लखनऊ कश्मीरी मोहल्ले चौक में तीन युवकों द्वारा कुत्ते पर जानलेवा हमले में घटना के तीन दिन बाद भी दोषियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं हुई है। ��ोषियों की पहचान कर सख्त से सख्त कार्रवाई करने की कृपा करें।।
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@AdminLKO
क्रूर राष्ट्रवादी तानाशाह बेनिटो मुससोलिनी से तीन लोग बहुत प्रभावित थे.
1) इटली की आधी प्रजा.
2) आरएसएस के नेता.
3) नेताजी सुभाष चंद्र बोस.
इटली की जनता चाहती थी, और उन्हें यकीन था चुटकी बजाते ही इटली की सारी समस्या बेनिटो मुससोलिनी हल कर, रोटी कपड़ा और मकान देगा.
आरएसएस के नेताओं बेनिटो मुससोलिनी की पार्टी, युवा मोर्चा और उनकी वेश भूषा की नकल कर आरएसएस की स्थापना की.
नेताजी सुभाष चंद्र बोस बेनिटो मुससोलिनी जैसा तानाशाह बनने की तमन्ना रखते थे. मुससोलिनी की तरह सेना की वर्दी पहनना उन्हें पसंद था. 1928 में कांग्रेस अधिवेशन के ���ौरान बोस ने सेना की तरह वर्दी पहनकर अधिवेशन में भाग लिया था.
वर्दी पहनना कोई अपराध नही है. लेकिन वर्दी पहनकर नागरिक अधिकारों को खत्म कर, बिना संविधान के शासन करने की कल्पना करना बेहद अमानवीय विचारधारा है.
सुभाष चंद्र बोस खुद को एक तानाशाह की तरह प्रस्तुत कर रहे थे. जिनका स्वप्न था भारत पर 20 वर्षों तक बिना किसी संविधान और चुनाव के शासन करना ?
1938 में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष बन गए. किसी राष्ट्र अध्यक्ष की तरह सैनिक वर्दी में सलामी ली. गांधी के सामने आज़ादी के लिए हथियारों से संघर्ष का ब्लू प्रिंट रखा. गांधी ने खुद को किनारा कर लिया. कांग्रेस की बड़ी लीडरशिप ब्रिटिश सरकार के हमदर्द थे.
बोस पर इस्तीफे का दबाव बनाया गया. सुभाष चंद्र बोस भारत से भागकर मदद के लिए जर्मनी चले गए. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौर में सुभाष चंद्र बोस जर्मनी और जापानी खेमे में थे.
अगर इटली, जर्मनी और जापान द्वितीय विश्वयुद्ध जीत जाते तो ?
भारत ब्रिटिश साम्राज्य के बजाय जर्मनी इटली और जापान की साझा कॉलोनी बनता.
जर्मनी और जापानी कॉलोनी "भारत" के प्रथम प्रधानमंत्री सुभाष चंद्र बोस बनते.
अडोल्फ हिटलर जो खुद को शुद्ध आर्य मानता था. भारत में भी कॉनसन्ट्रेशन कैम्प में बनाता. और इन कतलखाने कैम्प में किन समुदाय और जातियों को मारा जाता ?
आप भली भांति जानते हैं.
अच्छा हुआ द्वितीय विश्वयुद्ध जर्मनी और जापान हार गए. नही तो सुभाष चंद्र बोस के चक्कर में देश का बहुत बुरा हाल होता.
यूट्यूब पर मौर्य काल के बड़े लेखक चपड़ का खुलेगा रहस्य।
इंतजार करिए सिर्फ दो दिन।
सम्राट असोक के शिलालेखों में से 4 शिलालेखों में असोक का नाम लिखा है, जबकि चपड़ का नाम 3 शिलालेखों में दर्ज है। सम्राट के ��ाम से सिर्फ 1 बार कम।
इससे मौर्य काल में चपड़ की गरिमा का पता चलता है।
गलत का विरोध खुलकर करे, चाहे राजनीति हो या समाज, इतिहास आवाज #उठानें वालों का लिखा जाता हैं, #तलवें चाटनें वालो का नहीं! आदिवासी समुदाय का उलगुला���.
#IndiaAgainstUCC
"जाति" से मिला "आरक्षण" सबको दिखाई देता है, लेकिन "जाति" से मिला "शोषण", "भेदभाव" और "अत्याचार" किसी को नहीं दिखता।
- हंसराज मीना, फाउंडर- ट्राइबल आर्मी
@HansrajMeena | @TribalArmy
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