My Film Review in Satya Hindi :
#Daayra#KareenaKapoor#PrithvirajSukumaran
Meghna Gulzar's 'Daayra' brings Kareena Kapoor Khan and Prithviraj Sukumaran face-to-face in a gripping drama inspired by the 2019 Hyderabad encounter. As DCP Ajooni investigates DCP Raman's controversial encounter of rape accused, the film raises hard-hitting questions: Are justice and law always the same? Dr. Prakash Hindustani breaks down the film's nuanced take on the justice system's flaws, swift action, and moral grey areas. मेघना गुलजार की 'दायरा' 2019 के हैदराबाद एनकाउंटर से प्रेरित है। फिल्म में करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन पुलिस अफसरों के रूप में आमने-सामने हैं। डीसीपी अजूनी, डीसीपी रमन के एनकाउंटर की जांच करती हैं, जिससे बड़ा सवाल उठता है: क्या न्याय और कानून हमेशा एक होते हैं? डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी इस समीक्षा में बताते हैं कि कैसे यह फिल्म त्वरित न्याय, सिस्टम की खामियों और पुलिस की मजबूरी को बिन��� किसी को विलेन बनाए पेश करती है। #Daayra #KareenaKapoor #PrithvirajSukumaran #MeghnaGulzar #MovieReview #Bollywood #DaayraReview
भोपाल 16 सितम्बर.
सेन्ट्रल इंडिया प्रेस क्लब की तरफ से कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर (पुराना विधानसभा, मिंटो हॉल) में आयोजित राष्ट्रीय मीडिया संवाद में मुझे लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया. मंच पर मौजूद सर्वश्री विजय दास,उप मुख्यमंत्री मंत्र�� राजेंद्र शुक्ला, विधानसभा के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, हरियाणा के पूर्व राज्यपाल कप्तानसिंह सोलंकी, समाजवादी विचारक रघु ठाकुर, पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पत्रकार राजेन्द्र शर्मा और राहुल देव!
|| आभार ||
#media
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Hon’ble Minister @HardeepSPuri ji & @MoPNG_India,
I am facing severe delays with my LPG cylinder delivery. Despite repeated requests, there has been no supply. Kindly look into this matter urgently.
Consumer No: 617959
(consumer Name Geeta Prakash)
Agency: Indore Household Agency, Indore. MP
Provider: @HPCL (@HPCL_Support)
Please ensure prompt resolution. #HPGas #CustomerCare #Indore @PMOIndia@hpgasservices
My Film Review in Satya Hindi : https://t.co/exRFqRnFwd.
In this episode, Dr. Prakash Hindustani reviews Priyadarshan's latest release Haiwaan, a Hindi remake of the Malayalam hit Oppam. While Saif Ali Khan shines as the visually impaired protagonist, Akshay Kumar's villainous turn falls flat in a film dragged down by slow pacing and forced songs. Watch this complete review to know if this suspense thriller is actually worth your time and ticket money.
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इंदौर में राजकमल प्रकाशन का किताब उत्सव.
चर्चा सत्र का विषय : किसका मीडिया, किसका लोकतंत्र.
विनीत कुमार और प्रकाश हिन्दुस्तानी की बातचीत.
चर्चा मीडिया, सत्ता, कॉरपोरेट गठ���ोड़ और पत्रकारिता की बदलती स्थिति पर थी.
मीडिया ��ास्तव में किसका प्रतिनिधित्व करता है - जनता का, सरकार का या बड़े उद्योगपतियों का? मीडिया के चरित्र में आया बुनियादी बदलाव।
संपादक संस्था का क्षरण. न्यूज़ रूम्स से पारंपरिक संपादक की स्वायत्तता का खत्म होना और उसकी जगह मैनेजमेंट/पीआर कल्चर का हावी होना.
कॉरपोरेट और सत्ता का गठजोड़: मीडिया संस्थानों का विशुद्ध रूप से मुनाफ़ा-केंद्रित होना और सत्ता के प्रवक्ता की तरह काम करना।
प्रकाश ह���न्दुस्तानी ने विनीत कुमार का परिचय दिया और कहा कि विनीत कुमार न्यूज़ रूम्स के अंदर चल रहे पीआर ड्रामा, प्राइम टाइम के हाइप कल्चर और कॉरपोरेट-पॉलिटिकल गठजोड़ का कच्चा-चिट्ठा खोलते हैं और उनकी किताब मीडिया साक्षरता के लिए भी महत्वपूर्ण है.
वरिष्ठ संपादक राजेन्द्र माथुर कहते थे कि मीडिया का मालिक कोई व्यक्ति, फर्म, क��पनी या बहुराष्ट्रीय कॉरपोरेट हो सकता है, लेकिन वास्तविक मालिक पाठक या दर्शक होता है।
विनीत कुमार : इस सवाल का एक सीधा जवाब यह है कि "जिसका लोकतंत्र उसका मीडिया, या जिसका मीडिया उसका लोकतंत्र". लेकिन वक्त के साथ यह समीकरण बहुत जटिल हो गया है.
औपनिवेशिक भारत में जब हिन्दी पत्रकारिता शुरू हुई, तब सबसे दिलचस्प बात यह थी कि सरकार हमारी नहीं थी, लेकिन मीडिया हमारा था.
