मर्दों की आज़ादी में औरत की देह भी शामिल है क्या?
---------------------------------------
ये अपनी औरतों को ढँक कर रखते हैं और हमारी औरतों को ताड़ते हैं- बहुत साल पहले एक दोस्त ने कहा था और मैंने मासूमियत से पूछा था “कौन हैं तुम्हारी औरतें? कभी मिलवाओ!” सब हँस पड़े। बात हँसी की नहीं थी। लड़ाई की थी। जो हुई। तुम भी उनकी औरतों को ताड़ना चाहते हो, या अपनी औरतों को भी ��ुर्क़ा पहनाना चाहते हो? उसने कहा तुम समझ नहीं रहीं।
कैसे समझूँ?
----------
आप समझ सकते हैं उस अधिकार भाव को जो एक आदमी के अंदर होता है जिसके चलते वह किसी महिला का नक़ाब खींच दे? किसी की छाती पर हाथ मरकर भाग जाए? किसी का दुपट्टा नोचकर फरार हो जाए?
नौकरी का लेटर पकड़ाते-पकड़ाते नीतीश कुमार ने एक महिला का हँसते-हँसते नक़ाब नोच दिया। उनके पीछे खड़े मंगल पांडे को यह देखकर हँसते हुए किसी ने देखा।
हँसते-हँसते ही उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद ने कहा कल “हे,हे,हे...वो भी तो आदमी हैं न, पीछे नहीं पड़ जाना चाहिए, छू दिया नकाब तो इतना हो गया, कहीं और छू दिया होता तब क्या हो जाता!” फिर माइक वाला पत्रकार और महोदय दोनों हँस रहे हैं और मेरे दिमा��़ में गूँज रहा है “कहीं और छू दिया होता तो, तब क्या हो जाता! ही,ही,ही।”
पलट कर महिला ने मुख्यमंत्री को चांटा मार दिया होता तब? तब भी हँसी आती?
हँसते-हँसते ही एक आदमी दूसरे आदमी को चुटकुला सुना रहा है-
--------------------------------------------एक बंदा अपनी बीवी फेंकने पहाड़ पर जा रहा था, दोस्त बोला मेरी भी ले जा, तो दोस्त ने कहा, बुरा न माने तो तेरी वाली को वापस आते हुए फेंक दूँ? ही, ही, ही। बीवी मायके जाए तो इन्हें ‘बैचलर अगेन’ होना है लेकिन चरित्र हमेशा औरत का ख़राब रहेगा। ही, ही,ही। बुर्क़ा क्यों कहते हैं...ही,ही,ही...
राखी सावंत पर लोगों को अक्सर हँसते हुए देखा। उसी राखी सावंत ने कह दिया –“नक़ाब खेंचना बुरा नहीं? मैं आपकी धोती खींच लूँ तो?”
अभी कुछ दिन पहले ही शेयर किया था एक जज का पुराना फ़ैसला “स्तन पकड़ना, नाड़ा खोलना, रेप की कोशिश नहीं है।” मेरे यहाँ ही किसी ने कॉमेंट किया था- इन जज साहब की पब्लिकली पैंट उतार लें तो?
एक संत (?) कह रहा था - बीवी तो मनोरंजन का खिलौना होती है। ख़ुद ही हँस रहा है अपनी बात पर। सामने बैठी जनता भी।
एक शास्त्री कह रहा है- ख़ाली प्लॉट है औरत बिना सिंदूर। ख़ुद ही हँस रहा है। सामने बैठी जनता हँस रही है। उसके आस्थावान दर्शक टीवी पर देखकर हँस रहे हैं।
मैं इस ब्रह्मांड में एक पैशाचिक हँसी को बार-बार सुन रही ���ूँ
--------------------------------------------जो द्रौपदी का वस्त्रहरण देखकर ख़ुश होती है। एक सभा और सभा में ठहाके। ऐसी औरत के साथ ऐसा ही होना चाहिए। भीड़ है तमाम लोगों की इस दुनिया में जो महिलाओं के रेप, हत्या, उत्पीड़न को किसी भी तरह जस्टीफाई करते हैं।
यह सब कोई अलग-अलग घटनाएँ नहीं हैं। यह एक ही मानसिकता के अलग-अलग दृश्य हैं जहाँ ��र्द की आज़ादी हँसते-हँसते औरत के शरीर पर दर्ज की जाती है। जहाँ नक़ाब खींचना शरारत है, छू लेना भूल है, और पलटकर सवाल करना बदतमीज़ी। जहाँ सत्ता हँसती है, भीड़ हँसती है, और औरत की चुप्पी को सहमति मान लिया जाता है।
इस ब्रह्मांड में गूँजती वह पैशाचिक हँसी कोई मिथक नहीं है
--------------------------------------------वह हर उस ठहाके में है जो स्त्री की बेइज़्ज़ती पर फूटता है। वह हर उस चुटकुले में है जो बीवी, बहन, प्रेमिका को ‘वस्��ु’ बना देता है। वह हर उस फ़ैसले में है जो औरत के शरीर को टुकड़ों में बाँटकर अपराध को छोटा कर देता है। सवाल यह नहीं है कि “कानून क्या कहता है” या “इरादा क्या था।” सवाल यह है कि हम कब तक हँसते रहेंगे? और कब तक यह हँसी ही हिंसा बनकर औरतों के कपड़े, हिम्मत और ज़िंदगी नोचती रहेगी?
