जो लोग नेहरू जी को गहराई से जानना चाहते हैं, दक्षिण पंथियों द्वारा फैलाये गए हर झूठ का साक्ष्यों के साथ जवाब ...
शानदार .. 👍
@INCIndia@RahulGandhi
साभार- @aajtakradio
जवाहर लाल नेहरू से जुड़ी हर अफ़वाह की चीर फाड़ : पढ़ाकू नितिन, Ep 18 https://t.co/Mpx28won0L
सरेंडर की ये भयानक सच्चाई सुनिए 👇
ट्रंप के आदेश पर मोदी ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया।
ईरान हमें रुपए में तेल देता था। ट्रांसपोर्ट और इंश्योरेंस फ्री दे रहा था। 60 रुपए का क्रेडिट दे रहा था। इंटरनेशनल कॉस्ट से 12% का रिबेट दे रहा था। ईरान के 60 हजार करोड़ हमारे यूको बैंक में रखे थे जिससे बैंक डूबने से बच गया।
अब ट्रंप के आदेश पर सरेंडर जी अमेरिका से 8 गुना ज्यादा ट्रांसपोर्ट कॉस्ट पर महंगा तेल मंगा रहे हैं।
भारत के नुकसान की कीमत पर भारत की जनता का पैसा माय डियर फ्रेंड डोलांड को सौंप दिया गया। क्यों?
क्योंकि नरेंदर ने सरेंडर कर दिया।
आपको जानकार आश्चर्य होगा कि अयोध्या का हनुमानगढ़ी मंदिर को नवाब सुजाऊद्दोला ने बनवाया था..
वही नवाब सुजाऊद्दोला साहब जिसने गोरखनाथ को पीठ बनाने के लिए जमीन दान की थी..
आज भी हनुमानगढ़ी ही अयोध्या का सब से सिद्ध मंदिर माना जाता है..
क्योंकि हिंदुओं का मानना है कि भगवान राम के सेवक हनुमानजी संकटमोचक हैं..राम के पास पहुंचने का रास्ता हनुमान को माना गया है..
हनुमानगढ़ी मंदिर किस ने बनवाया था?
मंदिर को ज़मीन/पैसे किस ने दिए थे?
जब कुछ मुसलमानों ने हनुमानगढ़ी को तोड़ना चाहा था तब नवाब वाजिद अली शाह ने उन मुसलमानों का क़त्ल कर दिया था..
यह भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है..
मुझे इतिहास में दिलचस्पी है..धर्म के क़िस्से भी इतिहास का ही हिस्सा है..तो धर्म पर भी कुछ 'इल्म हासिल हो जाता है..
अयोध्या का एक भूला हुआ इतिहास..!
जवाहरलाल नेहरु पर सदन से सड़क तक दुष्प्रचार सारी सीमाएं पार कर गया है। मीडिया की ख़तरनाक चुप्पी के बीच जब दुष्प्रचार की अगुवाई ख़ुद प्रधानमंत्री और गृहमंत्री करते हैं तो जनता के लिए इससे बचना कठिन होता जाता है।
इसलिए, इस वीडियो को संभाल कर रखने की ज़रूरत है। नेहरू पर हमले लगातार होते जाएंगे। ध्यान से सुनें और समझें, नागरिक विवेक पर सत्ता कितने ख़तरनाक तरीक़े से हमले कर रही है। इतिहासकार, पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और अमेरिका , जापान में भी विज़िटिंग प्रोफ़ेसर रहे राजमोहन गांधी से इतिहास की सच्चाई को समझिए ।
साभार @_nehruvian
पलवल के जिस घर में 500 वोटर होने का राहुल गांधी ने जिक्र किया, वह भाजपा नेता का है।
दैनिक भास्कर की टीम वहां पहुंची। इस मकान में 501 वोट दर्ज हैं, जबकि वहां एक बच्चे समेत सिर्फ 7 लोग रहते हैं। मकान मालिक शिवराम ने कहा कि वे खुद हैरान हैं कि ऐसा कैसे हुआ।
हमारे लोकतंत्र के साथ यह कुकर्म कौन कर रहा है? किसके निर्देशन में हो रहा है? किसी सवाल का जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा? कोई जांच या कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
काहे के प्रोफेसर हो....इतना भी पता नहीं कि बख्तियार खिलजी तो बिहार गया ही नहीं था....
और नालंदा विश्वविद्यालय जलाने वाला खिलजी नहीं वे ब्राम्हण थे जिन्हें बौध्द धर्म के विस्तार से ख़तरा दिख रहा था।
ब्राम्हणों ने हजारों बौद्ध विहारों को जलाया, नष्ट किया और लाखों बौद्धों का नरसंहार किया।
ये सब ऐतिहासिक तथ्य हैं, वह नहीं जो आप बता रहे हो।
क्या मूर्खता है यह? @ECISVEEP एक सांसद को क्या दो राज्यों में दो बार मतदान की अनुमति होती है? आम नागरिक यह धाँधली करे तो समझ में आता है, पर सत्तारूढ़ @BJP4India का यह सांसद दो कार्ड ले कर, जो बार मतदान कैसे कर लेता है?
