#Repost
"@anubhavsinha, in #Assi, isn't subtle, but he isn't interested in being subtle. What is fascinating is that he finds a cinematic form that matches his bluntness."
REVIEW:
@taapsee#KaniKusruti
https://t.co/EtfUx97QX6
#Assi - 3.75 stars. @taapsee and Anubhav Sinha reunite for a hard-hitting, powerful film that boldly interrogates rape culture and its impact on the society. As much as the film relies on shock and trauma of a victim to discuss the cruelty of the crime, it is also deeply, deeply psychological. Highly recommended watch.
Take some time out and watch Assi. You won't regret it. Spectacular performance by everyone @taapsee@Mdzeeshanayyub, kani kusruti. And big thanks to @anubhavsinha sir for making it uncomfortable at places, it was much much needed.
#Assi
#Assi what a brilliant work by @anubhavsinha 🔥
This movie is raising the right questions on society, reminding us how somewhere, we failed to create a safe, conscious environment for our girls.
It's a must watch. 🤘
What a performance by @taapsee@Mdzeeshanayyub 👏 👏
आज मैने #Assi फिल्म देखी, फिल्म देखने के कई घंटे बाद अभी तक आशंकित हूं, ऐसी घटना को देखकर लगता जानवर इंसान बन गए, और इंसान जानवर 😞 ! एक बार फिर साबित कर दिया कि @taapsee सिर्फ एक अभिने��्री नहीं, बल्कि किरदार ��ो जीने वाली कलाकार हैं,
#ASSI is more than a hard-hitting tale: very distinctive cinematography & editing, brilliant, quietly strong performances by @KaniKusruti & @Mdzeeshanayyub as two impressively decent people, a fiery, moving role by @taapsee, and great side characters overall. But most of all 1/2
#Assi movie is about -
- brutal gang rape of a lonely woman in night
- trauma, the victim goes through
- false theft report of the vehicle used in crime to save culprits
- substitution and destruction of the DNA samples of victim
- missing police station's CCTVs footage
- no guilt shown by the accused persons
And this is the face of society we are living in 😢
@anubhavsinha@taapsee
अस्सी,एक फिल्म नहीं एक वेक ऑप काल है। जिसे सभी को सुनना चाहिए।
क्यों देखें-
क्योंकि दो घंटे की इस फिल्म में आप किरदार,समाज,कहानी,सिस्टम सभी के साथ जुड़ते चले जाएंगे और अंत में आप एक विचार के साथ निकलेंगे। एक विचार जो आपको अंदर से झकझोर देगी। खुद से सवाल पूछने पर मजबूर कर देगी कि क्या रेप जैसे विभत्स अपराध को जड़ से समाप्त करने में हम कैसी भूमिका निभा रहे हैं? कहीं पुरुष्त्व के दंभ में कहीं इस जड़ को कहीं अनजाने में उगने का खाद तो नहीं दे जाते हैं?
हर 20 मिनट पर देश में एक रेप होता है। इस बात को केंद्र में रखते हुए कहानी को वहां से आगे बढ़ायी गयी है जहां अक्सर ऐसे संजीदा विषय पर छोड़ दिया जाता है। क्या रेप के बाद पीड़िता की जिंदगी समाप्त हो जाती है? उसे समाज में स्वीकार्य नहीं किया जाएगा? क्या रेप का बदला बस हत्या है? आंख के बदले आंख सही न्याय है? तमाम मसलों पर बहुत ही व्यावहारिक चश्मे से फिल्म मेंदेखा गया है।
