जल्दी ही आप सभी को तमाम Mail Trail के साथ पूरी कहानी बताऊंगा कि ये सब क्या हुआ है और क्यों हुआ है.
आप बस इतना बताइए कि अगर किसी संस्थान को बनाने वाला हर वक्त सिर्फ बातें बनाए, संस्थान के Ideas और Vision पर सवाल पूछने पर, संसाधनों पर सवाल करने ��र हर बार आपको सिर्फ आपकी कमियां गिनाए और वो भी तब जब उसके मंच पर सिर्फ आपका ही काम दिखता हो, आपको ये कहे कि मुझे किसी से संस्थान चलाने की ट्रेनिंग नहीं चाहिए, धीरे-धीरे जब आप किसी माहौल में अपनी ही योग्यता पर सवाल करने ��ग जाएं तो आप कितने दिन उस संस्थान और आदमी को सम्माननीय कहेंगे?
जब आपको एक कंपनी में सिर्फ एक Mail के जरिए जोड़ लिया जाए, 2 महीनों के भीतर एक official कागज़ तक न दिखाई जाए और फिर जब आप एक negative माहौल से निकलने का फैसला करें तो आपकी सैलरी के साथ-साथ जो पैसे आपने कंपनी के मालिक के कहने पर उसके और टीम के चाय पानी पर खर्चे हों वो भी वापस देने के लिए 45 दिनों के नोटिस period का तमगा थमा दिया जाए तो आप क्या करेंगे, जबकि आपने न तो कभी कोई कागज़ देखा हो और न ही आपको जो mail दिया गया हो उसमें Notice Period का time period लिखा हो, फिर भी आप 20 दिनों तक अपने हिस्से की मेहनत के लिए आस लगाए रखें और फिर मालूम चले कि आपको किसी भी कीमत पर कुछ नहीं मिलेगा तो आप क्या करेंगे?
जब बतौर employee, अपनी बात रखने पर आपसे वापस ��ाकर काम सीखने को कहा जाए, आपको दूसरी संस्थाओं में नौकरी दिलाने की बात ऐसे कही जाए जैसे इस दौर में आप कहीं काम करने के लायक नहीं हैं तो आप क्या करेंगे? जब कोई व्यक्ति आपसे आपके काम के साथ-साथ अपने हिस्से का काम भी करने को बोलता रहे, अपने आप को Interview का सरताज बताने के बाद भी आपको अपने काम के साथ-साथ तमाम इंटरव्यू लाइनअप करने से लेकर सवाल लिखने को कहे , न होने पर खिल्ली उड़ाए तो आप क्या करेंगे?
मुझसे कहा गया कि मैं Salt नामक कंपनी खोलने वाले व्यक्ति Anil Sharda का 10 प्रतिशत भी नहीं हूं, जो जानकर मैं खुश हूं. लेकिन मेरा आपसे अनुरोध है कि saltbylutyens पर मौजूद आपलोग ही इनको बता दे कि मैं वहां कितना प्रतिशत था. शायद following का वो नंबर उनको वो समझा दे जो मैं नहीं समझा पाया.
आप लोगों के DM आ रहे हैं, घर वाले फोन पर परेशान हैं, लोग कह रहे हैं हटा लो स्टोरी, मत करो ट्वीट तुम्हारा मजाक बनेगा, इंडस्ट्री छोटी है कोई काम नहीं देगा. मुझे लगता है मीडिया या किसी भी संस्थान में ऐसी प्रवृति का खुल्ला विरोध होना चाहिए.
मैं बिल्कुल ठीक हूं. निश्चित ही थोड़ा असहज हूं क्योंकि इस तरीके का छीछालेदर करना मुझे कभी रास नहीं आया है. लेकिन जल्द कुछ अच्छा किया जाएगा.
