Rahul Gandhi should have tweeted or given a byte regarding Capt. Smit Machchhar's bravery...: @viveksilas
This is the same party that called 26/11 'RSS ki Saazish': @pradip103 slams Congress
@TheNewshour | @NavikaKumar
SC has posed a question; it has not passed a judgement. Let ECI clarify what SC has asked. Everything will be clear...: @HiteshJ1973
CEC should come out and clarify; the people want to know what's happening...: @viveksilas@TheNewshour | @NavikaKumar
हम सबके लिए प्रेरणास्रोत, अदम्य साहस और शौर्य की प्रतीक महान वीरांगना रानी दुर्गावती जी की जयंती पर कोटि कोटि नमन!
पीडीए सरकार आने पर हम वीरांगना रानी दुर्गावती जी की सोने की तलवार वाली स्वर्णिम प्रतिमा रिवर फ़्रंट पर लगाने का संकल्प लेते हैं।
मुख्यमंत्री जी की निकासी का समय आ गया लेकिन लखनऊ में अपने घर के पास ही के क्षेत्र में जलभराव की निकासी नहीं कर पाये।
जिन्होंने कभी घर बनाया-बसाया हो वो ही परिवार के लिए घर का महत्व समझ सकते हैं।
दवाई कंपनियों से कमीशन की शक्कर लेकर शिकंजी बनाकर गटक जानेवाली भाजपा सरकार दवाई कंपनियों पर क्या शिकंजा कसेगी।
जो भाजपाई ‘चंदा-चढ़ावा-दान’ चोरी तक करने में नहीं शर्माते हैं, जो निवेश के लिए भी एडवांस कमीशन खाकर अपने काले कारनामों को ख़ुद ही क्लीन चिट दे देते हैं, दूसरों की ‘केयर’ के नाम पर जमा फ़ंड अपने नाम करके उसे ‘ऑडिटफ़्री’ घोषित कर लेते हैं, वो क्या किसी दवाई कंपनी को छोड़ेंगे? जनता ख़ुद सोचे और बताए।
जिनके कमीशन ने ही दवाई की क़ीमत है बढ़ाई
वो हैं मरीज़ों से दगा करनेवाले ‘निर्दयी भाजपाई’
क्या #भाजपा_सरकार इस लूट में हिस्सेदार नहीं है?
क्या सरकार की ज़िम्मेदारी मे स्वास्थ्य सेवाओं जैसी आवश्यक सेवाओं का नियंत्रण नहीं आता?
जो सरकार किसानों की फसलों के दाम तय कर सकती है वो दवा व हास्पिटल जैसी आवश्यक वस्तुओं/सेवाओ के दाम क्यों नहीं कर सकती?
भाजपा में तो महेश शर्मा जैसे कई सांसद/मंत्री ऐसे हैं जो अस्पतालों के मालिक है,उन्हें तो इस लूट की जानकारी जरूर होगी।
@PMOIndia@MoHFW_INDIA
#Drug_Controller_India
गड्ढों के मामले में ‘45 में 74’ गड्ढेवाले गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का ‘कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे’ से गलाकाटू मुकाबला चल रहा है।
बीजेपी को अपने शासनकाल में बने सारे एक्सप्रेसवे या लिंक एक्सप्रेसवे का नाम निम्नलिखित तर्ज़ पर रखना चाहिए: ‘ANOTHER BJP CORRUPTION DISASTER EXPRESSWAY 2.0’.
इससे पत्रकारों, जनता व बच्चों को भाजपाई भ्रष्टाचार की नई अल्फ़ाबेट रटनी भी आसान हो जाएगी… ABCDE.
‘2.0’ इसलिए क्योंकि पहला स्थान पहले ही बीजेपी के भ्रष्ट-राज में बने ‘कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे’ के नाम हो चुका है।
बाक़ी 3.0, 4.0 व 5.0 के लिए भाजपा राज में बने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे में घमासान छिड़ा है।
भाजपा जाएगी, जान बच जाएगी!
‘शिक्षक और अभ्यर्थी संवाद’ एक अनूठा अनुभव रहा। ऐसे आयोजन होते रहने चाहिए जिनसे युवाओं की अपेक्षाओं से हम सब परिचित होते रहें और शिक्षकों के साथ मिलकर हम नये देश की नई राहें बनाएं।
यूथ की उम्मीदों पर जो खरा उतरे, हम वो Neo-India बनाएंगे!
