Karma (कर्मा)👇
डॉक्टर मैं आईसीयू में 2 साल काम किया सीरियस पेशेंट आते हैं किडनी फेल लिवर फेल हार्ट फेल हमें पता होता है 50% लोग खत्म हो जाएगा,
हमको पता चल जाता है यह जाने वाले हैं वह जाने वाले हैं,
अभी मैं क्या देखा कुछ लोग होश में होते हैं कुछ लोग बेहोश होते हैं एक भाई 70 साल की उम्र में रो रहा था मुझे पता है जाने वाला फिर मैं पास में गया सर पर हाथ फेरा और पूछा आप क्यों रो रहे हैं?
उसने जवाब दिया मुझे पूरा जिंदगी दिखाई दे रहा है, मैंने बोला क्या दिखाई दे रहा है उन्होंने जवाब दिया ध्यान से सुनना एक लाइन में जवाब दिया,
"जो करना चाहिए था वह नहीं किया जो नहीं करना चाहिए था वही किया"
मैंने बोला क्या किया?
उसने जवाब दिया मैंने बहुत लोग का अपमान किया इ���सल्ट किया अपशब्द बोला आज उन लोगों से माफी भी नहीं मांग सकता ��्योंकि मैं जाने वाला हूं।
मैंने बोला क्या करना चाहिए था?
उसने बोला है मेरे पास पावर था पैसा था सब कुछ था लेकिन मैं चाहता तो लोगों की मदद कर सकता था उससे दुआ ले सकता था लेकिन वह भी नहीं किया,
मैंने बोला क्यों नहीं किया?
उसने बोला अहंकार बहुत था ,दूसरे को तकलीफ देने में मजा आता था,आज मरते समय वह मुझे याद आ रहा है कि मैं अपना जीवन व्यर्थ किया और मैं ऐसे ही रोते-रोते जाऊंगा मरूंगा।।
आरक्षण का विरोध करने वाले कहते हैं, "योग्य उम्मीदवार नहीं मिलते।"
लेकिन जब योग्य उम्मीदवार मौ��ूद हों और फिर भी आरक्षित सीटों को "Not Found Suitable (NFS)" बताकर खाली छोड़ दिया जाए, तो सवाल मेरिट पर नहीं, सिस्टम ��र उठता है।
क्या NFS प्रतिनिधित्व रोकने का नया संस्थागत हथियार बनता जा रहा है? सवाल पूछना जरूरी है।
#Reservation #NFS #SocialJustice #HigherEducation #PhD #Representation
राष्ट्रपति भवन में बैठी इन दो शख्सियतों की बातचीत को इस वीडियो में देखिए सुनिए।
एक तरफ सदियों तक द��निया पर राज करने वाले साम्राज्य का प्रतीक...
और दूसरी तरफ वह भारत, जिसने गुलामी की राख से उठकर अपने भविष्य को अपने हाथों से गढ़ने का संकल्प लिया था।
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महारानी एलिजाबेथ ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर प्रश्न उठाया
"जब आपके देश में इतनी गरीबी है, तब अंतरिक्ष पर इतना खर्च क्यों?"
सवाल सुनने में तर्कसंगत लगता है,लेकिन हर तर्क तथ्य नहीं होता।
कई बार वर्तमान की धूल भविष्य का आकाश देखने ही नहीं देती।
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इंदिरा गांधी ने जिस शांति और आत्मविश्वास से उत्तर दिया, वह केवल एक प्रधानमंत्री का उत्तर नहीं था...
वह एक ऐसे राष्ट्र का उत्तर था जो सदियों तक दूसरों के फैसलों पर जीता रहा था, लेकिन अब अपनी नियति स्वयं लिखना चाहता था।
उन्होंने समझाया कि अंतरिक्ष तकनीक अमीर देशों का खिलौना नहीं...
वह किसान के खेत तक पहुँचने वाली मौसम की सूचना है।
वह चक्रवात आने से पहले लाखों लोगों की जान बचाने वाली चेतावनी है।
वह दूर-दराज़ गाँवों तक शिक्षा, संचार और विकास पहुँचाने का माध्यम है।
वह आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ है।
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यही तो अंतर है...
साम्राज्य संसाधनों को जीतकर शक्तिशाली बनते हैं...और सभ्यताएँ ज्ञान अर्जित करके।
एक ने दुनिया से लिया...दूसरे ने अपने लोगों के भविष्य में ��िवेश किया।
जिस देश ने कभी भारत को गरीब कहकर देखा, आज वही दुनिया भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और अंतरिक्ष विशेषज्ञों की प्रतिभा का सम्मान करती है।
वक्त तानों का हिसाब बहुत देर से करता है...लेकिन करता ज़रूर है।
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अगर 1960 और 1970 के दशक में भारत ने यह तय कर लिया होता कि पहले गरीबी पूरी तरह खत्म होगी, फिर विज्ञान में निवेश करेंगे...तो क्या आज हमारे पास अपने मौसम उपग्रह होते?
