कपास पर आयात शुल्क शून्य करने का फैसला इस सरक���र की किसान विरोधी सोच का सबसे ताज़ा और सबसे खतरनाक प्रमाण है।
सरकार ने कपास पर आयात शुल्क 11% से घटाकर शून्य कर दिया है। ऊपर से यह फैसला कपड़ा उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के नाम पर किया गया है, लेकिन अगर इस नीति के किसानो ��े आर्थिक और सामाजिक परिणामों को ज़रा गहराई से देखें तो साफ़ दिखता है, कि यह फैसला उद्योगपतियों के दरबार में बैठकर लिखा गया है और इसकी कीमत इस देश के साठ लाख कपास किसान चुकाएँगे।
पहले तथ्यों को यहाँ देखना ज़रूरी है, क्योंकि सरकार तथ्यों से हमेशा बचती है।
आयात शुल्क हटते ही घरेलू बाज़ार में कपास का भाव ₹57,000 प्रति गाँठ से गिरकर ₹52,500 पर आ गया। प्रति गाँठ ₹4,500 से ₹5,500 की सीधी गिरावट आई। यह गिरावट किस��� सूखे से नहीं आई, किसी बाढ़ से नहीं आई बल्कि यह दिल्ली के सत्ता के गलियारे में बैठकर लिए गए एक नीतिगत फैसले का तत्काल परिणाम है। जिस किसान ने बुवाई के वक्त बीज, खाद और मज़दूरी के लिए उधार लेकर पैसा लगाया था, उसकी लागत तो पहले से तय थी लेकिन उसकी आमदनी इस सरकार ने एक कलम चलाकर कम कर दी।
आयात के आँकड़े इससे भी भयावह तस्वीर पेश करते हैं। 2020-21 में भारत ने 1.87 लाख टन कपास आयात की थी जो 2024-25 में बढ़कर 7.03 लाख टन हो गई। और 2025-26 के पहले छह महीनों में ही 6.74 लाख टन आयात हो चुकी है जो पूरे पिछले साल के लगभग बराबर है। अब शुल्क शून्य है तो आने वाले महीनों में यह संख्या और बढ़ेगी। यह विदेशी कपास मिलों में जाएगी और घरेलू किसान की कपास मंडी में पड़ी रहेगी।
यह कोई जटिल अर्थशास्त्र नहीं है। जब बाज़ार में सप्लाई बढ़ती है तो कीमत गिरती है। विदेशी कपास के बड़े पैमाने पर आने से घरेलू कीमतें दबाव में रहेंगी। मिल मालिक सस्ती विदेशी कपास की तरफ जाएगा और घरेलू किसान की कपास की माँग घटेगी। यह कोई राजनीतिक आरोप नहीं है बल्कि यह बाज़ार का स्वाभाविक व्यवहार है, जिसे कोई भी अर्थशास्त्री नकार नहीं सकता और जिसे यह सरकार जानबूझकर नज़रअंदाज़ कर रही है।
इस पर ��रकार का जवाब है कि एमएसपी के ज़रिए किसान की रक्षा होगी। इस साल एमएसपी में ₹589 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है जिसमें मध्यम किस्म के लिए ₹7,710 और लंबी किस्म के लिए ₹8,110 प्रति क्विंटल तय किया गया है। लेकिन जब बाज़ार में भाव ₹4,500 से ₹5,500 प्रति गांठ गिर जाए तो ₹589 की बढ़ोतरी को किसान की रक्षा कहना न सिर्फ बेईमानी है, बल्कि यह उस किसान के साथ खुला मज़ाक है जो कर्ज़ में डूबा हुआ अपनी फसल का एमएसपी का इंतज़ार कर रहा है।
एमएसपी की असलियत और भी कड़वी है। एमएसपी की घोषणा और एमएसपी का वास्तविक मिलना दो बिल्कुल अलग बातें हैं और यह सरकार इस फर्क को हमेशा छुपाती है। जब बाज़ार में कीमतें एमएसपी से नीचे आती हैं तो Cotton Corporation of India यानी CCI खरीद करती है लेकिन यह व्यवस्था हर किसान तक नहीं पहुँचती। छोटे और सीमांत किसान जो विदर्भ और मराठवाड़ा के दूरदराज़ के गाँवों में हैं वो खरीद केंद्रों तक आसानी से नहीं पहुँच पाते। नमी और ग्रेडिंग के तकनीकी मानकों के नाम पर कितनी कपास वापस होती है यह सवाल सरकार कभी नहीं बताती क्योंकि इसका जवाब सरकार को शर्मिंदा करता है।
