क्या आप घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, मानसिक उत्पीड़न, कार्यस्थल पर उत्पीड़न, धोखाधड़ी, साइबर ठगी या अन्य किसी अन्याय से परेशान हैं एवं हमारी सहायता चाहते हैं?
तो अपनी विस्तृत शिकायत हिन्दी अथवा अंग्रेजी भाषा में हमारे अधिकारिक ईमेल [email protected] पर भेजें।
झूठा आरोप, कस्टडी में मौत, आत्महत्या की कहानी, फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और 29 साल बाद मिला न्याय!
वर्ष 1997 में वाराणसी के निवासी राजेंद्र प्रसाद सिंह अपने बेटे के लिए दवा लेने निकले थे। महानगर बस से सुंदरपुर जाते समय सीट को लेकर एक यात्री से उनका विवाद हो गया। मामला सुंदरपुर चौकी तक पहुंचा, जहां तत्कालीन दरोगा नरेंद्र प्रताप सिंह ने उन पर यात्री की जेब से ₹100 चोरी करने का आरोप लगाकर हिरासत में ले लिया।
आरोप है कि हिरासत के दौरान राजेंद्र प्रसाद सिंह को इतनी प्रताड़ना दी गई कि उनकी मृत्यु हो गई। मामले की जांच तत्कालीन दरोगा राधेश्याम सिंह को सौंपी गई, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट में इसे आत्महत्या बताते हुए कहा कि राजेंद्र ने अपने शॉल का फंदा बनाकर जान दे दी।
अगले दिन बीएचयू में पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डॉ. के.के. जैन ने भी अपनी रिपोर्ट में मृत्यु का कारण फांसी बताया। इतना ही नहीं, परिजनों को बिना सूचना दिए अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।
लेकिन राजेंद्र प्रसाद सिंह की पत्नी ने हार नहीं मानी। उन्होंने मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई। लंबी कानूनी लड़ाई और लगभग 29 वर्षों के इंतजार के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।
अदालत ने तत्कालीन दरोगा नरेंद्र प्रताप सिंह को 10 वर्ष, राधेश्याम सिंह को 6 माह तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़े डॉ. के.के. जैन को 5 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
यह मामला केवल एक व्यक्ति की मौत का नहीं, बल्कि न्याय पाने के लिए एक परिवार के लगभग तीन दशक लंबे संघर्ष की कहानी है। यह हमें सोचने पर मजबूर करता है कि यदि न्याय मिलने में ही 29 वर्ष लग जाएं, तो पीड़ित परिवार पर क्या बीतती होगी।
श्री अमरनाथ जी यात्रा 2026 में सेवा हेतु एनसीआईबी के सदस्यों एवं पदाधिकारियों के लिए विशेष आह्वान
"हर हर महादेव | जय बाबा बर्फानी"
असीम श्रद्धा, अटूट आस्था एवं निःस्वार्थ सेवा-भावना के साथ हम सभी पवित्र श्री अमरनाथ जी यात्रा 2026 का स्वागत करते हैं, जो 03 जुलाई 2026 से आरंभ होने जा रही है। यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण, अनुशासन और मानवता के सर्वोच्च मूल्यों को आत्मसात करने का एक दिव्य अवसर है।
नेशनल क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (NCIB) अपने सभी समर्पित सदस्यों, पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों से विनम्र आग्रह करता है कि वे इस पावन यात्रा में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए बाबा बर्फानी के दर्शन हेतु आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सेवा के लिए आगे आएँ।
यात्रा के दौरान स्वयंसेवकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायक होगी। आपका सहयोग श्रद्धालुओं को उचित मार्गदर्शन प्रदान करने, सुरक्षा एवं सहायता सुनिश्चित करने, चिकित्सा सहयोग उपलब्ध कराने, स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में त्वरित सहायता पहुँचाने में अमूल्य योगदान देगा।
यह सेवा केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि मानवता की सेवा के माध्यम से भगवान शिव की आराधना का श्रेष्ठ स्वरूप है। प्रत्येक श्रद्धालु तक सुरक्षा, सम्मान, सहयोग और अपनत्व का भाव पहुँचाना ही हमारा संकल्प है, ताकि वह इस कठिन किन्तु दिव्य यात्रा को विश्वास, संतोष और सकारात्मक अनुभव के साथ पूर्ण कर सके।
