@deepakanand7 यह कविता मैथिलीशरण गुप्त के नाम से प्रचारित की जाती रही है लेकिन यह उनकी नहीं है। ऐसे ही एक अन्य कविता 'कोशिश करने वालों की हार नही��� होती' भी हरिवंशराय बच्चन जी के नाम से प्रचारित होती रही है पर वह सोहनलाल द्विवेदी जी न��� लिखी है।
@chitraaum@_YogendraYadav योगेंद्र यादव जी बड़ा असमंजस की स्थिति कर दे��े हैं समझ में नहीं आता नेहरू और इंदिरा जी के काल की राजनीति को याद रखना है या नहीं ... ।
ये भेड़चाल वाला देश है ..इस से पहले भी कई बाबाओं के जलवे हमने देखे हैं ..इस बाबा में भी कुछ अलग नहीं है बस मूर्ख बनाने की अद्भुत कला आती है इस बाबा को 🤪
@devprakashmeena sir jo academic no ki wajha se bahar ho jate unko pata hota number ke kya mayne hae.
phir to sir numbers ki boundary hata deni chahiye
बिना संदर्भ 30 सेकंड की क्लिप काट कर चलाने वाले सोचते हों कि इसका उनपर कोई कुप्रभाव पड़ेगा तो भ्रम में हैं। उनके अन्दाज़ में कहूँ तो- ‘धूमधाम से अपनी मूर्खता जारी रखिए’, ‘रत्ती भर भी फ़र्क़ नहीं पड़ता’।
#ISupportDrishtiIAS#ISupportVikasSir
एक शि���ु रोग विशेषज्ञ डा. दिलीप महलानाबीस..
इन्होंने ORS का अविष्कार किया जो भारत जैसे मानसूनी देश में संजीवनी के समान है..किंतु इन्हें कोई नही जानता,इन्हें कोई पुरस्कार नहीं मिला।
कल इनका निधन हुआ..क्या आपको पता चला?
हमें हमारे वास्तविक नायकों का मूल्य ही नहीं मालूम..
ठेले-खोमचे से #पॉलीथिन ज़ब्त करने से अभियान सफल नहीं होगा बल्कि चौराहों पर कपड़े की थैलियों की ऐसी मशीन लगाने से राहत मिलेगी। दक्षिण भारत की कई नगर पालिकाओं ऐसा करके अपना क्षेत्र पॉलीथिन मुक्त कर दिया। यह योजना पूरे देश में लागू होनी चाहिए। आपकी राय ??
#पॉलीथिन_फ़्री_इंडिया
यूपी में आज और कल प्रारंभिक पात्रता परीक्षा (PET) है --- इसमें क़रीब 37 लाख बेरोजगार भाग ले रहे हैं --- ऐसे में इनके आने -जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन के मुकम्मल इंतज़ाम तो किये जाने चाहिए थे न ---ये दृश्य औरैया के फफूंद स्टेशन का है ---यह स्थिति शर्मनाक और दुखद है ---
उत्तर प्रदेश सरकार को सवालों के घेरे में जितनी बार @upsssc_pet ने खड़ा कराया, उतनी मर्तबा किसी संस्था ने नहीं. PET का स���ंटर सुदूर निर्धारित किया. अब वेबसाइट रिस्पॉन्ड नहीं कर रही. प्रवेश पत्र डाउनलोड नहीं हो रहे. कल इम्तहान है ! 500km यात्रा करनी है! ये भारी पड़ेगा, मान लीजिये !