@NitishKumar @cmobiharjdu बिहार में नौकरियों की कमी है।नई बहालियां भी बहुत कम हुई है और मानव संसाधन की कमी की वजह से बिहार की बौद्धिक प्रगति भी अवरुद्ध सी हो गई है।इसकी एक वजह यहाँ कार्यरत कर्मी है जिन्हें वेतन के रूप में राशि दी जाती है मगर उनके कार्य की विवेचना नही की जाती है।
@RaushanRRajput खोजा उसे जाता है जो गुम हो भारत गुम नहीं था वस्तुत: भारत से अन्य देशों का सम्पर्क टूट गया था वास्कोडीगामा ने बस भारत तक पहुँचने के समुन्द्री मार्ग का पता लगाया था।
@PMOIndia आदरणीय प्रधानमंत्री महोदय बिहार की राजनीति में सुशील मोदी जी को कोई पद नहीं दिया जाना बहुत ही खेदजनक,अपमानजनक है। माननीय सूमो जैसे व्यक्ति का बिहार की राजनीतिक विकास में अहम योगदान है। सूमो जैसे ज्ञानवान और गुणी व्यक्ति की अनदेखी बिहार के विकास की अनदेखी है। कृपया निराकरण करें।
@SushilModi एनडीए को जिस आशा के लिए हमसबों ने वोट किया था उसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। एक ओर जिनकी जरूरत नहीं है वैसे लोगों को शीर्ष नेतृत्व दिया जाना उनकी स्वेच्छाचारिता को प्रदर्शित करता है वहीं दूसरी ओर आपको दरकिनार किया जाना एक कर्मठ ज्ञानवान व्यक्ति का ��पमान प्रदर्शित करता है।
@Durgesh22961513@gadbihar@NitishKumar जिस प्रदेश के मुखिया अभियंत्रण में ��िग्रीधारी हो, जिन्हें अभियंताओं की महत्ता स्वयं पता है ऐसी परिस्थिति के बाद भी अग़र उनके मातहत काम करनेवाले अभियंताओं को अपनी जिंदगी बदहाली में काटनी पड़े तो आप किस किस को अपनी पीड़ा से अवगत कराएंगे। जब एक अभियन्ता ही दूसरे की दुख दर्द न समझे।
@Durgesh22961513@gadbihar किस किस की दुहाई दे हम किस किस से करें उनकी फरियाद।
जो अपनी बात पर ही कायम नही क्यूं कराएं उसे सब याद।।
बहुत लिया है उसने परीक्षा अब भस्म करो उसका तख्तो ताज।
लाठी अपनी चलाओ ऐसे साथी की पड़े सर माथे पर बेआवाज़।।
ऐसी सरकार के कारण ही BRAIN DRAIN होता रहा है बिहार में और तब आपलोग हल्ला करेंगे की बिहार में बदलाव नहीं हुआ | इससे भी बेहतर हो सकता था अगर आपने आई० टी० इंजीनियर को आई० टी० सहायक न बनाया होता | @NitishKumar
@Durgesh22961513@NitishKumar@bitsaofficial बहुत समय पहले भारत की स्वतंत्रता के ख़ातिर अल्प आयु में फांसी पाने वाले शहीद-ए-आजम युवाओँ के प्रेरणा स्रोत श्री भगतसिंह जी ने कहा था कि बहरों को सुनाने के लिए धमाके की जरूरत होती ह���। संविदाकर्मी का धमाका जल्द ही चुनाव में सामने आने वाला ही है। सरकार को महत्व पता चलना ही चाहिए।
सेना पर पत्थर गोली बरसाये
वो तो भटका हुआ नौजवान
लेकिन
महान पत्रकारो��� को फ़ोन पर गरिया दें
तो बन गया आतंक की पहचान
अब जो कहा, वो करके दिखाइये
इन गाली देने वालों को अपने घर बुलाइये
बातचीत से समस्या का हल निकालिये
जितना खुद का करते हो सम्मान
उतना सैनिक का भी रखो मान