कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आज पटना में मोदी जी के पिताजी पर अभद्र टिप्पणी कर निरंतर हार से उपजी हताशा में सारी मर्यादाएँ तार-तार करने की अपनी कुंठा का एक और निम्नस्तरीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
स्व��्गीय माता जी के अपमान के बाद स्वर्गीय पिता जी का नाम लेकर कांग्रेस बार-बार अपनी ओछी राजनीति का परिचय देती रही है।
लगातार चुनावी हार से हताश कांग्रेस के पास अब न नीति बची है, न मुद्दे, केवल गाली-गलौज की राजनीति रह गई है।
जनता हर बार इसका करारा जवाब देती आई है और आगे भी देगी।
कभी जिस भाषा को गुंडे-मवालियों से जोड़ा जाता था, आज कांग्रेस अध्यक्ष उसी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। इनके युवराज इसी खीझ में कभी सड़क पर महिला पुलिसकर्मियों से गलत बर्ताव करते हैं, तो कभी अपने ही नेताओं से धक्का-मुक्की करते हैं। इनकी पूरी कार्यशैली माफिया प्रवृत्ति क�� हो गई है। यह राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि एक माफिया गैंग अधिक प्रतीत होती है।
वैसे, खड़गे जी के बयान वाले ख़्वाब को पूरा करने के लिए तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्षा ने दस साल तक हर पैंतरा चला, लेकिन कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। आज उनका बेटा इसी ख़्वाब को पूरा करने के लिए कभी वियतनाम, तो कभी कोलंबिया के बीच दर-दर भटक रहा है।
देश की जनता आपका यह ख़्वाब कभी पूरा नहीं होने देगी!
One day, Hafsa, one of Muhammaad’s wives, caught him sleeping with his sláve, Maria. Hafsa told Aisha, and chaos tore through Muhammaad’s household. The conflíct between Aisha, Hafsa, and Maria was so intense that Muhámmaad refused to speak to his wives for 29 days.
Even Allah and Umar had to step in to calm things down (see Quran, Surah At-Tahrim, verse 1 & 4). Allah kept revealing verses to justify Muhammad’s actions.
Verse 1. "O Prophet! Why do you prohibit ˹yourself˺ from what Allah has made lawful to you, seeking to please your wives? And Allah is All-Forgiving, Most Merciful".
Verse 4 then threatens the wives...
"It will be better˺ if you ˹wives˺ both turn to Allah in repentance, for your hearts have certainly faltered. But if you ˹continue to˺ collaborate against him, then ˹know that˺ Allah Himself is his Guardian. And Gabriel, the righteous believers, and the angels are ˹all˺ his supporters as well"
Whenever Muhámmaad needed to pull another stunt, conveniently, a new revelation from Allah would arrive!
At some point, you have to ask yourself if these revelations were truly the will of an all-powerful God or simply Muhammaad’s own wishes dressed up as divine commands.
The problem per se is not Muhammad but Mecca.
There is no historical/ archeological evidence of there being a place called Mecca in the 7th century.
The other problem is when and who wrote the hadiths. These were 300 to 600 years too late and written by people who did not live in Mecca or even Medina.
मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों,
सामाजिक समरसता, न्याय एवं मानवता के उद्घोषक आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी की पावन जयंती पर आप सभी को हृदय से बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं।
महर्षि वाल्मीकि जी ने अपनी अमर कृति रामायण के माध्यम से सत्य, धर्म, मर्यादा और क��्तव्यनिष्ठा का जो संदेश दिया है, वह युगों-युगों तक समाज का मार्गदर्शन करता रहेगा।
रामराज्य की परिकल्पना भी प्रत्येक व्यक्ति के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण पर आधारित है। आज उत्तर प्रदेश सरकार महर्षि वाल्मीकि जी के इन्हीं आदर्शों को आत्मसात कर समाज के प्रत्येक वर्ग के उत्थान में जुटी है।
महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती पर मैं आप सभी युवाओं से विशेष रूप से कहना चाहूंगा कि युवा ऊर्जा के प्रेरणा ���ुंज भगवान श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करते हुए यह संकल्प लें कि किसी प्रकार का भेदभाव नहीं मानेंगे। जब मन से ऊंच-नीच की दीवारें टूटेंगी, तभी समरस समाज का स्वप्न साकार होगा।
जय श्रीराम!
7 allegations.
7 reality checks.