क्या हमारे मछुआरे सम��द्र में सुरक्षित लौट पाते?
क्या किसान मानसून का बेहतर अनुमान लगा पाते?
क्या आपदा प्रबंधन इतना प्रभावी होता?
क्या दुनिया अपने उपग्रह भारत से प्रक्षेपित करवाती?
राष्ट्र निर्माता केवल वर्तमान की समस्याएँ नहीं सुलझाते...वे भविष्य की संभावनाएँ भी गढ़ते हैं।
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इसका अर्थ यह नहीं कि गरीबी महत्वहीन थी...या है।
गरीबी मिटाना हर सरकार का पहला दायित्व है।
लेकिन यह भी उतना ही सच है कि विज्ञान और विकास को रोककर गरीबी कभी समाप्त नहीं होती।
रोटी भी चाहिए...और अनुसंधान भी।
क्योंकि भूख केवल पेट की नहीं होती...राष्ट्रों की भी होती है।
और जो राष्ट्र सपने देखना छोड़ देते हैं...वे धीरे धीरे दूसरों के सपनों का बाज़ार बन जाते हैं।
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आज जब हम चंद्रमा की सतह पर अपने कदमों के निशान खोजते हैं...
जब हमारे उपग्रह दुनिया के देशों की सेवा करते हैं...
जब भारत वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में सम्मान पाता है...
तो यह केवल वैज्ञानिकों की सफलता नहीं है।
यह उन नेताओं की दूरदृष्टि का भी परिणाम है, जिन्होंने आलोचना से डरकर भविष्य के दरवाज़े बंद नहीं किए।
नेतृत्व वही नहीं जो अगले चुनाव के बारे में सोचे...
नेतृत्व वह है जो अगली पीढ़ियों के बारे में सोच सके।
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इंदिरा गांधी का निर्णय कितना दूरदर्शी था, यह कांग्रेस या इंदिरा गांधी की नहीं बल्कि एक विचार की विजय है।
एक ऐ���ा विचार, जो कहता है,गरीब राष्ट्रों को सपने देखने से मत रोकिए।
और आज इन्हीं दूरदर्शी निर्णयों ने दुनिया को बताया है कि जब गरीब राष्ट्र सपने देखना सीख जाते हैं...तो एक दिन वही राष्ट्र इतिहास नहीं पढ़ते...इतिहास लिखते हैं।
#VijayShukla
दो वर्ष पहले लागू हुए नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) से बदलने लगी है तस्वीर.
जुलाई 2024 से अब तक पुलिस जांच औसतन 25% तेज हुई है, FIR दर्ज करना आसान हुआ है.
2024–2026 में कुल 74.41 लाख FIR दर्ज हुईं, जिसमें 59.71 लाख चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है.
अब 67% से ज्यादा मामलों में चार्जशीट 60 दिन के अंदर दाखिल किया जा रहा है.
दो वर्षों में लगभग 60,000 Zero FIRs दर्ज हुईं.
यौन अपराध मामलों में 71% मामलों में दो माह के अंदर चार्जशीट दाखिल की गई.
इसी बदलाव पर चर्चा 'Mudda Aapka' में.
#BNS #BNSS
https://t.co/qv8PuYZpEV
एक भव्य और ऐतिहासिक नज़ारा!🇮🇳
भारत की सबसे तेज़ ट्रेनों में से एक, "वंदे भारत" ने जब दुनिया के सबसे ऊँचे रेलवे आर्च ब्रिज—चिनाब ब्रिज को पार किया।
समुद्र तल से 359 मीटर ऊपर बना यह इंजीनियरिंग का अजूबा पेरिस के एफिल टावर से भी 35 मीटर ऊँचा है!
#VandeBharat#ChenabBridge #IndianRailways #IncredibleIndia
कोचिंग माफिया समस्या नहीं, शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी नाकामी का लक्षण है।
जब स्कूल डिग्री दें और नौकरी का रास्ता कोचिंग तय करे, तो समझिए शिक्षा नहीं, समान अवसर की हत्या हो रही है।
#JEE#NEET#CUET#EducationReforms
Bihar: परीक्षा देने जा रहे छात्रों
का ये हाल, कौन ज़िम्मेदार?
वीडियो बिहार के छपरा ज़िले का है, जहां रोज़ी-रोटी की तलाश में पर���क्षाएं देने जा रहे हज़ारों छात्र स्टेशन के बाहर ज़मीन पर सोने को मजबूर हैं. उन्हें अव्यवस्थाओं की मार भी झेलनी पड़ रही है.