आइए, हम सभी मिलकर सेवा, सहयोग, अनुशासन, समर्पण और करुणा की भावना के साथ इस महापावन यात्रा का हिस्सा बनें तथा श्री अमरनाथ जी यात्रा 2026 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित, सफल और अविस्मरणीय बनाने में अपना योगदान दें।
~ साभार: @NCIBHQ
दो प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल,
एक ही महिला की खबर को अलग–अलग तरीके से जनता के बीच परोसते हुए।
पहली खबर देखकर आपका पारा योगी पुलिस पर चढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन दूसरी खबर पढ़कर आप अपनी हँसी नहीं रोक पाएंगे।
खबर एक ही महिला की है,
लेकिन उसे अलग–अलग तरीके से प्रकाशित करने के कारण न्यूज चैनलों एवं समाचार पत्रों में प्रकाशित होने वाले खबरों के सत्यता पर सवालिया निशान लगा दिया है।
@aajtak@news24tvchannel
इस मूर्ख आदमी को ये लगता है कि बार बार चक्कर लगाने से और ऐसे रोने से इसको इसकी पेमेंट मिल जाएगी,
इस आदमी के हिसाब से 4 साल पहले की 500 लंच पैकेट की 52900 रुपए की पेमेंट कानपुर देहात के अधिकारियों ने फँसा रखी है।
वो अन्न का दाना किसी के पेट में ही गया है इस बात से इस आदमी को संतोष नहीं है।
गरीब दुखिया कहीं का!
कार्यालय अधिसूचना
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एनसीआईबी के समस्त अधिकारियों को सूचित किया जाता है कि पवित्र श्री अमरनाथ जी यात्रा 2026 का शुभारंभ 03 जुलाई 2026 से होने जा रहा है। जनसेवा एवं क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी निरंतर प्रतिबद्धता के अंतर्गत, एनसीआईबी मुख्यालय पिछले तीन वर्षों से इस प्रतिष्ठित यात्रा के दौरान सक्रिय रूप से अपनी सेवाएँ प्रदान करती आ रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष भी ब्यूरो द्वारा यात्रा अवधि के दौरान अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगा।
उक्त क्रम में अवगत कराना है कि,
मुख्यालय द्वारा श्री अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं के सुरक्षा एवं प्रशासनिक सहयोग हेतु अपने अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जानी है। प्रत्येक ड्यूटी शिफ्ट की अवधि अधिकतम 5 दिनों की होगी।
अतः जो भी अधिकारी स्वेच्छा से इस महत्वपूर्ण सेवा में अपना योगदान देना चाहते हैं, वे अपना नाम तथा आधिकारिक UID नंबर आज शाम 4 बजे के भीतर अपने स्टेट डायरेक्टर को उपलब्ध कराएँ।
आदेशानुसार,
एनसीआइबी मुख्यालय
https://t.co/cSrmyqTL8R
(नोट: निर्धारित समय के बाद प्राप्त होने वाले आवेदन/विवरण स्वीकार नहीं किए जाएंगे, क्योंकि अंतिम ड्यूटी रोस्टर तैयार कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक स्वीकृति एवं समन्वय हेतु अग्रेषित किया जाएगा।)
OFFICE NOTIFICATION
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All officers of NCIB are hereby informed that the sacred Shri Amarnath Ji Yatra 2026 is scheduled to commence on 03 July 2026.
In line with its continued commitment to public service and regional security, NCIB Headquarters has been actively rendering its services during this prestigious pilgrimage for the past three years. Continuing this tradition, the Bureau will once again discharge its responsibilities throughout the Yatra period this year.
In this regard, it is hereby notified that NCIB Headquarters will be deploying officers to assist in providing security and administrative support to pilgrims undertaking the Shri Amarnath Ji Yatra. The duration of each duty deployment/shift shall be a maximum of five (5) days.
Accordingly, officers who wish to voluntarily contribute to this important service are requested to submit their name and official UID number to their respective State Director no later than 4PM today.