"ओवर द टॉप" गये बिना अनुभव सिन्��ा जी की यह फिल्म अपनी गति से चलती है। फिल्म में जबरन किसी को हीरो,विलेन बताने की कोशिश नहीं की गयी। बहुत ही संजीदा तरीके से बताया गया कि रेप एक सामाजिक दोष जिसके लिए सरकार-पुलिस-प्रशासन से अधिक समाज को अपनी सोच में झांकने की जरूरत है,परिवार के मंथन करने की जरूरत है। जब पिता-मां को पता चलता है कि रेप में उसका बेटा भी शामिल है तो उसके माता-पिता के अंदर अपराध और संतान के बीच कशमकश को बहुत प्रभावी तरीके से दिखाया गया। बिना कहे संदेह है कि हर रेप करने वाला किसी का बेटा होता होगा। रेप के बाद रेपिस्ट के लिए तुरंत मॉब लिचिंग जैसी मांगों की व्यावहारिक दिक्कतों को संजीदा से समझाया गया। फिल्म देखते हुए आप कह���नी का हिस्सा बन जाते हैं।
अरसे बाद ऐसी सिनेमा है जिसमें किरदार एक्टर पर हापी है। तापसी पन्नू कोर्ट रूम में फिर शानदार रही। कनि, कुमुद मिश्रा, जीशान अयूब खान, रेवती ने भी अपने किरदार में शानदार काम किया है। महफिल लूटी है छोटे बच्चे ने। चंद सीन में ही उस बच्चे ने बिना कुछ कहे छाप छोड़ी है। कई डायलॉग दर्शकों पर अमित छाप छोड़ देते हैं। खासकर जब प्रिंसिपल रेप पीड़िता टीचर से कहती है- स्कूल के स्टूडेंट पास हो गये लेकिन स्कूल फेल हो गया। या तापसी का संवाद-अगर महिलाएं अपनी पर आ जाए तो दुनिया जला दे लेकिन वह ऐसा नहीं करेगी।
ऐसे समय जब हम कहते हैं कि फिल्में समाज से अपना टच खो रही है,अच्छी फिल्में नहीं बन रही,जब अस्सी आयी है तो उसे देखें ताकि फिल्मकार ऐसी और फिल्म बनाने का साहस दिखाएं।फ��ल्म अंत में उदय प्रकाश की पंक्ति से संदेश देकर जाती है-
आदमी मरने के बाद कुछ नहीं सोचता।
आदमी मरने के बाद
कुछ नहीं बोलता।
कुछ नहीं सोचने
और कुछ नहीं बोलने पर
आदमी मर जाता है।
आदमी मरने के बाद कुछ नहीं बोलता।
आदमी मरने के बाद कुछ नहीं सोचता।
कुछ नहीं बोलने, कुछ नह���ं सोचने से आदमी मर जाता है!
@taapsee ने उदय प्रकाश की कविता सुनाई। मौका था @anubhavsinha की फिल्म #Assi के प्रीमियर का। रेप जैसे संवेदनशील मसले पर आज के समाज की सच्चाई को सामने लाती एक फिल्म। तापसी के शब्दों में आप फिल्म एंजॉय तो नहीं करेंगे पर आपको सोचने पर मजबूर जरूर करेगी। ओटीटी का इंतजार मत कीजिए बल्कि ऐसी फिल्मों को थिएटर में जाकर देखिए। पूरी टीम को बधाई।
आदमी मरने के बाद कुछ नहीं बोलता।
आदमी मरने के बाद कुछ नहीं सोचता।
कुछ नहीं बोलने, कुछ नहीं सोचने से आदमी मार जाता है!
@taapsee steals the show at the #Assi screening! All the best to @anubhavsinha & team!
कुछ घंटे पहले जो फिल्म देखकर निकले हैं उसका प्रभाव लंबे समय तक रहने वाला है। अब तक कई फिल्में देखी हैं जिनमें लिखा होता है Based on true events लेकिन इसमें लिखा आया Based on Everyday News...क्योंकि ये हर दिन घट रहा है हर 20 मिनट में घट रहा है।
रेप सर्वाइवर पर बनी ये फिल्म झक��ोर देने वाली है।आप इसे देखेंगे तो समझेंगे कि एक महिला के साथ जब ये होता है उसके बाद हमारी पुलिस हमारी न्याय व्यवस्था हमारा समाज उससे किस तरह पेश आता है...।
मुझे लगता इस फिल्म का प्रचार और प्रमोशन फिल्म बनाने वालों से ज्यादा हम आम लोगों को करना चाहिए क्योंकि ये बेहद जरूरी फिल्म है।
फिल्म का नाम अस्सी है जिसे @anubhavsinha ने बनाया है। वैसे तो फ़िल्म में सबने अच्छा काम किया है लेकिन @taapsee और Kani Kusruti ने किरदा��ों को जैसे जी लिया है बहुत शानदार काम किया है कई बार ऐसा लगा कि ये एक्टर नहीं हैं बल्कि इनके साथ ये हो रहा है और ये उसपर रिएक्ट कर रही हैं।
दिल्ली में फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग थी जहां फिल्म के कलाकारों के साथ फिल्म देखी...फिल्म देखकर निकले तो किसी ने पूछा कि कैसी फिल्म है...तो मुंह से निकला - जरूरी फिल्म है...जिसे 20 फरवरी को रिलीज होने पर फिर से देखा जाएगा...
#Assi