गुजरात निकाय चुनावों को UGC पर रेफरेंडम मानने वाले चोट्टों ने बांक��पुर को अभी तक 'हल्दी की खेती में व्यस्त भाजपा वोटर' या 'भाजपा ये सब छोटे उपचुनाव में रुचि नहीं लेती' टाइप के सुगम संगीत वाले पोस्ट किए या नहीं?
ऐसे लड़चट्ट समर्थक भगवान किसी पार्टी को ना दे! यहाँ धरातल पर मैया ^& पड़ी है और इनका ध्यान हवा में है! नितिन नबीन पंद्रह दिन में तीन बार पटना गए, रहे। कई बड़े नेता प्रचार करने गए और फिर भी पीके जीत गया।
तुमलोग आँड़ तौलते रहे और बताते रहो कि क्यों भाजपा का कोर वोटर इंटैक्ट है और मोदी जी की जय-जयकार कर रहा है। बह₹#%! इनसे निकम्मा और चाटुकार (और चूतिया) समर्थक नहीं देखा है मैंने!
राहुल गाँधी वाले भी बीच-बीच में हाथ खड़े कर लेते हैं, पर ये वाला खड़ा कोयला है साला! जल कर राख हो जाएगा पर उससे उठता धुआँ मोदी जी के नाम का होगा।
जयपुर वासियों और करनी सेना के महिपाल सिंह समेत हर व्यक्ति को आभार जिन्होंने यूजीसी को भुलाया नहीं और सतत इसके लिए पदयात्रा आदि के माध्यम से लोगों को जोड़ते रहे।
BJP 2 उपचुनाव चुनाव हार गई। बांकीपुर और दतिया चुनाव हार के प्रमुख कारण:-
- UGC के कारण नाराजगी स्पष्ट है
- दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन का असर साफ़ दिखा
- बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर का जबरदस्त असर हुआ
- दतिया में नरोत्तम मिश्र का टिकट कटना BJP के लिए संकटकार��� रहा
जैसे ही कोई मेरिट की बात करे, तुम लोगों के पेट में इतना दर्द क्यों होने लगता है??
वैसे मेरिट तो किसी में भी हो सकता है!!
या फिर तुमने मान लिया है कि तुममें मेरिट कभी आएगा ही नहीं??😂😂
यह सिर्फ़ एक विधायक या प्रशांत किशोर की जीत नहीं है। यह उस राजनीतिक संदेश की जीत है, जो उन्होंने पूरे अभियान में दिया।
“आप सिर्फ़ एक उम्मीदवार को नहीं, राजनीति की एक सोच को वोट दे रहे हैं।”
भाजपा पर सबसे बड़ा आरोप यही रहा कि जनता किसी को वोट देती है और मुख्यमंत्री कोई दूसरा बन जाता है। जातीय समीकरणों के नाम पर नेतृत्व तय करने की इस राजनीति से लोगों में असंतोष था। जब तेजस्वी यादव को अनपढ़ कहकर निशाना बनाया जाता है, तो फिर सम्राट चौधरी जैसे नेताओं पर भी वही कसौटी लागू होती है।
मैं पहले भी कहता रहा हूँ कि अगर प्रशांत किशोर 25–50 सीटों पर फोकस करते और स्वयं भी चुनाव लड़ते, तो उनके 20 से ज़्यादा विधायक विधानसभा में ह�� सकते थे। लेकिन इस बार उन्होंने पूरी ताक़त एक सीट पर लगाई और जीतकर बड़ा राजनीतिक संदेश दे दिया।
इस नतीजे ने उस दावे को भी चुनौती दी कि भाजपा के टिकट पर कोई भी उम्मीदवार जीत सकता है। भाजपा के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्र में कमजोर उम्मीदवार उतारने की कीमत पार्टी को चुकानी पड़ी।
साथ ही, UGC जैसे मुद्दों और सामान्य वर्ग में बढ़ती नाराज़गी को भी पूरी तरह नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। चुनाव से पहले ज़मीन पर इन मुद्दों की चर्चा साफ़ दिखाई दे रही थी। अगर चुनाव महत्वहीन था, तो फिर भाजपा के बड़े नेताओं ने लगातार वहाँ प्रचार क्यों किया?
