🕉️🙏सम्यग्ज्ञान के भेद 🙏🕉️
मति ज्ञान
इंद्रिय और मन की सहायता से होने वाला जीव और अजीव विषयक ज्ञान मति ज्ञान है
श्रुत ज्ञान
मति ज्ञान के उपरांत जो चिंतन मनन द्वारा विशेष ज्ञान होता है उसे श्रुत ज्ञान कहते हैं
अवधि ज्ञान
इंद्रिय और मन की सहायता के बिना जो ज्ञान रुपी पदार्थ को प्रत्यक्ष जानता है वह अवधि ज्ञान है,यह ज्ञान एक निश्चित अवधि सीमा तक ही होता है
मन:पर्यय ज्ञान
अवधि ज्ञान की तरह बिना किसी बाह्य आलंबन के दूसरे के मन में रहने वाले रुपी पदार्थो को जानने वाला ज्ञान मन:पर्यय ज्ञान है
फिलहाल तो भारत में Hindu Vs Jain शुरू है....
पुरातन "निगंथ" अलग थे.... बुद्ध के समय के....
आज के "जैन" लोग खुद को उनसे जोड़ के देखते है.... आचरण से तो मुझे नहीं लगता....
लोग पुरानी बातों को लेकर "भूमिहार" को "वर्णसंकर" बोलता है लेकिन वर्तमान में "यादव" "वर्णसंकर" जैसा बातें करता है कभी बोलता है हम क्षत्रिय हैं तो कभी बोलता है हम शूद्र हैं। 🤦 #३ह
गणतंत्र में राजनीति राजपूतों की प्राकृतिक और वंशागत भूमिका है। सदियों से शासन, रक्षा और नेतृत्व उनकी विरासत रही है। आज का लोकतंत्र उसी परंपरा का विस्तार है, जिसमें वे अपनी क्षमता से राष्ट्र की दिशा तय कर सकते है
जिस प्रकार कुम्हार मिट्टी का बर्तन बनाता है, नाई बाल संवारता है। 💁
सरकार का यह विकास प्रगति नही बल्कि प्रगतिशील समाज के लिए विफलता का प्रमाण है।सच्चा विकास तब होता है जब स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन हो और युवा को अवसर उपलब्ध कराए। विकास के आंकड़े- सड़क, पुल, अस्पताल, स्कूल- निस्संदेह सराहनीय है किंतु यदि युवा को घर के पास काम नही मिलेगा तो वो"❓"
"मन का हारा हार, मन का जीता जीत"
संक्षेप में यह कहता है:
> जीवन की हर लड़ाई पहले मन के भीतर लड़ी जाती है।
> बाकी सब तो बस उस लड़ाई का परिणाम मात्र है। ☕