और @RakeshSinha01 जी, आप कौन सा उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं? यह मत कहिएगा कि रेनॉल्ड कलम की इंक लगा ली थी उँगली पर!
दिल्ली में वोटिंग का ट्वीट: https://t.co/okplDsAbMq
बिहार के दीघा विधानसभा की महिला वोटर कह रही है
“मैं सुबह 6:30 बजे से आई हुई हूँ.
लिस्ट में मेरा नाम है. BLO ने हमें पर्ची डिजिटली भेजा था
लेकिन वोट नहीं डालने दिया गया
अब मैं बिना वोट दिए वापस जा रही हूँ”
@ECISVEEP डिजिटल पर्ची पर वोट क्यों नहीं?
Big Expose
वोट चोरी का सुबूत आपके सामने हैं । भाजपा का एक कार्यकर्ता पहले 05 फ़रवरी 2025 को दिल्ली विधानसभा चुनाव में वोट डालता है। उसके बाद आज 06 नवंबर 2025 वो बिहार के विधानसभा चुनाव में वोट डालता है। दिल्ली के द्वारका में फिर बिहार के सिवान में वोट डाला।
SIR के बाद ये गुंजाइश ही नहीं बची कि बाहर किसी राज्य में रहने वाले व्यक्ति का वोट बिहार की वोटर लिस्ट में हो और रह जाए ।
फिर ये कैसे हुआ ?
और ऐसे कितने भाजपा कार्यकर्ता हैं जो देश के अलग अलग राज्यों से आकर आज बिहार में वोट डाल रहे हैं ?
#votechorgaddichhod
#VoteChorBJP
#VoteChor
पटना बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के कई पोलिंग बूथ के वोटरों की शिकायत… वोटर लिस्ट से नाम काट दिया गया है, आज पता चला… वोट नहीं दे पाए…
एक बानगी
https://t.co/uJ8geTJ87A
#UmashankarSinghPoint
🚨 वोट चोरी हुई और IITian हार गया!
@ArvindKejriwal के 20,000 वोट EC ने गायब कर दिए…
RTI में पूछा, जवाब मिला: “No info available.” 😡
ये चुनाव नहीं… लोकतंत्र की डकैती थी!
#VoteChori
वंदे मातरम् पर फैलाए जा रहे झूठ का ऐतिहासिक सच
कुछ लोग आज कह रहे हैं “नेहरू और कांग्रेस ने वंदे मातरम् पर कैंची चला दी क्योंकि मुस्लिम लीग और जिन्ना को आपत्ति थी।”
सच ये है कि यह बात अर्धसत्य और भ्रामक है।
बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में ‘वंदे मातरम्’ लिखा था। यह गीत भारत की स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा बन गया लेकिन इसके कुछ छंदों में देवी दुर्गा के रूपक थे।
कई मुस्लिम नेताओं ने माना कि यह धार्मिक प्रतीकवाद उन्हें असहज करता है।
1937 का कांग्रेस अधिवेशन (फैज़पुर):
यहां पंडित नेहरू, मौलाना आज़ाद और रवींद्रनाथ टैगोर सहित कई नेताओं ने निर्णय लिया कि
केवल पहले दो छंद (जो राष्ट्रभूमि की प्रशंसा करते हैं, किसी देवी का उल्लेख नहीं करते)
सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय गीत के रूप में गाए जाएंगे।
यह किसी दबाव में नहीं, बल्कि सर्वधर्म समभाव की भावना से लिया गया निर्णय था।
जिन्ना या मुस्लिम लीग का दबाव नहीं राष्ट्रीय एकता का निर्णय था।
कांग्रेस उस समय भारत को एकजुट रखना चाहती थी, जबकि मुस्लिम लीग देश को बांटने की राजनीति कर रही थी।
अगर कांग्रेस उस वक्त संकीर्ण दृष्टि अपनाती, तो शायद आज भारत का स्वरूप ही कुछ और होता।
24 जनवरी 1950 संविधान सभा का ऐतिहासिक निर्णय डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने संविधान सभा में घोषणा की “वंदे मातरम्, जो हमारी स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा रहा है, उसे ‘जन गण मन’ के समान सम्मान प्राप्त होगा।”
यानि एक को राष्ट्रगान, दूसरे को राष्ट्रीय गीत का समान दर्जा दिया गया।
यह भारत की समावेशी भावना की मिसाल है।
“कैंची” नहीं, बल्कि सम्मानपूर्वक संतुलन बनाया गया।
नेहरू या कांग्रेस ने गीत को ‘काटा’ नहीं उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि देश के हर नागरिक को अपने राष्ट्र-प्रतीक से जुड़ने का अधिकार मिले, चाहे उसका धर्म कुछ भी हो।
यही एक सच्चे धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक राष्ट्र की पहचान है।
आज जो लोग झूठ फैला रहे हैं, उन्हें इतिहास पढ़ना चाहिए। ‘वंदे मातरम्’ का सम्मान कांग्रेस ने ही तय किया, ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान घोषित किया,और दोनों को संविधान में समान गरिमा दी।
भारत माता की जय लेकिन सबकी भारत माता, न कि किसी एक धर्म की।