#DarulUloomDeoband
دار العلوم دیوبند کو بنے ہوئے 155 سال مکمل ہوچکے ہیں ماشاء اللہ
اللہ تعالیٰ دار العلوم کو دشمنوں کے شر و فتنہ سے محفوظ رکھے
दारुल उलूम देवबंद को बने हुए 155 साल मुकम्मल हो चुके हैं
अल्लाह दुश्मनों की बुरी नजर से बचाए रखें
(30 मई 1866)
छोड़िए, अच्छा हूं, ख़राब हूं मैं, कुछ नहीं हूं या बेहिसाब हूं मैं,
मेरा सफ़र है, मेरी जद्दोजहद, अपने जैसा हूं, लाजवाब हूं मैं...
सुबह का सलाम...........🌹
#SubahKaSalam
शैख़ सादी कहते हैं,
कि दोस्ती का रिश्ता बहुत बेहतर है,रिश्तेदारी से क्यों कि रिश्तेदारों से खून का रिश्ता होता है,लेकिन दोस्तों से रिश्ता दिल से होता है।और दिल सारे जिस्म को खून पहुँचाता है।❤️#HappyFriendshipDay2027
इस्लाम में ऐसे किसी शोर-शराबे या दिखावे की इजाज़त नहीं है। इमाम हुसैन की कुर्बानी हमें ज़ुल्म के ख़िलाफ़ खड़े होने और सच्चाई के रास्ते पर चलने का पैग़ाम देती है लेकिन अफ़सोस इस बात का है कि आज मुसलमानों की एक बड़ी आबादी को लगता है कि मुहर्रम नाच-गाने और तमाशे का त्योहार है।
हज़रत इमाम हुसैन उस इंक़लाब का नाम है जो लाखों की भीड़ के सामने अपने 72 लेकर खड़े हुए। लाखों की भीड़ ने हर ज़ुल्म किया लेकिन इमाम ने सर नहीं झुकाया। झुकाते भी कैसे अपने नाना हज़रत मुहम्मद ﷺ के दीन पर जो खड़े थे और जो उनके दीन पर होगा वो झुकेगा नहीं।
#TheMessageOfKarbala
नबी करीम ﷺ ने फरमाया:
जिसने हसन और हुसैन से मुहब्बत की उसने मुझसे मुहब्बत की, और जिसने इन दोनों से दुश्मनी (बुग़्ज़) की उसने मुझसे दुश्मनी की।
~ इब्ने माजा 143
#TheMessageOfKarbala
जो हमारी बदबख्त कौम मुहर्रम के दिन मेले और ढेले में अपने घर की औरताें के साथ घूमने जाते हैं उनका और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम से दूर दूर का कोई वास्ता नहीं ये लोग इसे अपने मनोरंज का त्योहार समझ लिए हैं।
#TheMessageOfKarbala
अगर आप इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के शहादत पर ढोल बजा कर खुद पर फख्र महसूस कर रहे हो, तो अपने घर वालो के मरने पर ढोल क्यों नही बजाते..?
#TheMessageOfKarbala
नबी करीम ﷺ ने फरमाया:
जिसने हसन और हुसैन से मुहब्बत की उसने मुझसे मुहब्बत की, और जिसने इन दोनों से दुश्मनी (बुग़्ज़) की उसने मुझसे दुश्मनी की।
~ इब्ने माजा 143
#TheMessageOfKarbala
अगर आप इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के शहादत पर ढोल बजा कर खुद पर फख्र महसूस कर रहे हो, तो अपने घर वालो के मरने पर ढोल क्यों नही बजाते..?
#TheMessageOfKarbala
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने कहा था।
"अगर 61 हिजरी से लेकर अब तक के आंसू को जमा किये जाएं तो आंसुओं का सैलाब आ जाएगा। कर्बला में हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की कुर्बानी इतनी अज़ीम क़ुर्बानी थी कि उस क़ुर्बानी ने सच और हक़ के लिए लड़ने वालों को नई राह दिखाई"
#TheMessageOfKarbala