ये लो दूसरे स्लोगन भी
👉एक कचौरी दो समोसा , हमे अपने अच्छे भाईयों पर है भरोसा ।
👉चावल कुछ कच्चे है ,कुछ मर्द जरूर अच्छे है ।
👉उल्लू रात में नहीं सोते ,सब मर्द एक जैसे नहीं होते ।
👉सब्जी में जीरा है , कुछ मर्द जरूर हीरा है ।
बाकी ���े भाड़ में जाओ 🥹
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज मोदी एक्ट की धारा 18 और 18ए(2) के अंतर्गत वैधानिक रोक को देखते हुए मेरी अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। हायकोर्ट का यह निर्णय अपनी जगह है, पर मैं इस से सम्मानपूर्वक असहमत हूँ।
साथ ही, यह भी स्पष्ट है कि न्यायालय ने क��ा है कि इसकी टिप्पणियाँ केवल जमानत आवेदन तक सीमित हैं और मेरी आपराधिकता इससे सिद्ध नहीं हो जाती। इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दूँगा और आशा करता ह��ँ कि देश की न्यायिक व्यवस्था में सर्वोच्च विश्वास बना रहे।
मुझे एक नीच, अधम, पतित ट्रोल के विरुद्ध अपने परिवार के सम्मान की रक्षा करने के लिए, इस घटिया और दमनकारी मोदी एक्ट (जिसे SC/ST एक्ट भी कहा जाता है) के प्रावधानों के तहत एक आपराधिक मामले में झूठा फँसाया गया है।
मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा है जो किसी व्यक्ति या समुदाय का जाति के आधार पर जानबूझकर अपमान या अपमानजनक व्यवहार माना जा सके। मैं उन किस�� भी निहित स्वार्थ वाली ताकतों से लड़ने के लिए तैयार हूँ जो इस देश में स्वतंत्र अभिव्यक्ति और सत्य कथन को दंडित करना चाहती हैं, भले ही इसके लिए मुझे जेल जाना पड़े।
एक नेता द्वारा अपनी राजनैतिक वोटबैंक को साधने के लिए, सामान्य जनता से बि��ा किसी सोच-विचार के, संशोधित किए गए इस पूरे कानून और इसके संशोधित नियमों का मैं तब तक विरोध करूँगा जब तक इसे पूरी तरह से निरस्त न किया जाए।
और हाँ, पुनः कहूँगा कि हमारी की माँ-बहनें सड़कों पर चलती-फिरती वस्तु नहीं है जिस पर कोई भी टिप्पणी करे और बच जाए। उनके सम्मान की रक्षा हेतु, सौ बार जेल जाना पड़े जाऊँगा और 101वीं बार वही करूँगा जो मैंने किया है।
PS: जो भी इस निरस्तीकरण पर स्खलित हो रहे हैं, तुम्��ारी माँ-बहन पर भी हर दिन ऐसी टिप्पणी होती है। उस पर भी मैं ही स्टैंड लूँगा क्योंकि तुम अपनी कायरता में दो शब्द नहीं लिख पाओगे।
आज कोर्ट में मेरे केस पर सुनवाई हुई। न्यायाधीश महोदय ने अगली सुनवाई तक केस पर पुलिस जाँच के लिए मुझे बुलाने से पूर्व जाँच अधिकारी को मुझे नोटिस देने कहा। यही नोटिस कोर्ट को भी दी जाएगी ताकि कोर्ट यह तय करेगा कि इसमें कोई तर्क है या नहीं।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि हमारे अधिवक्ता @jai_a_dehadrai ने हमारा पक्ष रखा कि उक्त व्यक्ति पर न तो कोई जातिगत टिप्पणी हुई, न ही उसका इस विषय में जातिसूचक शब्दों से कोई अपमान हुआ। अतः, कोई केस ही नहीं बनता।
जय अनंत जी समेत श्री सिंह एवम् प्रत्युष भाई आदि अधिवक्ताओं को मेरा ससम्मान आभार जिन्होंने मेरा पूर्ण पक्ष रखा। अगली सुनाई सप्ताह भर बाद है।