आपका निर्णय सही है.ये पांच दिनों या 55 दिनों का तमाशा भाजपा द्वारा प्रायोजित है.
आप किसी भी सोशल मीडिया एक्सपर्ट से जानकारी ले लीजिए आपको जाएंगे कि इंस्टाग्राम/फेसबुक के फालोवर्स पैसा देकर किसी भी संख्या में खरीदे और बढ़ाए जा सकते हैं.इसी प्रकार से व्यूज भी बिकते हैं.
3/-का एक.
“मैं 5 दिनों के लिए भावनाओं में बह गया था. सोचा था कि देश के लोकतंत्र को बढ़चढ़ाकर आगे ले जाने के लिए कुछ नए ऊर्जावान युवा आ रहे हैं, लेकिन ये तो AC में बैठकर काम करने वाले युवा निकले !!
कोई इन पर पंखा झल रहा था, कोई पानी पिला रहा था, और प्रोटेस्ट के बीच में ही इन्हें माँ की याद आ गई. फिर प्रोटेस्ट 2 घंटे पहले खत्म करके चलते बने और कहा, “अगले हफ्ते मिलेंगे”, जैसे कोई कॉफी मीटिंग हो!
जहाँ एक तरफ NSUI के लोग अपने ऊपर डंडे और वॉटर कैनन झेल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ये लोग किसको शिक्षा मंत्री बनाएँगे और किसको प्रधानमंत्री, उसके सपने भी देख रहे हैं.
ये संघर्ष करने वाले लोग नहीं हैं, ये आलसी लोग हैं. और इसलिए मैंने “कॉकरोच जनता पार्टी” छोड़ दी.”
#Lazy_Cockroaches
खबर ये भी है कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में आने वाले चंदे में भारी गोलमाल हुआ है जिसकी गवाह सीसीटीवी कैमरे हैं
हे राम !!
किन असुरों के बीच तुम फंसे हो.
विनोद जाखड़ बनना इतना आसान है क्या? विनोद जाखड़ ने संघर्षों का जो फुटप्रिंट तैयार किया है न वो कमाल और लाजवाब है।
पिछले कई दिनों से NEET पेपर लीक और CBSE के OSM सिस्टम पर NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और कार्यकर्ताओं ने सरकार की नाक में दम कर रखा।
जयपुर
महाराष्ट्र
छत्तीसगढ़
के बाद आज विनोद जाखड़ ने देहरादून सचिवालय का घेराव किया। पुष्कर धामी की सरकार ने वाटर कैनन का प्रयोग किया लेकिन
विनोद जाखड़ समेत कोई भी कार्यकर्ता अपनी जगह से नहीं हिला। विनोद जाखड़ ने बताया कि जब तक NEET छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता,
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं मिल जाता NSUI का ये प्रदर्शन चलता रहेगा।
ठीक है ये भी!!!
वैसे 78 और 79 में कोई विशेष अंतर नहीं है.खड़गे जी 78 के थे जब अध्यक्ष बने थे लेकिन अभी उनका कार्यकाल 2027 तक है.
2027 में 81 वर्षीय होने वाले दिग्विजय सिंह फिलहाल स्वस्थ हैं.
दिग्विजय @digvijaya_28 सिंह जी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं का दिल जीत लिया
दिग्विजय सिंह ने आज देश की जनता का दिल जीत लिया
दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल इसी साल ही खत्म हो रहा है. उम्मीद लगाई जा रही थी कांग्रेस इस बार फिर से दिग्विजय सिंह को राज्यसभा भेजेगा
पर फिर कांग्रेस ने तय किया दिग्विजय सिंह को राज्यसभा न भेजकर मीनाक्षी नटराजन को भेजा जाए
उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा
मुझे कांग्रेस ने 5 बार विधानसभा भेजा
दो बार मुख्यमंत्री बनाया
2 बार लोकसभा भेजा
2 बार राज्य सभा भेजा
कांग्रेस ने मुझे सब कुछ दे दिया है
अब नए लोगों को मौक़ा मिलना चाहिए
हम सब मिलकर मीनाक्षी नटराजन को जीता कर राज्य सभा भेजेंगे…..