By Order,
NCIB Headquarters
https://t.co/lobINiDAsN
(Note: Applications/details received after the stipulated deadline will not be considered, as the final duty roster will be prepared and forwarded for necessary approvals and coordination with the concerned authorities.This version is suitable for official circulation within the organization.)
एक दौर था जब आम आदमी कानून की धाराओं से कम और वर्दी के अधिकार से ज़्यादा परिचित था। लोगों के बीच यह धारणा बनी हुई थी कि यदि किसी के विरुद्ध नशीले पदार्थ की बरामदगी दिखा दी जाए, तो उसके लिए न्याय पाना बेहद कठिन हो जाएगा।
लेकिन समय बदल चुका है।
आज मोबाइल कैमरे हैं, सीसीटीवी हैं, डिजिटल रिकॉर्ड हैं, लोकेशन डेटा है, और सबसे महत्वपूर्ण – न्यायालयों द्वारा प्रक्रियागत अनुपालन की पहले से कहीं अधिक गहन समीक्षा है।
अब केवल इतना कहना पर्याप्त नहीं माना जाता कि "नशीला पदार्थ बरामद हुआ।"
सवाल यह भी उठता है –
"बरामदगी हुई तो कैसे हुई?"
यहीं से एनडीपीएस एक्ट की सबसे महत्वपूर्ण कसौटी शुरू होती है।
धारा 50 : अधिकारों की जानकारी
जब किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत तलाशी ली जाती है, तो कानून कुछ महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय प्रदान करता है। न्यायालय अक्सर यह देखती है कि संबंधित व्यक्ति को उसके अधिकारों की जानकारी दी गई थी या नहीं, और यदि दी गई थी तो उसका रिकॉर्ड क्या है।
कानूनी प्रक्रिया में केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि उस कार्रवाई का प्रमाण भी महत्व रखता है।
धारा 42 : सूचना का दस्तावेजी आधार
जहाँ कानून पूर्व प्राप्त सूचना के रिकॉर्ड की अपेक्षा करता है, वहाँ न्यायालय यह भी देख सकती है कि उस सूचना को विधि अनुसार दर्ज किया गया था या नहीं।
आज केवल "सूचना प्राप्त हुई थी" कहना पर्याप्त नहीं माना जाता; यह भी महत्वपूर्ण है कि उसका दस्तावेजी आधार उपलब्ध हो।
धारा 52 और 57 : जब्ती से प्रयोगशाला तक
किसी भी बरामद पदार्थ के संबंध में कई प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाते हैं—
- उसे किसने जब्त किया?
- सील किसने लगाई?
- उसे कहाँ सुरक्षित रखा गया?
- प्रयोगशाला तक कब और कैसे भेजा गया?
इसी क्रम को "चेन ऑफ कस्टडी" कहा जाता है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच के दौरान साक्ष्य की शुचिता और विश्वसनीयता बनी रहे।
स्वतंत्र गवाह और अन्य साक्ष्य
आज न्यायिक परीक्षण केवल कागज़ी औपचारिकताओं तक सीमित नहीं है।
सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा, स्वतंत्र गवाह, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्य भी जांच की विश्वसनीयता का हिस्सा बन चुके हैं।
अदालतें अब उपलब्ध साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला को एक साथ देखकर निष्कर्ष निकालती हैं।
बदलता हुआ समय, बदलती अपेक्षाएँ
तकनीक ने केवल जीवन नहीं बदला, न्यायिक जांच की प्रकृति भी बदल दी है।
कानून की किताबें अब पुस्तकालयों तक सीमित नहीं हैं। न्यायालयों के निर्णय सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। प्रक्रियागत अधिकारों के प्रति जागरूकता पहले से अधिक है।
इसीलिए आज किसी भी एनडीपीएस मामले में केवल बरामदगी का दावा पर्याप्त नहीं माना जाता; यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि जांच और कार्रवाई कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप हुई हो।
क्योंकि विधि का एक मूल सिद्धांत है –
न्याय केवल परिणाम से नहीं, प्रक्रिया से भी सुनिश्चित होता है।
और अदालत का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न अक्सर यही होता है –
"जो किया गया, क्या वह कानून के अनुसार किया गया?"नोट: यह एक सामान्य कानूनी विमर्श है। किसी भी मामले का परिणाम उसके विशिष्ट तथ्यों, साक्ष्यों और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत सामग्री पर निर्भर करता है।
@dgpup
Respected Sir,
Heartiest congratulations IPS Sh Rajeev Krishna while appointed as Director General of Police Uttar Pradesh.