यह हार भाजपा के लिए एक स्पष्ट राजनीतिक चेतावनी है कि ज़मीनी नाराज़गी और उम्मीदवार की गुणवत्ता, दोनों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
इतनी बार तुम्हारे ���ूठ और आधे सच को एक्सपोज किया है, कि अब थोड़ा बोरिंग हो गया है। खैर तुम झूठ बोलने से बाज नहीं आते तो हम भी पोल खोलना जारी रखेंगे।
तुम कहते हो - भारत ने पहले घोषणा नहीं की, बल्कि पूरी तैयारी के बाद E20 लागू किया।
अब जवाब सुनो - कौनसी तैयारी। 80% से अधिक गाड़ियों e20 कंपेटिबल नहीं है। ये कैसी तैयारी हुई?
अब बाकी का सुनो -
* एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाई गई। - तो? हम क्या करें?
* डिस्टिलरी विस्तार को वित्तीय ���हायता मिली। - तो? डिस्टलरीज के वित्तीय स्व��स्थ्य के लिए हम अपनी मेहनत से खरीदी गई गाड़ियां कबाड़ कर लें? वैसे अधिकतर लोग वाहन भी वित्तीय सहायता से ही खरीदते हैं। उसका क्या?
* ऑयल कंपनियों ने एथेनॉल की सुनिश्चित खरीद की। - तो? हमने बोला क्या ऐसा करने को?
* ARAI, ऑटो कंपनियों और विशेषज्ञों के साथ व्यापक परीक्षण किए गए। - रिपोर्ट कहाँ है? ये सारी रिपोर्टें तो तुम confidentiality के नाम पर छिपा कर बैठे हो।
ईंधन की उपलब्धता, इंजन की तैयारी और वैज्ञानिक पर���क्षण सफल होने के बाद ही E20 को चरणबद्ध तरीके से देशभर में लागू किया गया। - ऊपर वाले तीन प्वाइंट पढ़ लो फिर से।
#EthanolScam
@OGTeamBharat @tehseenp @FactswithDinesh @Nidhzee @Shankyram2 @theracemonkey
Today’s loss wasn’t just the BJP’s, it was the BJP IT Cell’s.
The moment they started branding sections of their own core voters as GC terrorists, they pushed those voters away.
You don’t win elections by insulting your own base.
तुम राष्ट्रपति बन गए ,
तुम प्रधानमंत्री बन गए ,
तुम IAS, IPS बन गए ,
उसके बाद भी तुम दलित हो, पिछड़े हो,
तो फिर ये बताओ कि अगड़ा (सामान्य) होने का क्या क्राइटेरिया है?
ऐसा क्या कर दिया जाय जिससे तुम अगड़ा बन जाओ ?
"हम फॉरवर्ड कास्ट का गर्दन काटने पर लगा था, काहे वोट दें BJP को?? हमारे बाल बच्चों का गर्दन काटने पर लगा है, इसलिए वोट दिए थे BJP को?
उ रविशंकर भी UGC पर साइन किया था, नहीं देंगे वोट!"
-ये बोलना है एक वोटर का
UGC पर GC वोटरों की नाराजगी अब दिख रही है!
सब कुछ साफ है अब-आँखे बंद करने से सच्चाई नहीं बदलेगी!
संसद में प्रभु श्रीराम का अपमान करने पर किसी ने पप्पू यादव पर जूता तो फेंका, लेकिन अफ़सोस कि निशाना चूक गया।
सच कहूँ तो यह घटना अत्यंत निंदनीय और हृदय विदारक है! अरे... मैं जूता फेंकने की नहीं, बल्कि उस फेंकने वाले के खराब निशाने की घोर निंदा कर रहा हूँ।