"भैयाजी कहिन"
एक पत्रकार जो एक कलाकार भी है, अगर वो न्यूज चैनल मैं ना होते तो अब तक फ़िल्मों मैं कई राष्ट्रीय पुरस्कार पा चुके होते।
देश के वरिष्ठ पत्रकार और हम सभी के "भैयाजी प्रतीक त्रिवेदी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।
@prateektv
सितंबर 2016 की बात है। प्रतीक सर से पहली मुलाकात फेसबुक के माध्यम से हुई थी। उस वक्त बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुई यह पहचान आगे चलकर मेरे जीवन के सबसे खास, पवित्र और भरोसेमंद रिश्तों में बदल जाएगी।
इसके बाद जब सर से ठीक से मिलने और बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ, तो उनसे सिर्फ पत्रकारिता ही नहीं, बल्कि जिंदगी जीने की बारीकियां सीखने को मिलीं।
परिवार और निजी जीवन के बीच संतुलन कैसे बनाए रखना है, मुश्किल परिस्थितियों में खुद को कैसे संभालना है, करियर में कैसे आगे बढ़ना है और साथ ही अपने धर्म, संस्कृति व आध्यात्मिक मार्ग पर कैसे दृढ़ रहना है—सर इन तमाम चीजों को इतनी सहजता और विस्तार से समझाते रहे कि हर बातचीत के बाद जीवन को देखने का नज़रिया ही बदल जाता था।
लेकिन अगर कोई मुझसे पूछे कि प्रतीक सर मेरे लिए क्या हैं, तो शायद मेरे पास इसका कोई एक शब्द नहीं है।
मेरे लिए सर सिर्फ एक सीनियर, वरिष्ठ पत्रकार या मार्गदर्शक नहीं हैं… वो मेरे 'संकटमोचन' की तरह हैं।
महाभारत का वह प्रसंग याद आता है—
जब कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन हताश, निराश और अंदर से टूट चुके थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने केवल उपदेश नहीं दिया था, बल्कि अर्जुन के हर संशय और दुख को हरकर उन्हें एक अभेद्य संबल दिया था।
ठीक उसी तरह, जब मेरी मां बीमार हुईं, उस वक्त मैं अंदर से पूरी तरह टूट गया था। समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं, कहां इलाज करवाऊं और किस तरह इस मुश्किल समय से निकलूं।
उस दौर में प्रतीक सर ने सिर्फ सलाह नहीं दी…
उन्होंने मुझे संभाला। मेरे लिए एक ढाल बनकर खड़े हुए। मुझे मानसिक रूप से मजबूत किया, सही रास्ता दिखाया और इलाज को लेकर हर संभव मार्गदर्शन किया।
"वही इंसान सही मायने में महान होता है, जो गिरते हुए को थाम ले और अंधेरों में दीया बन जाए।"
उस मुश्किल दौर में सर ने मेरे लिए जो किया, उसे शब्दों में बयां करना आज भी मेरे लिए मुमकिन नहीं है।
कुछ रिश्तों की कीमत शब्दों से नहीं मापी जा सकती… उन्हें सिर्फ महसूस किया जा सकता है।
आजकल सर से बातचीत पहले की तरह लगातार नहीं हो पाती। क्योकि माँ की बहुत सी यादें ताज़ा हो जाती है लेकिन एक बात आज भी वैसी ही है—
जब कभी सर की तस्वीर सामने आती है या कहीं सर दिखाई देते हैं, तो मां के उस मुश्किल दौर की बहुत सारी बातें अचानक आंखों के सामने तैरने लगती हैं। याद आता है कि किस तरह सर ने एक बड़े भाई और गुरु की तरह मेरा हाथ थामा था।
और यही वजह है कि सर से मेरा रिश्ता सिर्फ जान-पहचान का नहीं, बल्कि एक गहरे सम्मान, असीम विश्वास और कृतज्ञता का रिश्ता है।मुझे पूरा यकीन है कि मैं अकेला नहीं हूं।
वेदों में कहा गया है—
“संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्”
(अर्थात जो सबको साथ लेकर चले और सबकी चेतना को सही दिशा दे, वही सच्चा नायक है।)
मेरे जैसे न जाने कितने युवा और लोग होंगे, जिनके लिए प्रतीक सर किसी न किसी रूप में मार्गदर्शक, बड़े भाई, गुरु या संकट के समय का सहारा रहे होंगे।
शायद सर को अंदाज़ा भी नहीं होगा कि कितने लोगों की जिंदगी में उनकी कही हुई एक छोटी-सी बात ने कितना बड़ा संबल दिया है।
> "जो चिराग जलाते हैं औरों के रास्ते में, उन्हें अपनी राह के अंधेरों से कभी डर नहीं लगता।"
आज आपके जन्मदिन पर बस इतना कहना चाहता हूं—
प्रतीक सर, आपने जिंदगी में जिन लोगों का हाथ थामा है, शायद आपको उनकी संख्या याद न हो… लेकिन उन लोगों को आप और आपका योगदान हमेशा याद रहेगा।
आप इसी तरह समाज को रास्ता दिखाते रहें, जरूरतमंदों के साथ खड़े रहें और अपने अनुभव से लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाते रहें।
वेदों की इस पावन प्रार्थना के साथ आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं:
"पश्येम शरदः शतम्। जीवेम शरदः शतम्।"
(ईश्वर करे आप सौ शरदों (वर्षों) तक देखें, सौ वर्षों तक जीवंत, स्वस्थ और ऊर्जावान रहें।)
मेरी तरफ से आपको जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं और दिल से अनंत धन्यवाद।
ईश्वर आपको हमेशा स्वस्थ, प्रसन्न, निर्भय और दीर्घायु रखे। आपका स्नेह, आशीर्वाद और मार्गदर्शन हम सभी को यूं ही मिलता रहे।
शब्द कम पड़ जाते हैं सर…
आपके लिए दिल में सम्मान और कृतज्ञता का भाव कभी कम नहीं होगा।
जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं, प्रतीक सर!
#HappyBirthdayPrateekSir #PrateekTrivedi #BirthdayWishes #Mentor
@prateektv
Prefer to
#BE the #CAUSE
rather than to expect the result..
#BECAUSE
it will give birth to your dream world.
कर्म किए जा फल का उसने निर्धारण किया है..
बस तेरे कारण ही तो उसने तेरा वरण किया है.!
Be the reason of #solution.
Be the cause of #existence.
You become the author of your narrative, not just a character reading lines. Your only job is to provide the spark—the action.
Fortunately, I met all these gentleman in #AmritRatan Mahotsav by #NETWORK18. This thought and question came to my mind there only.
ना अमृत स्वयं बनता है..
ना रत्न यूं ही निखरता है.!
यह सब होता तेरे कारण.!
Because of you and your being the cause.
In picture with me is NETWORK 18 TEAM: From left to right.. Mr. Santosh Menon, Chief Content officer; Mr. Prateek Trivedi, Roving Editor; Mr. Mitul Sangnani, CEO (Digital); Mr. Siddharth Nevatia, CRO.
@prateektv@mitulsangani