जो पीड़ित वो पीडीए।
आज के भाजपा शासनकाल में हर तरह से उपेक्षित-उत्पीड़ित आशा वर्कर बहनों की माँगों के समर्थन में हम पूरी निष्ठा के साथ हैं। उनकी आर्थिक सुरक्षा व सामाजिक सुरक्षा से भाजपा सरकार पीछे क्यों हट रही है? जब भाजपा के झूठे प्रचार और निर्जीव पर अपव्यय के लिए सरकार के पास धन लूटाने को है तो आशा वर्कर्स के साथ भेदभाव का आधार क्या केवल यही है कि वो शोषित, वंचित, निर्धन पृष्ठभूमि से आती हैं या वो पीडीए में शामिल आधी आबादी मतलब महिलाएं हैं, क्या उन्हें सम्मान से जीने का हक़ नहीं?
#Protest
#AashaWorkers
#ashaworkersprotest
निराशा में आँख का पानी
जब समुंदर बन जाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!!!
कोई अपनी ताक़त पर
जब सर उठा इठलाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!
हुक़ूमतों का घमंड-गुरूर
जब पर्वत सा बन जाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!!!
दौर जब नाइंसाफ़ी का
हद ही पार कर जाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!
जब-जब देश का भविष्य
पूरा दांव पर लग जाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!!!
अब तो बच्चे भी नाकाम भाजपा सरकार को, शासन-प्रशासन की ज़िम्मेदारीभरी भाषा-बोली और सबक सिखा रहे हैं। देश की जनता इतनी हताश-निराश तो आज़ादी के पहले भी न थी।
इस शासनादेश के आधार पर भाजपा सरकार चाहे तो बदले की भावना छोड़कर जौहर यूनिवर्सिटी का नक़्शा भी आसानी से एक दिन में पास करा सकती है। भाजपा अपने लोगों के लिए इस शासनादेश को मानती है लेकिन किसी और के लिए इसे इस्तेमाल न करके हर समाज के छात्रों और उनके परिवारवालों के ख़िलाफ़ नाइंसाफ़ी कर रही है। इस जीओ के आधार पर ही भाजपा सरकार ने हज़ारों भवनों को नियमित करके, उन्हें वैध स्वरूप प्रदान किया है।
भाजपा बहाना न बनाए, शिक्षा के मंदिर को बचाए!
विद्वेष हारेगा, सौहार्द जीतेगा!
‘पक्षपात’ अन्याय का सबसे प्रत्यक्ष रूप होता है।
पूरे देश में प्रदर्शनकारियों को हटाने से अच्छा है, भाजपा सरकार स्वयं ससम्मान हट जाए।
यदि भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों ने इतिहास पढ़ा होता या स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया होता तो वो जानते कि जन-शक्ति जब हर संभावना से निराश हो जाती है, तो वो ख़ुद एक शक्ति बन जाती है।
भाजपा के राज में लोग जीते-जी अपनी चिता ख़ुद सजा के लेट गये, अब इससे ज़्यादा ‘अच्छे दिन’ भाजपा क्या लाएगी। भाजपा का समय पूरा हुआ।
भाजपा का अंतिम दौर शुरू होता है अब…
#चिता_आंदोलन
#केन_बेतवा_विरोध
NEET है या CHEAT है?
NEET REEXAM में घपलों की ख़बरें बढ़ती जा रही हैं लेकिन भाजपा सरकार में न किसी की ज़िम्मेदारी तय की जाती है, न किसी की जवाबदेही। इस्तीफ़ा देना या दिलवाना तो असंभव बात है।
अभ्यर्थी कह रहे हैं कि कड़वा सच ये है कि भाजपा के संगठन में भी सबसे ऊपर बैठे तथाकथित नैतिक लोग अपने किसी संगी-साथी मंत्री पर दबाव बनाकर इस्तीफ़ा लेने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि उन्हें डर है कि अपने को फँसता देख, वो मंत्री जी कहीं बाक़ी सारे भाजपाई हिस्सेदारों के घपलों का दबा-छुपा राज़ न खोल दें। यही हाल भाजपा सरकार के हर मंत्रालय का है, इसीलिए भाजपा में इस्तीफ़े नहीं होते हैं।
जनता पूछ रही है कि ‘मुख़बिरी और लीक में कोई ऐतिहासिक संबंध होता है क्या?’
