#Update
Abhijeet Dipke, Saurav Das, Ashutosh Ranka and Gitanjali Ma’am ( Sonam sir’s wife ) are still continuing the sit-in protest at Jantar Mantar
They are right now in front of Kerala House
This peaceful protest is not ending!
According to the Dainik Bhaskar report, Khajuraho-Panna rail line: 54,578 trees have been cut down... Railways say the old route was dangerous... Now a new route has been decided 1 km away, with 50,000 more trees to be cut.
#Deforestation#IndianRailway#MinistryofRailway
Actually Mr. Dharmendra Pradhan is currently administrating the ministry of education, his last ministry was Ministry of petroleum and natural gas. Sometime he forget his current ministry and mix petroleum/natural gas with the education... And it's obvious to get fire...
भर्ती परीक्षाओं को आखिर इतना मजाक क्यों बना दिया गया है
कहीं paper leak, कहीं server issue, कहीं center mismanagement और अब #ssc_gd 500 छात्रों को बुलाकर सिर्फ 250 की व्यवस्था।
आखिर ये कैसी परीक्षा प्रणाली बनाई जा रही है?
दूसरे जिलों से छात्र महीनों की तैयारी, खर्च और pressure लेकर exam देने पहुंचते हैं, और वहां जाकर पत�� चलता है कि system खु�� तैयार नहीं है।
सबसे दुखद बात ये है कि हर बार गलती व्यवस्था की होती है, लेकिन नुकसान सिर्फ छात्रों को उठाना पड़ता है। फिर जब युवा गुस्सा दिखाते हैं, तो लोग उनकी प्रतिक्रिया देखते हैं
लेकिन उस मजबूरी और टूटते भरोसे को नहीं, जो उन्हें वहां तक ले जाता है।
He is neither petroleum minister nor power minister. He is road transport and highway minister. 🤦🏻♂️
Do you know who is Petroleum minister and Power minister?
उम्र भर ग़ालिब यही भूल करता रहा, धूल चेहरे पे थी और आईना साफ़ करता रहा...
It happens, when the institution itself is involved in the corruption...
समझ तो गए ही होंगे...
भर्ती परीक्षाओं को आखिर इतना मजाक क्यों बना दिया गया है
कहीं paper leak, कहीं server issue, कहीं center mismanagement और अब #ssc_gd 500 छात्रों को बुलाकर सिर्फ 250 की व्यवस्था।
आखिर ये कैसी परीक्षा प्रणाली बनाई जा रही है?
दूसरे जिलों से छात्र महीनों की तैयारी, खर्च और pressure लेकर exam देने पहुंचते हैं, और वहां जाकर पत�� चलता है कि system खु�� तैयार नहीं है।
सबसे दुखद बात ये है कि हर बार गलती व्यवस्था की होती है, लेकिन नुकसान सिर्फ छात्रों को उठाना पड़ता है। फिर जब युवा गुस्सा दिखाते हैं, तो लोग उनकी प्रतिक्रिया देखते हैं
लेकिन उस मजबूरी और टूटते भरोसे को नहीं, जो उन्हें वहां तक ले जाता है।
खजुराहो-पन्ना रेलवे लाइन के लिए पहले 54,578 पेड़ काटे, अब ��स डिजाइन को गलत बताकर नया रूट तय किया, 50 हजार पेड़ और कटेंगे
#Deforestation #Panna #Khajuraho #Environment #RailProject
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NEET, CBSE Class 12th के बाद अब SSC GD में भी कई जगहों से गड़बड़ियों की खबर आ रही है।
कई जगहों से शिकायत आ रही है कि सर्वर में खराबी आ गई, कई जगह एग्जाम स��ंटर पर क्षमता से ज़्यादा बच्चों को बुला लिया गया।
ये किस तरह की सरकार है? जो एक पेपर ठीक से नहीं करा पा रहे?
This is the screen recording of our audience demographic which we have shared with media before our account was hacked.
More than 94% of the audience is from India.
Why is a Union Minister @KirenRijiju labelling Indian youth as Pakistani?
