इंसानियत का कोई धर्म नहीं ह��ता, उसका सिर्फ़ एक नाम होता है मोहब्बत।
सहारनपुर की सुनीता अरोड़ा 180 किलोमीटर का सफर तय करके जंतर-मंतर सिर्फ़ इसलिए पहुँचीं क्योंकि उन्होंने रोज़ एक नौजवान, मोहम्मद जुनैद, को बिना किसी भेदभाव के लोगों की मदद करते देखा था।
मुलाकात होते ही सुनीता जी की आँखें भर आईं। उन्होंने कहा "बेटा, तेरी माँ तुझसे मिलने सहारनपुर से आई है ऐसे ही हिंदू-मुस्लिम एकता और इंसानियत की मिसाल बनकर लोगों की सेवा करते रहना" यह दृश्य बता गया कि नफ़रत की दीवारें चाहे जितनी ऊँची हों, इंसानियत और मोहब्बत उन्हें हमेशा पार कर जाती है।
यही है भारत की असली पहचान प्यार, भाईचारा और इंसानियत।
मंत्री जी ने सराहनीय काम किया,
इसका मतलब ये नहीं की सरकार��� कामों पर सवाल नहीं किया जायेगा।
बहरहाल बुर्क़ा में बाराबंकी कि नाजनीन हैं, इनका छोटा बेटा लंबे समय से बीमार है। डॉक्टर ने इलाज के लिए लाखों रूपये का खर्चा बताया गया।
वो BJP नेता और मंत्री सतीश चन्द्र शर्मा के पास पहुंची, मंत्री जी ने नाजनीन के बेटे के लिए 9 लाख रूपये का इंतजाम किया है। अब नाजनीन के बेटे का इलाज हो सकेगा।
यह है विजयपत सिंघानिया
रेमंड ग्रुप के फाउंडर और पूर्व अध्यक्ष
एक समय था जब इनके पास अरबों, खरबों की संपत्ति थी
और यह अंबानी से भी ज्यादा अमीर थे
इनके पास खुद के luxury जेट और बेहतरीन गाड़ियों का काफिला था
लग्जरियस लाइफ जीने में उनका कोई शानी नहीं था
लेकिन फिर इन्होंने रेमंड कंपनी में अपनी पूरी भागीदारी अपने बेटे के नाम कर दी
उसके बाद उनके बेटे ने इनको कंपनी से हटा दिया
साथ में अपने घर से भी निकाल दिया
हर तरह की संपत्ति हड़प ली
नतीजा यह हुआ कि बुढ़ापे में इनको मुंबई में एक किराए के घर में रहना पड़ा था
कल उनकी दुख भरी स्थिति में मौत हो गई है
भगवान इनकी आत्मा को शांति दे 🙏
लेकिन यह कहानी हमें सबक ��ेती है कि जीते जी अपना सब कुछ किसी के नाम नहीं करना चाहिए
भले ही वो आपका बेटा क्यों ना हो
सुप्रीम कोर्ट ने कोविड वैक्सीन से जुड़ी याचिकाओं को लेकर सुनाया फैसला
◆ सरकार वैक्सीनेशन के साइड इफेक्ट्स का मुआवजा दे- SC
◆ जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि वैक्सीनेशन के साइड इफेक्ट्स की मॉनिटरिंग के लिए मौजूदा सिस्टम जारी रहेगा
#CovidVaccine | #SupremeCourt | Covid Vaccine Dose
"पापा, मैं आपका इलाज अच्छे हॉस्पिटल में
कराऊंगी"
अनाया कैंसर से जूझ रहे पिता का इलाज कराने वाली थी लेकिन उस अधूरे सपने के साथ वो फौजी बेटी अब नहीं रही!
झुंझुनूं के छोटे से गांव बाजवा रावतका की एक बेटी अनाया, जिसने अपने बीमार पिता की आंखों में उम्मीद जगाई थी लेकिन
एक बेकाबू थार ने उसको उसके पिता से हमेशा के लिए दूर कर दिया ! 😭
रविंद्र कुमार शर्मा के लिए अनाया सिर्फ एक बेटी नहीं, बल्कि उनका सहारा थी। उसने वादा किया था कि एयरफोर्स में भर्ती होने के बाद वह उनकी बीमारी का सबसे अच्छा इलाज कराएगी।
12वीं में 97% अंक हासिल करने वाली अनाया एयरफोर्स का written एग्जाम क्लियर कर चुकी थी !
31 जनवरी को जोधपुर में उसका फिजिकल एग्जाम होना था, जिसकी तैयारी के लिए वह रोज
जयपुर-दिल्ली एक्सप्रेस हाईवे पर दौड़ लगाती थी।
मंगलवार की सुबह एक तेज रफ्तार गाड़ी ने उसकी मेहनत, उसके सपनों और एक बेबस पिता की उम्मीदों को कुचल डाला ! वो थी उसकी आखिरी दौड़ और वो था आखिरी मंजर !
अनाया जैसी बेटियां देश का गौरव होती हैं। आज शब्द कम पड़ रहे हैं !
जीवनसाथी क्या होता है?
आज के दौर में जब रिश्ते एलिमनी पर चल रहे हो और सब कुछ पैसा ही हो गया हो, उस दौर में मोहब्बत और प्रेम की परिभाषा समझता वीडियो!
