ये करखानों मे लोहे क शोरो-गुल जिसमे,
है दफ़्न लाखों गरीबो की रूह का नग्मा।
ये शाहराहों पे रंगीन साडियों की झलक,
ये झोपडों मे गरीबों की बेकफ़न लाशें।
- साहिर लुधियानवी
जिंदगी का जीवनधारा कोई भी किताब के विचारधारा से अलग होता है। ‘औघड़’ सच्चाई उस समाज की, सच्चाई उस विषैले दोस्त की । ‘बिरंची’ जिसने तपने और जलने में अंतर समझाया जिसने ये समझाया कि प्रगतिशील होने के लिए केवल पाश और फैज की कविताये गाना ही पर्याप्त नहीं, ‘मधु’
बीमारी छूआछूत की बीमारी है, यहाँ हर जाती के नीचे एक जाती है। वाक़ई में @nilotpal_mrinal ने अपने मारे जाने की जमानत लिखी है। आप सभी से आग्रह है आज के इस अस्त व्यस्त सोशल मीडिया के युग से थोड़ा सा समय निकल कर समाज की सच्चाई को पढ़ना सीखिए। इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, फेसबुक, स्नैपचैट,