प्लेटफॉर्म नंबर 6 के कॉकरोच
भार��� गणराज्य में अब इंसान नहीं बचे थे।
सिर्फ कॉकरोच बचे थे।
छोटे-छोटे, भूरे रंग के, थके हुए कॉकरोच…
जिनके हाथों में पारदर्शी फाइलें होती थीं-
आधार कार्ड,
पासपोर्ट फोटो,
जाति प्रमाण पत्र,
EWS सर्टिफिकेट,
डोमिसाइल,
और साइबर कैफ़े में बीस रुपये देकर लैमिनेट करवाए गए सपने।
वे मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर, प्रयागराज, पटना और कोटा जैसे शहरों के छोटे कमरों में रहते थे…
जहाँ उम्मीद महीने के किराए पर मिलत��� थी।
हर साल सरकार नौकरियाँ निकालती थी…
ठीक वैसे जैसे ज्योतिषी शुभ मुहूर्त बताते हैं-
बहुत कम,
बहुत नाटकीय तरीके से,
और बिना किसी गारंटी के।
एक शाम,
जब कमरे का पंखा भारतीय न्याय व्यवस्था की तरह धीरे-धीरे घूम रहा था,
तभी एक कॉकरोच ने चिल्लाकर कहा-
“भाई! BPSC ने AEDO का फॉर्म निकाल दिया!”
कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया।
फिर शुरू हुआ भारतीय बेरोजगारी का सबसे पवित्र संस्कार-
“भाई, फॉर्म भर दिया?”
वेबसाइट सत्रह बार क्रैश हुई।
पेमेंट चार बार फेल हुआ।
एक कॉकरोच ने गलती से दो बार फीस भर दी।
दूसरे का जन्मतिथि सर्वर स्वीकार ही नहीं कर रहा था…
मानो सरकार को उसके अस्त���त्व पर ही शक हो।
लेकिन अंततः,
OTP और Server Error से लड़ते-लड़ते,
सभी ने फॉर्म भर दिया।
अब असली परीक्षा शुरू हुई-
ट्रेन टिकट बुक करना।
एडमिट कार्ड परीक्षा से तीन दिन पहले आया,
जैसा कि भारतीय परंपरा है।
Tatkal टिकट उतनी तेजी से गायब हुए,
जितनी तेजी से किसी घोटाले के बाद जवाबदेही गायब ह��ती है।
कॉकरोचों ने हर ऐप इस्तेमाल किया-
IRCTC,
ConfirmTkt,
Telegram Group,
यहाँ तक कि भगवान भी।
लेकिन टिकट नहीं मिला।
आख़िरकार एक कॉकरोच ने वीरता से कहा-
“जनरल में चलेंगे भाई।”
बाकियों ने वैसे ही सिर हिलाया,
जैसे लोग हिलाते हैं जिनके पास खोने को अब कुछ नहीं बचा होता।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन उस दिन रेलवे स्टेशन कम,
प्रलय का ट्रेलर ज़्यादा लग रहा था।
हर तरफ कॉकरोच ही कॉकरोच।
किसी के पास बैग था।
किसी के पास तक���या।
और किसी के पास पूरे परिवार की उम्मीदें।
ट्रेन प्लेटफॉर्म पर लगी।
फिर अचानक…
भौतिकी खत्म हो गई।
मानवता खत्म हो गई।
और व्यक्तिगत जगह नाम की चीज़ तो जन्म लेने से पहले ही मर गई।
कॉकरोच खिड़कियों से घुस रहे थे,
दरवाज़ों से,
इमरजेंसी गेट से,
शायद आध्यात्मिक शक्तियों से भी।
जनरल डिब्बे के अंदर ऑक्सीजन एक लग्ज़री बन चुकी थी।
एक कॉकरोच टॉयलेट के पास लटका हुआ सोच रहा था-
मार्क्स सही था,
अंबेडकर सही थे,
या फिर जिंदगी ही गलत थी।
दूसरा धीरे से बोला-
“भाई… अगर नौकरी लग गई ना…
तो जिंदगी भर Sleeper में ट्रैवल करूंगा।”
दो स्टेशन बाद,
सभी कॉकरोच शरणार्थियों की तरह Sleeper Coach में घुस गए।
TT भी उन्हें देखकर हार चुका था।
शायद उसे भी पता था-
यह लोग अपराधी नहीं,
अभ्यर्थी हैं।
गर्मी इतनी थी कि पंखे गर्म हवा को एक कोने से दूसरे कोने तक सरकारी फाइलों की तरह घुमा रहे थे।