ऐतिहासिक साक्ष्य भी इस सरकार के खिलाफ गवाही देते हैं। पिछली बार जब आयात शुल्क हटाया गया था तब महज तीन महीनों में 30 लाख गांठ कपास आयात हो गई थी। मिलों की माँग विदेशी कपास से पूरी हो गई और किसान को एमएसपी से भी कम दाम पर अपनी फसल बेचने पर मजबूर होना प��़ा। जो किसान बेहतर भाव की प्रतीक्षा में अपनी कपास रोककर बैठा था उसे अंत में घाटे में बेचना पड़ा। यह तथ्य इस सरकार को पता है और फिर भी यही नीति दोबारा लागू की जा रही है। यह नीतिगत लापरवाही नहीं है बल्कि यह जानबूझकर किया गया किसान के साथ अन्याय है।
एक और पहलू है जिसे इस पूरी बहस में दबाया जा रहा है। देश में कपास उत्पादन 15 साल के सबसे निचले स्तर पर है जहाँ उत्पादन सिर्फ 294 लाख गांठ है जबकि ज़रूरत 318 लाख गांठ की है। यह कमी अचानक नहीं आई। सिंचाई का अभाव, न�� कृषि तकनीक का किसान तक न पहुँचना और कीट प्रबंधन में सरकार की लगातार विफलता इन सब कारणों से उत्पादन गिरता रहा। जब किसान को कोई सहारा नहीं दिया गया तो उसने कपास का खेती छोड़ना शुरू किया और रकबा घटता चला गया। यह संकट सरकार ने पैदा किया और अब उसी संकट का बहाना बनाकर आयात शुल्क शून्य किया जा रहा है। पहले व्यवस्था ने किसान को तोड़ा और फिर उसी टूटे हुए किसान की कमज़ोरी को आधार बनाकर उद्योग के हित में नीति बना दी गई। नीति निर्माण का इससे बेशर्म तर्क और क्या हो सकता है।
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भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र से RJD के प्रत्याशी भाई सोनू राय जी की जीत पर क्षेत्र के सभी मतदाताओं का आभार और हार्दिक शुभकामनाएँ
#MLC@RJDforIndia
भोजपुर–बक्सर स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र, बिहार विधान परिषद उपचुनाव हेतु राष्ट्रीय जनता दल द्वारा ���ोषित प्रत्याशी श्री सोनू कुमार राय जी के समर्थन में आप सभी सम्मानित जनप्रतिनिधियों से विनम्र आग्रह है कि कल दिनांक 12 मई को क्रम संख्या 2 पर अपना बहुमूल्य मतदान कर उन्हें भारी मतों से विजयी बनावें,
@yadavtejashwi
@RJDforIndia
दिल्ली की धरती पर आज जो हुआ, वह सिर्फ एक अपराध नहीं—यह इंसानियत, संविधान और सामाजिक सद्भाव पर सीधा हमला है। जब “रक्षक” ही “भक्षक” बन जाए और किसी की पहचान देखकर गोली चला दी जाए, तो सवाल सिर्फ एक घटना का नहीं रहता, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का बन जाता है। बिहारी पहचान की वजह से जान लेने वाले वही लोग हैं जो कपड़ों से लोगों की पहचान करने वालों से प्रेरित हैं।
क्या आज एक बिहारी होना गुनाह है?
क्या मेहनत, ईमानदारी और संघर्ष की पहचान अब निशाना बनने लगी है?
