@Pawankhera Dear @Pawankhera Ji
Nothing is more absurd than you being born in a Hindu family. The land was of Hindus. Why don't you give gyan to Muslims living in Hindu-majority areas when they are shouting 5 times through loudspeakers and disturbing the majority of the Hindu population?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आरक्षित वर्ग चाहे आयु की, फीस की, स्थान की या आय आदि में छूट पता है, परंतु यदि वो ३५ वर्ष की आयु में २३ वर्ष की आयु के अनारक्षित व्यक्ति से एक नंबर अधिक लता है, तो उसे अनारक्षित सीट लेने का अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट जी, आप एक बिल लाइए जिसमें यह व्यवस्था हो कि दलित केवल फॉर्म भर दे, और उसे किसी दलित/अंबेडकर/फुले आदि नाम के NGO से एक सर्टिफिकेट मिल जाए कि इस बार ये नौकरी उसे मिले, तो उसे परीक्षा आदि देने की आवश्यकता नहीं।
लोग कहेंगे कि सुप्रीम कोर्ट बिल कैसे ला सकता है! भाई सुप्रीम कोर्ट इस देश में बिल, साँप, स्कोडा, लहसुन सब ला सकता है। वो संसद के कानून पलट देते हैं, तो बनाना क्या चीज है। नौकरियों को जाति-आधारित चुनाव से देना चाहिए।
परीक्षा की तैयारी करना ए�� मानसिक भार है ऐसे दलित-पीड़ित-शोषित-वंचित समाज के लोगों पर। उन्हें ना तो जल पीने दिए गया, ना जीने दिया गया, ऐसे में परीक्षा भवन में बुलाना एक अपराध घोषित कर दीजिए। आप सोचिए कि कोई दो साँस हायड्रोजन, एक साँस ऑक्सीजन खींच कर, फेफड़े से पेट में पानी बना रहा हो, उसके इतना विज्ञान जानने के उपरांत भी उसे परीक्षा में बैठना पड़ेगा?
35 वर्ष तक वो तैयारी करता है, क्या इसी आधार पर यह न माना जाए कि उसने पढ़ने लायक सब पढ़ लिया होगा? दूसरी बात, अंबेडकर जी ने 64 मास्टर्स की डिग्री ले ली, क्या यह काफी नहीं है? जब सवर्णों की भूमि ट्रांसफर हो सकती है, तो क्या अंबेडकर जी की डिग्री को पूरे दलित समुदाय का सामूहिक अधिकार न माना जाए?
यदि मुझे कभी कैंसर हुआ, तो मैं अस्पताल में कदम भी नहीं रखूँगा :- डॉ. निकोलस गुएगेन
मैंने बहुत से मरीजों को कीमोथेरेपी के दुष्प्रभाव���ं से मरते देखा है।
शायद जनता को यह नहीं पता, लेकिन कैंसर से मरने वाले 50% लोग वास्तव में इसके आक्रामक उपचारों' के कारण मरते हैं।
यदि मुझे कैंसर होता है, तो सबसे पहले मैं सब कुछ बंद कर दूँगा - काम और दूसरी चीज़ें - और उपवास (Fasting) शुरू करूँगा। कम से कम 30 दिनों तक। यह कैंसर के इंजन को बंद करने जैसा है।
मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि हमारे शरीर में ऊर्जा के दो स्रोत होते हैं: चीनी और केटोन बॉडीज
कैंसर की कोशिकाएं केवल चीनी का उपयोग कर सकती हैं, वे उपवास के दौरान शरीर द्वारा बनाए गए केटोन्स का उपयोग नहीं कर पातीं।
इसलिए, उपवास करके आप कैंसर को भूखा मार सकते हैं।
BJP leader @Kompella_MLatha offers prayers at the prayer room at Delhi Airport.
Now understand why this is such an important and much-needed step.
Airport prayer rooms are meant for everyone, irrespective of religion. But over time, only Muslims have been using them regularly, while people from other faiths rarely offer prayers in such public spaces. This created a perception that these spaces belong to Muslim community.
What was a shared facility slowly started being seen as an exclusive right.
And the moment Madhavi ji used that same space, the entire ecosystem erupted, abusing her and calling it “communal” or “hate”.
Think about it.
A Hindu offering prayers in a neutral, government-managed space is labelled communal, simply because others had been using it uninterrupted for years.
This mindset didn’t appear overnight. It grew because others chose to stay absent.
This should be an eye-opener for all the Hindus.
If you leave shared spaces unused, someone else will eventually start claiming ownership over them.
The solution is simple, participate, use what is yours too, and maintain balance....
@narendramodi प्रधानमंत्री के तृप्तिकरण की राजनीति ने बिहार के सारण मे रहने वाली 15 वर्षीय राजपुत लड़की का बलात्कर 5 महादलित राक्षसों द्वारा किया गया
प्रधानमंत्री क्यों खामोश है ?????
इंकॉउंटर का आदेश क्यों नही देता???
@PMOIndia
मैं हमेशा से कहता आया हूँ इन हराM के पिल्लों से कोई सामान मत खरीदा करो। जब पता है ये गंदगी करके खिलाते हैं तो फिर इनकी दुकानों पर जाना ही क्यों है?
लेकिन तुम लोगों को समझ ही नहीं आता। खुद ही अपने पैसों से इन्हें ताकत देते हो और बाद में रोना भी रोते हो।
लगता है मोदी जी की कोई पुरानी दबी हुई नाड़ी खुल गई है जिसे उन्हें अपने ओबीसी होने मूल भान हो गया है। शायद बचपन में उनका भी चोंचन हुआ होगा। इसीलिए अब न्याय दिलाने की उत्कंठा जाग चुकी है। लेकिन ये गूढ़ ज्ञान १५ साल बाद आया? विचारणीय है।
नेहरू जी ने कहा था कि नौकरी में “आरक्षण” से सरकारी कामकाज का स्तर गिरेगा, यह “योग्यता” का ��पमान और “अकुशलता” का सम्मान होगा।
मोदी जी इस बात को बताते हुए नेहरू को गलत सिद्ध करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि इससे उन्हीं का मुखौटा उतर रहा है-नेहरू का नहीं..
The Nehru–Gandhi family worked to sideline Babasaheb B. R. Ambedkar.
They focused only on glorifying the Nehru-Gandhi family.
They once described the public as a liability, whereas PM Modi considers the people of the country to be its greatest asset.
-Shri @NitinNabin