𝐋𝐞𝐭'𝐬 𝐝𝐞𝐦𝐨𝐥𝐢𝐬𝐡 𝐈𝐍𝐃𝐈 𝐀𝐥𝐥𝐢𝐚𝐧𝐜𝐞'𝐬 𝐩𝐫𝐨𝐩𝐚𝐠𝐚𝐧𝐝𝐚 𝐛𝐮𝐢𝐥𝐭 𝐨𝐧 𝐥𝐢𝐞𝐬!
1. "𝟏𝟑 𝐜𝐫𝐨𝐫𝐞 𝐯𝐨𝐭𝐞𝐫𝐬 𝐝𝐞𝐥𝐞𝐭𝐞𝐝" → Only flagged in the draft as dead, shifted, absent, or duplicate. Final rolls come after 20 lakh party agents verify. No eligible voter is removed without due process.
2. "𝐅𝐨𝐫𝐦 𝐬𝐢𝐱 𝐜𝐡𝐚𝐧𝐠𝐞𝐝 𝐭𝐨 𝐛𝐥𝐨𝐜𝐤 𝐲𝐨𝐮𝐭𝐡" → Form unchanged. A simple declaration was added for convenience. Approved unanimously, upheld by the Supreme Court.
3. "𝐕𝐨𝐭𝐞𝐫 𝐝𝐚𝐭𝐚𝐛𝐚𝐬𝐞 𝐜𝐞𝐧𝐭𝐫𝐚𝐥𝐢𝐳𝐞𝐝" → False. Fully decentralized. State rolls remain state-controlled.
4. "𝐘𝐨𝐮𝐧𝐠 𝐯𝐨𝐭𝐞𝐫𝐬 𝐛𝐥𝐨𝐜𝐤𝐞𝐝" → 2.37 crore added since SIR began. 50,000+ daily, 365 days a year.
5. "𝐎𝐧𝐞-𝐦𝐚𝐧 𝐬𝐡𝐨𝐰" → Major decisions are made by consensus of all three commissioners. Discussion isn't dissent.
6. "𝐕𝐨𝐭𝐞 𝐜𝐡𝐨𝐫𝐢" → No such thing. House-to-house verification, 20 lakh party agents watching, 100% webcasting.
7. "𝐂𝐄𝐂 𝐦𝐮𝐬𝐭 𝐠𝐨" → Pre-2023, no law existed at all. The new system includes the opposition leader.
𝐖𝐚𝐭𝐜𝐡 𝐭𝐡𝐞 𝐟𝐮𝐥𝐥 𝐛𝐫𝐞𝐚𝐤𝐝𝐨𝐰𝐧 𝐚𝐧𝐝 𝐬𝐡𝐚𝐫𝐞 𝐭𝐡𝐞 𝐟𝐚𝐜𝐭𝐬. ⬇️
#SaveDemocracyRemoveAnarchy
बंगाल की खाड़ी में चीन की बढ़ती मौजूदगी भारत के लिए लंबे समय से चिंता का विषय रही है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि बांग्लादेश के समुद्री बंदरगाह भारत के पूर्वी तट और हिंद महासागर के रणनीतिक समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम हैं. अब बांग्लादेश अपने बंदरगाहों के विकास और संचालन के लिए चीन के साथ-साथ डेनमार्क, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों की कंप���ियों को भी जिम्मेदारी दे रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ढाका अपने बंदरगाहों के जरिए चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है? और अगर ऐसा है, तो भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?
डेनमार्क के साथ किया 30 साल का समझौता
रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार ने डेनमार्क के साथ 30 साल का एक बड़ा समझौता किया है. यह एग्रीमेंट डेनमार्क के एपी मोलर-मार्स्क समूह की कंपनी एपीएम और चटगांव पोर्ट के लाडिया कंटेनर टर्मिनल के बीच हुआ है. इसके तहत कंपनी टर्मिनल की डिजाइनिंग, वित्तपोषण, निर्माण और संचालन करेगी. इस परियोजना में करीब 55 करोड़ डॉलर के निवेश की उम्मीद है.
ध्यान देने वाली बात ये है कि इस प्रोजेक्ट में बंदरगाह का मालिकाना हक बांग्लादेश के पास ही रहेगा. जबकि डेनमार्क की कंपनी के पास टर्मिनल के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी ही रहेगी. दूसरे शब्दों में कहें तो बांग्लादेश ने अपनी समुद्री संपत्����� को किसी दूसरे मुल्क के हवाले करने के बजाय उसके विकास के लिए निवेश का यह रास्ता चुना है.