छुपे बैठे भ्रष्टाचार की काली कोठरी में
भाजपाई साझेदार हैं लूट की पोटली में
#NTA
#NEET
#NEET_REEXAM
प्रिय छात्रों और अभिभावकगण,
जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने की युवाओं और उनके अभिभावकों की मुहिम में, हम सब पूरी तरह से आपके साथ हैं।
बदले की भावना में जल रही भाजपा सरकार जौहर यूनिवर्सिटी को अपनी संकीर्ण राजनीति का शिकार बनाने की कोशिश न करे। इस दुर्भावनापूर्ण पक्षपाती फ़ैसले के ख़िलाफ़, हमारे साथ हमारा छोटे-से-छोटा कार्यकर्ता, समर्थक, बड़े-से-बड़ा नेता और वो सब हज़ारों बच्चे व उनके मेहनतकश माता-पिता भी हैं जिनके सपने पर बुलडोज़र चलाने की निकृष्ट कोशिश भाजपा सरकार कर रही है।
हर विश्वविद्यालय शिक्षा का मंदिर होता है, हम ‘शिक्षा के मंदिर’ को बचाने के लिए देश भर से अपील करते हैं कि वो हमारे साथ आएं। विश्वविद्यालय में हर समाज के बच्चे पढ़ते हैं, क्या भाजपा अब हर समाज के युवाओं के विरुध्द हो गई है। भाजपा का अहंकार ही ये सब गलत काम करा रहा है। अगर कहीं कुछ काग़ज़ी कमी है भी तो उसके काग़ज़ पूरे करके यूनिवर्सिटी को बचाया जाए और स्टूडेंट्स के भविष्य को भी। यहाँ ग़रीबों के बच्चे पढ़ते हैं, जिनके पास इतना पैसा नहीं होता कि वो भाजपाइयों की तरह अपने बच्चों को महँगे विश्वविद्यालय या विदेशों में पढ़ा सकें। जिनके न परिवार हैं न बच्चे,वो परिवारवालों का दर्द क्या जानें। अगर भाजपा के मन में बच्चों, युवाओं, उनके परिवार-परिजनों व समाज के लिए रत्ती भर भी सहानुभूति होती तो वो ज़ुल्म और नाइंसाफ़ी से भरी इस विध्वंसक कार्रवाई का तत्काल कोई विकल्प ढूँढती।
सच तो ये है कि भाजपा शिक्षा के ही विरुद्ध है क्योंकि शिक्षित लोग जागरूक और प्रगतिशील होते हैं , वो अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ भी उठाते हैं और सवाल भी, जो दक़ियानूसी सोचवाली दमनकारी भाजपा की सत्ता को जरा भी रास नहीं आता है। इसीलिए भाजपाई और उनके संगी-साथी, गाँव-गाँव में प्राथमिक विद्यालय तथा अन्य स्थानों पर विश्वविद्यालय तक बंद करवाने की भूमिगत योजना बनाते रहते हैं। भाजपाई जानते हैं कि पढ़-लिखकर लोग नौकरी-रोज़गार माँगेंगे, जो भाजपा सरकार देना ही नहीं चाहती है। नौकरी-भर्ती भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं। जब हमारे प्राइमरी स्कूल बंद किये गये तो हमारे सजग शुभचिंतकों ने ‘पीडीए पाठशाला’ खोलकर, भाजपाई साज़िश नाकाम कर दी थी, इसीलिए अब उनके निशाने पर यूनिवर्सिटी आ गई है।
जौहर यूनिवर्सिटी पर हो रहा ये हमला, हर समाज के विद्यार्थियों के विरुध्द भाजपाई संगी-साथियों की एक बेहद घिनौनी साज़िश है। उन अपंजीकृत लोगों के अपने सभी स्कूल-विद्यालय चल रहे हैं लेकिन दूसरों पर प्रतिशोध की भावना से एकतरफ़ा कार्रवाई का षड्यंत्र रचा जा रहा है।
अति निंदनीय!
आपका
अखिलेश
भाजपा सरकार की व्यवस्था विफल है लेकिन मानवता ज़िंदा है। गुरुग्राम में एक स्कूल बस जब 5 घंटे के लिए पानी में फँस गई तो बारिश में बस कंडक्टर ने 1 किमी दूर जाकर बच्चों और टीचर्स के लिए खाना लेकर आने का सराहनीय काम किया।
भाजपा की नकारात्मक राजनीति कभी भी हमारे देश की अच्छाई को बुराई में बदलने में कामयाब नहीं होगी।
जहाँ-जहाँ भाजपा, वहाँ-वहाँ आपदा!
