बस इतनी सी आरज़ू है दिल में
मेरी नज्में उनके होंठों पे ठहर जाए
रब को ये दुआ कबूल हो जाए
हम भी उन्हें मकबूल हो जाए
मेरी बंदगी में इतना असर हो जाए
उनके सारे ख्वाब मुकम्मल हो जाए
तो ये जिंदगी सफल हो जाए |
तुम्हारे लबों को चूमने से पहले
तुम्हारा शर्म से लाल हो जाना
और धत्त ! कह के पलकें मुंद लेना
फिर शिद्दत से अपनी ओर खींच लेना
अपनी क़यामत बाँहों में भींच लेना
तुम्हारे दिल का धड़कना
मेरा बेकाबू होके बहकना
तुम्हारे सांसों का सुलगना
तुम्हारे जिस्म का पिघलना
1/2
अब तो बस आखिरी रस्म अदायगी है
इस रिश्ते का जनाजा उठ गया है
लाओ माचिस लगा दो आग
यादों का सर-ओ-सामाँ जुट गया है
सुना जब के है किसी तकलीफ में वो
आदतन दुआ में हाथ उठ गया है |
1/3
पहले सा बे-तकल्लुफ न मिले, ना कुछ कहे
लगता है वो शख्स मुझसे रूठ गया है
अब क्यूं करें किसी साहिल की उम्मीद
जब माझी से पतवार छूट गया है
चले थे जिस मंजिल की तलाश में
उस सफर का कारवां लूट गया है
2/2
अजीब सी टीस उठती है
पता नही कहां पर क्या टूट गया है
तन्हाइयों का आलम है
जब से उसका साथ छूट गया है
अजीब सी खलिश है हवाओं में
सीने में सांस घुट सा गया है
अब नहीं है उसके जुल्फ़ों की छांव
वो घना साया सर से उठ गया है
1/1
बिते हूए कल का क्या रोना धोना
बेहद जरूरी है वर्तमान में जीना
सोंचो! आज और अभी क्या है करना
आगे बढ़ो, मुश्किलों से क्या डरना
अतीत के तजुर्बे से सीखो
गलतीयां जो हो गयीं,उन्हें फिर न दुहराना
आने वाले कल से रखो इतनी सी आशा
खूद की हो बेहतर दिशा और दशा |
चाहा जरूर, पर कहा नही
शायद कभी मै सहज रहा नही
वैसे तो कितना कुछ कहना था
पर हमेशा इक झिझक सी रही
ना जाने कितनी सारी आशंकाएं
ना जाने कितनी सारी असुरक्षाएं
ना जाने कितनी सारी दुविधाएं
मन के किसी कोने में दबी ही रहीं 1/1
नित दिन राह निहारूं
सांवरीया के आने को
नैना तरसे, जिया तड़पे
उनकी एक झलक पाने को
सांसों की डोरी कहीं टूट न जाए
उम्मीदों का दीया कहीं बुझ न जाए
ओ रे कागा,ओ री कोयल
ओ रे पपिहा,ओ रे बादल
उनके आने की कोइ आहट तो दो
झूठा ही सही, थोड़ा राहत तो दो |
ना ही कोई गिला-शिकवा
ना ही किसी से शिकायत है
ना ही कहीं उठना बैठना
ना ही किसी से रफ़ाक़त है
तुम्हारे जाने के बाद
मुसलसल खामोश रहता हूं
लफ्जों से जैसे अदावत है
हर एक शय से बेखबर रहता हूं
सारे ज़माने से जैसे बग़ावत है |