"मिल भी जाते हैं तो कतरा के निकल जाते हैं,
हैं मौसम की तरह लोग... बदल जाते हैं,
हम अभी तक हैं गिरफ्तार-ए-मोहब्बत यारों,
ठोकरें खा के सुना था कि संभल जाते हैं।"
💔💔💔
"क्या दुःख है समन्दर को बता भी नहीं सकता,
आंसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता,
तू छोड़ रहा है तो ख़ता इसमें तेरी क्या,
हर शख्स मेरा साथ निभा भी नहीं सकता...।"