औरत की उन्मुक्त हँसी को ताड़का की हँसी कहने वाले मर्दों ने लगता है अपनी
आज़ादी में औरत की देह को भी शामिल मान लिया है और जब औरत अपनी आज़ादी की बात करती है तब इन्हें हँसी ��ती है।
वही पैशाचिक हँसी।
In a mother’s womb were two babies. One asked the other: “Do you believe in life after delivery?”The other replied, “Why, of course. There has to be something after delivery. Maybe we are here to prepare ourselves for what we will be later.”
“Nonsense,” said the first. “There is no life after delivery. What kind of life would that be?”
The second said, “I don’t know, but there will be more light than here. Maybe we will walk with our legs and eat from our mouths. Maybe we will have other senses that we can’t understand now.”
The first replied, “That is absurd. Walking is impossible. And eating with our mouths? Ridiculous! The umbilical cord supplies nutrition and everything we need. But the umbilical cord is so short. Life after delivery is to be logically excluded.”
The second insisted, “Well I think there is something and maybe it’s different than it is here. Maybe we won’t need this physical cord anymore.”
The first replied, “Nonsense. And moreover, if there is life, then why has no one ever come back from there? Delivery is the end of life, and in the after-delivery, there is nothing but darkness and silence and oblivion. It takes us nowhere.”
“Well, I don’t know,” said the second, “but certainly we will meet Mother and she will take care of us.”
The first replied “Mother? You actually believe in Mother? That’s laughable. If Mother exists then where is She now?”
The second said, “She is all around us. We are surrounded by her. We are of Her. It is in Her that we live. Without Her, this world would not and could not exist.”
Said the first: “Well I don’t see Her, so it is only logical that She doesn’t exist.”
To which the second replied, “Sometimes, when you’re in silence and you focus and listen, you can perceive Her presence, and you can hear Her loving voice, calling down from above.”
Maybe this was one of the best explanations of the concept of GOD.
– this lovely parable is from Your Sacred Self by Dr. Wayne Dyer 🙏
#Mahalaya2023#Navratri2023
"सुनिए महादेव, आपको भोजन का ध्यान नहीं रहता है, मैं नहीं रहूँगी तो ऐसा नहीं भोजन पानी त्याग के समाधि में बैठे रहना। ऐसा ना सोचें कि आपके गण ��ुझे लौटने के बाद कहेंगे नहीं।" - देवी के पाँव मानो किसी पक्षी के पंखों पर रखे थे, कैलाश में भोर से ही हलचल थी।
महादेव सिर नीचे किए भोजन कर रहे थे। धीरे से देवी की और देख मुस्कुराए, बोले- "मन नहीं हो रहा है तो ना जाओ, देवी।"
"आप ऐसे ना कहें। वर्ष में एक बार तो मायके जाती हूँ, सब स्मरण हो आता है, आँगन में दौड़ता नन्हें पाँव और पायल की छुन छुन पर मुस्कुराते पिता, सखियों की छेड़, भव्य भवनों की पहचानी हुई छ���ि, अब कई घर रिक्त हैं, परंतु उन में वही परिचित स्पंदन हैं, मानो खिड़कियाँ बोल रहीं हों - 'ए छुटकी, एदिके आशो! इधर आओ, तुमको अलता लगा दूँ? कई लोग हैं जो पहचानेंगे नहीं, परंतु मैं उन्हें पहचान लूँगी, एक विवाहित स्त्री क�� वापस मायके जाना अपने बालपन विस्मृत चिन्हों का ही संधान तो होता है। दाँतों में आँचल का कोना दबाये, रिक्शे के छत्ते के नीचे से बदलते हुए शहर में ठहरी हुई पहचान के चिन्ह ढूँढती आँखें वो कोने ढूँढती है जहाँ वो बुढ़िया के बाल बेचने वाले के पीछे अपनी सखियों के सैंग दौड़ लगाती थी, वो आम के बाग जहाँ से कच्ची केरियाँ अपने दुपट्टे में बांध के आती थी और चौकीदार जब शिकायत करने आता है, तो बाबा अपनी कुर्सी के पीछे उसे छुपा के कह देते थे - 'अरे नहीं, ये तो सुबह से कहीं गई ही नहीं, और एक बच्चा कितनी केरी खा ही लेगा। ये तो सुबह से घर पर ही है।' और उसके बाद आँखों ही आँखों में बाप बेटी इस छोटे से षड्यंत्र की सफलता पर मुस्कुरा देते थे। माँ का क्रोध, पिता का संरक्षण। मैं आज महादेवी हो कर इस समस्त विश्व की माँ हूँ, परंतु, एक सामान्य स्त्री की भाँति, प्रत्येक स्त्री की भाँति मुझे भी वह बालिका वर्ष में एक बार तो चाहिये जो मुझे पुनर्जीवित कर जाये।"
