सैयद मखदूम अशरफ़ जहांगीर सिमनानी अलैहिर्रहमा जो एक भारतीय मुस्लिम सुफी धर्म गुरु (गौस) हैं आप का मजारशरीफ #किछौछा शरीफ़ में है। आप बीसवीं सदी के न केवल चमत्कारिक बाबा है बल्कि आप साम्प्रदायिक सौहार्द की ऐसी जीती- जागती मिसाल है कि मुसलमान होते हुए भी लाखों हिंदू के आप मुर्शिद हैं
عروس حضرت یا محمد، قصیدہ بردہ شریف کے ایک مشہور، معروف اور محبوب ترین شعری مصرعے یا اجتماعی ورد (مقررہ شعر) کا ایک حصہ ہے جو محافلِ نعت اور سماع میں کثرت سے پڑھا جاتا ہے
عالم اول اور فاضل اول کے رجسٹریشن میں بھی 22 ستمبر تک توسیع کر دی گئی ہے۔ایسے طلبہ و طالبات جو 2025 یا اس سے پہلے مولوی پاس کر چکے ہیں, اور کسی وجہ سے اب تک رجسٹریشن نہیں کرا سکے ہیں وہ جلد سے جلد کرا لیں۔
उसकी आँखों के सामने बीमारियाँ आती हैं, लोग मर जाते हैं और सगी औलाद भी मौत के बाद भूल जाती है; लेकिन वह अपनी ज़िंदगी में 'सदक़ा-ए-जारिया' (निरंतर लाभ देने वाले पुण्य) के काम नहीं करता जो दुनिया से जाने के बाद उसके काम आएँ।
असली अंधा वह नहीं है जिसके पास रोशनी नहीं है, बल्कि वह है जो देख तो सकता है लेकिन सिर्फ अपने मतलब की चीज़ों पर नज़र रखता है और दूसरों के हक़ छीनता है।
अंधा वह है जो दुनिया के सारे तमाशे देख रहा है, फिर भी सबक नहीं सीखता और अनजान बना रहता है।
यह वह पवित्र स्थान है जहाँ हज़रत ख़्वाजा #मोईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैह, हज़रत ख़्वाजा #क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह और हज़रत बाबा #फ़रीदुद्दीन मसूद गंज-ए-शकर रहमतुल्लाह अलैह ने एक साथ नमाज़ अदा की थी।
स्थान: मस्जिद औलिया, दिल्ली, भारत
تضمین برمصرعۂ کلام الامام
تو نُبوت کا گلستاں ، وہ ولایت کا رَبیع
یا نبی اُسکی لطافت کی ہے تجھ سے تَوسیع
وہ تری شان کا مظہر ہے بہ اوصافِ جمیعْ
اُسکی نسبت کا لیے ہاتھ میں دامانِ رَفیعْ
" تیری سرکار میں لاتا ہے رضؔا اُس کو شفیعْ "
جو مرا غوث ہے اور لاڈلا بیٹا ��یرا
अल्लाह से इश्क़ (इश्क़-ए-हक़ीक़ी) #सूफ़ियाना और इस्लामी परंपरा का सबसे ऊँचा और रूहानी मक़ाम है। यह महज़ एक लफ़्ज़ नहीं, बल्कि ब���दे और उसके रब के बीच का वो गहरा रूहानी ताल्लुक़ है, जहाँ इंसान अपने वजूद को अल्लाह की मर्जी में फ़ना (समाहित) कर देता है।
उर्दू माध्यम से #UPSC का सफर, दो बार असफलता के बाद तीसरी कोशिश में IPS बनीं #सारा_रिजवी पहले पहल तो #CA बनना चाहती थीं, लेकिन एक व्याख्यान से प्रेरित होकर UPSC की तैयारी शुरू की। दो बार असफल होने के बावजूद उन्होंने ��ार नहीं मानी और 2008 में तीसरी कोशिश में UPSC पास कर IPS बनीं।
इस्लाम में लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा को बुनियादी महत्व हासि�� है। #दीन ए इस्लाम ने ज्ञान प्राप्त करने (शिक्षा हासिल करने) को पुरुष और स्त्री दोनों के लिए समान रूप से अनिवार्य (फ़र्ज़) घोषित किया है ताकि एक संतुलित और नैतिक रूप से मजबूत #समाज_का_निर्माण हो सके।
इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार "नाउम्मीदी (निराशा) #कुफ़्र है" एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विचारणीय बात है, जो क़ुरआन और हदीस के भाव को दर्शाती है। अल्लाह तआला का इरशाद है: "और अल्लाह की रहमत (दया) से निराश न हो, निस्संदेह अल्लाह की रहमत से वही लोग निराश होते हैं जो अविश्वासी हैं