जेवर की अत्यंत भयावह घटना पर सन्नाटा और भी भयावह है।
जेवर में एक नाबालिग बच्चे की बेरहमी से हत्या हुई है। हत्या के पहले उसके साथ अमानवीयता की बात भी स्थानीय लोगों द्वारा कही गई है।
अपराधियों को फांसी की सजा से कम कुछ भी मंजूर नहीं।
सपा सरकार में बना शानदार लखनऊ आगरा एक्सप्रेसवे बनाम भाजपा सरकार में बना बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की तुलना देखिये सुनिए और साझा कीजिए।
भाजपा सरकार ने जो सड़कें बनाई हैं वो भ्रष्टाचार युक्त हैं, सुविधाएं नहीं हैं, खतरनाक हैं, जानलेवा हैं और भाजपा सरकार ने सड़क बनाने के नाम पर सिर्फ जनता का पैसा लूटा है।
संविधान द्वारा दिये गये आरक्षण के अधिकार को मारनेवाली भाजपा का अंहकार आज अंदर-ही-अंदर बहुत ख़ुश होगा कि सदियों से वंचित, शोषित, पीड़ित समाज आज भी उनके वर्चस्व के आगे दंडवत होकर याचना कर रहा है लेकिन अपने प्रभुत्व के घमंड में चूर भाजपाई और उनके संगी-साथी ये भी याद रखें कि जब आग्रह हार जाता है, तब इंसान सीमाएं लांघ जाता है।
अब क्या सत्ताधारी राजनीति को पाताल से भी नीचे ले जाएंगे। देश के राजनीतिक इतिहास का ये एक घनघोर ‘काला दिन’ है। आज पूरा देश आक्रोशित है और लोकतंत्र व्यथित।
चुनावी व्यवस्था के नाम पर केंद्रीय बलों का जो दुरुपयोग मतगणना में आज बंगाल में हुआ है, ठीक वैसा ही घपला 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में अधिकांश जगह किया गया था, जिसकी साक्षात गवाह कन्नौज की विधानसभाएं थीं। फिर इसी निंदनीय मॉडल को फ़र्रुख़ाबाद के 2024 लोकसभा चुनाव में दोहराया गया था।
सब जानते हैं क्या हुआ है और सच क्या है और जनमत की खुली लूट कैसे हुई है।
घोर, घोर, घोर निंदनीय!!!
नोएडा में औद्योगिक असंतोष से जन्मे प्रदर्शन के प्रति टकराव का नहीं सुलझाव का रास्ता निकालना चाहिए। प्रदर्शनकारियों व उनके मुद्दों के समर्थन में एकजुटता दिखानेवाले और शांति की अपील करनेवाले युवाओं, एक्टिविस्ट पर लगाए गए फ़र्ज़ी मुक़दमे हटाए जाएं और उनकी तत्काल रिहाई हो।
भाजपाई इतिहास पढ़ें और समझें जनशक्ति से बड़ी कोई ताक़त न कभी हुई है न कभी होगी।
स्टार प्रचारक उप्र के मुख्यमंत्री जी यदि चुनावी पर्यटन से लौट आएं हों तथा उप्र के रीलजीवी स्वास्थ्य मंत्री जी अगर ‘भ्रामक-भ्रमण’ से लौट आएं हों (जिस रील में उन्होंने दिल्लीवालों की बात तो करी परंतु जानबूझकर लखनऊवालों का नाम तक नहीं लिया) तो वो प्रदेश की राजधानी के सबसे प्रतिष्ठित अस्पताल की बदहाली और जनता की दुर्गति देख लें। इनसे कुछ करने की उम्मीद न पहले थी, न अब है। ये तो बस देख लें कि जनता आपसे अच्छी है, जिसकी रील भ्रामक नहीं, सच में सच्ची है।
मुख्य जी से आग्रह है कि अब इस साहसी शिकायतकर्ता के ख़िलाफ़, आप अपनी ‘हाता नहीं भाता’ की नीति को लागू करके कोई बुलडोज़री कार्रवाई नहीं करेंगे और न ही ‘5 बड़ा या 7’ वाले प्रदेश अध्यक्ष जी से नोटिस भेजने को कहेंगे।
मुख्यमंत्री जी के सूचनार्थ : ये वीडियो एआई जेनरेटेड नहीं है और न ही स्वास्थ्य मंत्री जी की रील एआई जेनरेटेड थी।
हम नहीं चाहते हैं कि समाज के बीच आग जले। हम चाहते हैं समाज में सौहार्द की फुहार हो। हमारी सकारात्मक राजनीति की स्वस्थ परंपरा ने हमें यही सिखाया है। इसीलिए हम भाजपा विधायक श्रीमती अनुपमा जायसवाल जी से मिलने गये और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करके आएं हैं। राजनीति अपनी जगह है और मानवीय संबंधों का महत्व अपनी जगह।
सद्भाव बना रहे, सौहार्द बना रहे!