बिहार खत्म हुआ है. बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु, पांडिचेरी बाकी है. आपका शुक्रिया💚🙏🏻
"कविताओं जैसा शब्द, बांसुरी सी बजती आवाज़ और आग सा सच।"
प्रिय भारत सूरज, @bharatsuraj01
आपकी आवाज़ जब हवाओं से टकराती है तो लगता है मानो कोई बांसुरी गाँव की चौपाल में बज रही हो, और लोग दूर-दूर से खिंचकर सुनने चले आते हों। आपके शब्दों में सिर्फ़ खबर ��हीं, बल्कि एक आग है, जो बुझी हुई आँखों में फिर से चमक भर देती है।
कम संसाधनों में इतना बड़ा संसार रच देना, यह सिर्फ़ हुनर नहीं, यह प्रेम है अपने पेशे से, अपने लोगों से, अपने सच से। आपको देखकर लगता है कि पत्रकारिता अब भी ज़िंदा है, अब भी सांस ले रही है। आपकी रिपोर्ट्स में जो लय है, वह किसी गीत की तरह है, और आपका साहस उस गीत का सबसे ऊँचा सुर।
भारत, आपका बोलना किसी साधारण संवाद की तरह नहीं होता। वह एक पुकार है, जो दिल के भीतर उतरती है। वह हमें बताती है कि सच बोलने के लिए भीड़ नहीं चाहिए, सिर्फ़ हिम्मत चाहिए। और आपके पास हिम्मत का जो समंदर है, उसकी लहरें हर सुनने वाले के दिल को भिगो देती हैं।
आपकी कलम और कैमरा भले सादा हों, पर उनमें जो जुनून है, वह किसी क्रांति से कम नहीं। यही जुनून आपको अलग बनाता है। यही जुनून आने वाली पीढ़ियों को याद रहेगा। आप जैसे पत्रकार ��में यक़ीन दिलाते हैं कि सच्चाई की लौ अब भी बुझी नहीं, और जो इसे थामे हुए हैं, वे ही असली रौशनी के रखवाले हैं।
भारत सूरज, आपको देखना किसी कविता को जीते-जी देखने जैसा है। आपकी मुस्कान, आपका जोश और आपकी निडरता, ये सब मिलकर हमें यह भरोसा दिलाते हैं कि यह देश अब भी कहानियों, सपनों और हिम्मतों से भरा है।
आपके लिए दुआ है, आपकी आवाज़ और ऊँची हो, आपकी कलम और धारदार हो, और आपका जुनून कभी कम न हो।
ख़त लिखने वाला लड़का।
चाय इश्क़ और राजनीति।
"Whenever you played against him, you knew the game was never over until he was out!" 😮💨
Cricket greats celebrate MS Dhoni, one of the newest inductees in the ICC Hall of Fame 🤩
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मैं एक आम आदमी हूं।
कभी कैब ड्राइवर के रूप में बैठे-बैठे मर जाता हूं, क्योंकि लापरवारी के लबादे में लिपटी एयरपोर्ट की छत मेरे ऊपर गिर जाती है।
कभी राह चलते प्रचार का होर्डिंग बोर्ड गिरने से मारा जाता हूं।
कभी ट्रेन मैं बैठे-बैठे सरिया मेरे सीने से पार हो जाता है, तो कभी मिडिल बर्थ गिरने से मेरी मौत हो जाती है।
इन सब से भी बच गया तो ट्रेन हादसे में मेरी जान चली जाती है। कभी पुल गिरने से मार�� जाता हूं, कभी इमारत।
मैं कोई जिंदा शरीर नहीं, बल्कि संख्या भर हूं। क्योंकि इस देश के हादसों में मौत सिर्फ पहली होती है,बाकी सब सरकार के लिए संख्या होते हैं। मृतकों की संख्या बढ़कर इतनी हुई वाली हेडलाइन हूं मैं। मैं वहीं हूं जिसकी मौत का जिम्मेदार आज तक नहीं मिला, जांच रिपोर्ट के नाम पर किसी सरकारी तहखाने की फाइल में धूल फांकने वाला लाल स्याही से लिखा नाम हूं मैं।
मैं मरा तो कीमत लगा दी जाएग��। 10 लाख, 20 में मेरी जिंदगी तोल दी जाएगी। हमारी नहीं, उनकी सरकार की गलती है,ये बात बोल दी जाएगी।
शायद बिहार की अब यही रीत हो चली है, कभी इस पार तो कभी उस पार.. इस बार मांझी की पतवार है , लेकिन वही पुराना सत्ता का व्यापार...न��तीश कुमार का पाला बदलना बिहार के जन���त को क्या संदेश देता है बता रहे हैं @VistaarNews के संवाददाता @bharatsuraj01 #NitishKumarRejoiningNDA #NitishKumar #Nitish_Kumar #OathCeremony #VistaarNews
Kohli's innings of 29(16) will draw diverse comments because of his stature. From a T20 perspective, it was exactly the kind of innings a team wants. One of six batters scored more than a sixth of the runs at a SR > asking rate. But because he is a great player, we expect more and think it was underwhelming. A 29(16) from Jaiswal or Gill will be more acceptable though it should really be seen the same way. The 29(16) approach will produce, say a 60(33) a few times. It is admirable that at this stage of his career Kohli is actually challenging himself in the shortest form. 29(16) is a better innings than 50(40) in a 170+ run chase.