This remarkable achievement reflects the faith and confidence reposed in your leadership, dedication.Wishing you great success, Good wishes.
NCIB
NCIB की जनहित पहल का बड़ा असर: ओडिशा सरकार ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर लिया संज्ञान, DGP को भेजा पत्र
भुवनेश्वर, 29 मई 2026।
राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, बढ़ते अपराध और आम जनता में बढ़ रही असुरक्षा की भावना को लेकर नेशनल क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (NCIB), ओडिशा द्वारा उठाई गई आवाज का प्रभाव अब प्रशासनिक स्तर पर दिखाई देने लगा है। NCIB द्वारा गृह विभाग, ओडिशा सरकार को भेजे गए विस्तृत ज्ञापन पर संज्ञान लेते हुए राज्य के गृह (विशेष शाखा) विभाग ने मामले को डीजीपी एवं आईजी पुलिस, ओडिशा के पास आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया है।
NCIB ओडिशा के राज्य निदेशक सुदाम चरण दास द्वारा भेजे गए पत्र में राज्य में बढ़ रही हत्या, लूट, चोरी, महिला अपराध तथा संगठित आपराधिक गतिविधियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई थी। ज्ञापन में हाल के कई चर्चित मामलों का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि अपराध की बढ़ती घटनाओं ने जनता के बीच भय और असंतोष का माहौल पैदा कर दिया है।
NCIB ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा था कि कानून का राज स्थापित करने, पुलिस प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाने तथा अपराधियों के विरुद्ध त्वरित एवं निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। संगठन ने यह भी मांग की थी कि राज्य में शांति, न्याय और जनविश्वास की पुनर्स्थापना के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
NCIB की इस जनहित पहल को गंभीरता से लेते हुए ओडिशा सरकार के गृह विभाग ने 29 मई 2026 को जारी आधिकारिक पत्र के माध्यम से डीजीपी एवं आईजी पुलिस को पूरे मामले से अवगत कराया और आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। साथ ही इसकी सूचना NCIB को भी प्रदान की गई।
विदित हो कि NCIB लंबे समय से अपराध नियंत्रण, भ्रष्टाचार विरोधी जागरूकता और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रशासन के समक्ष उठाने का कार्य करता रहा है। ओडिशा में कानून-व्यवस्था को लेकर उठाई गई यह पहल भी इसी जनसरोकार का हिस्सा है। संगठन का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की चिंताओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाना और जवाबदेही सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व है।
NCIB ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं, बल्कि समाज में शांति, सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए रचनात्मक हस्तक्षेप करना है। संगठन भविष्य में भी जनता से जुड़े मुद्दों को संबंधित प्रशासनिक एवं संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष मजबूती से उठाता रहेगा।
आवश्यक सूचना
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नेशनल क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (NCIB) अपने लीगल विंग के विस्तार हेतु भारत के समस्त जनपदों, राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ताओं को स्वैच्छिक (अवैतनिक) रूप से संगठन से जुड़ने के लिए आमंत्रित करता है।
इच्छुक अधिवक्तागण अधिक जानकारी एवं पंजीकरण हेतु हमारे व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर +91 9792580000 पर संपर्क कर सकते हैं तथा हमारी आधिकारिक वेबसाइट https://t.co/UOYdg6LKoG पर विजिट कर सकते हैं।
~ साभार: @NCIBHQ
⚠️ रेबीज को हल्के में न लें
अहमदाबाद में एक पुलिस इंस्पेक्टर का दुखद निधन—
बताया जा रहा है कि पालतू कुत्ते के नाखून लगने के बाद लापरवाही भारी पड़ गई।
❗कुत्ता काटे या सिर्फ नाखून लगे, तुरंत डॉक्टर से सलाह लें
❗पालतू कुत्ते का वैक्सीनेशन होने पर भी सावधानी जरूरी
रेबीज जानलेवा है.
