँढ कर ला रहे हैं।
3. व्यक्तिगत जवाब - एक आदमी के पीछे पड़े हैं??? क्या लोग महात्मा गाँधी के पीछे पड़े हैं? क्या गाँधीजी सत्याग्रह के बाद जेल से रिहा किए गए हैं? अगरचे इस पूरे कुतर्क के दौरान आपके मुँह से अफ़सोस का एक शब्द तक उस निर्दोष IAS अधिकारी या उनके परिवार के लिए नहीं निकला। और ऊपर से आप और आपके मंत्री-संतरी ठें-ठें कर रहे हैं।
विनाश काले विपरीत बुद्धि! @NitishKumar
बिहार में सरकारी सेवक की हत्या के मामले में सज़ायाफ्ता अपराधी को जेल से रिहाई में रियायत देने वाले ख़तरनाक संशोधन को चुनौती देते हुए मैंने ‘जनहित याचिका’ माननीय उच्च न्यायालय में कल दायर कर दी है। मुझे उम्मीद है कि इंसाफ़ होगा और क़ानून का राज स्थापित होगा। सत्यमेव जयते।
नीतीश कुमार फिर दर-दर भटक रहे हैं और बिहार को तो भटका चुके हैं। बिहार को अगर किसी एक चीज ने पिछले 10 साल में सबसे अधिक नुक़सान पहुँचाया है तो वह है उनकी पीएम बनने की महत्वाकांक्षा। 2005 में आगे बढ़ चुके बिहार ने आपके इस चाह की भारी क़ीमत चुकाई है। अब तो मोह त्यागिए! @NitishKumar
बिहार को किसी राज्य के मॉडल की ज़रूरत नहीं है। बुद्ध के जमाने से हम ज्ञान देने वाले रहे, लेने वाले नहीं। यहाँ कुशासन से झगड़ा हमारा आंतरिक मामला है। बाकियों में दम न हो तो न सही पर अपने झगड़े से हम सबको साथ लेकर अपने मॉडल से लड़ सकते हैं, बाहरी अपना घर सँभाले। #मैं_बिहारी_हूँ
क्या इस देश के पदाधिकारियों को इस अन्याय पर विरोध दर्ज नहीं करना चाहिए? क्या स्वर्गीय जी. कृष्णैया के लिए इतना भी नहीं करेंगे? या एक IAS की जान इतनी सस्ती है कि कोई ले ले और उसे रियायत मिल जाए? यह मनोबल तोड़ने वाला ही नहीं बल्कि ग़लत है। और जो ग़लत है सो ग़लत है। @IASassociation
युवा दलित IAS अधिकारी। अत्यंत गरीब परिवार से। बेहद ईमानदार। किसी की मुफ़्त चाय भी न जानते थे। 5 दिसम्बर 1994 को जी. कृष्णैया सरकारी कार से खींच पीट-पीट कर मार दिये गए। अब उनकी आत्मा को भी लालू-नीतीश ने मार डाला है। हम सब बिहारी उनके परिवार के गुनहगार हैं। ईश्वर हम पर रहम न करे।
डॉ अम्बेडकर का सच्चा सम्मान करना है तो उनके जैसा बनना होगा, उनके जैसी सोच-योग्यता चाहिए होगी, कड़े परिश्रम से पढ़ाई करनी होगी। मेरे लिए डॉ अम्बेडकर को श्रद्धांजलि का मतलब है समाज से जाति-व्यवस्था का उन्मूलन, आर्थिक बराबरी और राजनीति से अयोग्य लोगों को बाहर निकालना।
सीएम नीतीश कुमार विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए तीन दिवसीय दौरे पर दिल्ली में थे। यहां उन्होंने राहुल गांधी, खरगे सहित दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से भी मुलाकात की। अब सीएम नीतीश पर 'द प्लूरल्स पार्टी' की अध्यक्ष पुष्पम प्रिया चौधरी ने हमला बोला है। देखिए ये रिपोर्ट।
#PushpamPriyaChaudhary #NitishKumar #Bihar | @pushpampc13