उन्हें सम्मान देना ये उनकी रोज की आदत हैं। दूरदराज से आए ग़रीब परिवार के बच्चे भी उनसे बेहिचक बातचीत करते हैं और वो सबसे उनका हालचाल पूछतीं हैं, किसका पेपर कैसा गया, कैसा नहीं।
ये मूर्ख, बड़ी बहन अदिति यादव जी के संबंध में जो घटिया टिप्पणी कर रहे हैं, जिसका आधार ही लंदन कॉलेज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही हैं पर टीका हैं।
मूर्खों पता नहीं हैं की पिछले एक साल से अदिति जी दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ फैकल्टी से लॉ ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही हैं।
इन दिनों सेमेस्टर परीक्षाएं चल रही हैं, और जैसा की मैं भी लॉ फैकल्टी में उनका बैचमेट हूँ, हर परीक्षा के बाद मुलाक़ात होती हैं, और अदिति जी को अपने दादा श्रद्धेय नेताजी और पिता आदरणीय अखिलेश यादव जी से विरासत में संस्कार और नैतिकता को पूरी तरह आत्मसात करती हैं। सभी बच्चों से मिलना
I protested against the RSS a few days back.
That made the Principal and his staff so rattled that they now want my 60+ year-old father, who lives in Chhattisgarh, to come to Delhi and meet them.
The college did not inform me before writing to my parents, nor did they have any conversation with me regarding any wrongdoing on my part.
This is clear-cut mental harassment and torture of my father and my family.
I lost my mother in January. The Principal knows this very well, yet now he is intimidating my only parent -my father.
They wrote the letter on 28th April, sent it on 13th May, and my father received it on 25th May.
I come from a Dalit family from a small village in Chhattisgarh, and I have faced several other discriminatory issues from this college administration as well.
I never knew that exercising my rights could create such a big problem for my family.
Despite all this, I am not intimidated. I do not fear the administration.
I am the elected President of the Shivaji College Students’ Union. If they are intimidating me, imagine the situation of ordinary students in Delhi University.
Babasaheb Ambedkar and his Constitution stand by me.
I will not bow down.
The RSS has destroyed academic institutions, and I will continue fighting against it.
Jai Hind. Jai Samvidhaan.
आयी हुई और लायी हुई भीड़ का अंतर समझ आ जाता है। कल प्रधान संसदीय क्षेत्र बनारस में नारी सड़कों पर बेहोश हुई और आज जिन बसों को ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ के ‘प्रधान उद्घाटन’ में ल��ाया गया है उनके ड्राइवरों-कंडक्टरों के लिए खाने-पानी-रहने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। ये भाजपा सरकार की असंवेदनशीलता का निकृष्टतम रूप है।
गर्मियों की छुट्टियों में जबकि बसों की माँग बढ़ी हुई है, एक सरकारी कार्यक्रम के लिए 2-3 दिनों के लिए बसों को दिखावटी काम में लगाना, जनता को प्रताड़ित करना है।
इन बसों का खालीपन बता रहा है, हवा का रुख़ भाजपा के ख़िलाफ़ जा रहा है।
नये साल का नया सवेरा
आशाओं का नया बसेरा
आइए नये रण के लिए नये प्रण लें।
नया संकल्प ही नया कल लाता है।
हम बदलेंगे तो सब बदलेगा!
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!
5 बड़ा या 7 ?
विधायक बड़ा या सांसद ?
राज्य बड़ा या केंद्र ?
राज्य सरकार का मंत्री बड़ा या केंद्र सरकार का?
फिर सवाल ये है कि 5 बार के विधायक को भाजपाई राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाते हैं और 7 बार के सांसद को राज्य का अध्यक्ष।
इसका तर्क क्या है… दरअसल इसका कोई तर्क भाजपा के पास नहीं है… इसका कारण सिर्फ़ ये है कि प्रभुत्ववादी भाजपाई ये संदेश देना चाहते हैं कि PDA समाज का व्यक्ति कितना भी क़ाबिल हो पर वो वर्चस्ववादियों के आगे एक सीमा से आगे नहीं बढ़ सकता है।
भाजपा ने पीडीए समाज को नीचा दिखाने को लिए ये नया तरीका अपनाया है। ये अपमान पीडीए समाज अब और नहीं सहेगा… अब अपनी ���ीडीए सरकार बनाएगा, पीडीए को मान दिलाएगा।
@nehraji77 @PragyaLive अरे पागलों भूल गए दो सीट्स पर महागठबंधन के आधिकारिक प्रत्याशियों का पर्चा ख़ारिज हो गया था जहाँ महागठबंधन ने वहाँ के किसी निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन दिया था वही दो निर्दलीयों प्रत्याशी महागठबंधन के खाते में गिने जा रहे हैं।