होली की रात का जागरण, जप और ध्यान चार चाँद लगा देगा।
होली के दिन किया हुआ जप लाख गुना फलदायी होता है। यह साफल्य-दिवस है, मौन रहना, फलाहार करना और अपना-अपना गुरुमंत्र जपना।
इस दिन जिस निमित्त से भी जप करोंगे वह सिद्ध होगा। ईश्वर को पाने के लिए जप करना।
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प्राकृतिक रंग बनाने की विधि :-
काला रंग- आंवले के चूर्ण को लोहे के बर्तन में भिगोएं।
हरा रंग- मेहँदी का चूर्ण + आटा।
भूरा रंग- मेहँदी + आंवले का चूर्ण।
पीला रंग- अमलतास या गेंदे के फूल या हल्दी चूर्ण + बेसन।
लाल रंग- लाल चंदन+ लाल गुलहड़ के फूलों का चूर्ण।
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आप व्यवहार करते हुए भी अपने में कर्तापन न लाओ। सहज स्वभाव से कर्तव्य-कर्म ईमानदारी से निभाते जाओ। अपने सहज स्वरूप में टिकते जाओ। जो अपने सहज स्वरूप को पा लेता है उसको इंद्रियों के विषय बाँध नहीं सकते। सुख उसका स्वभाव हो जाता है। वह अव्यय पद को पा लेता है। #AsharamjiBapuQuotes
वैदिक, प्राचीन एवं विश्वप्रिय उत्सव
यह होलिकोत्सव प्राकृतिक, प्राचीन व वैदिक उत्सव है । साथ ही यह आरोग्य, आनंद और आह्लाद प्रदायक उत्सव भी है, जो प्राणिमात्र के राग-द्वेष मिटाकर, दूरी मिटाकर हमें संदेश देता है कि हो... ली... अर्थात् जो हो गया सो हो गया ।
Happy Holi
#होलिका_दहन
होली की रात का ( 28 मार्च 2021) जागरण , जप , ध्यान … पुण्य का ढेर पै��ा करता हैं।
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महान तपस्या , महान पुण्य, महान फल देने वाली यह होली की रात हैं । - पूज्य संत श्री आशारामजी बापू
'विपरीत परिस्थिति हटे और अनुकूल परिस्थिति आये तब हम सुखी र��ेंगे' - ऐसा सोचते हो तो आप जगत के दास हो गये। 'हर परिस्थिति परिवर्तनशील है, मैं आत्मा अपरिवर्तनशील हूँ' - ऐसा सोचते हो तो आप परिस्थिति के स्वामी हो गये। #AsharamjiBapuQuotes
#होली_पर्व पर नाचें, कूदें, फांदे और केसूड़े के रंग से अपने शरीर को जरा रंग देंगे । Palash के फूलों में आपके सप्तधातुओं को संतुलित करने की शक्ति है । केसूड़े के फूलों को देनेवाले वृक्ष का नाम शास्त���रों में ब्रह्मवृक्ष है ।
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#Holi2021
#वैदिक_होली
होली के बाद 15-20 दिन तक बिना नमक का अथवा कम नमकवाला भोजन करना स्वास्थ्य के लिए हितकारी है।
इस मौसम में 15-20दिन सु��ह 20-25 नीम के कोमल पत्ते और एक काली मिर्च चबा के खाने से व्यक्ति वर्षभर निरोग रहता है
इन दिनों में भुने हुए चने का सेवन शरीर से वात, कफ आदि दोषों का शमन करता है।
आरोग्य, सत्ता, साम्राज्य, बुद्धिमता पा लेना दुर्लभ नहीं। जगत का बोध करा दे, ऐसे कई लोग मिलेंगे लेकिन जगदीश्वर तत्व का बोध... वैकुंठ में, लोक-लोकांतर में नहीं, अपने आप में सत का बोध करा दे, ऐसे सद्गुरुओं की प्राप्ति दुर्लभ है। #AsharamjiBapuQuotes#tuesdaymotivations#tuesdayvibe
@asharamjibapu_ 🌼🙏
तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता।।
इसलिए हे महाबाहो ! जिस पुरुष की इन्द्रियाँ इन्द्रियों के विषयों से सब प्रकार निग्रह की हुई हैं, उसी की बुद्धि स्थिर है। #AsharamjiBapuQuotes
जिन भाग्यशालियों ने सद्गुरु के द्वारा भगवन्नाम पाया है, उनका चित्त परमात्मसुख से तृप्त होने लगता है। फिर उनको दुनिया की कोई चीज-वस्तु आकर्षित करके अंधा नहीं कर सकती। वे ज्यों-ज्यों जप करते जायेंगे, त्यों-त्यों उनके हृदय ���ें आत्म-अमृत उभरता जायेगा। #AsharamjiBapuQuotes
पलाश की अपनी एक सात्त्विकता है । पलाश के फूलों का रंग रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाता है । गर्मी को पचाने की, सप्तरंगों व सप्तधातुओं को संतुलित करने की क्षमता पलाश में है । पलाश के फूलों से जो होली खेली जाती है, उसमें पानी की बचत भी होती है ।- पूज्य बापूजी
��ेषां त्वन्तगतं पापं जनानां पुण्यकर्मणाम् ।
ते द्वन्द्वमोहनिर्मुक्ता भजन्ते मां दृढव्रताः ॥
ऐसे तो भजन करने वाले लाखों-करोड़ों आदमी मिलते हैं लेकिन द्वंद और मोह को साथ में रखकर भजन करते हैं । इसलिए जो महापुरुषों को मिलता है, वो आम आदमी को नहीं मिलता ।
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बीते हुए समय को याद ना करना, भविष्य की चिंता ना करना और वर्तमान में प्राप्त सुख-दु:खादि में सम रहना, ईश्वर-सुमिरन, सत्संग करना उन्नति के सर्वोपरि साधन हैं। ईमानदारी से किया हुआ व्यव��ार भी भक्ति बन जाती है और दिखावा,ठगने के लिए की हुई भक्ति भी बंधन बन जाती है। #AsharamjiBapuQuotes