जयपुर में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर भाजपा सरकार के बर्बर लाठीचार्ज में घायल श्री देवराज पलाड़ा के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद हैं।
ये सिर्फ हादसा नहीं है बल्कि सत्ता के घमंड में एक युवा की हत्या है। भाजपा सरकार ने फिर साबित कर दिया कि उसे जनता के सवालों से डर लगता है, असहमति की आवाज़ को सुनने के बजाय उसे पुलिस के डंडों से कुचला जा रहा है।
राजस्थान में एक नौजवान की जान लेने वाली इस अंधी व्यवस्था को जनता के सामने जवाब देना होगा, सरकार इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कर कार्रवाई करे, पीड़ित परिवार को न्याय एवं उचित मुआवजा दें।
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श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर में RSS की विचारधारा का विरोध करने पर छात्रों के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई के विरोध में छात्र विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठे हैं।
छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में RSS के पोस्टर-बैनर लगाने का विरोध किया। इसके बदले उन्हें मानसिक प्रताड़ना और अन्य कॉलेजों में स्थानांतरित कर उनके भविष्य को बर्बाद करने की साजिश रची जा रही है।
भाजपा सरकार तानाशाही कर छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज़ दबाना चाहती है। विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों पर की गई दंडात्मक कार्रवाई तुरंत वापस ले और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।
छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। विश्वविद्यालय संविधान से चलते हैं, किसी एक संगठन की शाखा से नहीं। शिक्षा संस्थानों में संवाद, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और वैचारिक विविधता का सम्मान होना चाहिए।
@RajCMO@RajGovOfficial@INCIndia@INCRajasthan@IYC
“जॉब नहीं मिलेगा, तो सिंहासन हिलेगा।”
कोटा के बाद, देहरादून के बाद अब ‘छात्रों की गूंज’ प्रयागराज पहुंच रही है।
यह वो शहर है जहां लाखों नौजवान सालों से तैयारी कर रहे हैं - फ़ॉर्म भरते हैं, फीस देते हैं, और इंतज़ार करते रहते हैं।
पेपर लीक ने उनका आज छीना। रुकी हुई भर्तियों ने उनका कल। और अभी कुछ दिन पहले, दिल्ली में इन्हीं बच्चों पर लाठियां और पैलेट चलाए गए - सिर्फ़ इसलिए कि उन्होंने अपने हक़ की बात की।
हम उनकी आवाज़ उठाते रहेंगे और उन्हें इंसाफ़ दिलाकर रहेंगे। अब बहाने नहीं चलेंगे - जवाबदेही लीजिए, या कुर्सी छोड़िए।
8 अगस्त - प्रयागराज में मिलते हैं।
#ChhatronKiGoonj
श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर में छात्रावासों से RSS के पोस्टर हटाने पर B. Sc. के छात्र कृष्ण कुमार चौधरी, आशीष कुमावत और साहिल जोशी को कॉलेज से प्रतिबंधित कर अन्य कॉलेजों में स्थानांतरित करना विश्वविद्यालय प्रशासन की पक्षपातपूर्ण और तानाशाही कार्यशैली को दर्शाता है।
छात्रों का आरोप है कि उन्हें RSS की शाखा से जुड़ने के लिए लगातार मानसिक प्रताड़ना और दबाव बनाया गया। छात्रों द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन को मानसिक उत्पीड़न की लिखित शिकायत भी दी गई, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके विपरीत अब उन्हीं निर्दोष छात्रों को दंडित किया गया, जो पूर्णतः निंदनीय और अस्वीकार्य है।
यदि पोस्टर फाड़ने पर छात्रों पर कार्रवाई हो रही है, तो पोस्टर लगाने वालों और अनुमति देने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं, यह दोहरा मापदंड क्यों?
विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध और बौद्धिक विकास के लिए, न कि किसी संगठन विशेष के प्रचार-प्रसार के लिए। विश्वविद्यालय प्रशासन स्थानांतरित छात्रों का स्थानांतरण अविलंब रद्द करें।
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छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर 36 घंटे से पानी की टंकी पर आमरण अनशन कर रहे छात्रनेता सुश्री वियोना जाट, श्री विजयपाल कुड़ी एवं श्री कोशेन खान से भाजपा सरकार का एक भी जिम्मेदार प्रतिनिधि अब तक बात करने नहीं पहुंचा।
सरकार छात्रों की जायज मांग सुनने के बजाय पुलिस-प्रशासन के दम पर इनको दबाने में जुटी है। यह सरकार की संवेदनहीनता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति घोर उपेक्षा का प्रमाण है।
पानी की टंकी पर बैठे छात्रनेताओं के समर्थन में आज शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे NSUI के कार्यकर्ता को गिरफ्तार करना निंदनीय हैं। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, इसे कुचलना छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है।
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छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग एवं दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए बर्बर लाठी चार्ज के विरोध में छात्रनेता वियोना जाट, विजयपाल कुड़ी एवं कोशेन खान जयपुर में पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों पर जिस प्रकार बर्बर लाठीचार्ज किया गया, वह लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
दूसरी ओर राजस्थान में पिछले चार वर्षों से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं। छात्रसंघ चुनाव लोकतंत्र की पहली पाठशाला हैं, इन्हें रोकना न केवल युवाओं के सपनों से विश्वासघात है, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों पर सीधा प्रहार है।