महादेव ने उनकी ओर देखा, मुस्कुरा कर बोले- "मायके की चौंध में मुझे स्मरण तो करोगी ना, देवी। या इस कैलाश में बैठी सामाजिक बंधनों से अनभिज्ञ योगी को लज्जित हो कर भूल ही जाओगी।"
"महादेव, मैं और आप अब भिन्न ही कहाँ हैं। मैं तो अब जब भी जाती हूँ, हिमवान की बिटिया नहीं महादेव की दुलहिन ही ��ानी जाती हूँ। और आपको भी यह स्मरण रहे। पत्नी कैलाश पर नहीं है तो आप यह ना सोचें कि आप मुक्त हैं, और बिना सूचना दिया कहीं भी निकल लेंगे। एक माह में लौट के आती हूँ। आप मुझे बहुत स्मरण कीजियेगा। मैं आपकी हो कर ही जा रही हूँ।"
"जाओ देवी, पुनः बालपन का सुख जिओ, पुनः नगर की वीथिकाओं में अपनी संतानों के सुख में भागीदार हो कर आओ, नगर की नन्हीं बच्चियों की किलकारियों में मुस्काओ, फुचका खाती, नटखट नेत्रों स�� ��हाँ वहाँ तकती कुमारियों की शंकित मुस्कानों को ऐसा निर्दोष उच्छृंखल अट्टहास बना दो मानो पर्वत से कल कल बहती जीवनदायिनी गंगा का स्वर हो। जिस समाज में स्त्रियों को खिलखिला कर हंसने की स्वतंत्रता हो, उसी पर भाग्य की देवी मुस्कुराती है। तुम्हारे स्नेहिल संरक्षण में भारतवर्ष की बेटियाँ सदा सौभाग्यवती रहें। समुद्र में स्वयं को खोती गंगा वहाँ मिलेगी, उसे भी मेरा स्नेह देना।
#महालय #Mahalaya2023 #Navratri2023
Not my own creation but had to share:
For the Hindi music / movie lovers / followers
There was
a romantic poet :
अभी ना जाओ
छोड़ कर कि
दिल अभी
भरा नहीं
🔸
There was
a philosophical poet :
मै
पल
दो पल का
शायर हूँ
🔹
There was
a regretful poet:
कभी ��भी
मेरे दिल में
खयाल आता है
🔸
There was
a poet who was
a committed lover:
मेरे दिल में
आज क्या है
तू कहें तों
मैं बता दूँ
🔹
There was
a poet content with
his life:
मांग के
साथ
तुम्हारा
🔸
There was a poet
who compromised
his love for his lover :
चलो
इक बार
फिर से
अजनबी
बन जाए
हम दोनों
🔹
There was
a downcast poet :
जाने वो
कैसे लोग थे
जिनके
प्यार को
प्यार मिला
🔸
There was
a carefree poet :
मैं
जिंदगी का
साथ
निभाता चला
🔹
There was a
non-materialistic poet :
ये दुनिया
अगर
मिल भी जाए
तो क्या है
🔸
There was
a patriotic poet :
ये
���ेश है
वीर
जवानों का
🔹
There was
revolutionary poet :
जिन्हें
नाज़ है
हिंद पर
वो
कहाँ है
🔸
There was
pessimistic poet :
तंग
आ चुके है
कशमकश-ए-जिंदगी से
हम
🔹
There was
a peace-loving
humanitarian poet :
अल्ला
तेरो नाम
ईश्वर
तेरो नाम
🔸
There was
a secular poet :
तू
हिंदू
बनेगा
ना
मुसलमान
बनेगा
🔹
There was
a flirting poet :
ए मेरी
जोहराजबी
तुझे
मालूम नहीं
🔸
There was
a reminiscing poet :
जिंदगी भर
ना
भूलेगी
ये
बरसात की
रात
All these Poets had
ÖNE name :
#Saahir Ludhianvi !
Wishing him a wonderful 94th Birthday
We ask and aspire for world class cities, roads, transport systems, airports etc.
What about a world class justice system? Effective Policing, efficient precaution and courts that deliver justice promptly. Don’t we deserve that as well.
In Tianmen Mountain National Park, you can find the world's tallest natural arch.
there, at the pinnacle of the ascent, framed by the arch the suns radiant beams illuminate the 999 step, known as "the Stairway to Heaven"
Sometimes the best moments happen spontaneously. Went to a dubbing studio and I couldn't resist the urge to sing the cover of one of my all time favorite songs. 🤷🏻♀️🖤
Pure joy! ☺️✨
#TuJhoom#ParineetiChopra
Your believe / faith / religion does not make your a better person
Your behaviour does
Stop acting superior just because you follow a certain faith
Your bad behaviour will actually reflect badly on the religion you follow!