मक़सद जब साफ़ हो तो हाथ-में-हाथ होता है
निगाह मंज़िल पर हो तो सफ़र आसान होता है!
बात बड़ी ये नहीं है कि गठबंधन में कितनी सीटें या कौन सी सीट किसके पास जा रही है बात बड़ी ये है कि हम सबको ये सुनिश्चित करना है कि जीत गठबंधन की हो।
फिर दोहराते हैं : बात सीट की नहीं जीत की है।
ये जीत हमारे गठबंधन के दलों से बढ़कर हम सबकी उस संयुक्त कोशिश की जीत होगी जो इसलिए लगातार संघर्षरत है कि साम्प्रदायिकता फिर कभी सिर न उठा सके और लोकतंत्र-संविधान-आरक्षण पर भाजपाई आंच न आए और देश का सौहार्द फिर से खिलखिलाए, देश की तरक़्क़ी और ख़ुशहाली फिर से मुस्कुराए।
जय संविधान-जय हिंदुस्तान!
Salute to the bravery of Indian pilot Captain Smit Machhar! The entire nation is proud of him.
In adverse circumstances, wisdom and courage are the greatest strengths.
We wish him a speedy recovery.
शहरों में जलभराव का मुख्य कारण अधिक वर्षा नहीं बल्कि भाजपाई भ्रष्टाचार की वजह से जलनिकासी की व्यवस्था का फ़ेल हो जाना है। नाली से लेकर नाले तक गंदगी से जाम हैं तो पानी निकलेगा कहाँ से।
विभिन्न तरह के प्रदूषण व नालों के नदियों में गिरने की वजह से नदियों का बहाव गाद के जमा होने की वजह से बुरी तरह बाधित हुआ है। बंधा बनाकर उफनती नदी के पानी को रोकना कोई कारगर उपाय नहीं है। हम भविष्य में नदियों की गाद हटाकर उनको गहरा करने का काम करेंगे जिससे नदियाँ अविरल मतलब बिना किसी रुकावट के प्राकृतिक रूप से बह सकें और उनके अंदर के जीव-जंतु व इकोसिस्टम से नदियाँ स्वयं निर्मल हो सकें।
राजधानी लखनऊ हो या स्मार्ट सिटी गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज जैसे बड़े अन्य शहर सब जगह हाल-बेहाल है। गंदगी से बीमारी फैलने का डर भी है। विशेष रूप से नदी के किनारे बसे व नदीय अर्थव्यवस्था पर आधारित लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
ऐसा लगता है कि भाजपा सरकार की आँख का पानी भी बहकर जलराशि को बढ़ा रहा है।
भाजपा जाएगी, नदी जीवन पाएगी।
शहरों में जलभराव का मुख्य कारण अधिक वर्षा नहीं बल्कि भाजपाई भ्रष्टाचार की वजह से जलनिकासी की व्यवस्था का फ़ेल हो जाना है। नाली से लेकर नाले तक गंदगी से जाम हैं तो पानी निकलेगा कहाँ से।
विभिन्न तरह के प्रदूषण व नालों के नदियों में गिरने की वजह से नदियों का बहाव गाद के जमा होने की वजह से बुरी तरह बाधित हुआ है। बंधा बनाकर उफनती नदी के पानी को रोकना कोई कारगर उपाय नहीं है। हम भविष्य में नदियों की गाद हटाकर उनको गहरा करने का काम करेंगे जिससे नदियाँ अविरल मतलब बिना किसी रुकावट के प्राकृतिक रूप से बह सकें और उनके अंदर के जीव-जंतु व इकोसिस्टम से नदियाँ स्वयं निर्मल हो सकें।
राजधानी लखनऊ हो या स्मार्ट सिटी गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज जैसे बड़े अन्य शहर सब जगह हाल-बेहाल है। गंदगी से बीमारी फैलने का डर भी है। विशेष रूप से नदी के किनारे बसे व नदीय अर्थव्यवस्था पर आधारित लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
ऐसा लगता है कि भाजपा सरकार की आँख का पानी भी बहकर जलराशि को बढ़ा रहा है।
भाजपा जाएगी, नदी जीवन पाएगी।