गोरखपुर की शहरी जनता अपने विधायक-मुख्यमंत्री के ‘लोकल डबल इंजन’ से पूछ रही है कि तथाकथित स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर अरबों के जिस फ़ंड का ख़र्चा काग़ज़ों में दिखाया गया है, वो कौन डकार गया।
दूसरों को आँख बंद करके ‘शासन-प्रशासन’ के नाम पर कोसनेवालों ने अब क्या अपनी आँखें बंद कर ली हैं? माननीय को चिराग तले का अंधेरा नहीं दिखता है तो कम-से-कम चिराग़ तले का पानी ही देख लें।
अब क्या वो अपने क्षेत्र के शिकायत करनेवालों पर भी अपने कटु वचनों की भड़ास निकालेंगे। इनकी कड़वाहट देखकर तो करेला भी शर्मा जाता है।
सबसे पहले जल भराव के पीड़ितों के लिए भोजन-पानी, दैनिक ज़रूरतों के सामानों, दवाइयों व रैन बसेरे का इंतज़ाम किया जाए। हम जलमग्न क्षेत्रों में हुई जनता की हानि की भरपाई की माँग करते है। महंगाई व बेरोज़गारीजन्य ‘मंदी, भ्रष्ट जीएसटी तंत्र तथा भाजपाई वसूली’ से जूझते व्यापारियों की हालत वैसे ही बहुत जर्जर है, अब जलभराव के कारण वो अपने माल की हानि बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है। कारोबारियों को बिना किसी भेदभाव के, ईमानदारी से मुआवज़ा दिया जाए। सरकार के भ्रष्टाचार का ख़ामियाज़ा जनता या दुकानदार भाई क्यों भुगतें? साथ ही हमारी माँग ये भी है कि जलभराव के बाद आनेवाली बीमारियों से भी बचाव के उपाय किये जाएं व सफ़ाई अभियान युद्ध स्तर पर चलाया जाए।
अब क्या वो गोरखपुर का नाम भी बदलकर ‘जलनगरी’ रखनेवाले हैं? अब तो साबित हो गया है कि माननीय जापान किसी और की ख़ोज में गये थे न कि सिटी प्लानिंग जैसा कोई अनुभव लेने, नहीं तो गोरखपुर की ये दुर्गति न होती।
इस बार भाजपा के हाथ से गोरखपुर भी गया!
वरिष्ठ समाजवादी नेता एवं पूर्व विधायक चौ. लालता प्रसाद निषाद जी का निधन, अत्यंत दुखद !
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।
शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं।
भावभीनी श्रद्धांजलि !
श्री सोनम वांगचुक जी को ‘बल-प्रयोग’ करके, ज़बरदस्ती उनके आमरण अनशन स्थल से उठाकर ले जाना अत्यंत निंदनीय समाचार है। आज सुबह घटी ये घटना थोड़ी ही देर में पूरे देश और संपूर्ण विश्व में फैल चुकी है। सारी दुनिया और देशभर में श्री सोनम वांगचुक जी को लेकर गहरी चिंता है और भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ आक्रोश भी। जो लोग सादी वर्दी में इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए धोखे से अचानक घुसे थे, उनकी पहचान सार्वजनिक की जाए।
ये हमारी पुरज़ोर माँग है कि श्री सोनम वांगचुक जी की चिकित्सा ‘न्यायिक निगरानी’ में हो क्योंकि श्री सोनम वांगचुक जी का जीवन मानवता, पर्यावरण-संरक्षण, लोकतांत्रिक मूल्यों, युवा ऊर्जा की प्रेरणा, साइंस और इनोवेशन के लिए अनमोल है।
हमारे देश की जनता व समस्त विश्व इस समय भाजपा सरकार को संदेह और सवाल भरी संदिग्ध नज़र से देख रहा है। दमनकारी राजनीति करनेवाली भाजपा सरकार की इस अवांछनीय कार्रवाई ने इंटरनेशनल लेवल पर हमारे देश की मानवीय और डेमोक्रेटिक इमेज को बेहद धूमिल और खंडित करने का काम किया है।
भाजपा ने न कभी गांधी जी में विश्वास किया, न कभी उनके गांधीवादी तौर-तरीक़ों में।
भाजपा की नकारात्मक विचारधारा ही ‘विवाद’ की है; संवाद की नहीं।
भाजपा निराशा का पर्याय बन चुकी है।
भाजपा सरकार नहीं, अहंकार है!