सरकार से मांग करते है कि छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार तत्काल छात्रसंघ चुनाव बहाल करें और दिल्ली में हुए छात्रों पर बर्बर हमले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए गृहमंत्री अमित शाह अपना इस्तीफा दे।
@PMOIndia@rashtrapatibhvn@RajCMO@RajGovOfficial@viyonajaat@vijaypal_kuri
🚨 हम छात्रों को न्याय दिलाकर रहेंगे।
राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा,
छात्रों पर हमला करने वालों को सज़ा मिलेगी, जवाबदेही तय होगी और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री से तीन साफ़ मांगें:
👉 अमित शाह को बर्खास्त करें।
👉 सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराएं।
👉 कम से कम नैतिक ज़िम्मेदारी तो लें।
: LoP श्री @rahulgandhi जी
मैं BJP, RSS या उनसे जुड़े किसी भी व्यक्ति से कभी माफ़ी नहीं मांगूंगा। Leader of Opposition होने के नाते देश के महत्वपूर्ण मुद्दे उठाना मेरा अधिकार है, और मैं यह अधिकार निभाता रहूंगा।”
:- Shri @RahulGandhi Leader of Opposition, Lok Sabha
• गृह मंत्री ने हमारे छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया।
• उन्होंने हमारे छात्रों के शरीर में छर्रे दागवाए।
: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री @RahulGandhi जी
आज संसद में मेरे भाषण के दौरान मैंने दिल्ली में छात्रों पर हुई बर्बरता का मुद्दा उठाया और इसके ज़िम्मेदार का नाम लिया - गृह मंत्री अमित शाह।
मुझे BJP ने बोलने नहीं दिया।
आज शाम 6 बजे - प्रेस कॉन्फ्रेंस करूंगा और वो सब कहूंगा जो सदन में कहने नहीं दिया गया।
माइक बंद कर सकते हैं - छात्रों की गूंज नहीं।
राजस्थान विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री सी.पी जोशी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
महादेव से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूं।
@drcpjoshi
सत्य और सत्याग्रह - दोनों से डरती है मोदी सरकार।
मध्य प्रदेश के आदिवासी भाई-बहन जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल पर इसलिए बैठे थे क्योंकि केन-बेतवा परियोजना में उनकी ज़मीन छीन ली गई, लेकिन उन्हें न न्यायपूर्ण मुआवज़ा मिला और न सम्मानजनक पुनर्वास।
"सत्य" यह है कि आदिवासी देश के पहले मालिक हैं - जल, जंगल और ज़मीन पर सबसे पहला हक़ उन्हीं का है।
और उनका "सत्याग्रह" इसलिए है क्योंकि वही हक़ आज उनसे छीना जा रहा है।
अपने अनोखे तरीके से उनकी मांग बस इतनी है कि गुज़र-बसर करने के लिए उचित सहारा तो दो - वरना जिंदगी तो चिता के ही समान है।
मगर यह भी भाजपा सरकार को मंज़ूर नहीं। उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस बल से उनका शांतिपूर्ण विरोध भी कुचला जा रहा है।
हम अपने आदिवासी भाई-बहनों के साथ हैं। उन्हें न्याय दिला कर रहेंगे - मुआवज़ा और पुनर्वास तो देना ही पड़ेगा।
Credits for video: Shiksha Pareek and Lok Singh
@faeloreeah @lok_singh_
छात्रों के ख़िलाफ़ पूरा का पूरा सिस्टम ही जानलेवा है।
खबर आ रही है कि बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर AK-47 से गोलियाँ चलाई गई हैं और सैकड़ों छात्रों को गिरफ़्तार करके उनपर FIR की जा रही है।
मोदी जी, कहाँ गया आपका वादा कि छात्रों पर कोई FIR नहीं की जाएगी और उन्हें रिहा कर दिया जाएगा? उल्टा उनपर घातक हमले और बर्बरता की जा रही है।
दिल्ली में छात्रों पर पेलेट गन चली और बिहार में AK-47। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार हो या दिल्ली - हर जगह पैटर्न एक ही है।
पहले भी कहा है, ये सरकार झूठी है। सुधार इनके बस का नहीं है। अपनी बातों से मुकर जाएगी और हर तरकीब से छात्रों की आवाज़ दबाएगी।
मोदी जी, देश के छात्रों से माफ़ी मांगिए। और जिन्होंने छात्रों पर हमला किया है, उन्हें कुचला है उनपर कार्रवाई कीजिए, छात्रों पर नहीं।
IYC राष्ट्रीय महासचिव एवं राजस्थान युवा कांग्रेस के प्रभारी श्री विकास छिकारा जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
महादेव से आपके उत्तम स्वास्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ।
@VikasChhikara_
Pellet guns, lathis and tear gas were used against students peacefully protesting in Delhi.
I met 19-year-old Sahil Lochab. Shot with pellets, he may lose an eye. His “crime”? Demanding an end to paper leaks and a fair future for our students.
@AmitShah ji, I have two questions:
1. Did you approve the use of lethal force, including pellet guns, against students? If not, who did?
2. Were the men in plain clothes beating students with lathis police personnel or volunteers? Who authorised their deployment?
Desh jawab maang raha hai.
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे education system को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है।
सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।
2 मांगें अभी भी बाकी हैं - प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो।
ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है - अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है।
इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है।
डरो मत!