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का बड़ा ऐलान
राजा वड़िंग ने कहा, “आने वाले दो दिनों में पूरी पंजाब कांग्रेस एकजुट होकर मैदान में उतरेगी। चन्नी साहब, रंधावा साहब, राणा गुरजीत सिंह जी, बाजवा साहब और हम सभी एक ही गाड़ी में दिखाई देंगे। हम पंजाब के हर जिले में जाएंगे, कार्यकर्ताओं से मिलेंगे और संगठन को मजबूत करेंगे।”
अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मैं चार चुनाव जीत चुका हूँ—तीन विधायक के और एक सांसद का। कांग्रेस पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है। अगर भविष्य में पार्टी मेरा टिकट भी काट देती है, तब भी मेरा झंडा कांग्रेस का ही बुलंद रहेगा और मैं कांग्रेस के लिए ही काम करता रहूँगा।”
उन्होंने कहा कि उनके लिए पार्टी और विचारधारा किसी भी पद या टिकट से बड़ी है तथा कांग्रेस को मजबूत करना ही उनका संकल्प है।
मै कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव को पूरी तरह से पल पल समझा था.मैने टी.वी.पर देखा था जब सोनिया जी ने इनसे तैयार रहने को कहा था.इनको तो मुख्यमंत्री बने रहने की हूल सवार थी.इन्होंने खुद सेव की जगह बेर चुना था.इनके साथ कोई साजिश नहीं हुई थी.अब ये खामखां का स्यापा कर रहे हैं.
अशोक गहलोत ने आज कहा कि उनके साथ साजिश हुई जिसकी वजह से वह कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बन पाए...इस बात में कितना दम!
अब घटनाक्रम समझिए
कांग्रेस कांग्रेस आलाकमान ने तय किया कि सचिन पायलट को राजस्थान की कमान सौंपी जाए और अशोक गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाए
25 सितंबर के पूरे घटनाक्रम से कुछ दिन पहले सोनिया गांधी ने अशोक गहलोत को मिलने के लिए बुलाया और कहा कि आपको राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाएगा आप इसके लिए तैयार रहे! साथ ही यह भी कहा गया था आप विधायकों से बात कीजिए और उनको इसके बारे में बताइए.
गहलोत ने सभी विधायकों से इस बारे में बातचीत की।
जब 25 सितंबर को आलाकमान के निर्देश पर खरगे और माकन पर्यवेक्षक के रूप में विधायकों से बातचीत करने जयपुर पहुंचे थे वो हुआ जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की संभावना के बीच, उनके समर्थक करीब 92 विधायकों ने बगावत कर दी। इन विधायकों ने सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध करते हुए तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी को अपने सामूहिक इस्तीफे सौंप दिए थे।
आलाकमान के दूत निराश होकर dilli लौट आए और इसकी पूरी रिपोर्ट सोनिया गांधी को दी गई।
इसके बाद अशोक गहलोत खुद सोनिया गांधी से मिले और माफी मांगी, साथ ही 25 सितंबर की घटना को आधार बनाकर खुद को कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव से अलग कर लिया।
अब समझ नहीं आ रहा कि अशोक गहलोत ने आज ये बयान क्यों दिया? उनके साथ षड्यंत्र हुआ या सचिन पायलट के साथ षड्यंत्र हुआ? अब ये बात आलाकमान जान चुका है। #rajasthan
राजस्थान के रहने वाले सभी साथी इसका जवाब जरूर दें।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अचानक मीडिया में 25 सितंबर को लेकर सवाल क्यों करने लगे ?
क्या वाकई में एक बार फिर जादूगरी हो सकती है ? वैसे भी अशोक गहलोत राजस्थान के चाणक्य हैं।
आप सभी साथी अपनी राय जरूर दें।
जंतर-मंतर पर “कॉकरोच जनता पार्टी” के आंदोलन को लेकर सवाल उठा रहे लोगों से मेरी अपील-
ये लड़ाई आपके उस बच्चे के लिए भी ज़रूरी है, जो कल अगर कोई परीक्षा दे, तो उसका करियर बर्बाद न हो, वो डिप्रेशन में न आ जाए, वो सुसाइड न कर ले…
इसलिए इसका मज़ाक मत बनाइए, इसे दबाइए मत… और हो सके तो अपने बच्चे के भविष्य की ख़ातिर खुलकर बोलिए- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दो।
अशोक गहलोत सिर्फ नेता नहीं, कांग्रेस के सबसे अनुशासित सिपाहियों में से एक है
पद आया, विवाद आया, साज़िशें हुईं, लेकिन उन्होंने कभी पार्टी से बड़ा खुद को नहीं माना
राजनीति में ऐसे समर्पण की मिसालें कम मिलती हैं
Ashok Gehlot
Congress
Rahul Gandhi
ये कारतूस दग चुका है !!