भाजपा की सोच दरारवादी है, इसीलिए जहाँ भी एकता, सौहार्द और एकजुटता होती है, भाजपा डरकर प्रतिक्रियावादी बनकर आंदोलनों को तितर-बितर कर देती है लेकिन भाजपा भूल गयी है कि आज की नई पीढ़ी ‘डिजिटल यूनिटी’ के माध्यम से वैचारिक क्रांति लाने में सक्षम है. ऐसा हुआ है, हो रहा है और होगा भी…
@Wangchuk66
भाजपा की ‘चोरी-लूट-छल-कपट-झूठ-फ़रेब’ की अधर्मी राजनीति अब प्रभु रामजी के मंदिर से आगे बढ़कर हनुमानगढ़ी तक पहुँच गई है। जो ‘महामुख’ हनुमानगढ़ी को लेकर मिथ्या-प्रचार कर रहे हैं, वो अपने महापाप का प्रायश्चित करें और स्वीकार करें कि वो राम मंदिर की चोरी से ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कर रहे हैं अन्यथा हनुमानगढ़ी की सीढ़ियाँ घुटनों के बल चढ़कर, आस्था के इस अनादि तीर्थ से क्षमा याचना करें। संकीर्ण राजनीति करते-करते वो भूल जाते हैं कि वो झूठ बोलकर अपने ‘धर्मपद’ को भी अपमानित कर रहे हैं। अगर उन्हें झूठ बोलना ही है तो वो ऐसा साधारण व्यक्ति की वेशभूषा धारण करके करें। अपने स्वार्थ की सिद्धी के लिए, श्रद्धा के प्रतीकों को धारण करके भोल-भाले आस्थावानों को ठगना महा-अधर्म है।
हनुमानगढ़ी की अतिशय शक्ति जब सामान्य पापियों का ही शमन कर देती है, तो इन ‘महापापियों’ का क्या हश्र होगा, कहने की आवश्यकता नहीं। प्रभु रामजी और हनुमान जी के प्रकोप से कोई अधर्मी नहीं बचेगा।
आज पूरा देश देख रहा है कि जहाँ-जहाँ भाजपा और उनके अपंजीकृत संगी-साथी क़ब्ज़ा करके बैठे हैं वहाँ-वहाँ घोर बेईमानी, चोरी, गबन, लूट हो रही है। अभी तो ये पहली परत खुली है, आगे-आगे देखिए खुलता है क्या!
पूज्य शंकराचार्य जी की बात का हम 100% समर्थन करते हैं।
अधर्मी भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों ने पहले अयोध्या को लूटकर बर्बाद किया अब झूठ प्रसारित करके बदनाम कर रहे हैं। इससे अयोध्या का संत-महंत समाज बेहद आहत और आक्रोशित है। अयोध्यावासियों को लग रहा है कि ये महापापी भाजपाई अयोध्या के मान-सम्मान से न जाने किस जन्म का बदला ले रहे हैं।
हर आस्थावान कहे आज का
अब कभी न चाहिए भाजपा!
जिन भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों ने भगवान के ख़जाने में हाथ डालकर ‘धर्म-धन’ चुराने तक का दुस्साहस कर लिया, वो किसी पुजारी और इंसान का मान क्या करेंगे। बेहद निंदनीय!
वैधानिक कार्रवाई हो।
जो भाजपा का साथी, वो रामघाती!
#CC_to_CC
भ्रष्ट भाजपा राज में अब नोटों का भी प्राइवेटाइजेशन हो जाएगा क्या? कमीशनख़ोरी का मॉडल इस हद तक गिर जाएगा, देश की जनता ने सोचा न था। जब देश की मुद्रा ही आत्मनिर्भर नहीं होगी तो अर्थव्यवस्था और देश आत्मनिर्भर कैसे होगा? अब क्या सरकार भी आउटसोर्सिंग पर दे दी जाएगी?
इतने बड़े और संवेदनशील कार्य के लिए इतना छोटा कंजूसीभरा टेंडर निकालने के पीछे, कहीं चुपके से औपचारिकता पूरा करने का कोई गलत मंसूबा तो नहीं है। लगता है सेटिंग पहले ही हो चुकी है, दिखाने को ख़ानापूर्ति की जा रही है।
भाजपा सरकार नहीं; मुनाफ़ाख़ोरों की भागीदार है।