सच यह है कि दिल्ली का आज का स्वरूप—उसकी अर्थव्यवस्था, उसका निर्माण, उसकी रफ्तार—बिहार के लाखों मेहनतकश हाथों की देन है। सड़क से लेकर संस्थान तक, श्रम से लेकर सेवा तक—बिहारियों का योगदान सिर्फ महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि आधारभूत है। दिल्ली पुलिस से लेकर हर क्षेत्र में बिहारियों ने अपनी निष्ठा और क्षमता साबित की है।
ऐसे में “बिहारी पहचान” पर हमला सिर्फ एक समुदाय पर नहीं, बल्कि उस भारत की आत्मा पर हमला ��ै जो विविधता में एकता की बात करता है।
यह वक्त है अन्याय के खिलाफ खड़े होने का। और ऐसे समय में भाजपा सरकार के केंद्रीय मंत्री शर्मनाक बयानबाज़ी में लगे हैं ।
हम यह साफ कर देना चाहते हैं—
बिहारी होना गर्व है, कमजोरी नहीं।
और इस पहचान का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
#Bihar #Bihari #BihariPride #Justice #StandAgainstHate
बिहार की सत्ता पर क़ब्ज़ा जमाये हुए लोग कुर्सी कुर्सी खेल रहे हैं, और बिहार की जनता अपराध से परेशान है।
अररिया जिले के फारबिसगंज में एक शख़्स ने सरेआम बीच बाजार दूसरे शख्स का गला काट दिया और सैकड़ों लोगों के बीच उसका सिर लेकर घूमता रहा।
बाद में भ���ड़ ने हत्या करने वाले को ढूंढ़कर उसकी भी हत्या कर दी। पुलिस भी कानून व्यवस्था को संभालने की जगह जान बचाती दिखी।
मंत्री पदों पर आसीन और सत्ताधारी पार्टियों के चलाने वाले बस इसमें लगे हैं कौन सी कुर्सी किसके हत्थे चढ़े, विधि व्यवस्था से मुंह मोड़ कर सत्ता की मलाई का बटवारा चल रहा है।
सरकार सत्ता के नशे में मस्त
जनता अपराध से है त्रस्त!!
#Bihar #Araria #Crime #BiharGovtFails #TejashwiYadav
@nidhiambedkar@grok And that’s why AI can’t be as efficient as human always. साफ़ साफ़ “साक़िब की दुल्हन “ लिखा है और दुप��्टे के बॉर्डर पर “क़ुबूल है” लिखा हुआ है, दोनों उर्दू में लिखा है। @grok
प्रेस विज्ञप्ति
दिनांक 27 मार्च 2026 को अठारहवीं लोकसभा की कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण संबंधी स्थायी समिति द्वारा तैंतीसवाँ प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।
भारतीय संसद की कृषि संबंधी मामलों की इस समिति ��े सर्वदलीय सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से पारित यह प्रतिवेदन भारत की कृषि संप्रभुता, खाद्य सुरक्षा एवं स्वायत्तता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इस प्रतिवेदन में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं किसान कल्याण विभागों को संसदीय समिति द्वारा यह मार्गदर्शन दिया गया है कि देश के कृषि उत्पादन और कृषि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कृषि संबंधी आयात को विनियमित ��रना अति आवश्यक है।
जिस समय केंद्र सरकार द्वारा अमेरिकी ट्रेड डील के माध्यम से कृषि क्षेत्र में बिना शुल्क आयात को बढ़ावा दिया जा रहा है, ठीक उसी समय भाजपा सांसदों के समर्थन एवं सत्तारूढ़ दलों के बहुमत वाली संसद की कृषि क्षेत्र की स्थायी समिति द्वारा भारत के कृषि क्षेत्र को विदेशी उत्पादों से बचाने के लिए आयात शुल्क, पोर्ट ऑफ एंट्री पर विस्तृत जीएम जांच तथा अन्य कई नीतिगत प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं।
इससे यह स्पष्ट है कि भारत सरकार और केंद्रीय मंत्रिमंडल विपक्ष के साथ-साथ सत्तारूढ़ दल के सांसदों का भी विश्वास खो चुकी है और आनन-फानन में लिए गए शून्य प्रतिशत आयात शुल्क वाले अमेरिकी ट्रेड डील को निजी तौर पर भाजपा के सांसदों का भी समर्थन प्राप्त नहीं है।
27 मार्च को प्रस्तुत किए गए इस प्रतिवेदन में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं। इसके अतिरिक्त संसद की स्थायी समिति की प्रेस विज्ञप्ति एवं रिपोर्ट संलग्न है।