एनसीआईबी मध्यप्रदेश एवं 21 एमपी एनसीसी बटालियन द्वारा “सायबर अपराध एवं बचाव” विषय पर विशेष जागरूकता व्याख्यान आयोजित
दिनांक 25 मई 2026 को 21 एमपी एनसीसी बटालियन, रतलाम द्वारा आयोजित “संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर” के अंतर्गत शासकीय एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, सेलाना में “सायबर अपराध एवं उससे बचाव के तरीके” विषय पर एक विशेष जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में एनसीआईबी मध्यप्रदेश इकाई की महत्वपूर्ण सहभागिता रही।
उक्त कार्यक्रम हेतु 21 एमपी एनसीसी बटालियन, रतलाम द्वारा जारी पत्र क्रमांक 21MP/110/प्रशिक्षण दिनांक 13 मई 2026 के माध्यम से एनसीआईबी मध्यप्रदेश इकाई के स्टेट डायरेक्टर श्री राजेश सुराणा को मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था।
यह संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर दिनांक 24 मई 2026 से 02 जून 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें रतलाम, मंदसौर, जावरा, नागदा, अलीराजपुर, थांदला, सेलाना, पेटलावद, कुक्षी एवं इंदौर क्षेत्र से आए लगभग 550 एनसीसी कैडेट्स सहभागिता कर सैन्य प्रशिक्षण एवं व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। कार्यक्रम में सैन्य अधिकारियों, एनसीसी अधिकारियों एवं कैडेट्स की विशेष उपस्थिति रही।
अपने प्रेरणादायी व्याख्यान में श्री राजेश सुराणा ने वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों एवं डिजिटल सुरक्षा के महत्व पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कैडेट्स को ऑनलाइन फ्रॉड, सोशल मीडिया अपराध, फर्जी लिंक, OTP धोखाधड़ी, मोबाइल हैकिंग, साइबर ठगी एवं डिजिटल सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान कीं। साथ ही सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, सोशल मीडिया के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग एवं साइबर अपराध होने की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में व्यावहारिक उदाहरणों सहित विस्तार से समझाया।
कार्यक्रम के दौरान कैडेट्स को डिजिटल जागरूकता, साइबर सुरक्षा एवं नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई तथा उन्हें इंटरनेट एवं सोशल मीडिया का सकारात्मक एवं जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करने हेतु प्रेरित किया गया। उपस्थित कैडेट्स एवं अधिकारियों द्वारा विषय से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे गए, जिनका श्री सुराणा ने सरल एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समाधान प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर केम्प इंचार्ज सुबेदार मेजर कालीचरण एवं बटालियन अधिकारियों द्वारा व्याख्यान की सराहना करते हुए श्री राजेश सुराणा का आभार व्यक्त किया गया तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
यह आयोजन कैडेट्स में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने, डिजिटल अपराधों से बचाव हेतु सजगता विकसित करने एवं जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने की दिशा में अत्यंत प्रेरणादायी एवं उपयोगी सिद्ध हुआ।
@NCIBMP@Cyberdost@DGP_MP@PMOIndia@rashtrapatibhvn
@proncibup@ChairmanUppcl@MD_PuVVNL@PuVVNLHQ@EMofficeUP महोदय,आपके द्वारा मोबाइल नंबर प्रदान ना किये जाने के कारण हम आपकी सहायता करने में असमर्थ हैं। भविष्य में किसी असुविधा के निवारण हेतु आप हमारे टोल फ्री नंबर 1912/18004101912 पर कॉल अथवा हमारे ट्विटर हैंडल
@PuVVNLHQ पर ट्वीट कर सकते है धन्यवाद
उपभोक्ता द्वारा शिकायत प्राप्त होने पर विभाग द्वारा तुरंत संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की गई और समस्या का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया गया। समाधान के बाद उपभोक्ता ने विभाग की तत्परता और सेवाओं के प्रति धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।@ChairmanUppcl@PuVVNLHQ@MD_PuVVNL
#036 Trained 600 NCC Cadets on the subject of “Cyber Crime & Security” at CATC, SAILANA on special invitation as a Chief Guest.
Also administered the pledge of “Cyber Suraksha & Nasha Mukti” to all NCC cadets and staff members present during the camp.
@HMOIndia@Cyberdost#NCIB