T 5812 - Guru poornima Greetings
एकमप्यक्षरं यस्तु गुरुः शिष्ये निवेदयेत्।
पृथिव्यां नास्ति तद्द्रव्यं यद्दत्त्वा ह्यनृणी भवेत् ।।
*(स्कन्दपुराणम्,४४/१७)*
अर्थात्-
गुरु शिष्य ��ो जो एकाध अक्षर भी कहे,तो उसके बदले में पृथ्वी का ऐसा कोई धन नहीं,जो देकर गुरु के ऋण में से मुक्त हो सकें।
गुरुपूर्णिमा पर नमन🙏🏻
आदर और सम्मान सहित 🛕🙏🏽