आज विडंबना यह है कि सरकार हमारी ���ै, लेकिन मीडिया हमारा नहीं रहा.
समस्या यहीं से शुरू हुई कि आज का मीडिया जनता का होने के बजाय सरकार का दिखने और होने का दावा करता है। वह जितना अधिक सरकार का होना चाहता है, उतना ही लोकतंत्र का कम होता जाता है.
प्रकाश हिन्दुस्तानी : कॉरपोरेट और सत्ता के गठजोड़ से चलने वाला यह मीडिया केवल खबरें नहीं बेच रहा, बल्कि जिस तरह से नैरेटिव और एजेंडा तय कर रहा है, उस पर आपकी क्या राय है?
विनीत कुमार : यह केवल ���ुछ शहरों (इंदौर, भोपाल, पटना या रांची) तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि पूरे देश का संकट है. मीडिया व्यवस्था में स्थानीयता और जमीनी मुद्दों को खत्म करना बहुत आसान बना दिया गया है.
यह एक ऐसी ट्रेन की तरह काम कर रहा है जहाँ सिर्फ मुख्य इंजन का एक गियर बदलने से पीछे लगे सारे डिब्बे उसी दिशा में मुड़ जाते हैं. स्थानीय चैनल और संस्करण स्वतंत्र न रहकर बस उस मुख्य इंजन के पीछे चलने वाले डिब्बे बनकर रह गए हैं.
सवाल : आज मीड���या में जिस तरह से स्थानीय मुद्दों और आम भागीदारी को दरकिनार किया जा रहा है, क्या अब भी मीडिया से कोई उम्मीद बाकी है?
विनीत कुमार : आज मीडिया की कार्यप्रणाली को लेकर चिंताएं बिल्कुल जायज हैं और हम सब उन चिंताओं में साथ हैं.
इसके बावजूद मीडिया से पूरी तरह उम्मीद छोड़ देना सही नहीं होगा। यह उम्मीद बेवजह नहीं है, क्योंकि औपनिवेशिक भारत को एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक भारत बनाने में मीडिया की बहुत ���ड़ी ऐतिहास���क भूमिका रही है.
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विनीत कुमार और प्रकाश हिन्दुस्तानी की यह बातचीत 4 सितम्बर 2026 की शाम हुई थी. पूरी बातचीत वीडियो में.
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कृपया आइये...
राजकमल प्रकाशन के 'किताब उत्सव' में मेरा सत्र कल 4 सितंबर को शाम साढ़े 5 बजे से इंदौर के प्रीतम लाल दुआ सभागृह में होगा.
मैं लेखक विनीत कुमार से 'किसका मीडिया, किसका लोकतंत्र' विषय पर बातचीत करूंगा. इस मौके पर विनीत कुमार की चर्चित किताब 'मीडिया का लोकतंत्र' के नये संस्करण का लोकार्पण भी होगा.
राजकमल प्रकाशन का यह किताब उत्सव 4 से 8 सितंबर तक है. इसमें पुस्तक प्रदर्शनी भी रहेगी.
In this brutal and honest review, Dr. Prakash Hindustani breaks down Yash's highly anticipated gangster drama, Toxic: A Fairy Tale for Grown-ups. Despite a stellar cast including Kiara Advani, Nayanthara, and a dual role by Yash, the film suffers from extreme violence, a weak screenplay, and an exhausting 3-hour runtime that heavily relies on style over substance.
#ToxicMovieReview #Yash #KiaraAdvani #Nayanthara #ToxicMovie #FilmReview #SouthIndianCinema #SatyaHindi @P_hindustani
राम लीला की तरह 'मसीह लीला'!
कला का एक रूप यह भी!
हमारा कथकली ईश्वर की प्रार्थना है. इसी शैली में केरल के धर्म प्रचारकों ने मसीह लीला का मंचन शुरू किया है.
केरल की विश्वप्रसिद्ध पारंपरिक शास्त्रीय नृत्य-नाट्य विधा है कथकली. अब ईसा मसीह के जीवन पर आधारित इस कथकली की प्रस्तुति 'दिव्यकारुण्य चरितम' और 'क्रिश्चियन कथकली' के रूप में आकर्षण का केन्द्र है।
यह बाइबिल और भारतीय शास्त्रीय कला का संगम है. सामान्यतः कथकली में महाभारत, रामायण और हिन्दू पौराणिक कथाओं का मंचन किया जाता है, परंतु सांस्कृतिक समन्वय और अंतर-धार्मिक सौहार्द को दर्शाने के लिए कलाकारों और लेखकों ने प्रभु यीशु मसीह के जीवन, उपदेशों, The Last Supper, क्रूसीकरण और पुनरुत्थान की कथाओं को कथकली की शैली में ढाला है!
इसमें भी पारंपरिक कथकली के वाद्ययंत्रों जैसे चेन्डा, मद्दलम्, इलाथलम और भाव-भंगिमाओं का प्रयोग हो रहा है।
यीशु मसीह, पोंटियस पिलातुस, यहूदा और मरियम मगदलीनी जैसे पात्रों को कथकली के विशेष मेकअप यानी वेषम और परिधानों में प है और इसके गीत और ��ंवाद (आट्टक्कथा) संस्कृत के बजाय सरल मलयालम में!
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