आजादी का असली मतलब वही समझ सकता है जिसने कभी आजादी देखी ही ना हो...
देश में ब्लैक पेंग्विन जैसे बहुत से तबके हैं जिन्हें आजादी की सख्त जरूरत है।
और ये बात जंतर मंतर वाली मादाएं कभी नहीं समझ पाएंगी... वो क्या है ना फूली फूली खा रही हैं।
मेरी समझ में आजतक ये नहीं आया कि गांधी जयंती पर ड्राई डे का क्या लॉजिक है.??
सवाल:-
1. क्या मदिरा पीने से शांति भंग होती है?
2. क्या बापू के बड्डे पर मदिरा पीकर सेलिब्रेट करने से बाबू की आत्मा दुःखी होती है??
खैर! हमें क्या हम कौनसे सुराप्रेमी हैं।😅