इसका एकमात्र उद्देश्य देश में मोदी सरकार की गिरती लोकप्रियता और बढ़ते जनाक्रोश को भटकाना है.
ये सरकार के सहयोग से मिली पुलिस परमीशन के कारण एक्सपोज़ हो चुका है.जब तक भाजपा चाहेगी इसे पर्यटन करने देगी,अगर इसने नेता होने की गलतफहमी पाल ली तो जेल भेज देगी.
Cockroach janta party के फाउंडर Abhijeet Dipke ने धर्मेन्द्र प्रधान को फिर से चेतावनी दी है..
पिछली बार कहा था जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट करेंगे शाम तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दे देंगे
हालांकि इससे कुछ फर्क नहीं पड़ा और अभिजीत के दावे और धमकी खोखली निकली
अब फिर से धर्मेंद्र प्रधान को एक तरह से धमकी दी है
अभिजीत ने कहा है कि शनिवार तक धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दे दें.
अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर वह देश के अलग-अलग राज्यों में और शहरों में जाएंगे
मतलब भारत भ्रमण करेंगे
अगर फिर भी इस्तीफा नहीं दिया जंतर मंतर पर फिर से प्रोटेस्ट करेंगे
इस बेवकूफ को कोई यह बता दो कि तब तक तो लोकसभा चुनाव आ जाएंगे उसके बाद धर्मेंद्र प्रधान खुद पद छोड़ देंगे 🤣
तेरे सैर सपाटे औऱ नौटंकी के चक्कर में छात्र पढ़ाई लिखाई छोड़ दे क्या?
होना जाना कुछ नहीं है बिना वजह के नौटंकी किए जा रहा है..
ये करवा पायेगा इस्तीफा? इससे कहो टाइम बता दे...
75 वर्षीय अशोक गहलोत 2028 में 78 साल के हो जायेंगे.वे आज जो बोलते हैं,वह समझ में नहीं आता है ढाई साल बाद तो और भी मुश्किल होगी.
मुझे लगता है अशोक गहलोत की चाहत खुद मुख्यमंत्री बने से ज्यादा सचिन पायलट मुख्यमंत्री न बने ही है.
अपने खिलाफ पायलट का विद्रोह उन्हें टीसता है.
ये बात स्वीकार करने में इतनी दिक्कत क्यो हो रही है कि अशोक गहलोत राजस्थान में कांग्रेस का कल थे, सचिन पायलट आज हैं।
हो सकता है कि गहलोत साहब में अभी भी CM बनने की योग्यता हो लेकिन पार्टी तो सबकी होती है न ? आख़िर DK के लिए सिद्धरामैया ने भी कुर्सी छोड़ी जबकि वो भी अच्छे से काम कर रहे थे।
गहलोत जी को सब कुछ मिल चुका है, अब कोशिश करें कि राहुल गांधी को PM बनाएं, पायलट को CM बनने दें, अपने बेटे को मंत्री बनाएं, सबको मौक़ा मिले।
His courageous fighting spirit against the undemocratic,anti national and monopolism in economic policies developed Rahul Gandhi ji,the only leader of ethics and honesty with a clear vision of development and secular India.he will never compromise the Modi's anti India defaults.
In the current Political Scenario, keep this clear in your mind.
📍If you want to remove the Modi Government, then you are with Rahul Gandhi.
📍If you are not with Rahul Gandhi, then you don’t want to remove the Modi Government.
Everything else is useless 🙏
राजस्थान में गहलोत-पायलट समर्थकों के बीच वीडियो क्लिप वार छिड़ गया है। 2020 की अंदरूनी लड़ाई के बयान चुन चुन कर निकाले जा रहे हैं और X पर साझा किए जा रहे हैं। ये सब इसलिए क्योंकि प्रदेश कांग्रेस में जो सांगठनिक बदलाव होने हैं उसे लेकर ज़बरदस्त खींच तान मच गई है। यानि राज्य गँवाने के बाद भी नेताओं को समझ नहीं आयी है।
पार्टी कार्यकर्ता कह रहे हैं कि हाईकमान अब भी ढीला पड़ा और निर्णायक कदम नहीं उठाया तो 2028 में भी कुछ भी हाथ नहीं लगने वाला।