मैं यकीनन कह सकती हूँ कि आपकी इस वीडियो को देखकर आंखें नम जरूर हो जाएगी।😭😭
Food Safety and Standards Authority of India से तिरछा सवाल >
👇
न्यूयॉर्क स्टेट यूनिवर्सिटी के रिसर्च में साफ़ कहा गया है कि बिसलेरी, एक्वाफिना समेत 93% बोतलबंद पानी में प्लास्टिक कण पाए गए और कई मामलों में बोतलबंद पानी नल के पानी से भी ज़्यादा खतरनाक निकला। 9 देशों के 11 बड़े ब्रांड्स की 259 बोतलों का टेस्ट हुआ नतीजा डराने वाला है।
अब सवाल FSSAI से है >>
अगर बोतलबंद पानी “सबसे सुरक्षित” है, तो प्लास्टिक माइक्रोपार्टिकल्स कैसे घुस रहे हैं?
अगर खतरा साबित हो चुका है तो कौन-सी कार्रवाई हुई? कौन-सा अलर्ट जारी हुआ? कौन-सा ब्रांड सस्पेंड हुआ?
हक़ीकत यह है कि लाइसेंस बाँटने वाली संस्था बनकर FSSAI ने उपभोक्ताओं की सेहत दांव पर लगा दी है। रिपोर्टें आ रही हैं, रिसर्च सामने है, लेकिन ज़मीन पर न निगरानी, न सख़्त टेस्टिंग, न जवाबदेही। सवाल यही है—FSSAI जनता की सेहत की रखवाली कर रही है या इंडस्ट्री की?
26 साल पुराना एक एहसान… जो आज इंसानियत की मिसाल बन गया...!!🥰🙌🏼
मध्य प्रदेश के DSP संतोष पटेल ने साबित कर दिया कि असली बड़ा आदमी वह नहीं होता जिसके पास पद होता है, बल���कि वह होता है जिसके दिल में कृतज्ञता ज़िंदा रहती है।
साल 1999 में, जब संतोष पटेल गंभीर रूप से बीमार थे और उन्हें तुरंत खून की ज़रूरत थी, तब कोई रिश्तेदार या पहचान काम नहीं आई। उसी समय सतना के एक साधारण सफाईकर्मी संतु मास्टर आगे आए और बिना किसी स्वार्थ के रक्तदान कर उनकी जान बचा ली।
समय बदला… हालात बदले… और वही युवक आगे चलकर पुलिस सेवा में चयनित होकर DSP बने। लेकिन 26 साल बाद भी वे उस अनजान एहसान को ��ूले नहीं, जिसने उन्हें नया जीवन दिया था।
हाल ही में जब उन्होंने अपने जीवनदा��ा को खोजने की कोशिश की, तो पता चला कि संतु मास्टर अब इस दुनिया में नहीं हैं। यह जानकर वे भावुक हो उठे। तभी उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने हर संवेदनशील इंसान की आंखें नम कर दीं।
DSP संतोष पटेल ने संकल्प लिया कि वे संतु मास्टर की बेटी का कन्यादान स्वयं करेंगे, क्योंकि उनके लिए यह सिर्फ सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उस खून के कर्ज़ को चुकाने का एक पवित्र प्रयास है, जिसने कभी उन्हें मौत से वापस ल���टाया था।
यह कहानी हमें याद दिलाती है कि....
👉 इंसानियत का कर्ज़ वक्त के साथ खत्म नहीं होता।
👉 पद और वर्दी से बड़ा होता है दिल।
👉 और सच्ची महानता एहसान याद रखने में है, जताने में नहीं।
आज जब दुनिया स्वार्थ और दिखावे की दौड़ में आगे बढ़ रही है, ऐसी घटनाएँ भरोसा दिलाती हैं कि इंसानियत अब भी ज़िंदा है।
कोविड वैक्सीन से लकवे जैसी बीमारी का खतरा!
वैसे भी हाल ही में ऐसी कई घटनाएं देखने को मिली है जिसमे चलते चलते लोग heart attack से मर जा रहे है ! भले उनका सही कारण ना मालूम हो लेकिन कोविड के बाद से अकस्मात heart failure मृत्यु दर में भी काफ़ी इजाफा हुआ है
भारत सरकार के संचार मंत्रालय के तहत काम करने वाले दूरसंचार विभाग (DoT) ने एक जरूरी जानकारी दी है. DoT ने बताया है कि इस साल अक्टूबर महीने में 50 हजार मोबाइल हैंडस���ट को रिकवर किया है, जो चोरी हुए या फिर गुम हुए थे.DoT ने साल 2023 में संचार साथी प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया था. इस प्लेटफॉर्म की मदद से अब तक 7 लाख से ज्यादा मोबाइल फोन रिकवर किए जा चुके हैं. ये जानकारी आकाशवाणी पोर्टल से मिली है.DoT ने लोगों से कहा कि वह अपने स्मार्टफोन में संचार साथी ऐप इंस्टॉल कर लें. यह ऐप ना सिर्फ रिपोर्ट, ब्लॉक और चोरी हुए फोन को खोजने का काम करता है. बल्कि यह फेक मोबाइल हैंडसेट को पहचा��ने में भी मदद करता है.
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