कोई बच्चा रो रहा था।
कोई उल्टी कर रहा था।
कोई Polity रिवाइज कर रहा था।
कोई Cutoff पर बहस कर रहा था।
लेकिन हर कॉकरोच के हाथ में नोट्स थे।
क्योंकि भारत में गरीबी आराम कर सकती है…
प्रतियोगिता नहीं।
अगली सुबह वे बिहार पहुँचे।
लाल आँखें।
गीले कपड़े।
टूटी हुई देह।
परीक्षा केंद्र के बाहर हजारों कॉकरोच खड़े थे-
आत्मविश्वास का नाटक करते हुए।
कोई Last Minute Current Affairs पढ़ रहा था।
कोई साफ टॉयलेट खोज रहा था।
कोई जीवन का अर्थ।
पहला पेपर शुरू हुआ।
ज़्यादातर ने कुछ खाया तक नहीं था।
इनविजिलेटर ने गर्व से कहा-
“Silence Maintain कीजिए।”
मानो इस देश ने युवाओं की आवाज़ पहले से दबा न रखी हो।
पहले पेपर के बाद,
कॉकरोचों ने प्रतियोगी छात्रों का राष्ट्रीय भोजन खाया-
बासी समोसा,
नारंगी रंग की चाउमीन,
गुनगुनी लस्सी,
और नमी खाए हुए बिस्किट।
फिर दूसरा पेपर शुरू हुआ।
Question Number 63 तक पहुँचते-पहुँचते दिमाग़ ने आत्महत्या कर ली।
लेकिन OMR भरना जारी रहा।
क्योंकि भारत में छात्रों को बहुत कुछ सिखाया जाता है-
Critical Thinking नहीं,
सहनशक्ति ज़रूर।
रात हो चुकी थी।
होटल फुल।
लॉज फुल।
सस्ती इंसानियत भी फुल।
एक होटल वाले ने मुस्कुराकर कहा-
“रूम है… साढ़े ��ार हजार।”
कॉकरोच हँस पड़े।
मज़ाक पर नहीं…
अपनी औकात पर।
आख़िरकार वे प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर अखबार बिछाकर सो गए।
किसी ने बैग को तकिया बनाया।
किसी ने Lucent GK को।
मच्छर पूरी रात भर्ती प्रक्रिया चलाते रहे।
सुबह चार बजे किसी ने चिल्लाया -
“उठो भाई! दूसरा दिन का पेपर है!”
और कॉकरोच फिर उठ खड़े हुए।
बिना क्रांति।
बिना शिकायत।
बिना टीवी डिबेट।
सिर्फ ज़िंदा रहने के लिए।
तीसरा पेपर खत्म हुआ।
कई दिनों बाद उनके चेहरों पर खुशी थी।
“भाई… इस बार हो जाएगा।”
यह वही खतरनाक वाक्य है…
जो भारत को अब तक चलाए हुए है।
वापसी का सफर और भी बुरा था।
टिकट फिर नहीं मिला।
बीस घंटे का सफर -
खड़े होकर,
दरवाज़े पर बैठकर,
टुकड़ों में सोकर,
पानी बाँटकर,
बैग बचाकर।
दिल्ली लौटते वक्त हर कॉकरोच आधा इंसान,
आधा थकान बन चुका था।
कमरे पर पहुँचकर उन्होंने घर फोन किया-
“पेपर अच्छा गया है।”
कई महीन��ं बाद उस रात वे सुकून से सोए।
लेकिन एक सप्ताह बाद नोटिफिकेशन आया-
EXAM CANCELLED
Paper Leak.
Investigation Under Process.
New Dates Will Be Announced Soon.
सरकार ने चिंता जताई।
कोचिंग संस्थानों ने नए बैच लॉन्च कर दिए।
न्यूज़ चैनलों ने प्राइम टाइम डिबेट कर ली।
और कॉकरोच?
उन्होंने चुपचाप फिर Telegram खोला।
नए PDF डाउनलोड किए।
Current Affairs अपडेट किया।
नई वैकेंसी खोजी।
क्योंकि कॉकरोच हर चीज़ झेल लेते हैं -
भ्रष्टाचार।
गर्मी।
भूख।
अपमान।
पेपर लीक।
रद्�� परीक्षाएँ।
और लोकतंत्र।
रात के दो बजे,
एक टिमटिमाते बल्ब के नीचे,
एक कॉकरोच छत को देखते हुए धीरे से बोला -
“एक दिन हम भी इंसान बनेंगे…”
फिर उसने किताब खोली।
क्योंकि अगला फॉर्म आ चुका था।
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