खुद तो अंबेडकरवादी bsd वाले बिना आरक्षण के तो खड़े नहीं हो पा रहे ,
बिना सरकारी भीख आरक्षण के खुद का और अपने परिवार का पेट नहीं भर पा रहे है ,
वो भी चले है अपने बाप लोगों का सामना करे 😁😁😁
सुनील अस्तेय भाई ने बिल्कुल बेहतरीन बात कही है, चंद मुट्ठीभर मनुवादी औकात भूल गए हैं 🔥 🔥
अगर SC ST OBC समुदायने फूंक भी मार दिया तो 3% मनुवादी हवा में उड़ जाएंगे,
जनसंख्या के अनुसार ही बात करना चाहिए मनुवादियों को ।
जो अंबेडकरवादी ब्राह्मण की बेटियों को बहु बनाने का सपना देख रहे है ,
उनसे एक सवाल है :-
वो अपनी बेटियों को कोठे पर बि��ाएंगे या बाजार में नीलामी करवाएंगे .?
इन्हीं मुट्ठी भर लोगों ने ,
तुम्हारे बाप दादा के गण में झाड़ू गले में मटकी टांग कर मोर बनाया था ,
और तुम्हारी एमियो से हर महीने स्तन टैक्स व हर रात शुद्धिकरण का रिकॉर्ड बनाया तब जाकर तुम झा**ट भर अंबेडकरवादी जन्म लिए ,
ताकि अपने बायोजिकल ताऊओ को गीदड़ भभकी दे सको। 😁😁
रक्षा बंधन तो भाई बहन का त्योहार है ! इसमें बहन भाई को राखी बांधती है और भाई अपनी बहन को गिफ्ट देता है। क्रीती अगर किसी मंदिर में या घर में हो रही पूजा में एसे कपड़े में बैठती तो ग़लत कह सकते थे।
इसमें धर्म का अपमान या भावना आहत करने वाली क्या बात है ?
चुदीस्ट स्याले जरा बताना तो आज तक कितने चमरपिल्लो की पीढ़िया सुधरी है,
और जिनकी पीढ़ियाँ सुधर गई फिर वो आज भी क्यों आरक्षण ले रहे है ,
अगर अभी तक सुधरी नहीं है तो अगले कितने वर्षों में तुम लोग गटर से बाहर निकल जाओगे .?
वे आरक्षण से नफरत क्यों करते हैं?
क्योंकि उन्हें यह पता है कि आरक्षण बहुजनों को वह अवसर प्रदान करता है, जिससे उनकी पूरी पीढ़ी बदल जाती है।
अब अगर बहुजन समाज के लोग द्विज सवर्णों के साथ बराबरी करेंगे, तो वे अपनी जातीय श्रेष्ठता किस पर दिखाएंगे?