भारत को मायने समझने की जरूरत
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि बांग्लादेश ने बंदरगाहों के सामरिक इस्तेमाल से चीन को पूरी तरह दूर कर दिया है. लेकिन उसके ताजा फैसलों से बांग्लादेश में चीन का एकाधिकार कम होता हुआ जरूर नजर आ रहा है. ऐसे में भारत को इस संतुलन को बारीकी से समझने की जरूरत है.
#Bangladesh #Denmark #China #Port #ZeeNews
उधर इकरा को दीदी और नाहिद हसन को भैया बता कर गाए जा रहे थे भाईचारे के तराने; इधर बागपत में गुर्जरों पर टूट पड़ी मुस्लिम भीड़... बिंदास बोल में धर्मयोद्धा डॉ सुरेश चव्हाणके जी ने उधेड़ी फर्जी सेक्युलरिज़्म की खाल
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#Baghpat#BindasBol@baghpatpolice
काशी के नमो घाट पर 10 लाख से ज्यादा उमड़ा जनसैलाब देखकर सभी दिमागी नक्सलियों को सदमा लग गया, वो इसे कुंभ का दृश्य बताकर अफवाह फैलाने में लग गए हैं..
बेचारों का दुख खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है 😎
#IndianAirForce
मुहब्बत की दुकान में नफरत के बीज !!
अच्छा हुआ खर्गे जी, आपने आवेश में आकर काँग्रेस के बंद कमरें में चलने वाली बातें मंच पर इस्तेमाल कर ही दीं। भारत भी काँग्रेस को जान चुका है।
मोदी जी के दिवंगत पिताजी के बारे में अभद्र भाषा में की गई टिप्पणी काँग्रेस के बेशर्मी की हद बयां करती है।
मैं फिर कहता हूँ, आप अगले चुनाव भी हारेंगे और इसका कारण लोगों के मन में मोदी जी के प्रति लगाव तो होगा ही.. पर आपके ऐसे नफरती शब्द भी अनेक कारणों में से एक होंगे।
ये सड़क किस देश में है? इसका निर्माण करते समय क्या ये दिमाग में नहीं आया कि ये कितना रिस्की होगा? @grok भाई साहब सच्चाई क्या है कृपया विस्तृत जानकारी दो
आप सभी को महर्षि वाल्मीकि जयंती की असीम शुभकामनाएं। उनके सद्विचार भारतीय संस्कृति और विरासत के मूल तत्व रहे हैं, जो हर युग में राष्ट्र को पुष्पित-पल्लवित करते रहेंगे। मानवता के लिए उनके अनमोल संदेश देशवासियों के लिए सदैव पथ-प्रदर्शक बने रहेंगे।
क्या हो जाएगा अगर कांग्रेस आ जाएगी ?
आप प्रश्न कर ही नहीं सकते है ।
सारी सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दबा देंगे ।
आप सोचिए काशी नाम रखकर बीफ़ परोसा ��ा रहा है ।
यूट्यूबर ने आवाज़ उठाया तो FIR हो गई सांप्रदायिकता के नाम ।
जिन्ना जैसे हिंदुओं के हत्यारें को सेकुलरिज्म का परिचायक बताया जा रहा है ।
कांग्रेस से बड़ी हिन्दुद्रोही कोई नहीं है और बात इतनी नहीं है वो आपके आँखों के सामने आपकी भावनाओ को जूतों तले रौंद देते है ।
भगवान गणेश के मंच पर शंकर महादेवन तो ��पनी कथाओं में जया किशोरी गाती हैं ‘छाप तिलक सब छीनी’
क्या किसी ने कभी अमीर खुसरो के इन शब्दों के अर्थ पर सवाल उठाया?
सूफियाने की धुन में हमारा शत्रुबोध आखिर कह��ँ चला गया?
@Shh_Shaili
"संघ का प्रशिक्षण मिले मुसलमान स्वयंसेवक भी हैं...
केरल में ऐसे स्वयंसेवक हैं।
तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण पूरा करके संघ में जिला स्तर का दायित्व देखने वाले ईसाई लोग भी हैं।
ऐसे उदाहरण अन्य जगहों पर भी देखने को मिलते हैं"
: जे नंदकुमार, राष्ट्रीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह