How many more massacres will it take for the world to stop this genocide
This was from earlier today, Israeli war planes bombed a house full of people causing death and destruction.
This needs to stop
Ceasefire now
The Israeli army committed a new massacre in Dair Al-Balah city
People are still under the rubble and the neighbour are still trying to get them out or collect their flesh.
@KTRBRS Sir we respect you as the only dynamic educated leader of telengana no body can compete u........let us see how can others do more than you......
Israel just bombed the 3rd oldest church in the world murdering a few more scores of Palestinians. For those of you still in denial of a genocide, we have community members with 30-40 relatives wiped out in Gaza. It’s not just Muslims, it’s everything and everyone Palestinian.
@GAUAHAR_KHAN Those who are shouting without knowing the history let them shout۔۔۔۔when Britishers ruled us they would have shown pity to them also۔۔۔۔۔۔
@RubikaLiyaquat Janta ki b do aankhe rubika ji .......agar aap jaise patrekaro ka talent desh k un muddo par baat kare jiss se desh ki taraqqi ho to aaj aap blacklist mai na hoti
ट्रेन में मुसलमानों को पहचान कर हत्या करने की घटना फासीवाद और नरसंहार की मानसिकता की उपज
- जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने गृह मंत्री को लिखा पत्र, कहा- राजनीतिक उद्देश्यों से ऊपर उठकर राष्ट्रसेवा को अपनी प्राथमिकता मानते हुए सख्त कदम उठाएं और दंडात्मक कार्रवाई करें
नई दिल्ली, 01 अगस्त 2023। जमीअत उलेमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने ट्रेन में एक आरपीएफ कांस्टेबल के जरिए अपने वरिष्ठ एएसआई टीकाराम और तीन अन्य मुसलमानों की पहचान कर उनकी हत्या करने पर अपना गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है। इस घटना को उन्होंने फासीवाद और नरसंहार की मानसिकता की उपज बताया है।
मौलाना मदनी ने इस संबंध में देश के गृह मंत्री को एक पत्र भेजा है और घटना की प्रवृत्ति और इसकी गंभीरता की ओर ध्यान आकर्षित किया है। मौलाना मदनी ने अपने पत्र में कहा है कि यह कोई अलग-थलग कार्रवाई नहीं है बल्कि वर्षों से जारी नफरती अभियान का परिणाम है, जिसमें देश के सत्ताधारी राजनीतिक दल के नेता, यहां तक कि मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण मंत्री और टीवी मीडिया भी समान रूप से भागीदार हैं। इन सभी ने देश में जो नफरत का बीज बोया है, उसका खामियाजा आज देश की मासूम जनता को जान देकर भुगतना पड़ रहा है।
मौलाना मदनी ने कहा कि बार-बार धर्म संसदों और प्रदर्शनों में मुसलमानों के नरसंहार का नारा लगाने वाले खुद को आजाद और कानून से ऊपर समझ रहे हैं और उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई भी नहीं की जाती, जिसके कारण वह अब पूरे हौसले के साथ ऐसे नरसंहार पर आधारित नारे लगा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण हरियाणा के भिवानी का है, जहां बीते कल कथित तौर पर बजरंग दल के कार्यकर्ता यह नारा लगा रहे थे “मुल्ले काटे जाएंगे, राम राम चिल्लाएंगे“। इसी तरह टीवी मीडिया पर घृणा आधारित नारों के साथ कार्यक्रम आयोजित होते हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से दक्षिणपंथी संगठनों के कार्यकर्ता मुसलमानों को मारने और सबक सिखाने की धमकियां देते हैं, लेकिन देश पर सत्तासीन जिम्मेदार लोग उनकी तरफ आंखें बंद किए हुए हैं, जिसका स्पष्ट परिणाम है कि अब यह नारे चरितार्थ होते प्रतीत हो रहे हैं।
मौलाना मदनी ने अपने गहरे दुख एवं चिंता को व्यक्त करते हुए गृह मंत्री का ध्यान आकर्षित किया है कि वह देश में नफरत के इस वातावरण की गंभीरता से समीक्षा करें और राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर उठकर राष्ट्र की सेवा को अपनी प्राथमिकता मानते हुए कठोर कदम उठाएं और दंडात्मक कार्रवाई करें।
मौलाना मदनी ने कहा कि रेल द्वारा देश की जनता लाखों की संख्या में रोजाना यात्रा करती है। उनकी जान-माल की सुरक्षा रेलवे की जिम्मेदारी है, लेकिन जब रेलवे के सुरक्षाकर्मी ही नफरत के जहरीले वातावरण से प्रभावित होकर निर्दोष सवारी पर गोली चलाएं तो इससे ज्यादा शर्मनाक बात और क्या हो सकती है? इस संबंध में एक पत्र भारत सरकार के रेल मंत्री को भी प्रेषित किया गया है और तत्काल कार्रवाई के लिए उनका ध्यान आकर्षित किया गया है। इसके साथ ही यह मांग की गई है कि न्याय को सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र, पारदर्शी और त्वरित जांच कराएं और मृतकों को उचित मुआवजा दिया जाए।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि हम राजनीतिक नेताओं से आग्रह करते हैं कि वह अपने प्रभाव और मंच का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करें और नफरत भरे भाषण या विभाजनकारी विचारों को फैलाने से बचें। राजनीतिक स्वार्थ के लिए धार्मिक भावनाओं का शोषण न केवल नैतिक रूप से निंदनीय है बल्कि यह हमारे लोकतांत्रिक और विविधतापूर्व समाज की नींव को भी कमजोर करता है। साथ ही सिविल सोसायटी के संगठनों, धार्मिक नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और मीडिया पर इस बात के लिए जोर देते हैं कि नफरती अभियान के खतरों के बारे में जागरूकता पैदा करें और संवाद एवं शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए मिल कर काम करें।
गोदी मीडिया दस साल से ज़हर फैला रहा है। विपक्षी दलों को अपना आलस्य छोड़ जनता तक पहुँचने के लिए दूसरा रास्ता खोजना चाहिए। कार नहीं है तो पैदल चलिए। आप इन्हें जितना भी विज्ञापन दें, इनके एंकरों को इंटरव्यू दें मगर चुनाव में सिंगल कॉलम स्पेस नहीं मिलने वाला है। 2019 का ही कवरेज़ देख लीजिए। 2024 में भी यही होगा। विपक्षी दलों के नेता इन चैनलों में कैसे जा सकते हैं? सभी को एक प्रतिनिधिमण्डल बना कर मुकेश अंबानी के पास जाना चाहिए। कहना चाहिए कि उनके चैनल पर बैठ दो एंकर ज़हर फैला रहे हैं। आप क्यों इन एंकरों के सामने लाचार हैं? क्या ये एंकर अंबानी समूह के मालिक हैं? NBDSA ने फ़ाइन किया है। सुप्रीम कोर्ट की कई टिप्पणियाँ हैं। मुकेश अंबानी का नाम लेकर अपील करनी चाहिए। फिर जनता के बीच जाकर हर भाषण में इन चैनलों और अख़बारों के बारे में बताना चाहिए। हर रैली और हर पदयात्रा में। अगर इतना नहीं कर सकते तो फिर घर में रहिए। जो गोदी मीडिया से नहीं लड़ रहा है वो लड़ ही नहीं रहा है। बाक़ी सब ख़ानापूर्ति है।