1.समिति की यह राय है कि पीएम आशा योज��ा को सशक्त करके, मूल्य समर्थन योजना के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य खरीद को राष्ट्रीय तिलहन और दलहन उत्पादन के 100% तक विस्तारित करने की आवश्यकता है, जो वर्तमान में 25% है।
2.समिति द्वारा यह पुरजोर सिफारिश की गई है कि सरकार ऐसी व्यवस्था बनाए जिसमें आयात शुल्क को घरेलू उत्पादन स्तर के आधार पर गतिशील रूप से समायोजित किया जा सके, ताकि किसानों को सस्ते आयात से बचाया जा सके।
3.समिति यह भी प्रस्तावित करती है कि यदि पाम ऑयल की वैश्विक कीमतें 800 डॉलर प्रति टन या सरकार द्वारा निर्धारित किसी अन्य दर स��� नीचे आती हैं, तो पाम ऑयल के आयात पर 20% या सरकारी प्राधिकारियों द्वारा उपयुक्त समझे जाने वाले प्रतिशत के अनुसार सुरक्षा शुल्क लगाया जाए।
4.बीजों की अधिकतम मूल्य सीमा तय करने के लिए एक राष्ट्रीय आयोग की स्थापना की जाए, जिसमें किसान प्रतिनिधियों, राज्य सरकारों और उद्योग संगठनों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व हो।
5.नए बीज विधेयक की तत्काल आवश्यकता है, जिसमें निजी क्षेत्र के बीज उत्पादकों को विनिय���ित करने के लिए उचित प्रावधान हों।
6.समिति ने दृढ़ता से सिफारिश की है कि केंद्र सरकार द्वारा बीज संप्रभुता अधिकारों को मान्यता देने वाला एक नया बीज विधेयक अतिशीघ्र लाया जाए, जिसमें स्वदेशी बीजों को मान्यता देने के साथ-साथ पारंपरिक प्रथाओं और जैव विविधता को बढ़ावा देने को प्राथमिकता दी जाए।
7.देश के कृषि क्षेत्र से संबंधित नीति निर्माण एवं विनियमन में विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के किसानो��� के प्रतिनिधित्व पर जोर दिया जाए तथा प्रस्तावित कानून में बीज आपूर्ति और मूल्य, दोनों के लिए विनियमन शामिल किया जाए।
8.समिति ने प्रस्तावित किया है कि आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) खाद्य पदार्थों एवं बीजों के आयात पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है।
9.समिति ने प्रस्तावित किया है कि राज्य बीज निगमों में अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए किसान कल्याण विभाग के दिशा-निर्देशों एवं मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) में संशोधन किया जाए।
10.राइस ब्रान ऑयल को अन्य खाना पकाने वाले तेलों के साथ मिश्रित करने को प्रोत्साहित किया जाए तथा वि��ायक निष्कर्षण उद्योग में दक्षता बढ़ाई जाए।
11.सभी प्रकार के आयातित कृषि एवं खाद्य उत्पादों की पोर्ट ऑफ एंट्री पर यह विस्तृत जांच की जाए कि उक्त उत्पाद आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) हैं या नहीं।
यह देखा गया है कि आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) खाद्य पदार्थ देश में अवैध रूप से लाए जा रहे हैं। इसके तात्कालिक रोकथाम के लिए बीज सहित सभी आयातित खाद्य एवं कृषि उत्पादों की पोर्ट ऑफ एंट्री पर ही विस्तृत जा��च एवं नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए।
सुधाकर सिंह
सांसद: बक्सर लोकसभा
सदस्य: कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण संबंधी स्थायी समिति
मुज़फ़्फ़रपुर के गायघाट क्षेत्र में हुए जगतवीर राय हत्याकांड ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे नेता प्रतिपक्ष आदरणीय तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार और स्थानीय पुलिस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है।
माननीय सदस्य विधान परिषद, युवा राष्ट्रीय जनता दल के प्रधान महासचिव, कर्मठ एवं ऊर्जावान नेता क़ारी सोहैब भाई को यौम ए पैदाइश की पुरख़ुलूस मुबारकबाद।
@qarisohaibrjd
पिछले लोक सभा चुनाव के समय भाजपा के कई सारे सिटिंग सांसदों ने ये लिख कर दिया था “मैं स्वेच्छा से चुनाव नहीं लड़ना चाहता हूँ”
सेम पैटर्न है, नीतीश कुमार के “राज्य सभा सांसद बनना चाहता हूँ” वाले पत्र का।
बाक़ी सबको तो पता है ही।
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