गाजीपुर के पीड़ित परिवार को हमारे पूरे पीडीए समाज ने मिलकर, एक समुदाय के रूप में 5 लाख रुपये एकत्र कर, इस कठिन घड़ी में अपने प्रतिनिधि मंडल के माध्यम से जो मदद की है, वो दरअसल पीडीए की एकता का प्रतीक है।
इससे पीड़ित पीडीए परिवार के रूप में इनका मनोबल बढ़ेगा और ये विश्वास भी कि वर्चस्ववादियों के अत्याचार के ख़िलाफ़ समस्त पीडीए समाज एकसाथ संघर्ष कर रहा है और करता रहेगा।
हम पीडीए के मान-सम्मान, समान अवसर -स्थान और चतुर्दिक उत्थान के लिए संघर्ष करते रहेंगे, इसमें साल लगे या सदी!
पीड़ा ही वो धागा है, जिससे पूरा पीडीए समाज जुड़ा है।
#गाजीपुर_की_बेटी
#जो_पीड़ित_वो_पीडीए
दावा था रात के बारह बजे बहन-बेटियां बेख़ौफ़ गहने पहनकर निकलने के लिए आज़ाद हैं लेकिन इसके ठीक विपरीत भाजपा कुराज में सच ये है कि दिनदहाड़े ‘बहन-बेटियां’ अपनी जान जोखिम में डालकर अपने गहनों को लूटेरों से बचाने के लिए भिड़ने के लिए मजबूर हैं।
भाजपा जाएगी, लूट ख़त्म हो जाएगी!
#बुरे_दिन_जानेवाले_हैं
प्रतापगढ़ में एक दलित बेटी की जघन्य हत्या का समाचार बेहद दुखद और निंदनीय है।
सवाल ये है कि उप्र में ‘पीडीए बेटियों’ की हत्या का सिलसिला क्यों जारी है? क्या भाजपा सरकार की महिला सुरक्षा की बातें खोखली हैं या फिर महिला सुरक्षा में भी भेदभाव हो रहा है।
जब घुमंतू माननीय को चुनाव प्रचार से फ़ुरसत मिल जाए तो अपने उत्तर प्रदेश की बेटियों की दुर्दशा पर भी नज़र डालिएगा, वैसे अन्याय और अत्याचार के सिवाय आपसे प्रदेश की किसी बहन-बेटी-माता को कोई उम्मीद है नहीं।
हम फिर से याद दिला दें कि कानपुर की एक बेटी आपसे मिलने का समय माँगते-माँगते सार्वजनिक रूप से हताशा व्यक्त कर चुकी है। एक असंवेदनशील व्यक्ति के रूप में आप जो चाहे करें परन्तु अपने पद का मान रखने के लिए, उस बेबस बेटी से ज़रूर मिलें। ये पूरे प्रदेश की माँग है, कम-से-कम जाते समय तो कोई अच्छा काम कर जाइए।
वर्चस्ववादी कब समझेंगे ग़रीब के जीवन का भी महत्व होता है। किसी की भी जान की क़ीमत कभी पैसा नहीं हो सकता।
इस बात की जाँच हो कि भाजपा के ये कौन लोग हैं जो समझाने के नाम पर दबाव बना रहे हैं और वो भी पुलिस की साक्षात् उपस्थिति में। इसकी भी जाँच हो कि हत्या के मामले में कौन पुलिसवाले सक्रिय होकर पीड़ित पक्ष को एक तरह से धमका रहे हैं और पीड़ित पक्ष का साथ देनेवालों पर ही झूठे मुक़दमे लगा रहे हैं। ये घोर अत्याचार है।
इस तरह से पीडीए समाज की एक जान के बदले पैसे देने की सौदेबाजी एक हत्या के बाद एक और मानसिक हत्या है।
न्याय हो!