परीक्षा के समय पर्याप्त संख्या ��ें स्पेशल ट्रेनों का न चलना और सामान्य ट्रेनों का घंटों लेट होना इसकी प्रमुख वजह है. इसी को लेकर छात्रों ने बीते दिन हंगामा और विरोध-प्रदर्शन भी किया था.
इसके अलावा, परीक्षा केंद्रों के आसपास बजट में होटल उपलब्ध नहीं होते. डॉरमेट्री और लॉज भी मौके का फायदा उठाकर महंगे हो जाते हैं. स्टेशनों पर वेटिंग रूम की संख्या सीमित होती है, जिसके कारण भारी भीड़ के दौरान छात्रों को खुले में रात गुज़ारनी प���़ती है.
"जब आखिरी पेड़ काट दिया जाएगा, आखिरी नदी जहरीली हो जाएगी, तब इंसान समझेगा कि पैसा खाया नहीं जा सकता।"
और शायद इसी सवाल के बीच खड़ा है Google का 15 बिलियन डॉलर वाला Vizag AI Project।
AI और विकास के नाम पर इसे भविष्य की बड़ी छलांग बताया जा रहा है। लेकिन अगर पानी, ऊर्जा और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को नज़रअंदाज किया गया, तो यह प्रोजेक्ट भविष्��� का "Environmental और Economic Disaster" भी बन सकता है।
सवाल AI का नहीं, विकास के उस मॉडल का है जिसमें मुनाफे और पर्यावरण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
#Google #AI #Environment #ClimateCrisis #WaterCrisis #Development #India #DataCenter
आज बसपा की उत्तर प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी जिसमें कार्यालय के बाहर एक पोस्टर लगा हुआ था उसमें एक प्रेरणादायक संदेश लिखा वो वो संदेश ख़ुद बहनजी ने लिखा।
संदेश कुछ इस प्रकार लिखा था -
“जिस समाज का इतिहास नहीं होता है वो समाज कभी शासक नहीं बन सकता है क्योंकि इतिहास से प्रेरणा मिलती हैं, प्रेरणा से जागृति आती है, जागृति से सोच बनती हैं सोच से ताक़त बनती हैं, ताक़त से शक्ति बनती हैं और शक्ति से शासक बनते हैं”
फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद स्थित नगला बिलौटिया गांव में बीएससी छात्र अतिन कुमार जाटव की मृत्यु अत्यंत दुखद ,चिंताजनक और झकझोर देने वाली घटना है।
16 मई ���ो अतिन को जाति पूछकर बेरहमी से पीटा गया, सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और मानसिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया गया कि उसने 17 मई को आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया। सुसाइड नोट में जिस पीड़ा, बेइज्जती और अन्याय का जिक्र है, वह पूरे समाज और प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े करता है।
एक गरीब दलित परिवार का इकलौता बेटा, जो पढ़ाई के साथ अपने ��िव्यांग माता-पिता और छोटी बहन का सहारा था, आज इस दुनिया में नहीं है। यह केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि सामाजिक भेदभाव, जातीय मानसिकता और अमानवीय व्यवहार का भयावह परिणाम प्रतीत होता है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, इस घटना में अब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी न होना आपके प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
हमारी संवेदनाएँ शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस असीम दुःख को सहने की शक्ति दे।
हम @UPGovt से माँग करते हैं कि:- सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो।मामले में SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए।सुसाइड नोट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष व त्वरित जांच हो।पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता, स���रक्षा और न्याय सुनिश्चित किया जाए।
भीम आर्मी–आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की फिरोजाबाद की टीम घटना के बाद से ही पीड़ितों के साथ मौजूद है।
विश्व उच्च रक्तचाप दिवस
#WorldHyperTensionDay
हर वर्ष 17 मई को विश्व उच्च रक्तचाप दिवस मनाया जाता है।
उच्च रक्तचाप को “साइलेंट किलर” ���हा जाता है क्योंकि इसके लक्षण अक्सर जल्दी दिखाई नहीं देते।
सामान्य रक्तचाप लगभग 120/80 mmHg माना जाता है।
अत्यधिक नमक, तनाव, धूम्रपान और गलत खानपान उच्च रक्तचाप के मुख्य कारण हैं।
नियमित व्यायाम और संतुलित आहार से रक्तचाप को नियंत्रित रखा जा सकता है।
उच्च रक्तचाप से हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
पर्याप्त नींद और तनाव कम करना भी रक्तचाप नियंत्रण में मदद करता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में करोड़ों लोग उच्च रक्तचाप से प्रभावित हैं।
समय-समय पर रक्तचाप की जांच कराना बेहद जरूरी है, खासकर 40 वर्ष की आयु के बाद।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर उच्च रक्तचाप से बचाव और बेहतर स्वास्थ्य संभव है।
@MoHFW_INDIA
@MIB_India @airnewsalerts